लखनऊ, 27 अगस्त 2026: वामपंथी नेताओं और कार्यकर्ताओं की निजी जानकारी पुलिस एवं खुफिया तंत्र द्वारा कथित तौर पर जुटाए जाने के विरोध में गुरुवार को लखनऊ में मार्च निकाला गया। यह मार्च भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) यानी भाकपा (माले) लिबरेशन के राज्यव्यापी आंदोलन के तहत आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारी परिवर्तन चौक से जिलाधिकारी कार्यालय तक पहुंचे और निजता के अधिकार के साथ-साथ अभिव्यक्ति, संगठन और शांतिपूर्ण विरोध के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई।
मार्च में वामपंथी कार्यकर्ताओं के अलावा छात्र-युवा संगठनों और लोकतांत्रिक नागरिकों ने भी हिस्सा लिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रदेश के अलग-अलग जिलों में पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाइयों द्वारा भाकपा (माले) तथा अन्य वामपंथी आंदोलनों से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं से संवेदनशील निजी जानकारी मांगी जा रही है।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार, इस जानकारी में आधार कार्ड, पैन कार्ड, पासपोर्ट, बैंक खातों से जुड़ी जानकारी, पारिवारिक विवरण, चल-अचल संपत्ति, सोशल मीडिया प्रोफाइल और अन्य व्यक्तिगत सूचनाएं शामिल हैं। मार्च के दौरान सवाल उठाया गया कि इतनी संवेदनशील जानकारी किस कानूनी प्रावधान, आदेश या सक्षम प्राधिकारी के निर्देश के तहत मांगी जा रही है और इसे एकत्र करने का उद्देश्य क्या है।
राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर डेटा जुटाने का आरोप

भाकपा (माले) ने आरोप लगाया कि राजनीतिक विचारधारा और लोकतांत्रिक गतिविधियों से जुड़े लोगों की निजी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया नागरिकों की निजता और लोकतांत्रिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर सवाल है। पार्टी का कहना है कि किसी व्यक्ति का किसी राजनीतिक दल, जनसंगठन या लोकतांत्रिक आंदोलन से जुड़ाव अपने आप में उसकी निगरानी या व्यक्तिगत डेटा एकत्र करने का आधार नहीं बनाया जा सकता।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि संबंधित सूचनाएं किस कानून के तहत मांगी जा रही हैं, उन्हें एकत्र करने का उद्देश्य क्या है और इस डेटा के इस्तेमाल की क्या व्यवस्था है। साथ ही यह भी सवाल उठाया गया कि एकत्र की गई जानकारी को कहां रखा जा रहा है, किन अधिकारियों या संस्थाओं के पास इसकी पहुंच है और निर्धारित उद्देश्य पूरा होने के बाद उसे नष्ट करने की क्या प्रक्रिया है।
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने निजता को केवल व्यक्तिगत अधिकार नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। उनका कहना था कि नागरिकों को अपनी राजनीतिक राय रखने, संगठन बनाने और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की स्वतंत्रता होनी चाहिए।
राजीव गुप्ता बोले- राजनीतिक विचारधारा निगरानी का आधार नहीं हो सकती
भाकपा (माले) राज्य कमेटी के सदस्य राजीव गुप्ता ने कहा कि लोकतंत्र में किसी व्यक्ति की राजनीतिक विचारधारा या किसी लोकतांत्रिक आंदोलन से उसका जुड़ाव उसके खिलाफ निगरानी और निजी डेटा संग्रह का आधार नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा कि यदि आधार, बैंक खातों, संपत्ति और अन्य निजी सूचनाओं को केवल राजनीतिक जुड़ाव के कारण एकत्र किया जा रहा है, तो यह निजता और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला है।
राजीव गुप्ता ने सरकार से सार्वजनिक रूप से जानकारी देने की मांग की कि ऐसी सूचनाएं किस कानून और किस सक्षम प्राधिकारी के आदेश के तहत मांगी जा रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि इन सूचनाओं को एकत्र करने का उद्देश्य क्या है और पहले से जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल किस तरीके से किया जा रहा है।
उनके मुताबिक, नागरिकों को यह जानने का अधिकार है कि उनके बारे में एकत्र की जा रही निजी जानकारी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से हो रहा है और उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है।
कमला गौतम ने लोकतांत्रिक असहमति का मुद्दा उठाया
भाकपा (माले) राज्य कमेटी सदस्य कमला गौतम ने भी निजी जानकारी जुटाने की कथित प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक असहमति को अपराध की तरह देखना और आंदोलनों से जुड़े लोगों की व्यक्तिगत जानकारी जुटाना लोकतांत्रिक समाज में स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि सरकार की जिम्मेदारी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करना है। राजनीतिक गतिविधियों या विचारों के कारण नागरिकों को भय और दबाव की स्थिति में रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
कमला गौतम ने कहा कि नागरिकों को अपनी बात रखने, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का अधिकार है। उनके अनुसार, ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल करने वाले लोगों की व्यक्तिगत जानकारी जुटाने की किसी भी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए।
छात्र-युवा संगठनों ने भी जताई चिंता
मार्च में छात्र और युवा संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। AISA लखनऊ विश्वविद्यालय के अध्यक्ष शांतम निधि ने कहा कि छात्र और युवा जब शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों जैसे मुद्दे उठाते हैं तो उन्हें निगरानी या दबाव के जरिए चुप नहीं कराया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की जवाबदेही नागरिकों के प्रति होती है। उनके अनुसार, राजनीतिक गतिविधियों में भाग लेने वाले छात्रों और युवाओं की निजी जानकारी जुटाने की किसी भी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।
