सिनेमाघरों में अक्सर ऐसी फिल्में आती हैं जिनका उद्देश्य केवल दर्शकों का मनोरंजन करना होता है, लेकिन कुछ फिल्में ऐसी भी होती हैं जो पर्दे पर कहानी सुनाने के साथ-साथ दर्शक को अपने भीतर झांकने का मौका देती हैं। ‘हनुमान अंश’ इसी दूसरी श्रेणी की फिल्म है। विशाल चतुर्वेदी के निर्देशन में बनी यह फिल्म नीब करौरी बाबा के जीवन, उनकी आध्यात्मिक यात्रा, मानव सेवा और भगवान राम के प्रति उनकी अटूट आस्था से प्रेरित है। फिल्म 7 अगस्त 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई।
फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नीब करौरी बाबा की कहानी को सिर्फ चमत्कारों की श्रृंखला बनाकर पेश नहीं करती, बल्कि उनके व्यक्तित्व के उस पक्ष पर अधिक ध्यान देती है जिसमें प्रेम, करुणा, सेवा, त्याग और इंसानियत प्रमुख हैं। यही वजह है कि ‘हनुमान अंश’ को पारंपरिक बायोपिक की बजाय एक आध्यात्मिक ड्रामा के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
क्या है ‘हनुमान अंश’ की कहानी?
‘हनुमान अंश’ की कहानी नीब करौरी बाबा के जीवन और उनके आध्यात्मिक परिवर्तन के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म यह समझाने की कोशिश करती है कि एक साधारण इंसान किस तरह जीवन के अनुभवों, संघर्षों और भीतर उठने वाले सवालों से गुजरते हुए आध्यात्मिक रास्ते की ओर बढ़ता है।
फिल्म में बाबा के जीवन को केवल श्रद्धा के नजरिए से नहीं बल्कि एक मानवीय यात्रा के रूप में देखने की कोशिश की गई है। उनके भीतर का बदलाव, संसार से दूरी, आध्यात्मिक खोज और बाद में लोगों के प्रति उनका समर्पण कहानी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनता है।
फिल्म के केंद्र में चमत्कार जरूर हैं, लेकिन निर्देशक ने कहानी को केवल चमत्कारों पर निर्भर नहीं किया। कई दृश्यों में यह संदेश उभरकर सामने आता है कि आध्यात्मिकता का वास्तविक अर्थ दूसरों के प्रति प्रेम और सेवा में है।
यही फिल्म की सबसे महत्वपूर्ण बात है।
नीब करौरी बाबा के किरदार में शोभिनव सत्य
फिल्म में नीब करौरी बाबा की भूमिका शोभिनव सत्य ने निभाई है। उनके अभिनय को फिल्म की प्रमुख ताकतों में गिना जा सकता है। आजतक की समीक्षा में भी उनके किरदार के ठहराव और सहजता की तारीफ की गई है।
शोभिनव सत्य ने किरदार को जरूरत से ज्यादा नाटकीय बनाने के बजाय शांत और संयमित रखने की कोशिश की है। बाबा जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व को पर्दे पर निभाना आसान नहीं होता, क्योंकि थोड़ी सी अति अभिनय को बनावटी बना सकती है।
यहां अभिनेता का प्रयास यह दिखाई देता है कि वह संवादों से ज्यादा चेहरे के भाव, नजरों और शारीरिक भाषा के जरिए किरदार को स्थापित करें।
कुछ दृश्यों में उनका शांत रहना ही संवाद से ज्यादा प्रभाव पैदा करता है। यही इस भूमिका की चुनौती भी थी और इसकी खूबसूरती भी।
फिल्म की सबसे बड़ी ताकत—इसका संदेश
‘हनुमान अंश’ को केवल एक धार्मिक फिल्म कह देना इसके दायरे को छोटा कर देगा। फिल्म का मूल संदेश सेवा और इंसानियत से जुड़ा हुआ है।
नीब करौरी बाबा की शिक्षाओं से प्रेरित कहानी में बार-बार यह विचार सामने आता है कि इंसान की वास्तविक पहचान उसके पद, संपत्ति या बाहरी उपलब्धियों से नहीं बल्कि उसके व्यवहार और दूसरों के प्रति संवेदना से होती है।
फिल्म का आध्यात्मिक पक्ष भी इसी सोच के आसपास घूमता है।
यानी अगर कोई दर्शक धार्मिक आस्था से जुड़ा है तो उसे फिल्म में आध्यात्मिक संतुष्टि मिल सकती है, जबकि दूसरा दर्शक इसे एक इंसान के आत्मिक परिवर्तन की कहानी के तौर पर देख सकता है।
यही इसकी व्यापक अपील बनाती है।
चमत्कार हैं, लेकिन फिल्म सिर्फ चमत्कारों की नहीं
नीब करौरी बाबा से जुड़ी कई चमत्कारिक कथाएं लंबे समय से भक्तों के बीच लोकप्रिय रही हैं। फिल्म इन प्रसंगों को भी कहानी का हिस्सा बनाती है। हालांकि, फिल्म का जोर केवल यह साबित करने पर नहीं है कि बाबा के साथ क्या चमत्कार हुआ।
इसके बजाय निर्देशक चमत्कारों के पीछे मौजूद आस्था और उनके व्यक्तित्व को समझाने की कोशिश करते हैं।
यह तरीका फिल्म को केवल घटनाओं का संग्रह बनने से बचाता है।
आध्यात्मिक फिल्मों के सामने हमेशा यह चुनौती रहती है कि वे श्रद्धा और सिनेमाई प्रस्तुति के बीच संतुलन कैसे कायम करें। ‘हनुमान अंश’ कई जगह इस संतुलन को साधने में सफल दिखाई देती है।
निर्देशन कैसा है?
