लखनऊ, 1 सितंबर 2026। राजधानी लखनऊ में किसानों से जुड़े भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, रोजगार, आवासीय भूखंड और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे एक बार फिर सामने आए हैं। भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रवादी अराजनैतिक की ओर से किसानों की समस्याओं को लेकर पंचायत और धरना-प्रदर्शन आयोजित किए जाने के बाद जिलाधिकारी, लखनऊ को संबोधित मांगपत्र सौंपा गया। संगठन ने वर्षों से लंबित किसान समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
संगठन की ओर से जारी दस्तावेजों में किसानों ने लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), टाटा मोटर्स और अन्य संबंधित विभागों से जुड़े कई मामलों को उठाया है। मांगपत्र में वर्ष 1984-85 में गोमती नगर योजना के लिए अधिग्रहित किसानों की भूमि, मुआवजे, रोजगार, किसान बारात घर, किसान पंचायत भवन, श्मशान घाट, पेयजल, पार्कों और अन्य सुविधाओं से जुड़े मुद्दे शामिल हैं।
किसान संगठन का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के दौरान किसानों से किए गए कई वादे अभी तक पूरी तरह लागू नहीं हुए हैं। संगठन ने प्रशासन से इन मामलों की समीक्षा कर किसानों को उनका हक दिलाने की मांग की है।
गोमती नगर योजना में अधिग्रहित जमीन का मुद्दा

किसान संगठन द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए मांगपत्र में बताया गया है कि यूएचपीएसआईडीसी/संबंधित औद्योगिक विकास संस्था द्वारा वर्ष 1984 और 1985 में ग्राम सगा दांव व मोलया क्षेत्र के किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। मांगपत्र के अनुसार, किसानों की भूमि टाटा मोटर्स के लिए लगभग 90 वर्षों के लिए दिए जाने की बात कही गई थी।
किसानों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण के समय उनसे कई तरह के वादे किए गए थे, लेकिन उनमें से कुछ का अपेक्षित रूप से पालन नहीं हुआ। संगठन ने इन वादों की समीक्षा कर किसानों के हित में निर्णय लेने की मांग की है।
मांगपत्र में सबसे प्रमुख मांग किसानों की अधिग्रहित भूमि का पूर्ण भुगतान करने की है। संगठन का कहना है कि जिन किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई, उन्हें उनकी भूमि का उचित और पूर्ण मुआवजा मिलना चाहिए।
हर किसान परिवार को रोजगार देने का वादा पूरा करने की मांग
किसानों ने भूमि अधिग्रहण के साथ किए गए रोजगार संबंधी वादे को भी प्रमुखता से उठाया है। मांगपत्र में कहा गया है कि किसानों की भूमि अधिग्रहित किए जाने पर हर किसान परिवार के घर से एक या दो लोगों को स्थायी नौकरी देने का वादा किया गया था।
किसान संगठन का दावा है कि यह वादा पूरी तरह लागू नहीं हुआ। संगठन ने मांग की है कि अधिग्रहित भूमि से प्रभावित किसान परिवारों का सर्वे कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि कितने परिवारों को रोजगार मिला तथा कितने परिवार अभी भी रोजगार से वंचित हैं।
किसानों ने मांग की है कि जिन परिवारों को रोजगार नहीं दिया गया है, उनके मामले में मुआवजा अथवा अन्य उपयुक्त व्यवस्था की जाए।
ITI और BTI के छात्रों को नौकरी और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा
मांगपत्र में आईटीआई और बीटेक पास छात्रों के भविष्य का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन के अनुसार, टाटा मोटर्स द्वारा प्रभावित क्षेत्र के युवाओं को नौकरी और शिक्षा से संबंधित अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी।
किसान संगठन ने आरोप लगाया कि इन वादों को अपेक्षित रूप से पूरा नहीं किया गया। संगठन ने मांग की है कि प्रभावित किसान परिवारों के योग्य युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं और शिक्षा से जुड़े वादों को भी पूरा किया जाए।
यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के लिए रोजगार का सवाल सीधे उनकी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा है। किसान संगठन का कहना है कि केवल जमीन का अधिग्रहण और मुआवजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के सामाजिक और आर्थिक पुनर्वास की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
किसानों को विकसित आवासीय भूखंड देने की मांग

मांगपत्र में किसानों को 4,000 वर्गफीट तक विकसित आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। संगठन ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों के लिए आवासीय पुनर्वास की व्यवस्था होनी चाहिए।
किसान संगठन के मुताबिक, प्रभावित परिवारों को केवल आर्थिक मुआवजे तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्हें रहने के लिए विकसित भूखंड और आवश्यक बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
मांगपत्र में यह भी कहा गया है कि किसानों को विकसित आवासीय भूखंड देने के लिए आवश्यक प्रक्रिया को जल्द पूरा किया जाए।
किसान बारात घर और किसान पंचायत भवन की मांग
किसानों ने प्रभावित गांवों में किसान बारात घर और किसान पंचायत भवन बनाने की मांग भी उठाई है। संगठन का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक कार्यक्रमों के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का होना जरूरी है।
मांगपत्र में किसान बारात घर के निर्माण के साथ-साथ किसान पंचायत भवन उपलब्ध कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि ऐसी सुविधाओं से ग्रामीण समुदाय को सामाजिक कार्यक्रमों के आयोजन में मदद मिलेगी।
इसके अलावा गांवों के विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा की व्यवस्था सुधारने की भी मांग की गई है।
खड़क गांव के श्मशान घाट और रास्तों का मुद्दा
मांगपत्र में खड़क गांव के श्मशान घाट, जिसे दस्तावेज में गाटा संख्या 1054 से संबंधित बताया गया है, के विकास और वहां तक रास्ते की व्यवस्था कराने की मांग की गई है।
किसान संगठन ने प्रशासन से मांग की है कि श्मशान घाट की बाउंड्री और विकास कार्य कराया जाए तथा वहां आने-जाने के लिए उचित रास्ते की व्यवस्था की जाए।
संगठन के मुताबिक ग्रामीण क्षेत्रों में अंतिम संस्कार से जुड़ी सुविधाओं का विकास भी बुनियादी नागरिक सुविधा का हिस्सा है। इसलिए संबंधित स्थानों पर आवश्यक निर्माण और पहुंच मार्ग की व्यवस्था होनी चाहिए।
पार्कों और जमीन के इस्तेमाल पर भी सवाल
किसान संगठन ने लखनऊ विकास प्राधिकरण से जुड़े कई मामलों को भी मांगपत्र में शामिल किया है। दस्तावेज में गोमती नगर क्षेत्र के पार्कों और अन्य जमीन के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
संगठन ने प्रशासन से यह जानकारी मांगी है कि गोमती नगर योजना में अधिग्रहित भूमि पर कितने पार्क विकसित किए गए, कितनी भूमि का किस प्रकार इस्तेमाल किया गया और किन स्थानों पर पार्क या अन्य सार्वजनिक सुविधाएं विकसित की गईं।
मांगपत्र में यह भी पूछा गया है कि पार्कों को किन नियमों के तहत अन्य संस्थाओं अथवा निजी उपयोग के लिए दिए जाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि उनकी जमीन सार्वजनिक योजनाओं के लिए अधिग्रहित की गई थी तो उसके उपयोग और विकास की पूरी जानकारी पारदर्शी तरीके से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
जमीन के बदले मिलने वाले मुआवजे की मांग

मांगपत्र में किसानों को उनकी अधिग्रहित भूमि के बदले उचित मुआवजा देने का मुद्दा भी प्रमुख है। संगठन ने कहा है कि कुछ मामलों में किसानों को अभी तक भुगतान नहीं मिला है।
किसान संगठन ने मांग की है कि गोमती नगर योजना के तहत अधिग्रहित भूमि का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। इसमें यह स्पष्ट किया जाए कि कितने किसानों की भूमि अधिग्रहित हुई, कितने किसानों को भुगतान किया गया और कितने किसान अभी भी भुगतान से वंचित हैं।
साथ ही, जिन किसानों को लंबे समय से भुगतान नहीं मिला है, उनके मामलों का जल्द निस्तारण करने की मांग की गई है।
11.2 प्रतिशत आयकर वापसी की मांग
मांगपत्र में किसानों से संबंधित 11.2 प्रतिशत इनकम टैक्स की राशि वापस करने की मांग भी की गई है। संगठन ने दावा किया है कि प्रभावित किसानों से संबंधित मामलों में इस राशि का मुद्दा लंबित है।
किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की जांच कर पात्र किसानों को नियमानुसार धनराशि वापस करने की प्रक्रिया शुरू की जाए।
किसानों के लिए पानी और अन्य सुविधाओं का सवाल
मांगपत्र में ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल व्यवस्था का मुद्दा भी उठाया गया है। संगठन ने गुलाम हुसैन पुरवा और अन्य क्षेत्रों में पानी की समस्या का उल्लेख करते हुए स्थायी समाधान की मांग की है।
दस्तावेज के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में लंबे समय से पानी की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। किसानों का कहना है कि आजादी के कई दशक बाद भी यदि गांवों में लोगों को मूलभूत पेयजल सुविधा के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है तो यह गंभीर विषय है।
संगठन ने संबंधित विभागों से पेयजल व्यवस्था की जांच कराने और जरूरत के अनुसार नए ट्यूबवेल अथवा वैकल्पिक जलस्रोत विकसित करने की मांग की है।
अनमोल श्रम सहकारी समिति को लेकर भी सवाल
मांगपत्र के एक हिस्से में अनमोल श्रम संविदा सहकारी समिति लिमिटेड, जौनाबाद, लखनऊ से जुड़े मामले का उल्लेख किया गया है। संगठन ने समिति के चुनाव और उसके संचालन को लेकर सवाल उठाए हैं।
किसान संगठन ने मामले की जांच कराने और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।
इसके अलावा संगठन ने पुराने प्रशासनिक निर्णयों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की समीक्षा की भी मांग की है।
विनस खंड एलपीएसओ स्कूल के पास निर्माण का मुद्दा
किसान संगठन ने विनस खंड एलपीएसओ स्कूल के पास उस स्थान का भी मुद्दा उठाया है, जिसे किसानों के बारात घर और किसान भवन के लिए चिन्हित किए जाने की बात कही गई है।
मांगपत्र में इस स्थान पर निर्माण कार्य जल्द शुरू कराने की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि जमीन किसानों की सामुदायिक सुविधा के लिए चिन्हित की गई है तो वहां संबंधित निर्माण कार्य पूरा कराया जाना चाहिए।
किसानों ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की
भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रवादी अराजनैतिक की ओर से जिलाधिकारी को संबोधित मांगपत्र में कुल कई बिंदुओं के माध्यम से किसानों की समस्याएं रखी गई हैं। संगठन ने कहा है कि इन मामलों पर संबंधित विभागों से रिपोर्ट लेकर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जानी चाहिए।
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले कई दशक पुराने हैं और इनका समाधान लंबे समय से लंबित है। ऐसे में प्रशासन को सभी संबंधित विभागों—लखनऊ विकास प्राधिकरण, औद्योगिक विकास से जुड़े विभागों और स्थानीय प्रशासन—के साथ समन्वय कर समस्या का समाधान करना चाहिए।
पंचायत और धरना प्रदर्शन के बाद सौंपा गया मांगपत्र
दस्तावेज के अनुसार, किसानों की समस्याओं को लेकर 1 सितंबर 2026 को लखनऊ के गोमती नगर क्षेत्र में पंचायत एवं धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसके बाद जिलाधिकारी को संबोधित मांगपत्र सौंपा गया।
किसान संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अशोक यादव के नाम से जारी दस्तावेजों में किसानों की विभिन्न मांगों को विस्तार से रखा गया है। संगठन ने स्पष्ट किया है कि वह किसानों की भूमि, मुआवजा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मामलों को लेकर आगे भी आवाज उठाता रहेगा।
अब इस पूरे मामले में प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। खासकर गोमती नगर योजना से जुड़े पुराने भूमि अधिग्रहण मामलों में किसानों की मांगों पर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा होती है या नहीं, इस पर किसानों की नजर रहेगी।
किसान संगठन द्वारा लगाए गए आरोप और उठाई गई मांगें उसके मांगपत्र पर आधारित हैं। इन मामलों में संबंधित सरकारी विभागों या प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट होगी।
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