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क्राइम थ्रिलर, गैंगस्टर ड्रामा और भक्ति की कहानी में कौन-सी फिल्म दर्शकों का दिल जीत रही है?

मनोरंजन डेस्क | नई सोच नई ऊर्जा

सिनेमाघरों में जब एक साथ अलग-अलग जॉनर की फिल्में दस्तक देती हैं, तो दर्शकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि आखिर किस फिल्म पर पैसा और समय खर्च किया जाए। एक तरफ अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी वाली क्राइम थ्रिलर फिल्म ‘हैवान’ है, दूसरी ओर लोकप्रिय वेब सीरीज की दुनिया से बड़े पर्दे पर पहुंची ‘मिर्जापुर: द मूवी’ और तीसरी तरफ धार्मिक एवं भावनात्मक विषय पर आधारित ‘हनुमान अंश’ दर्शकों के बीच चर्चा में है।

तीनों फिल्मों की कहानियां, प्रस्तुति, दर्शक वर्ग और मनोरंजन का अंदाज एक-दूसरे से काफी अलग है। ‘हैवान’ अपराध, बदले और सस्पेंस के सहारे दर्शकों को बांधने की कोशिश करती है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ गैंगस्टर दुनिया, सत्ता संघर्ष, हिंसा और पुराने किरदारों की लोकप्रियता के दम पर दर्शकों को आकर्षित करती है। वहीं ‘हनुमान अंश’ आध्यात्मिक भावनाओं, धार्मिक आस्था और मानवीय संघर्ष के जरिए अपनी अलग पहचान बनाती है।

आपके साझा किए गए फिल्म पोस्टरों में ‘हैवान’ को 6/10, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को 9.2/10 और ‘हनुमान अंश’ को 9.7/10 की रेटिंग दिखाई गई है। इन रेटिंग्स के आधार पर ‘हनुमान अंश’ सबसे आगे और ‘मिर्जापुर: द मूवी’ दूसरे स्थान पर नजर आती है। लेकिन किसी फिल्म की वास्तविक गुणवत्ता केवल ऑनलाइन रेटिंग से तय नहीं होती। कहानी, अभिनय, निर्देशन, पटकथा, भावनात्मक प्रभाव और दर्शक की पसंद भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

इस विशेष समीक्षा में तीनों फिल्मों के कथानक की दिशा, अभिनय, निर्देशन, मनोरंजन, कमजोरियां, दर्शक वर्ग और आपसी तुलना को विस्तार से समझेंगे।

1. हैवान: बड़े सितारों की जोड़ी, लेकिन क्या कहानी उतनी मजबूत है?

‘हैवान’ का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी स्टारकास्ट है। फिल्म में अक्षय कुमार और सैफ अली खान लंबे अंतराल के बाद एक साथ दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा बोमन ईरानी, श्रिया पिलगांवकर और अन्य कलाकार भी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फिल्म का निर्देशन प्रियदर्शन ने किया है, इसलिए दर्शकों को इससे एक साथ क्राइम, सस्पेंस, एक्शन और मनोरंजन की उम्मीद रही है।

फिल्म की कहानी बदले और अपराध के इर्द-गिर्द घूमती है। अक्षय कुमार एक नकारात्मक भूमिका में नजर आते हैं, जबकि सैफ अली खान ने एक दृष्टिहीन किरदार निभाया है। यह संयोजन कागज पर काफी दिलचस्प दिखाई देता है। एक तरफ खतरनाक अपराधी और दूसरी तरफ ऐसा व्यक्ति, जिसकी दृष्टि नहीं है, लेकिन जो घटनाओं की तह तक पहुंचने की कोशिश करता है। इस तरह की कहानी में मनोवैज्ञानिक तनाव और रोमांच पैदा करने की काफी संभावनाएं रहती हैं।

कहानी और पटकथा

‘हैवान’ की कहानी में बदला, अपराध और रहस्य के तत्व मौजूद हैं। शुरुआती स्तर पर फिल्म दर्शकों के मन में यह सवाल पैदा करती है कि अपराध के पीछे असली वजह क्या है और किरदारों के बीच संबंध किस दिशा में जाएंगे। हालांकि, उपलब्ध समीक्षाओं में फिल्म की पटकथा और लंबाई को लेकर मतभेद दिखाई देते हैं।