शांतम निधि ने निजता को लोकतांत्रिक स्वतंत्रता की बुनियादी शर्त बताते हुए कहा कि छात्र-युवा कार्यकर्ताओं और जन आंदोलनों से जुड़े नागरिकों की निजी जानकारी जुटाने की गैर-पारदर्शी प्रक्रिया को रोका जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि यदि ऐसी जानकारी पहले से एकत्र की जा चुकी है तो उसकी वैधानिकता, उद्देश्य, इस्तेमाल और संरक्षण से संबंधित जानकारी सार्वजनिक की जाए।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार के सामने रखीं पांच प्रमुख मांगें

मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखीं। इनमें सबसे प्रमुख मांग राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर वामपंथी नेताओं और कार्यकर्ताओं की निजी जानकारी जुटाने पर तत्काल रोक लगाने की रही।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि भाकपा (माले), अन्य वामपंथी दलों और जनसंगठनों से जुड़े लोगों का राजनीतिक आधार पर निजी डेटा एकत्र करने की कार्रवाई बंद की जाए।
इसके अलावा सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की गई कि निजी जानकारी किस कानून, आदेश और उद्देश्य के तहत मांगी जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही तय करने और संबंधित अधिकारी या संस्था के बारे में जानकारी सार्वजनिक करने की भी मांग की।
कथित दबाव और धमकी की जांच की मांग
प्रदर्शनकारियों ने फोन, संदेश या अन्य माध्यमों से निजी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कथित तौर पर धमकी या दबाव डाले जाने की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की।
उनका कहना है कि यदि किसी नागरिक से व्यक्तिगत दस्तावेज या वित्तीय जानकारी मांगी जाती है तो उसे स्पष्ट रूप से यह बताया जाना चाहिए कि जानकारी क्यों मांगी जा रही है और किस कानूनी प्रक्रिया के तहत मांगी जा रही है।
उन्होंने राजनीतिक गतिविधियों के आधार पर नागरिकों की निगरानी, प्रोफाइलिंग और डेटाबेस तैयार करने की किसी भी गैर-पारदर्शी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग की।
पहले से जुटाए गए डेटा को लेकर भी सवाल
प्रदर्शनकारियों ने केवल भविष्य में ऐसी कार्रवाई रोकने की मांग नहीं की, बल्कि पहले से एकत्र की गई निजी जानकारी को लेकर भी जवाब मांगा।
भाकपा (माले) ने मांग की कि सरकार सार्वजनिक करे कि पहले से जुटाए गए डेटा का इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा रहा है, इसे कहां सुरक्षित रखा गया है, इसे किन व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ साझा किया गया है और इसे कब तथा किस प्रक्रिया के तहत नष्ट किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नागरिकों की निजी जानकारी के संग्रह और इस्तेमाल को लेकर स्पष्ट नियम, जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है। उनके मुताबिक, संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा का अनियंत्रित इस्तेमाल नागरिकों के अधिकारों और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।
निजता, अभिव्यक्ति और विरोध के अधिकार की रक्षा की मांग
मार्च का व्यापक मुद्दा केवल निजी डेटा संग्रह तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारियों ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, संगठन बनाने के अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार से भी जोड़कर देखा।
भाकपा (माले) का कहना है कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति स्वाभाविक प्रक्रिया है और अलग विचार रखने वाले नागरिकों को डर या निगरानी के वातावरण में नहीं रखा जाना चाहिए।
पार्टी ने कहा कि किसी नागरिक की राजनीतिक पहचान या किसी जन आंदोलन से जुड़ाव के आधार पर उसके निजी जीवन की जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को कानूनी और संवैधानिक कसौटियों पर परखा जाना चाहिए।
आंदोलन जारी रखने का ऐलान
भाकपा (माले) ने कहा कि वह नागरिक स्वतंत्रताओं और निजता के अधिकार से जुड़े मुद्दे पर अपना आंदोलन जारी रखेगी। पार्टी ने राजनीतिक असहमति को निगरानी और भय के माध्यम से दबाने की किसी भी कथित कोशिश का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने की बात कही।
लखनऊ में निकाला गया यह मार्च ऐसे समय में हुआ है जब डिजिटल दौर में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और सरकारी संस्थाओं द्वारा डेटा संग्रह को लेकर देशभर में व्यापक बहस जारी है। आधार, बैंकिंग, संपत्ति और सोशल मीडिया जैसी सूचनाएं बेहद संवेदनशील मानी जाती हैं। ऐसे में प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि किसी भी व्यक्ति से इस तरह की जानकारी लेने के पीछे कानूनी आधार, उद्देश्य और जवाबदेही स्पष्ट होनी चाहिए।
फिलहाल भाकपा (माले) ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का कहना है कि जब तक निजी जानकारी जुटाने की प्रक्रिया का कानूनी आधार और उद्देश्य स्पष्ट नहीं होता, तब तक इस मुद्दे पर सवाल उठाना और लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना जारी रहेगा।
नोट: इस खबर में निजी डेटा जुटाए जाने और संबंधित कार्रवाई से जुड़े आरोप भाकपा (माले) तथा मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए हैं। इन आरोपों पर संबंधित सरकारी अथवा पुलिस पक्ष का आधिकारिक जवाब इस प्रेस विज्ञप्ति में उपलब्ध नहीं है।
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