लखनऊ। उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन के क्षेत्र में बीते वर्षों में बड़े बदलाव का दावा करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश अब केवल बड़ी आबादी वाला राज्य नहीं, बल्कि देश की युवा प्रतिभा और उद्यमिता की बड़ी ताकत बनकर उभर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में जहां स्टार्टअप की संख्या बेहद सीमित थी, वहीं आज प्रदेश में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप काम कर रहे हैं। इनमें से 8 स्टार्टअप यूनिकॉर्न का दर्जा हासिल कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री ने स्टार्टअप इकोसिस्टम को लेकर अपने संबोधन में कहा कि भारत में भी पिछले वर्षों में स्टार्टअप की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक 2014 से पहले देश में करीब 500 स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या ढाई लाख से अधिक हो चुकी है। उन्होंने कहा कि मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम युवाओं के सपनों को उड़ान देने के साथ उन्हें अपने विचारों को कारोबार और रोजगार के अवसरों में बदलने का मंच उपलब्ध कराता है।
2017 से पहले यूपी में थे केवल 120 स्टार्टअप
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की सबसे बड़ी युवा आबादी वाले राज्यों में शामिल उत्तर प्रदेश भी कभी स्टार्टअप के मामले में काफी पीछे था। उन्होंने बताया कि 2017 से पहले प्रदेश में केवल करीब 120 स्टार्टअप थे। इसके बाद सरकार ने ऐसा वातावरण तैयार करने पर जोर दिया, जिसमें युवाओं को अपने नए विचारों पर काम करने, निवेश हासिल करने और कारोबार खड़ा करने के अवसर मिल सकें।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार ने स्टार्टअप के लिए अनुकूल माहौल बनाने का प्रयास किया। इसका परिणाम यह है कि आज प्रदेश में 24 हजार से ज्यादा स्टार्टअप युवाओं के सपनों को नई दिशा दे रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह बदलाव केवल संख्या तक सीमित नहीं है। प्रदेश में अलग-अलग क्षेत्रों में नए प्रयोग, तकनीक आधारित कारोबार और नवाचार देखने को मिल रहे हैं। इससे उत्तर प्रदेश की पुरानी छवि को बदलने में भी मदद मिली है।
107 स्टार्टअप को मिलेगा प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश स्टार्टअप नीति के तहत 107 स्टार्टअप्स को विभिन्न प्रकार के प्रोत्साहन से जोड़ा जा रहा है। इसके अलावा नीति के अंतर्गत 9 इनक्यूबेटर्स को प्रोत्साहन दिया जा रहा है, जबकि 12 नए इनक्यूबेटर्स को मान्यता प्रदान की जा रही है।
इनक्यूबेटर्स नए उद्यमियों और स्टार्टअप्स को शुरुआती चरण में जरूरी मार्गदर्शन, तकनीकी सहायता, नेटवर्किंग और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में ऐसे संस्थागत प्लेटफॉर्म विकसित हों, जहां युवा अपने आइडिया को व्यावसायिक रूप दे सकें।
कार्यक्रम में स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े विभिन्न हितधारकों, समितियों के सदस्यों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ भी चर्चा का उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में स्टार्टअप किस तरह नए काम कर रहे हैं, इसे समझना और उनके अनुभवों को सामने लाना जरूरी है।
महिला उद्यमिता में भी बढ़ी भागीदारी
उत्तर प्रदेश के स्टार्टअप इकोसिस्टम की एक खास उपलब्धि के रूप में मुख्यमंत्री ने महिला उद्यमिता का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 24 हजार से अधिक स्टार्टअप में करीब आधे स्टार्टअप महिलाओं द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, यह बदलाव महिला सशक्तीकरण के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। महिलाओं का उद्यमिता में बढ़ता योगदान न केवल उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करता है, बल्कि परिवार और समाज में निर्णय लेने की उनकी क्षमता को भी बढ़ाता है।
सरकार की कोशिश है कि महिलाओं और युवाओं की प्रतिभा को स्थानीय स्तर पर अवसर मिले और उन्हें रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों या देशों की ओर जाने के बजाय अपने प्रदेश में ही नए अवसर पैदा करने का मंच मिले।
यूपी की पुरानी छवि बदलने का दावा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश की वर्ष 2017 से पहले की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय प्रदेश की छवि देश के बाहर और दूसरे राज्यों में अच्छी नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब वे सांसद के रूप में देश के अन्य हिस्सों में जाते थे तो उत्तर प्रदेश का नाम सुनकर लोगों के मन में आशंका और नकारात्मक धारणा दिखाई देती थी।