लाइव हिन्दुस्तान की समीक्षा में फिल्म के लगभग 2 घंटे 40 मिनट के रनटाइम, सीमित ट्विस्ट और कमजोर थ्रिल को इसकी प्रमुख कमियों में गिना गया है। वहीं पंजाब केसरी की समीक्षा ने फिल्म के सस्पेंस, निर्देशन और मुख्य कलाकारों के अभिनय को सकारात्मक नजरिए से देखा है। <Cite refs={[“turn0search5″,”turn0search0”]}/>

यही अंतर बताता है कि ‘हैवान’ को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ लोगों को इसकी कहानी और कलाकारों का प्रदर्शन पसंद आ सकता है, जबकि दूसरे दर्शकों को पटकथा अपेक्षाओं के अनुरूप न लगे।

अभिनय

अक्षय कुमार का नकारात्मक किरदार फिल्म की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। आमतौर पर सकारात्मक भूमिकाओं में नजर आने वाले अभिनेता को अपराधी के रूप में देखना दर्शकों के लिए अलग अनुभव हो सकता है। सैफ अली खान का दृष्टिहीन व्यक्ति का किरदार भी कहानी को एक अलग आयाम देता है।

हालांकि, किसी भी चुनौतीपूर्ण किरदार की सफलता केवल उसके विचार पर निर्भर नहीं करती। उसके लिए मजबूत लेखन, विश्वसनीय प्रस्तुति और पर्याप्त भावनात्मक गहराई आवश्यक होती है। उपलब्ध समीक्षाओं में अक्षय और सैफ के अभिनय को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कुछ समीक्षकों ने दोनों की प्रतिभा की सराहना की, जबकि कुछ ने कहा कि किरदारों को पर्याप्त गहराई नहीं मिल पाई। <Cite refs={[“turn0search0″,”turn0search5”]}/>

निर्देशन और मनोरंजन

प्रियदर्शन की फिल्मों से कॉमेडी और मनोरंजन की उम्मीद की जाती है। लेकिन ‘हैवान’ का प्रमुख स्वर क्राइम और थ्रिलर का है। इसलिए यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या फिल्म सस्पेंस को लगातार बनाए रख पाती है।

समीक्षाओं के अनुसार, फिल्म में कुछ प्रभावशाली दृश्य और कलाकारों के बीच टकराव देखने को मिलता है, लेकिन पटकथा की गति और कुछ दृश्यों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए गए हैं। <Cite refs={[“turn0news42″,”turn0search5”]}/>

किसे देखनी चाहिए?

अगर आपको अक्षय कुमार, सैफ अली खान, क्राइम थ्रिलर और अपराध-आधारित कहानियां पसंद हैं, तो ‘हैवान’ आपके लिए एक विकल्प हो सकती है। हालांकि, यदि आप बहुत मजबूत सस्पेंस, अप्रत्याशित ट्विस्ट और बेहद कसी हुई पटकथा की उम्मीद कर रहे हैं, तो फिल्म देखने से पहले अपनी अपेक्षाएं संतुलित रखना बेहतर होगा।

हमारा संपादकीय आकलन: 2.5/5

यह रेटिंग हमारी तुलनात्मक संपादकीय राय है, किसी आधिकारिक या दर्शक-रेटिंग प्लेटफॉर्म की रेटिंग नहीं।

2. मिर्जापुर: द मूवी — गैंगस्टर दुनिया का बड़े पर्दे पर विस्तार

‘मिर्जापुर’ का नाम भारतीय ओटीटी दर्शकों के बीच किसी परिचय का मोहताज नहीं है। इस फ्रेंचाइजी ने अपराध, सत्ता, बदले और पारिवारिक संघर्ष की दुनिया के जरिए एक बड़ा प्रशंसक वर्ग बनाया है। ‘मिर्जापुर: द मूवी’ इसी लोकप्रिय दुनिया को सिनेमाघरों तक लेकर आती है।