फिल्म का लेखन और निर्देशन विशाल चतुर्वेदी ने किया है। कहानी का ट्रीटमेंट पारंपरिक कमर्शियल सिनेमा से अलग है। फिल्म तेजी से एक घटना से दूसरी घटना की तरफ भागने के बजाय अपने पात्र और वातावरण को समय देती है।
यहां दर्शक को कहानी के साथ चलना पड़ता है।
यही वजह है कि फिल्म की गति कुछ दर्शकों को धीमी लग सकती है। लेकिन जिस तरह की कहानी फिल्म कहना चाहती है, उसके लिए यह धीमापन पूरी तरह कमजोरी नहीं है।
फिल्म का उद्देश्य लगातार रोमांच पैदा करना नहीं बल्कि दर्शक को एक भावनात्मक और आध्यात्मिक अनुभव देना है।
कुछ समीक्षाओं ने भी फिल्म के इसी शांत और आत्ममंथन वाले अंदाज को इसकी खासियत माना है।
सिनेमैटोग्राफी और माहौल
‘हनुमान अंश’ की विजुअल दुनिया भी फिल्म के आध्यात्मिक मूड को स्थापित करने में मदद करती है। धार्मिक स्थलों, प्राकृतिक वातावरण और शांत दृश्यों का इस्तेमाल कहानी को एक अलग वातावरण देता है।
फिल्म का माहौल कई जगह ऐसा लगता है जैसे दर्शक किसी कहानी को देखने के बजाय किसी आध्यात्मिक यात्रा का हिस्सा बन रहा हो।
यहां बड़े बजट वाली फिल्मों जैसी भव्यता हर जगह नजर नहीं आती, लेकिन फिल्म के विषय के अनुरूप वातावरण तैयार करने की कोशिश साफ दिखाई देती है।
और शायद यही इस फिल्म की जरूरत भी थी।
संगीत और भावनात्मक प्रभाव
ऐसी फिल्मों में संगीत सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं होता। वह कहानी के भावनात्मक असर को बढ़ाने का काम करता है। ‘हनुमान अंश’ में भी संगीत और आध्यात्मिक वातावरण को कहानी के साथ जोड़ा गया है।
जहां संवाद कम प्रभावी पड़ सकते थे, वहां संगीत और दृश्य मिलकर भाव पैदा करते हैं।
फिल्म का भक्तिमय पक्ष खासतौर पर उन दर्शकों को ज्यादा पसंद आ सकता है जो भक्ति संगीत और आध्यात्मिक विषयों से जुड़ाव महसूस करते हैं।
फिल्म की कमजोरी क्या है?
हर फिल्म की तरह ‘हनुमान अंश’ भी पूरी तरह कमियों से मुक्त नहीं है।
सबसे पहली बात इसकी गति है। जिन दर्शकों को तेज रफ्तार कहानी, लगातार ट्विस्ट और मनोरंजन चाहिए, उन्हें फिल्म कुछ हिस्सों में धीमी लग सकती है।
दूसरी चुनौती यह है कि फिल्म का भावनात्मक और आध्यात्मिक स्वर लगातार बना रहता है। इसलिए यह उन दर्शकों के लिए नहीं है जो पारंपरिक मसाला फिल्म की तलाश में सिनेमाघर जाते हैं।
इसके अलावा, नीब करौरी बाबा से पहले से परिचित दर्शक फिल्म की घटनाओं को अलग नजरिए से देख सकते हैं। वहीं उनके बारे में पहली बार जानने वाला दर्शक फिल्म को एक परिचयात्मक यात्रा के रूप में देख सकता है।
क्या यह सिर्फ भक्तों के लिए है?
नहीं।
हालांकि ‘हनुमान अंश’ का मूल आधार आध्यात्मिक है, लेकिन फिल्म का संदेश इससे आगे जाता है। प्रेम, सेवा, विनम्रता और जरूरतमंदों की मदद जैसे विषय किसी एक धर्म या समुदाय तक सीमित नहीं हैं।
यही कारण है कि फिल्म को केवल धार्मिक दर्शकों के लिए बनी फिल्म मानना उचित नहीं होगा।
हां, यदि दर्शक को आध्यात्मिक या धार्मिक विषयों में बिल्कुल रुचि नहीं है, तो फिल्म का अनुभव उसके लिए सीमित हो सकता है।
लेकिन जो दर्शक शांत, विचारप्रधान और भावनात्मक सिनेमा देखना चाहते हैं, उनके लिए यह फिल्म एक अलग अनुभव दे सकती है।
फिल्म क्यों चर्चा में है?

‘हनुमान अंश’ की चर्चा का एक कारण यह भी है कि यह बड़े सितारों पर निर्भर फिल्म नहीं है। सीमित बजट और अपेक्षाकृत नए चेहरों के बावजूद फिल्म ने दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाने की कोशिश की है। हालिया रिपोर्टों में इसके बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी की बात सामने आई है।
फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया भी उत्साहजनक रही है। हालांकि दर्शकों की ऑनलाइन रेटिंग और प्रतिक्रियाओं को आलोचनात्मक समीक्षा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए, फिर भी यह संकेत जरूर मिलता है कि फिल्म ने अपने लक्षित दर्शकों के बीच भावनात्मक प्रभाव पैदा किया है।
हमारी राय
‘हनुमान अंश’ ऐसी फिल्म नहीं है जिसे सिर्फ यह सोचकर देखा जाए कि इसमें कितने बड़े स्टार हैं या कितने बड़े स्तर के एक्शन सीन हैं।
यह फिल्म एक अलग सवाल पूछती है—मनुष्य अपने जीवन का अर्थ कहां खोजता है?
नीब करौरी बाबा की यात्रा के माध्यम से फिल्म प्रेम, आस्था, सेवा और आत्मिक बदलाव की बात करती है। फिल्म कई जगह उपदेश देने के बजाय दृश्य और परिस्थितियों के जरिए अपना संदेश पहुंचाती है।
फिल्म की रफ्तार थोड़ी धीमी है, लेकिन उसका विषय भी ठहरकर देखने वाला है। अभिनय में शोभिनव सत्य का काम प्रभावी है और निर्देशन फिल्म को अत्यधिक नाटकीय होने से काफी हद तक बचाता है।
अगर आप आध्यात्मिक सिनेमा, संतों की जीवन यात्रा या ऐसी कहानियां पसंद करते हैं जो फिल्म खत्म होने के बाद भी कुछ देर तक दिमाग में चलती रहें, तो ‘हनुमान अंश’ आपके लिए देखने लायक फिल्म है।
अगर आप केवल तेज रफ्तार मनोरंजन, कॉमेडी या एक्शन की तलाश में हैं, तो यह फिल्म शायद आपकी उम्मीदों पर खरी न उतरे।
अंतिम फैसला
‘हनुमान अंश’ आस्था का प्रदर्शन कम और आस्था के जरिए इंसान को समझने की कोशिश ज्यादा है।
यह फिल्म बताती है कि किसी संत की कहानी केवल उनके चमत्कारों में नहीं होती, बल्कि उन मूल्यों में भी होती है जिन्हें वह समाज के लिए छोड़ जाते हैं। नीब करौरी बाबा के जीवन से प्रेरित यह फिल्म प्रेम, सेवा और मानवता को अपनी कहानी के केंद्र में रखती है।

हमारी रेटिंग: ⭐⭐⭐½/5
किसके लिए: आध्यात्मिक सिनेमा, संतों की जीवन-कथाएं और शांत, भावनात्मक फिल्में पसंद करने वाले दर्शक।
किसके लिए नहीं: तेज रफ्तार मसाला, एक्शन या लगातार ट्विस्ट वाली फिल्में पसंद करने वाले दर्शक।
एक लाइन में: ‘हनुमान अंश’ चमत्कारों से ज्यादा उस इंसान की कहानी है, जिसने सेवा और प्रेम को अपनी आध्यात्मिक यात्रा का आधार बनाया।
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