उन्होंने दावा किया कि उस समय प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति, दंगे, बंद और कर्फ्यू जैसी परिस्थितियों के कारण निवेश, शिक्षा, रोजगार और इनोवेशन की चर्चा करना मुश्किल था। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब किसी क्षेत्र में स्थिर और सुरक्षित वातावरण नहीं होता, तो वहां रोजगार, शिक्षा और उद्यमिता का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना कठिन हो जाता है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा, रोजगार, स्टार्टअप, इनक्यूबेशन और इनोवेशन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनके विकास के लिए केवल नीति बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि सरकार, युवाओं, निवेशकों और आम जनता के बीच भरोसे का वातावरण भी जरूरी है।
25 करोड़ की आबादी को चुनौती नहीं, अवसर मानने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की करीब 25 करोड़ की आबादी को अक्सर बड़ी चुनौती के रूप में देखा जाता है, लेकिन सरकार इसे राज्य की ताकत और डेमोग्राफिक डिविडेंड के रूप में देखती है।
उन्होंने कहा कि यदि इतनी बड़ी युवा आबादी को सही शिक्षा, प्रशिक्षण और स्किलिंग से जोड़ा जाए तो यही जनसंख्या राज्य की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत बन सकती है। उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश के पास देश की सबसे युवा और प्रतिभाशाली वर्कफोर्स में से एक मौजूद है।
सरकार की जिम्मेदारी है कि इस प्रतिभा को ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराया जाए, जहां युवा अपनी ऊर्जा और क्षमता का इस्तेमाल कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के 24 हजार से अधिक स्टार्टअप इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच की भूमिका निभा रहे हैं।
यूपी की अर्थव्यवस्था को तीन गुना करने का दावा
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 के बाद उत्तर प्रदेश ने अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय, महिला कार्यबल की भागीदारी और औद्योगिक क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने दावा किया कि पिछले करीब नौ वर्षों में प्रदेश की इकोनॉमी को तीन गुना करने में सफलता मिली है।
इसी तरह प्रति व्यक्ति आय को तीन गुना करने और महिला वर्कफोर्स की भागीदारी में भी तीन गुना वृद्धि का दावा किया गया। मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश में बड़े उद्योगों की संख्या भी पहले की तुलना में करीब तीन गुना हुई है।
उन्होंने इसे ‘नए उत्तर प्रदेश’ की तस्वीर बताते हुए कहा कि राज्य अब देश की तेजी से उभरती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
क्वांटम, ड्रोन और स्पेस टेक्नोलॉजी पर फोकस
उत्तर प्रदेश सरकार अब स्टार्टअप इकोसिस्टम को नई और उभरती तकनीकों से जोड़ने पर भी जोर दे रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार क्वांटम कंप्यूटिंग, स्पेस टेक्नोलॉजी, ड्रोन टेक्नोलॉजी, रोबोटिक्स और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले संस्थानों और स्टार्टअप्स के साथ सहयोग करने के लिए तैयार है।
उन्होंने बताया कि आईआईटी कानपुर, एसजीपीजीआई और आईआईटी बीएचयू समेत कई संस्थानों ने अलग-अलग क्षेत्रों में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित करने की दिशा में पहल की है। सरकार ने इन संस्थानों को सहयोग देने की प्रतिबद्धता जताई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, उत्तर प्रदेश में एक दर्जन से अधिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस या तो संचालित हो रहे हैं या उन्हें विकसित करने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।
स्टार्टअप इकोसिस्टम को और मजबूत करने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप की संख्या बढ़ना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन अभी काफी संभावनाएं बाकी हैं। उनका मानना है कि राज्य की आबादी और युवा कार्यबल को देखते हुए देश के स्टार्टअप इकोसिस्टम में यूपी की भागीदारी और अधिक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार का फोकस युवाओं की प्रतिभा को तकनीक, स्किलिंग, निवेश और बाजार से जोड़ने पर रहेगा। इससे नए कारोबार खड़े होने के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में स्टार्टअप को लेकर सरकार की रणनीति अब केवल नए कारोबार शुरू कराने तक सीमित नहीं दिखाई देती, बल्कि इसे शिक्षा, रोजगार, तकनीक, महिला उद्यमिता और औद्योगिक विकास के व्यापक इकोसिस्टम से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, 8 यूनिकॉर्न, नए इनक्यूबेटर्स और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की पहल इस बदलाव की दिशा में सरकार द्वारा पेश किए जा रहे प्रमुख आंकड़े हैं। आने वाले वर्षों में इन पहलों का वास्तविक असर रोजगार, निवेश और वैश्विक स्तर पर यूपी के स्टार्टअप्स की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में कितना दिखाई देता है, यह राज्य के लिए सबसे महत्वपूर्ण अगला चरण होगा।
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