फिल्म में पंकज त्रिपाठी, अली फजल, दिव्येंदु और रवि किशन जैसे कलाकारों की मौजूदगी दर्शकों की उत्सुकता बढ़ाती है। पुराने किरदारों, सत्ता की लड़ाई और अपराध की दुनिया से जुड़े संघर्षों के कारण यह फिल्म उन दर्शकों को विशेष रूप से आकर्षित कर सकती है, जो पहले से ‘मिर्जापुर’ की कहानी से परिचित हैं।

कहानी का आकर्षण

‘मिर्जापुर’ की पहचान केवल बंदूक, हिंसा और गैंगवार से नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे सत्ता, परिवार, महत्वाकांक्षा और बदले की भावनाओं का मिश्रण भी रहा है। फिल्म में भी इसी प्रकार के तत्वों की अपेक्षा की जाती है।

दर्शकों के लिए इसका सबसे बड़ा आकर्षण यह हो सकता है कि लोकप्रिय किरदार बड़े पर्दे पर किस तरह दिखाई देते हैं। कालीन भैया, गुड्डू पंडित और अन्य प्रमुख पात्रों की मौजूदगी कहानी को फ्रेंचाइजी से जोड़ती है।

हालांकि, किसी वेब सीरीज को फिल्म में बदलना आसान नहीं होता। सीरीज में कहानी को कई एपिसोड में विस्तार देने का अवसर मिलता है, जबकि फिल्म में सीमित समय में कथानक को आगे बढ़ाना पड़ता है। यदि कहानी बहुत अधिक किरदारों और उपकथाओं में उलझ जाती है, तो दर्शकों के लिए भावनात्मक जुड़ाव कमजोर हो सकता है।

अभिनय

‘मिर्जापुर: द मूवी’ का सबसे मजबूत पक्ष इसकी कलाकारों की टीम हो सकती है। पंकज त्रिपाठी का कालीन भैया वाला किरदार पहले से ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। अली फजल और रवि किशन जैसे कलाकार भी गंभीर और प्रभावशाली अभिनय के लिए जाने जाते हैं।

हालांकि, बड़े कलाकारों की मौजूदगी तभी प्रभावी बनती है जब पटकथा उन्हें पर्याप्त अवसर देती है। यदि किसी किरदार को केवल लोकप्रियता के आधार पर प्रस्तुत किया जाए और उसके संघर्ष को पर्याप्त विस्तार न मिले, तो दर्शक निराश हो सकते हैं।

फिल्म को लेकर उपलब्ध आलोचनात्मक प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में लेखिका शोभा डे की फिल्म पर कड़ी आलोचना का उल्लेख है, जबकि अन्य रिपोर्टों में फिल्म के लोकप्रिय प्रदर्शन और दर्शकों के आकर्षण की चर्चा की गई है। <Cite refs={[“turn0news68″,”turn0news65”]}/>

हिंसा और मनोरंजन

‘मिर्जापुर’ की दुनिया में हिंसा, अपराध और सत्ता संघर्ष प्रमुख तत्व रहे हैं। यही वजह है कि फिल्म का दर्शक वर्ग भी अपेक्षाकृत स्पष्ट है। जिन्हें गंभीर क्राइम ड्रामा और गैंगस्टर कहानियां पसंद हैं, वे इस फिल्म से जुड़ सकते हैं।

लेकिन हिंसा का प्रभाव तभी मजबूत होता है जब वह कहानी और किरदारों के विकास से जुड़ी हो। केवल एक्शन और खून-खराबे से फिल्म लंबे समय तक दर्शकों को प्रभावित नहीं कर सकती। इसी बिंदु पर फिल्म की पटकथा का महत्व बढ़ जाता है।

किसे देखनी चाहिए?

