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गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब प्रदेश की परंपरा को विज्ञान की शक्ति, विज्ञान को तकनीक की गति और तकनीक को युवाओं की ऊर्जा मिलेगी, तब उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरा क्षेत्र देश के विकास की नई कहानी लिखने में सक्षम होगा। उन्होंने युवाओं से केवल नौकरी पाने की तैयारी करने के बजाय इनोवेटर, एंटरप्रेन्योर और समस्या का समाधान खोजने वाला बनने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वविद्यालय की अब तक की यात्रा, विद्यार्थियों और शिक्षकों की उपलब्धियों तथा संस्थान में विकसित हो रहे शिक्षा और शोध के वातावरण की सराहना की। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थापना दिवस किसी भी संस्थान के लिए केवल एक औपचारिक अवसर नहीं होता, बल्कि यह अपनी उपलब्धियों की समीक्षा करने और भविष्य की दिशा तय करने का महत्वपूर्ण पड़ाव भी होता है।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और संस्थान की पूरी टीम को उनके उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मानित करना इस बात का संकेत है कि यहां सामान्य ढर्रे से हटकर कुछ नया करने की कोशिश हो रही है।

परंपरा, विज्ञान और तकनीक के मेल से बदलेगा क्षेत्र

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक विरासत और आधुनिक विज्ञान के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अपनी समृद्ध परंपराएं और ज्ञान की विरासत हैं। यदि इन्हें आधुनिक विज्ञान और तकनीक के साथ जोड़ा जाए तो विकास की नई संभावनाएं तैयार हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि विज्ञान को तकनीक की गति और तकनीक को युवाओं की ऊर्जा मिलने पर प्रदेश की क्षमता कई गुना बढ़ सकती है। युवाओं को यदि सही अवसर उपलब्ध कराए जाएं तो वे न केवल अपने भविष्य को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज और देश की आर्थिक प्रगति में भी बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।

मुख्यमंत्री के मुताबिक, उत्तर प्रदेश की विकास यात्रा में विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। इन संस्थानों से निकलने वाला ज्ञान जब समाज की वास्तविक समस्याओं से जुड़ेगा, तभी शिक्षा का प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई देगा।

उन्होंने कहा कि विकसित भारत की संकल्पना केवल सरकारी प्रयासों से पूरी नहीं होगी। इसके लिए विश्वविद्यालयों, संस्थाओं, विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत को मिलकर काम करना होगा।

गोरखपुर को नॉलेज और इकोनॉमिक हब बनाने की संभावनाएं

मुख्यमंत्री ने गोरखपुर की भूमिका को भी विस्तार से रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि गोरखपुर को केवल धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए। यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की व्यापक संभावनाओं का द्वार बन सकता है।

उन्होंने गोरखपुर को शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि और इनोवेशन के बड़े क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना पर जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर इन क्षेत्रों को एक-दूसरे से जोड़ा जाए तो गोरखपुर और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।

उनके अनुसार, महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है। विश्वविद्यालय में शिक्षा के साथ रिसर्च एंड डेवलपमेंट, इनोवेशन, इंडस्ट्री और रोजगार के बीच मजबूत संबंध विकसित किया जाना जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय के कैंपस और प्रयोगशालाओं में तैयार होने वाला ज्ञान केवल चारदीवारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उसका लाभ पूर्वी उत्तर प्रदेश के गांवों, किसानों, अस्पतालों, उद्योगों और स्टार्टअप तक पहुंचना चाहिए।

किसानों तक पहुंचे विश्वविद्यालय की रिसर्च

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय में कृषि शिक्षा और शोध को किसानों की जरूरतों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि कृषि से जुड़े विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं का काम ऐसा होना चाहिए, जिससे किसानों की उत्पादकता और आय बढ़ाने में वास्तविक मदद मिल सके।

उन्होंने कहा कि खेतों में आने वाली समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने, आधुनिक तकनीक को कृषि से जोड़ने और नई संभावनाओं पर काम करने की जरूरत है। जब विश्वविद्यालय में होने वाला शोध सीधे किसान तक पहुंचेगा, तभी उसका सामाजिक और आर्थिक महत्व सामने आएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र में शोध का उद्देश्य केवल अकादमिक उपलब्धि तक सीमित नहीं होना चाहिए। उसका परिणाम खेतों में दिखाई देना चाहिए और किसानों की जिंदगी को आसान बनाने में योगदान देना चाहिए।

मेडिकल रिसर्च से गांवों की स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

मुख्यमंत्री ने महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय में आधुनिक चिकित्सा और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े विद्यार्थियों के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में एमबीबीएस के विद्यार्थी आधुनिक चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं, जबकि बीएएमएस के विद्यार्थियों ने पारंपरिक चिकित्सा के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन किया है।

उन्होंने कहा कि मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की जरूरतों से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों में तैयार होने वाला मेडिकल ज्ञान यदि गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों की स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचता है तो इसका सीधा लाभ आम लोगों को मिलेगा।

इसी तरह फार्मेसी के क्षेत्र में होने वाला शोध नई दवाओं और हेल्थकेयर इनोवेशन की संभावनाओं को बढ़ा सकता है। मुख्यमंत्री ने अलग-अलग विषयों के बीच सहयोग की जरूरत बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक इन सभी क्षेत्रों को बड़े बाजार और नई अर्थव्यवस्था से जोड़ने का काम कर सकती है।

