
नगर आयुक्त कोर्ट में पेश, 7 दिन का समय मांगा; 21 मई को अगली सुनवाई में सभी को उपस्थित रहने के निर्देश
लखनऊ नगर निगम से जुड़ा शपथ विवाद अब कानूनी मोड़ ले चुका है। इस मामले में Allahabad High Court ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रशासनिक अधिकारियों को तलब किया है।
यह मामला पार्षद Lalit Tiwari की शपथ से जुड़ा है, जिस पर सवाल उठने के बाद मामला हाईकोर्ट तक पहुंच गया।
⚖️ कोर्ट की सख्ती, नगर आयुक्त हुए पेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने नगर आयुक्त को तलब किया था। आदेश के पालन में आज नगर आयुक्त हाईकोर्ट में पेश हुए।
सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से कोर्ट से 7 दिन का समय मांगा गया, ताकि मामले से जुड़े सभी तथ्यों और प्रक्रियाओं को स्पष्ट किया जा सके।
📅 21 मई को अगली सुनवाई, कई अधिकारी तलब
हाईकोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 21 मई तय की है।
इस दौरान कोर्ट ने:
- लखनऊ के मेयर को
- जिला मजिस्ट्रेट (DM) को
- नगर आयुक्त को
व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
🏛️ मेयर और डीएम नहीं हुए पेश
आज की सुनवाई में:
- मेयर की ओर से बताया गया कि वे शहर से बाहर हैं
- डीएम विशाख जी अवकाश पर होने के कारण पेश नहीं हो सके
हालांकि, कोर्ट ने इस पर सख्त रुख दिखाते हुए अगली तारीख पर सभी को उपस्थित रहने के संकेत दिए हैं।
❗ क्या है पूरा विवाद?
ललित तिवारी की शपथ प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं, जिसके बाद मामला न्यायालय में पहुंचा।
याचिका में शपथ की वैधता और प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई गई है। कोर्ट अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रहा है, ताकि नियमों के अनुसार स्थिति स्पष्ट की जा सके।
🔍 तेज हुई न्यायिक कार्रवाई
हाईकोर्ट की सख्ती से साफ है कि यह मामला अब गंभीर कानूनी जांच के दायरे में आ चुका है।
अगर अगली सुनवाई में संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है, तो अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई भी हो सकती है।
लखनऊ नगर निगम का यह शपथ विवाद अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
अब सबकी नजर 21 मई की सुनवाई पर टिकी है, जहां कोर्ट इस मामले में आगे की दिशा तय करेगा।