‘मिर्जापुर: द मूवी’ उन दर्शकों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जिन्होंने वेब सीरीज के पिछले सीजन देखे हैं और इस दुनिया के किरदारों से परिचित हैं। नए दर्शकों को कहानी के संदर्भ समझने में कुछ कठिनाई हो सकती है।

हमारा संपादकीय आकलन: 3.5/5

यह हमारी स्वतंत्र तुलनात्मक राय है। इसे फिल्म के आधिकारिक दर्शक स्कोर के रूप में न समझें।

3. हनुमान अंश — आस्था, भावना और आध्यात्मिक कहानी का प्रभाव

‘हनुमान अंश’ बाकी दोनों फिल्मों से बिल्कुल अलग विषय प्रस्तुत करती है। जहां ‘हैवान’ अपराध और ‘मिर्जापुर’ गैंगस्टर संघर्ष पर आधारित है, वहीं ‘हनुमान अंश’ का आकर्षण आध्यात्मिकता, आस्था और मानवीय भावनाओं में है।

आपके साझा किए गए पोस्टर में इस फिल्म को 9.7/10 की रेटिंग और 155K से अधिक वोट्स के साथ दिखाया गया है। यह दर्शाता है कि आपके संदर्भ में फिल्म को दर्शकों की ओर से बहुत मजबूत प्रतिक्रिया मिली है। हालांकि, यह रेटिंग किस प्लेटफॉर्म से ली गई है और उसका सत्यापन कैसे हुआ है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

कहानी और भावनात्मक प्रभाव

‘हनुमान अंश’ की कहानी धार्मिक आस्था और जीवन के संघर्षों से जुड़े विषयों को सामने लाती है। फिल्म का मूल आकर्षण यह है कि वह दर्शक को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव देने का प्रयास करती है।

आध्यात्मिक फिल्मों में कहानी की सफलता कई बातों पर निर्भर करती है—क्या फिल्म अपने धार्मिक विषय को सम्मानपूर्वक प्रस्तुत करती है, क्या किरदारों की भावनाएं विश्वसनीय लगती हैं और क्या कहानी दर्शकों के भीतर सकारात्मक विचार पैदा करती है।

उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में ‘हनुमान अंश’ की लोकप्रियता और इसके विस्तार का उल्लेख मिलता है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की पहुंच बढ़ाने के लिए इसके अन्य भाषाओं में डब किए जाने और आगे की फ्रेंचाइजी योजनाओं पर काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। <Cite refs={[“turn0news62”]}/>

अभिनय और निर्देशन

आध्यात्मिक फिल्मों में अभिनय का स्वर अक्सर भावनात्मक और संयमित होता है। यहां कलाकारों को केवल संवाद बोलने के बजाय आस्था, विश्वास, संघर्ष और आशा जैसे भावों को व्यक्त करना पड़ता है।

‘हनुमान अंश’ की सफलता का आकलन करते समय यह देखना जरूरी है कि क्या फिल्म अपने विषय को केवल धार्मिक प्रतीकों तक सीमित रखती है या मानवीय कहानी के स्तर पर भी प्रभाव पैदा करती है। एक अच्छी आध्यात्मिक फिल्म दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ सकती है और अपने संदेश को सहज तरीके से प्रस्तुत कर सकती है।

किसे देखनी चाहिए?

यदि आपको धार्मिक, आध्यात्मिक, भावनात्मक और प्रेरणादायक फिल्में पसंद हैं, तो ‘हनुमान अंश’ आपकी पसंद बन सकती है। यह उन दर्शकों के लिए विशेष रूप से आकर्षक हो सकती है, जो अपराध और हिंसा से अलग किसी सकारात्मक या आध्यात्मिक अनुभव की तलाश में हैं।

हमारा संपादकीय आकलन: 3.5/5

यह रेटिंग हमारी समीक्षा के लिए है। पोस्टर पर दिखाई गई 9.7/10 रेटिंग से इसका कोई आधिकारिक संबंध नहीं है।

तीनों फिल्मों की सीधी तुलना

श्रेणीहैवानमिर्जापुर: द मूवीहनुमान अंश
प्रमुख जॉनरक्राइम थ्रिलरगैंगस्टर क्राइम ड्रामाआध्यात्मिक ड्रामा
मुख्य आकर्षणअक्षय-सैफ की जोड़ीलोकप्रिय फ्रेंचाइजी और किरदारआस्था और भावनात्मक विषय
दर्शक वर्गथ्रिलर और एक्शन पसंद करने वालेमिर्जापुर के प्रशंसकधार्मिक व भावनात्मक सिनेमा पसंद करने वाले
संभावित मजबूत पक्षस्टारकास्ट और सस्पेंस का विचारकिरदारों की लोकप्रियता और अपराध की दुनियाआध्यात्मिक भावनाएं और प्रेरणात्मक विषय
संभावित कमजोरीपटकथा की गति और लंबाईहिंसा, उपकथाएं और फ्रेंचाइजी पर निर्भरताविषय की प्रस्तुति और भावनात्मक गहराई का आकलन आवश्यक

कहानी के आधार पर कौन आगे?