एनएमसी निरीक्षण का उदाहरण देकर टीमवर्क पर जोर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विश्वविद्यालय में होने वाले एनएमसी निरीक्षण का उदाहरण देते हुए टीमवर्क को सफलता का महत्वपूर्ण मंत्र बताया। उन्होंने कहा कि किसी संस्थान की उपलब्धि केवल एक व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं होती।

एनएमसी से जुड़े निरीक्षण या किसी भी महत्वपूर्ण संस्थागत प्रक्रिया की जिम्मेदारी केवल प्रिंसिपल की नहीं हो सकती। इसके लिए पूरी फैकल्टी, कर्मचारी और संबंधित टीम को मिलकर काम करना होता है। उन्होंने कहा कि जब पूरी टीम एक लक्ष्य के लिए अनुशासन के साथ काम करती है तो चुनौती का समाधान भी सामूहिक रूप से निकाला जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय की टीमवर्क और अनुशासन की भावना की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान की कार्यसंस्कृति में दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, पंचम स्थापना दिवस विश्वविद्यालय की यात्रा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो आगे और बेहतर काम करने की प्रेरणा देता है।

‘लीग से हटकर’ काम करने वालों का सम्मान

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से विद्यार्थियों, फैकल्टी सदस्यों, कर्मचारियों और संस्थान की टीम के उन लोगों को सम्मानित किया गया जिन्होंने अपने क्षेत्र में सामान्य तरीके से अलग हटकर कुछ नया करने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने इस पहल की सराहना की।

उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की पहचान केवल उसके भवन, पाठ्यक्रम या डिग्री से नहीं बनती। उसकी असली पहचान वहां होने वाले नए प्रयोग, शोध, नवाचार और समाज पर पड़ने वाले प्रभाव से बनती है।

मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से भी इसी भावना के साथ आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल तय रास्ते पर चलने की मानसिकता से आगे निकलना होगा और नई समस्याओं के नए समाधान खोजने होंगे।

‘जॉब रेडी’ नहीं, ‘फ्यूचर रेडी’ बनें युवा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में युवाओं को भविष्य की बदलती दुनिया के लिए तैयार रहने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि आज का दौर तेजी से बदल रहा है। ऐसे में केवल किसी एक नौकरी के लिए तैयारी करना पर्याप्त नहीं है।

युवाओं को ऐसी स्किल, विजन और इच्छाशक्ति विकसित करनी होगी, जो उन्हें बदलते समय के साथ लगातार आगे बढ़ने में सक्षम बनाए। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को केवल ‘एम्प्लॉय’ बनने की तैयारी नहीं करनी चाहिए, बल्कि उन्हें इनोवेटर, एंटरप्रेन्योर और प्रॉब्लम सॉल्वर बनने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने युवाओं से आत्ममंथन करने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें केवल यह सवाल नहीं करना चाहिए कि वे अपने लिए क्या कर सकते हैं। इससे आगे बढ़कर उन्हें यह सोचना चाहिए कि अपने ज्ञान, प्रतिभा और क्षमता से वे समाज और देश के लिए क्या योगदान दे सकते हैं।

‘आप देश के भविष्य के निर्माता बनिए’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने युवाओं की सफलता की परिभाषा को व्यापक बनाने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि किसी विद्यार्थी की सफलता केवल उसके व्यक्तिगत करियर तक सीमित नहीं होनी चाहिए।

यदि किसी युवा के ज्ञान से किसी व्यक्ति का जीवन बेहतर होता है, उसके इनोवेशन से कोई समस्या हल होती है, उसके उद्यम से दूसरे लोगों को रोजगार मिलता है और उसकी आर्थिक गतिविधि देश की अर्थव्यवस्था को गति देती है, तो यही उसकी वास्तविक सफलता है।

उन्होंने युवाओं से कहा कि वे केवल अपने भविष्य के निर्माण तक सीमित न रहें, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने में भी अपनी भूमिका निभाएं।

विश्वविद्यालय से समाज तक पहुंचे ज्ञान

मुख्यमंत्री ने कहा कि महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों के सामने सबसे बड़ी जिम्मेदारी यह है कि कैंपस में तैयार होने वाला ज्ञान समाज के लिए उपयोगी बने। प्रयोगशालाओं में होने वाली रिसर्च का असर किसानों के खेतों, मरीजों के जीवन, उद्योगों की जरूरतों और युवाओं के उद्यम में दिखाई देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि जब विश्वविद्यालय का ज्ञान समाज की वास्तविक जरूरतों से जुड़ेगा, तभी वह सामाजिक शक्ति और आर्थिक विकास का आधार बनेगा।

महायोगी गोरखनाथ विश्वविद्यालय के पंचम स्थापना दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संबोधन इसी व्यापक सोच पर केंद्रित रहा। उन्होंने शिक्षा को रोजगार से आगे ले जाकर शोध, नवाचार, उद्यमिता और सामाजिक उपयोगिता से जोड़ने की जरूरत बताई।

कार्यक्रम से स्पष्ट संदेश सामने आया कि उत्तर प्रदेश के विकास में विश्वविद्यालयों की भूमिका केवल डिग्री देने तक सीमित नहीं रह सकती। शिक्षा, विज्ञान, तकनीक और युवा ऊर्जा के बीच बेहतर तालमेल बनाकर ही प्रदेश को ज्ञान आधारित विकास की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालय परिवार को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए इसी दिशा में निरंतर नए प्रयास करने की प्रेरणा दी।

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