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अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के चयन को लेकर चल रही व्यापक प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। CEO पद के लिए गठित सर्च कमेटी ने अपनी विस्तृत चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद अंतिम रिपोर्ट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को सौंप दी है। कमेटी ने मुख्य कार्यकारी अधिकारी के पद के लिए तीन योग्य प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया है। अब इन नामों पर अंतिम निर्णय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की ओर से लिया जाएगा।

CEO के चयन की यह प्रक्रिया कई चरणों में पूरी की गई। जानकारी के अनुसार, चयन प्रक्रिया की शुरुआत कुल 5,585 आवेदनों से हुई थी। बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों की तकनीकी और मैनुअल स्तर पर जांच के बाद योग्य उम्मीदवारों को आगे की प्रक्रिया में शामिल किया गया। कठोर शॉर्टलिस्टिंग और मूल्यांकन के बाद 16 प्रत्याशियों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। इन प्रत्याशियों से 11 और 12 अगस्त 2026 को अयोध्या में प्रत्यक्ष संवाद भी किया गया।

सर्च कमेटी के मुताबिक पूरी प्रक्रिया में उम्मीदवारों की योग्यता, नेतृत्व क्षमता, प्रशासनिक समझ, संस्थागत प्रबंधन और जिम्मेदारी संभालने की क्षमता को प्रमुख आधार बनाया गया। कमेटी ने चयन प्रक्रिया को पारदर्शी, तकनीकी रूप से सक्षम और योग्यता आधारित रखने का प्रयास किया।

5,585 आवेदनों से शुरू हुई चयन प्रक्रिया

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए चयन प्रक्रिया की शुरुआत व्यापक स्तर पर की गई थी। कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए। इतने बड़े आवेदन आधार में से उपयुक्त उम्मीदवारों की पहचान करना चयन समिति के सामने शुरुआती चुनौती थी।

आवेदनों की प्रारंभिक जांच के दौरान उम्मीदवारों की शैक्षिक योग्यता, पेशेवर अनुभव, प्रशासनिक क्षमता और पद की आवश्यकताओं के अनुरूप उनकी प्रोफाइल का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद विभिन्न चरणों से गुजरते हुए उम्मीदवारों की संख्या लगातार कम की गई।

सर्च कमेटी ने शॉर्टलिस्टिंग के दौरान तकनीकी साधनों के साथ-साथ मैनुअल मूल्यांकन का भी सहारा लिया। इसका उद्देश्य केवल आवेदन के आंकड़ों या दस्तावेजों के आधार पर निर्णय लेने के बजाय उम्मीदवार की समग्र क्षमता का आकलन करना था।

कठोर मूल्यांकन के बाद 16 उम्मीदवारों को चयन प्रक्रिया के अंतिम चरण में पहुंचाया गया। इन उम्मीदवारों के साथ आगे प्रत्यक्ष संवाद की प्रक्रिया भी निर्धारित की गई।

अयोध्या में 16 प्रत्याशियों से हुआ प्रत्यक्ष संवाद

CEO चयन प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक 11 और 12 अगस्त 2026 को आयोजित प्रत्यक्ष संवाद रहा। इस दौरान अंतिम चरण में पहुंचे 16 प्रत्याशियों से अयोध्या में बातचीत की गई।

प्रत्यक्ष संवाद के माध्यम से उम्मीदवारों की नेतृत्व क्षमता, दृष्टिकोण, प्रशासनिक सोच और संस्थागत जिम्मेदारियों को समझने का प्रयास किया गया। ऐसे पद के लिए केवल तकनीकी या पेशेवर योग्यता ही पर्याप्त नहीं मानी जाती, बल्कि बड़े धार्मिक एवं सांस्कृतिक संस्थान के संचालन, प्रबंधन और विभिन्न स्तरों पर समन्वय स्थापित करने की क्षमता भी महत्वपूर्ण होती है।