यदि केवल कहानी की संभावनाओं की बात करें, तो तीनों फिल्मों का अपना अलग आकर्षण है।

‘हैवान’ में अपराध और बदले का विषय है, लेकिन ऐसे विषय पर बनी फिल्मों में दर्शक अक्सर बहुत मजबूत ट्विस्ट और कसी हुई पटकथा की उम्मीद करते हैं। यदि कहानी अनुमानित हो जाए, तो प्रभाव कम हो सकता है।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ के पास पहले से स्थापित दुनिया और लोकप्रिय किरदारों का लाभ है। लेकिन इसी वजह से उस पर अपेक्षाएं भी अधिक हैं। दर्शक चाहते हैं कि फिल्म फ्रेंचाइजी की पहचान बनाए रखते हुए कुछ नया भी प्रस्तुत करे।

‘हनुमान अंश’ का विषय अलग है। इसकी सफलता का आधार एक्शन या गैंगवार नहीं, बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक जुड़ाव है। यदि फिल्म अपने विषय को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करती है, तो यह अपने दर्शक वर्ग में मजबूत प्रभाव छोड़ सकती है।

अभिनय के मामले में किसका पलड़ा भारी?

अभिनय की तुलना करना आसान नहीं है, क्योंकि तीनों फिल्मों में कलाकारों से अलग-अलग प्रकार की भूमिकाओं की अपेक्षा की जाती है।

‘हैवान’ में अक्षय कुमार और सैफ अली खान के सामने चुनौतीपूर्ण और विरोधाभासी किरदार हैं। एक नकारात्मक भूमिका और दूसरा दृष्टिहीन व्यक्ति का चरित्र—दोनों के लिए अभिनय की अलग शैली की जरूरत होती है।

‘मिर्जापुर: द मूवी’ में पंकज त्रिपाठी, अली फजल और रवि किशन जैसे कलाकारों की मौजूदगी इसकी बड़ी ताकत है। इनके पुराने किरदारों से दर्शकों की भावनात्मक पहचान पहले से जुड़ी हुई है।

‘हनुमान अंश’ में अभिनय का मूल्यांकन भावनात्मक और आध्यात्मिक प्रस्तुति के आधार पर किया जाना चाहिए। यहां संवाद, भाव-भंगिमा और कहानी के संदेश को प्रभावी बनाना महत्वपूर्ण है।

मनोरंजन के मामले में कौन बेहतर?

मनोरंजन पूरी तरह दर्शक की पसंद पर निर्भर करता है।

अगर आपको एक्शन, अपराध और रहस्य पसंद है, तो ‘हैवान’ और ‘मिर्जापुर: द मूवी’ आपके लिए अधिक उपयुक्त हो सकती हैं। दोनों फिल्मों में अपराध की दुनिया और तनावपूर्ण घटनाक्रम प्रमुख आकर्षण हैं।

यदि आप ‘मिर्जापुर’ के पुराने प्रशंसक हैं, तो फिल्म के किरदार और फ्रेंचाइजी का वातावरण आपके अनुभव को बेहतर बना सकते हैं। वहीं, नए दर्शकों को कहानी की पृष्ठभूमि समझने के लिए पहले की सामग्री देखना उपयोगी हो सकता है।

दूसरी ओर, ‘हनुमान अंश’ उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प हो सकती है, जो धार्मिक भावनाओं और आध्यात्मिक कथाओं से जुड़ना चाहते हैं। इसकी सफलता का पैमाना एक्शन या हिंसा के बजाय भावनात्मक प्रभाव और विषय की प्रस्तुति होगा।

दर्शकों की रेटिंग और समीक्षकों की राय में अंतर

आपके साझा किए गए पोस्टरों में तीनों फिल्मों की रेटिंग में काफी अंतर दिखाई देता है। ‘हनुमान अंश’ को 9.7/10, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को 9.2/10 और ‘हैवान’ को 6/10 का स्कोर दिखाया गया है।

लेकिन ऑनलाइन रेटिंग को फिल्म की अंतिम गुणवत्ता मान लेना सही नहीं होगा। अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर वोटिंग प्रणाली, दर्शकों की संख्या, रेटिंग देने वाले लोगों की पसंद और प्रचार का प्रभाव अलग हो सकता है।

‘हैवान’ के संबंध में उपलब्ध समीक्षाएं इस बात का उदाहरण हैं। कुछ समीक्षकों ने फिल्म की खूबियों को रेखांकित किया, जबकि कुछ ने इसकी कहानी और रनटाइम की आलोचना की। <Cite refs={[“turn0search0″,”turn0search5”]}/>

इसी प्रकार ‘मिर्जापुर: द मूवी’ को लेकर भी लोकप्रियता और आलोचनात्मक प्रतिक्रिया के बीच अंतर देखने को मिलता है। एक ओर फिल्म को दर्शकों का आकर्षण मिल रहा है, वहीं कुछ आलोचकों ने इसकी कहानी और हिंसा पर सवाल उठाए हैं। <Cite refs={[“turn0news65″,”turn0news68”]}/>

हमारी अंतिम राय: किसे चुनें?

तीनों फिल्मों की तुलना के बाद किसी एक फिल्म को सभी दर्शकों के लिए सर्वश्रेष्ठ कहना उचित नहीं होगा। हर फिल्म का अपना दर्शक वर्ग और अलग उद्देश्य है।

अगर आप क्राइम थ्रिलर के प्रशंसक हैं: ‘हैवान’ को स्टारकास्ट और अपराध-आधारित कहानी के लिए चुन सकते हैं, लेकिन कमजोर पटकथा की आलोचनाओं को ध्यान में रखें।

अगर आप मिर्जापुर के पुराने प्रशंसक हैं: ‘मिर्जापुर: द मूवी’ आपके लिए सबसे स्वाभाविक विकल्प हो सकती है। लोकप्रिय किरदारों और फ्रेंचाइजी की दुनिया का आकर्षण इसका बड़ा कारण है।

अगर आपको धार्मिक और आध्यात्मिक फिल्में पसंद हैं: ‘हनुमान अंश’ आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकती है। यह बाकी दोनों फिल्मों से अलग तरह का भावनात्मक अनुभव देने का प्रयास करती है।

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन: हैवान vs मिर्जापुर vs हनुमान अंश

13 सितंबर 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर

Akshay Kumar–Saif Ali Khan’s ‘Haiwaan’ fetches ₹80 crore non-theatrical deal

हैवान

शुरुआती कलेक्शन

₹2.80 करोड़

भारत में नेट कलेक्शन • पहला दिन

फिल्म 11 सितंबर 2026 को रिलीज हुई। उपलब्ध बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट में पहले दिन भारत में ₹2.80 करोड़ का नेट कलेक्शन दर्ज है। विदेश और वर्ल्डवाइड कलेक्शन का सत्यापित आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

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मिर्जापुर: द मूवी

मजबूत प्रदर्शन

₹218.48 करोड़

वर्ल्डवाइड ग्रॉस • रिपोर्टेड कुल

बॉलीवुड हंगामा के बॉक्स ऑफिस पेज पर भारत में ₹152.96 करोड़ नेट, ₹182.10 करोड़ ग्रॉस और विदेशों में ₹36.38 करोड़ का कलेक्शन दर्ज है। इन आंकड़ों के अनुसार कुल वर्ल्डवाइड ग्रॉस ₹218.48 करोड़ है।

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हनुमान अंश

सफलता की ओर

₹205 करोड़

रिपोर्टेड ग्रॉस कलेक्शन • 36वां दिन

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म ने रिलीज के 36वें दिन लगभग ