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जौनपुर/लखनऊ, 1 सितंबर 2026। उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर आम आदमी पार्टी ने योगी आदित्यनाथ सरकार पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। आम आदमी पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने मंगलवार को जौनपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में सरकारी शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों की बदहाली और कथित प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर गंभीर सवाल उठाए।

संजय सिंह ने जौनपुर के कुछ सरकारी विद्यालयों का उदाहरण देते हुए दावा किया कि कई स्कूल जमीन पर अपने पुराने स्थान पर मौजूद नहीं हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड और U-DISE पोर्टल पर वे अब भी संचालित विद्यालयों के तौर पर दर्ज हैं। उन्होंने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही बताते हुए कहा कि यदि विद्यालयों का स्थान बदला गया है तो इसकी जानकारी सरकारी पोर्टल पर अपडेट क्यों नहीं की गई।

आप नेता ने कहा कि प्रदेश सरकार एक तरफ सरकारी स्कूलों को बंद नहीं करने और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर स्कूलों की वास्तविक स्थिति इन दावों से अलग तस्वीर पेश कर रही है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने और सरकारी रिकॉर्ड को जमीनी स्थिति के अनुसार दुरुस्त करने की मांग की।

जौनपुर के पांच स्कूलों का उठाया मुद्दा

प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने जौनपुर के पांच सरकारी स्कूलों का उल्लेख किया। उन्होंने विशेष तौर पर कंपोजिट विद्यालय गदन अर्ज़नी, प्राथमिक विद्यालय उर्दू बाजार और प्राथमिक विद्यालय बाग हासिम सहित अन्य विद्यालयों को लेकर सवाल खड़े किए।

संजय सिंह के मुताबिक, इन विद्यालयों का पुराना अस्तित्व जमीन पर दिखाई नहीं देता, जबकि सरकारी पोर्टल पर उनकी स्थिति अलग तरीके से दर्ज है। उनका कहना था कि सरकारी योजनाओं और स्कूलों से संबंधित आंकड़ों का आधार सरकारी पोर्टल होते हैं। ऐसे में यदि पोर्टल पर किसी विद्यालय के संचालन की जानकारी दर्ज है लेकिन मौके पर उसकी वास्तविक स्थिति अलग है, तो यह गंभीर विषय है।

उन्होंने कहा कि स्कूलों से संबंधित आंकड़ों में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, क्योंकि इन्हीं आंकड़ों के आधार पर विद्यार्थियों की संख्या, शिक्षकों की तैनाती, भवनों की स्थिति और सरकारी योजनाओं का संचालन होता है।

नगर शिक्षा अधिकारी के पत्र का हवाला

संजय सिंह ने अपने आरोपों के समर्थन में नगर शिक्षा अधिकारी द्वारा बेसिक शिक्षा अधिकारी को लिखे गए एक पत्र का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि विभागीय पत्र में स्कूलों को स्थानांतरित किए जाने का उल्लेख है और यह भी सवाल उठता है कि क्या यह स्थानांतरण सक्षम अधिकारी की अनुमति और संबंधित प्रक्रिया के तहत हुआ।

आप सांसद ने कहा कि यदि किसी सरकारी विद्यालय को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया गया है तो इसकी आधिकारिक जानकारी संबंधित रिकॉर्ड और पोर्टल में भी दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि विभाग के पास स्कूलों के स्थानांतरण की जानकारी है तो सरकारी पोर्टल पर पुरानी स्थिति क्यों बनी हुई है।

संजय सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दावे का भी जिक्र किया, जिसमें सरकारी स्कूलों को बंद नहीं करने की बात कही जाती रही है। उन्होंने सवाल किया कि यदि स्कूल बंद नहीं किए गए हैं तो फिर जमीन पर उनका अस्तित्व क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

उन्होंने कहा कि शिक्षा का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों के बच्चों पर पड़ता है। ऐसे में सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर किसी भी प्रकार की लापरवाही का सीधा असर विद्यार्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को बताया दबाव की जीत

संजय सिंह ने आम आदमी पार्टी के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी द्वारा सरकारी स्कूलों की बदहाली को लेकर चलाए जा रहे अभियान और लगातार उठाए जा रहे सवालों के बाद प्रदेश सरकार को स्कूलों की मरम्मत के लिए 604 करोड़ रुपये जारी करने पड़े हैं।

उन्होंने कहा कि इस राशि में से 302 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की जा चुकी है। संजय सिंह ने इसे आम आदमी पार्टी के अभियान की सफलता बताया और कहा कि सरकार को सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्कूलों की बदहाली को सामने लाने वाले आम आदमी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने पंकज अमाना, मुकेश सिंह, भूदेव और फिरोज सिद्दीकी का नाम लेते हुए कहा कि एफआईआर से पार्टी का अभियान रुकने वाला नहीं है।

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी सरकारी स्कूलों की स्थिति को जनता के सामने लाती रहेगी। उनके मुताबिक, यदि सरकार स्कूलों की वास्तविक स्थिति सुधारने का दावा करती है तो उसे जमीनी स्तर पर इसका असर भी दिखाई देना चाहिए।

जर्जर स्कूलों पर सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम

प्रेस वार्ता में संजय सिंह ने जर्जर सरकारी स्कूलों को लेकर प्रदेश सरकार को एक महीने का अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी जिलाधिकारियों और बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्रों में बदहाल और जर्जर स्कूलों की स्थिति सुधारने की मांग करेंगे।

उन्होंने कहा कि जिन विद्यालयों की इमारतें जर्जर हैं, जहां बच्चों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं या जहां भवनों की स्थिति विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक है, उन पर तत्काल काम होना चाहिए।

संजय सिंह ने चेतावनी दी कि यदि एक महीने के भीतर जर्जर स्कूलों में सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ तो आम आदमी पार्टी दोबारा अभियान तेज करेगी। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता स्कूलों की जमीनी स्थिति के वीडियो बनाकर जनता के सामने रखेंगे और सरकार के दावों की वास्तविकता उजागर करेंगे।

राम मंदिर को लेकर भी सरकार पर लगाए गंभीर आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े मामलों को लेकर भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि राम मंदिर के नाम पर चार प्रकार की कथित अनियमितताएं हुई हैं।

संजय सिंह ने जमीन खरीद, निर्माण कार्य, आभूषण और चढ़ावे से जुड़े मामलों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2021 में उन्होंने राम मंदिर से संबंधित जमीन खरीद में कथित अनियमितताओं का मुद्दा सबसे पहले उठाया था।

उन्होंने कहा कि इस मामले में अब तक दोषियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार जांच के नाम पर मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। हालांकि, ये सभी आरोप राजनीतिक बयानबाजी और आरोपों के रूप में हैं और इनके संबंध में संबंधित पक्षों का जवाब अथवा किसी सक्षम जांच एजेंसी या अदालत का अंतिम निष्कर्ष अलग से महत्वपूर्ण होगा।

आप सांसद ने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और जवाबदेही जरूरी है। उन्होंने सरकार से मांग की कि जिन मामलों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, उनकी पारदर्शी जांच कराई जाए और यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो।

शिक्षा और ‘अंधभक्ति’ पर भाजपा पर निशाना

संजय सिंह ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भाजपा की राजनीतिक सोच पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के बजाय सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को कमजोर कर रही है।

इसी संदर्भ में उन्होंने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए कहा, “अनपढ़ रहेगा इंडिया, तभी तो अंधभक्त बनेगा इंडिया।” उनके इस बयान के जरिए उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की प्राथमिकताओं में गरीब बच्चों की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर्याप्त रूप से शामिल नहीं है।

उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक समाज में शिक्षा नागरिकों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझने में सक्षम बनाती है। इसलिए सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर भवन, पर्याप्त शिक्षक, स्वच्छ वातावरण और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए कैशलेस इलाज की मांग

संजय सिंह ने उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षणेत्तर कर्मचारियों यानी क्लर्क और अन्य स्टाफ के लिए भी स्वास्थ्य सुविधा का मुद्दा उठाया। उन्होंने मांग की कि इन कर्मचारियों को पांच लाख रुपये तक की कैशलेस इलाज सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

उन्होंने कहा कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए उनके स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को गंभीरता से विचार करना चाहिए।

संजय सिंह ने कहा कि वह इस मांग को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखेंगे और सरकार से कर्मचारियों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने की मांग करेंगे।

सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग

आम आदमी पार्टी के नेता ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल बजट जारी करने से नहीं होगा, बल्कि उस बजट का सही इस्तेमाल और जमीनी स्तर पर निगरानी भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्कूलों के भवन, शौचालय, बिजली, पेयजल, फर्नीचर और अन्य बुनियादी सुविधाओं की नियमित समीक्षा होनी चाहिए।

उनके मुताबिक, सरकारी पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और जमीनी हकीकत के बीच किसी भी प्रकार का अंतर प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय होना चाहिए। उन्होंने मांग की कि जौनपुर में जिन स्कूलों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, उनकी मौके पर जांच कराई जाए और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।

संजय सिंह ने कहा कि आम आदमी पार्टी आगे भी सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर अभियान चलाती रहेगी। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि वे अपने क्षेत्रों में स्कूलों की स्थिति का जायजा लें और यदि किसी विद्यालय में गंभीर खामी है तो उसकी जानकारी प्रशासन तक पहुंचाएं।

प्रेस वार्ता में कई पदाधिकारी रहे मौजूद

जौनपुर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान संजय सिंह के साथ आम आदमी पार्टी के काशी प्रांत अध्यक्ष पवन तिवारी और जिलाध्यक्ष डॉ. अनुराग मिश्रा सहित पार्टी के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।

आम आदमी पार्टी ने संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान को और व्यापक किया जाएगा। पार्टी का कहना है कि वह सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए जिलास्तर पर अधिकारियों को ज्ञापन और पत्र सौंपेगी।

अब देखना यह होगा कि जौनपुर के जिन विद्यालयों को लेकर संजय सिंह ने सवाल उठाए हैं, उन पर जिला प्रशासन और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से क्या जवाब सामने आता है। साथ ही, 604 करोड़ रुपये की स्कूल मरम्मत राशि के इस्तेमाल और जर्जर विद्यालयों में होने वाले कार्यों की जमीनी प्रगति भी आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।

फिलहाल, संजय सिंह के आरोपों ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों की स्थिति, सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर एक बार फिर बहस तेज कर दी है। आम आदमी पार्टी इसे अपने ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान से जोड़कर सरकार पर दबाव बनाने की तैयारी में है, जबकि अब सरकार और संबंधित विभाग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा।

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