सर्च कमेटी ने उम्मीदवारों के साथ संवाद के दौरान उनके अनुभव और भविष्य की कार्ययोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं का मूल्यांकन किया। इस चरण को चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया, क्योंकि इससे शॉर्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के व्यक्तित्व और निर्णय क्षमता का प्रत्यक्ष आकलन संभव हुआ।

ऑनलाइन संवाद भी चयन प्रक्रिया का हिस्सा रहा

प्रत्यक्ष संवाद से पहले चयन प्रक्रिया में 3 से 6 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन संवाद का चरण भी आयोजित किया गया था। इससे उम्मीदवारों के साथ एक व्यवस्थित और समान अवसर वाली प्रक्रिया के तहत बातचीत की गई।

ऑनलाइन प्रक्रिया के जरिए उम्मीदवारों की संचार क्षमता, विषय की समझ और संस्थागत जिम्मेदारियों से जुड़े उनके दृष्टिकोण का मूल्यांकन किया गया। इसके बाद अंतिम चरण के लिए चुने गए उम्मीदवारों के साथ अयोध्या में प्रत्यक्ष संवाद किया गया।

इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य चयन को केवल एक चरण तक सीमित न रखते हुए कई स्तरों पर उम्मीदवारों की योग्यता की जांच करना था।

6 जुलाई को गठित हुई थी सर्च कमेटी

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO चयन के लिए सर्च कमेटी का गठन 6 जुलाई 2026 को किया गया था। इसके बाद 11 जुलाई को कमेटी की पहली बैठक हुई, जिसमें चयन प्रक्रिया और पात्रता मानदंड पर चर्चा की गई।

14 जुलाई को कमेटी के सचिव की नियुक्ति की गई और इसके बाद आवेदन प्रक्रिया तथा उम्मीदवारों के मूल्यांकन का काम आगे बढ़ाया गया। 18 जुलाई 2026 को आवेदन प्रक्रिया बंद होने के बाद प्राप्त आवेदनों की समीक्षा और मूल्यांकन का चरण शुरू हुआ।

चयन प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया गया, ताकि बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों में से योग्य उम्मीदवारों को निष्पक्ष तरीके से शॉर्टलिस्ट किया जा सके।

दिल्ली-NCR, पुणे और संबलपुर में हुई प्रक्रिया

सर्च कमेटी ने चयन प्रक्रिया को तकनीकी रूप से प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न स्थानों पर टीमों के माध्यम से काम किया। जानकारी के अनुसार दिल्ली-NCR, पुणे और संबलपुर-उड़ीसा में टीमों ने समानांतर रूप से प्रक्रिया को आगे बढ़ाया।

तकनीकी और मैनुअल दोनों प्रक्रियाओं को साथ लेकर चलने का उद्देश्य चयन में अधिक से अधिक सटीकता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना था। इतने बड़े स्तर पर प्राप्त आवेदनों के मूल्यांकन के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जबकि महत्वपूर्ण स्तरों पर मानवीय समीक्षा भी की गई।

सर्च कमेटी का कहना है कि तकनीक और मैनुअल प्रक्रिया के संयुक्त इस्तेमाल से चयन प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित बनाया जा सका। इससे बड़ी संख्या में आवेदनों की स्क्रीनिंग और योग्य उम्मीदवारों की पहचान में मदद मिली।

विशेषज्ञों वाली सर्च कमेटी ने संभाली जिम्मेदारी

CEO चयन के लिए गठित सर्च कमेटी में विभिन्न क्षेत्रों का व्यापक अनुभव रखने वाले सदस्य शामिल रहे। कमेटी में सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली, सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी और परमाणु वैज्ञानिक डॉ. सुरेश हावरे शामिल रहे।

कमेटी में न्यायपालिका, रक्षा और वैज्ञानिक क्षेत्र से जुड़े अनुभव का प्रतिनिधित्व होने से चयन प्रक्रिया को अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखने में मदद मिली। कमेटी के सदस्यों के अनुभव का इस्तेमाल उम्मीदवारों की प्रशासनिक क्षमता, नेतृत्व, संस्थागत सोच और जिम्मेदारी निभाने की योग्यता को परखने में किया गया।

