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लखनऊ, 7 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े विवाद और नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने बुधवार को आंदोलन के 37वें दिन बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास का घेराव किया। अभ्यर्थियों का आरोप है कि पूर्व में मुलाकात का आश्वासन मिलने के बावजूद मंत्री की ओर से प्रतिनिधिमंडल से वार्ता नहीं की गई, जिसके बाद उन्हें दोबारा आवास के बाहर प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों के मुताबिक, बुधवार को दोपहर करीब 4 बजे बड़ी संख्या में अभ्यर्थी बेसिक शिक्षा मंत्री के आवास पहुंचे। उनका कहना है कि इससे पहले 5 अक्टूबर को भी मंत्री के आवास का घेराव किया गया था। उस दौरान प्रशासन की ओर से अभ्यर्थियों को यह जानकारी दी गई थी कि 7 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह से मुलाकात कराई जाएगी।

अभ्यर्थियों का दावा है कि निर्धारित समय पर प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात नहीं कराई गई। उनका आरोप है कि मंत्री अपनी गाड़ी से आवास के अंदर चले गए और अभ्यर्थियों से बातचीत नहीं हुई। इसके बाद प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए और अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी।

मुलाकात नहीं होने पर फिर शुरू हुआ प्रदर्शन

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थी आशुतोष वर्मा के अनुसार, 5 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद उन्हें उम्मीद थी कि सरकार की ओर से उनकी समस्या पर गंभीरता से बातचीत की जाएगी। प्रशासन के माध्यम से 7 अक्टूबर को पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात का आश्वासन मिलने के बाद अभ्यर्थियों ने बातचीत की उम्मीद जताई थी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि जब तय समय पर मुलाकात नहीं हुई तो उनके सामने आंदोलन जारी रखने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने मंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

आंदोलनकारियों के मुताबिक, उनका उद्देश्य किसी प्रकार का विवाद पैदा करना नहीं बल्कि लंबे समय से लंबित भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़वाना है। उनका कहना है कि वे लगातार सरकार और विभाग के सामने अपनी मांग रख रहे हैं, लेकिन अभी तक भर्ती का स्पष्ट कार्यक्रम जारी नहीं किया गया है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर ईको गार्डन भेजा

अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें बलपूर्वक उठाकर बसों में बैठाया और ईको गार्डन भेज दिया।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि बातचीत का रास्ता निकालने के बजाय प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाया गया।

वहीं, इस कार्रवाई को लेकर प्रशासन या पुलिस की ओर से अलग से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल आंदोलनकारियों ने दावा किया है कि उन्हें प्रदर्शन स्थल से हटाकर ईको गार्डन भेजा गया।

एक ही मांग- भर्ती का शेड्यूल जारी हो

68,500 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों की मुख्य मांग स्पष्ट है। उनका कहना है कि सरकार यथाशीघ्र भर्ती का शेड्यूल जारी करे और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े निर्णय का इंतजार कर रहे हैं। उनका दावा है कि जब तक भर्ती का स्पष्ट कार्यक्रम सामने नहीं आता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

आंदोलनकारियों का कहना है कि अभ्यर्थियों ने परीक्षा और चयन प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग चरणों को पूरा किया है और अब सरकार को नियुक्ति की दिशा में स्पष्ट निर्णय लेना चाहिए।

आरक्षण विवाद को लेकर भी अभ्यर्थियों का बड़ा दावा

68,500 शिक्षक भर्ती का मामला सिर्फ नियुक्ति कार्यक्रम तक सीमित नहीं है। अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से जुड़े विवाद को भी अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है।

आंदोलनकारियों के अनुसार, राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने 7 जुलाई 2026 को एक आदेश जारी किया था, जिसके अनुपालन की मांग अभ्यर्थी कर रहे हैं। उनका दावा है कि आयोग के आदेश के तहत पूर्व में निर्धारित 150 अंकों में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत अंक प्राप्त करने वाले पात्र अभ्यर्थियों का संशोधित परिणाम जारी किया जाना चाहिए और सफल अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जानी चाहिए।

अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग के आदेश के बाद अब सरकार को इस मामले में आगे की प्रक्रिया स्पष्ट करनी चाहिए। उनके मुताबिक, लंबे समय से विवाद में फंसी भर्ती को किसी निश्चित समयसीमा के भीतर आगे बढ़ाने की आवश्यकता है।

10 सितंबर की बैठक का भी किया हवाला

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने 10 सितंबर 2026 को बेसिक शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक का भी हवाला दिया है। उनका दावा है कि इस बैठक में 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर चर्चा हुई थी और अभ्यर्थियों के अनुसार भर्ती में कथित अनियमितता को स्वीकार किए जाने तथा प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय दिलाने की बात सामने आई थी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार की ओर से यह स्वीकार किया गया है कि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित समस्या हुई है, तो उसके समाधान के लिए ठोस कदम भी उठाए जाने चाहिए।

हालांकि, बैठक में वास्तव में क्या निर्णय हुआ और उसके आधिकारिक कार्यवृत्त में क्या दर्ज है, इसकी पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों से ही की जानी चाहिए। आंदोलनकारी इस बैठक को अपने पक्ष में महत्वपूर्ण आधार मानते हुए भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग कर रहे हैं।

37 दिनों से आंदोलन का दावा

अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनका आंदोलन अब 37वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इतने लंबे समय से प्रदर्शन के बावजूद समाधान नहीं होने से आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों और सरकार तक अपनी बात पहुंचा चुके हैं। इसके बावजूद भर्ती का कार्यक्रम स्पष्ट नहीं होने के कारण उन्हें लगातार धरना और प्रदर्शन करना पड़ रहा है।

आंदोलनकारी नेताओं का कहना है कि अभ्यर्थियों के लिए यह सिर्फ नौकरी का मामला नहीं है, बल्कि वर्षों की मेहनत और उनके भविष्य से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को मामले को जल्द से जल्द सुलझाने की दिशा में ठोस कदम उठाना चाहिए।

सैकड़ों अभ्यर्थियों की मौजूदगी का दावा

बुधवार को हुए प्रदर्शन में सैकड़ों अभ्यर्थियों के शामिल होने का दावा किया गया है। आंदोलन का नेतृत्व आशुतोष वर्मा, तूफान सिंह, नवीन चौधरी और अखिल कुमार ने किया।

प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती का कार्यक्रम जारी करने और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने की मांग को प्रमुखता से उठाया। उनका कहना था कि वे किसी आश्वासन के बजाय अब स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं।

अभ्यर्थियों ने कहा कि यदि सरकार भर्ती प्रक्रिया को लेकर समयबद्ध कार्यक्रम जारी करती है तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन जब तक कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आता, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

सरकार के सामने अब क्या चुनौती?

68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद लंबे समय से अलग-अलग कानूनी और प्रशासनिक मुद्दों के कारण चर्चा में रहा है। ऐसे में सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट और स्वीकार्य समाधान निकाले।

अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्हें सिर्फ आश्वासन नहीं चाहिए। वे चाहते हैं कि भर्ती प्रक्रिया की अगली तारीखें सार्वजनिक की जाएं और नियुक्ति की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।

वहीं, आरक्षण से जुड़े दावों पर भी अभ्यर्थी स्पष्ट निर्णय की मांग कर रहे हैं। उनका तर्क है कि यदि किसी स्तर पर गलती हुई है तो उसे सुधारने के लिए संशोधित परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना चाहिए।

आंदोलन और तेज करने की चेतावनी

बुधवार के प्रदर्शन के बाद अभ्यर्थियों ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार की ओर से भर्ती का शेड्यूल जारी नहीं किया जाता है तो आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उनका कहना है कि वे पिछले 37 दिनों से अपनी मांग को लेकर सड़कों पर हैं और अब वे किसी भी तरह की अनिश्चितता में और समय नहीं गंवाना चाहते।

अभ्यर्थियों के अनुसार, उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता।

उनका कहना है कि सरकार यदि बातचीत के जरिए समाधान निकालती है तो वे उसका स्वागत करेंगे, लेकिन सिर्फ आश्वासन देकर आंदोलन को समाप्त नहीं कराया जा सकता।

अब निगाह सरकार के अगले कदम पर

68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर बुधवार का प्रदर्शन एक बार फिर यह दिखाता है कि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ है। 37 दिनों से जारी आंदोलन, मंत्री आवास पर प्रदर्शन और पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को ईको गार्डन भेजे जाने के दावों के बीच अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है।

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग है कि भर्ती का स्पष्ट शेड्यूल जारी किया जाए, आरक्षण से जुड़े विवाद पर आयोग के आदेश के अनुरूप कार्रवाई की जाए और पात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।

आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि जब तक उन्हें ठोस कार्रवाई दिखाई नहीं देती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। अब देखना यह होगा कि सरकार और बेसिक शिक्षा विभाग इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद को समाप्त करने के लिए क्या कदम उठाते हैं और अभ्यर्थियों की मांगों पर कब तक स्पष्ट निर्णय सामने आता है।

नोट: इस खबर में भर्ती, आरक्षण, 7 जुलाई के आदेश, 10 सितंबर की बैठक तथा पुलिस कार्रवाई से संबंधित दावे आंदोलनकारी अभ्यर्थियों द्वारा उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित हैं। संबंधित विभाग, सरकार या पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी खबर में शामिल किया जाना चाहिए।

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