लखनऊ, 27 अगस्त 2026: लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट के ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में अदालत ने अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय पॉक्सो, लखनऊ ने अभियुक्त मनोज कुमार सिंह (47) को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(1) के तहत दोषी ठहराते हुए कुल ₹50,000 के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई थाना गोमतीनगर पुलिस और अभियोजन शाखा की प्रभावी पैरवी का परिणाम है। मामले की विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों और अदालत में लगातार की गई पैरवी के आधार पर अभियुक्त को दोषसिद्ध किया गया।
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि अपराधियों को न्यायालय से अधिकतम सजा दिलाने के उद्देश्य से ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत गंभीर आपराधिक मामलों में प्रभावी पैरवी और अभियोजन के साथ समन्वय पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में हुई थी FIR
पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट के मुताबिक, गोमतीनगर थाना क्षेत्र में मई 2025 में एक नाबालिग से दुष्कर्म का मामला सामने आया था। पीड़िता की उम्र करीब 15 वर्ष बताई गई है। मामले में पीड़िता के परिजन की ओर से 26 मई 2025 को पुलिस को तहरीर दी गई थी।
शिकायत के अनुसार, घटना 25 मई 2025 की रात करीब 11 बजे से मध्यरात्रि के बीच गोमतीनगर क्षेत्र के विपुलखंड इलाके में हुई। आरोप था कि अभियुक्त ने नाबालिग को अकेला पाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
शिकायत मिलने के बाद गोमतीनगर थाने में संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले को पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज करते हुए जांच शुरू की।
चूंकि मामला नाबालिग से संबंधित था, इसलिए पुलिस और अभियोजन की कार्रवाई में पीड़िता की पहचान एवं निजी जानकारी की गोपनीयता बनाए रखना महत्वपूर्ण रहा। इस रिपोर्ट में भी नाबालिग पीड़िता की पहचान से जुड़ी कोई जानकारी सार्वजनिक नहीं की जा रही है।
विवेचना में जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोप पत्र
पुलिस के मुताबिक, मामले की विवेचना उपनिरीक्षक प्रमोद कुमार सिंह ने की। जांच के दौरान पुलिस ने उपलब्ध साक्ष्यों को संकलित किया और अभियुक्त के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया।
इसके बाद मामला विशेष पॉक्सो न्यायालय में चला। पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में उपलब्ध साक्ष्यों एवं मामले से जुड़े तथ्यों को प्रभावी तरीके से रखा गया।
लखनऊ पुलिस का कहना है कि न्यायालय में लगातार पैरवी और अभियोजन शाखा के साथ समन्वय के चलते मामले की सुनवाई के दौरान प्रभावी पक्ष रखा गया। इसी प्रक्रिया के बाद अदालत ने अभियुक्त को संबंधित धाराओं में दोषी पाया और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
₹50 हजार का अर्थदंड भी लगाया
विशेष न्यायालय पॉक्सो, लखनऊ ने अभियुक्त मनोज कुमार सिंह को 20 वर्ष के कठोर कारावास के साथ कुल ₹50,000 के अर्थदंड से दंडित किया है।
पुलिस के अनुसार, यदि अभियुक्त अर्थदंड की राशि का भुगतान नहीं करता है तो उसे न्यायालय के आदेश के अनुसार अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा।
अदालत का यह फैसला पॉक्सो कानून के तहत नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में न्यायिक कार्रवाई के महत्व को रेखांकित करता है। ऐसे मामलों में जांच, साक्ष्य संकलन और अभियोजन की प्रभावी भूमिका दोषसिद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है।
ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत लगातार हो रही पैरवी
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट ने बताया कि उत्तर प्रदेश पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर ऑपरेशन कन्विक्शन चलाया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य गंभीर अपराधों में आरोपियों के खिलाफ मजबूत कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ न्यायालय में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करना है, ताकि दोष सिद्ध होने पर अपराधियों को कानून के मुताबिक सजा मिल सके।
इसी अभियान के तहत पुलिस थानों के पैरोकारों को संबंधित मुकदमों की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साथ समन्वय करने और जरूरी दस्तावेज एवं साक्ष्यों से संबंधित प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
गोमतीनगर थाने के इस मामले में भी पुलिस के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में लगातार न्यायालयीन पैरवी की गई।
वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में हुई कार्रवाई
पुलिस प्रेस नोट के अनुसार, इस मामले में पुलिस आयुक्त तरुण गाबा और संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार के निर्देशन में अपराध नियंत्रण तथा दोषियों को अधिकतम सजा दिलाने के लिए प्रभावी पैरवी की गई।
इसके अलावा पुलिस उपायुक्त पूर्वी और अपर पुलिस उपायुक्त पूर्वी के निर्देशन में सहायक पुलिस आयुक्त गोमतीनगर तथा प्रभारी निरीक्षक गोमतीनगर बृजेश कुमार तिवारी के नेतृत्व में न्यायालय में मामले की पैरवी की गई।
पुलिस की ओर से प्रभारी निरीक्षक बृजेश कुमार तिवारी और कांस्टेबल अवनीश कुमार ने पैरवी में भूमिका निभाई।
पुलिस का कहना है कि गंभीर अपराधों में केवल मुकदमा दर्ज करना और जांच पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि न्यायालय में मामले की प्रभावी पैरवी भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत ऐसे मामलों की लगातार समीक्षा की जा रही है।
पॉक्सो कानून के तहत गंभीर अपराध
पॉक्सो यानी Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों को यौन अपराधों से सुरक्षा देने के लिए बनाया गया कानून है। नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों के मामलों में कानून कठोर प्रावधान करता है।
इस मामले में पुलिस ने BNS की धारा 64(1) और पॉक्सो एक्ट की धारा 3/4(1) के तहत कार्रवाई की। मुकदमे की सुनवाई के बाद विशेष पॉक्सो अदालत ने अभियुक्त को दोषी माना और 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बाद पुलिस ने इसे ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी अभियोजन और न्यायालयीन पैरवी की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया है।
पुलिस ने कहा- गंभीर मामलों में सजा दिलाना प्राथमिकता
लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट का कहना है कि अपराध नियंत्रण के साथ-साथ अपराधियों को न्यायालय से सजा दिलाना भी पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए विवेचना की गुणवत्ता, साक्ष्यों का संकलन, समय से आरोप पत्र दाखिल करना और न्यायालय में प्रभावी पैरवी जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है।
पुलिस के मुताबिक, ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत ऐसे मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है जिनमें गंभीर अपराध हुए हैं और जिनमें अभियोजन की प्रभावी पैरवी के जरिए दोषसिद्धि की संभावना मजबूत हो सकती है।
इस मामले में भी विवेचना के दौरान जुटाए गए साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा गया और अभियोजन पक्ष ने मामले की लगातार पैरवी की।
20 साल की सजा के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया
अदालत के फैसले के बाद अभियुक्त को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही ₹50,000 का अर्थदंड भी लगाया गया है। अर्थदंड जमा नहीं करने की स्थिति में अदालत के आदेश के अनुसार अतिरिक्त कारावास का प्रावधान लागू होगा।
किसी भी आपराधिक मामले में दोषसिद्धि के बाद संबंधित पक्षों के पास कानून के तहत उपलब्ध अपीलीय उपाय होते हैं। इसलिए अदालत के मौजूदा फैसले को निचली अदालत के स्तर पर आया निर्णय माना जाता है और आगे की कानूनी प्रक्रिया संबंधित पक्षों के अधिकारों के अनुसार चल सकती है।
पुलिस और अभियोजन के समन्वय पर जोर
इस मामले की कार्रवाई से एक बार फिर यह सामने आया है कि गंभीर अपराधों में पुलिस जांच और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय दोषसिद्धि की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लखनऊ पुलिस के अनुसार, थाना गोमतीनगर के पैरोकार ने न्यायालय में लगातार मामले की पैरवी की और अभियोजन पक्ष के साथ आवश्यक समन्वय बनाए रखा।
पुलिस कमिश्नरेट ने कहा है कि ऑपरेशन कन्विक्शन के तहत प्रभावी पैरवी का अभियान आगे भी जारी रहेगा। खासतौर पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों में आरोपियों को कानून के मुताबिक सजा दिलाने के लिए जांच और अभियोजन प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा।
नोट: यह खबर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट द्वारा जारी प्रेस नोट के आधार पर तैयार की गई है। नाबालिग पीड़िता की पहचान से संबंधित कोई विवरण प्रकाशित नहीं किया गया है। प्रेस नोट के अलग-अलग हिस्सों में मुकदमा संख्या को लेकर अंतर दिखाई देता है; इसलिए इस खबर में उस संख्या को प्रमुखता से नहीं दिया गया है।
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