CEO पद के लिए ऐसे व्यक्ति की आवश्यकता है जो संस्थान के प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी कार्यों को प्रभावी ढंग से संचालित कर सके। इसी कारण चयन प्रक्रिया में केवल सामान्य योग्यता के बजाय नेतृत्व और प्रबंधन क्षमता को भी महत्वपूर्ण माना गया।

अंतिम चरण में तीन उम्मीदवारों का पैनल

विस्तृत मूल्यांकन के बाद सर्च कमेटी ने तीन योग्य प्रत्याशियों का पैनल तैयार किया है। कमेटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को सौंप दी है।

इस पैनल में ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी गई है, जिनके पास संस्थागत नेतृत्व, प्रशासन और प्रबंधन से जुड़ा अनुभव तथा आवश्यक पेशेवर दृष्टिकोण मौजूद हो। कमेटी के अनुसार चयन प्रक्रिया में योग्यता, संस्थागत उत्कृष्टता, पारदर्शिता और पेशेवर आचरण के मानकों को महत्व दिया गया।

हालांकि, तीन नामों का पैनल सौंपे जाने के बाद भी CEO के रूप में अंतिम चयन स्वतः नहीं माना जाएगा। अंतिम निर्णय राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास की ओर से किया जाएगा। इसके बाद ही चयनित मुख्य कार्यकारी अधिकारी की आधिकारिक घोषणा होगी।

अब न्यास के निर्णय पर टिकी निगाहें

सर्च कमेटी की रिपोर्ट सौंपे जाने के साथ चयन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा पूरा हो चुका है। अब सभी की निगाहें राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के अगले निर्णय पर हैं।

न्यास सर्च कमेटी द्वारा सुझाए गए तीन नामों पर विचार करने के बाद CEO के नाम को अंतिम रूप देगा। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के मुख्य कार्यकारी अधिकारी की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाएगी।

CEO का पद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की प्रशासनिक व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है। अयोध्या में राम मंदिर से जुड़े विभिन्न विकास कार्यों, प्रशासनिक समन्वय, संस्थागत प्रबंधन और भविष्य की योजनाओं के बीच इस पद की भूमिका अहम होगी।

पारदर्शिता और योग्यता पर दिया गया जोर

सर्च कमेटी ने पूरी प्रक्रिया को योग्यता आधारित और पारदर्शी रखने पर जोर दिया। 5,585 आवेदनों से शुरुआत करके 16 उम्मीदवारों तक पहुंचना और फिर तीन नामों का पैनल तैयार करना कई चरणों वाली प्रक्रिया का परिणाम है।

कमेटी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, चयन प्रक्रिया में तकनीकी स्क्रीनिंग, मैनुअल मूल्यांकन, ऑनलाइन संवाद और प्रत्यक्ष संवाद जैसे विभिन्न चरण शामिल रहे। इससे उम्मीदवारों की योग्यता को अलग-अलग स्तर पर परखने का प्रयास किया गया।

अब अंतिम निर्णय न्यास के स्तर पर होना बाकी है। तीन योग्य प्रत्याशियों के पैनल के साथ सर्च कमेटी ने अपनी जिम्मेदारी पूरी कर दी है। आने वाले समय में न्यास की आधिकारिक घोषणा के बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के नए CEO के नाम पर अंतिम मुहर लग जाएगी।

निष्कर्ष:
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के CEO पद के लिए चली लंबी चयन प्रक्रिया अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। हजारों आवेदनों की जांच, कई स्तरों की शॉर्टलिस्टिंग, ऑनलाइन संवाद और अयोध्या में 16 अंतिम प्रत्याशियों से प्रत्यक्ष बातचीत के बाद सर्च कमेटी ने तीन नामों का पैनल तैयार कर अपनी रिपोर्ट न्यास को सौंप दी है। अब अंतिम फैसला राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास करेगा। आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह साफ होगा कि इस महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी की कमान किस उम्मीदवार को सौंपी जाती है।

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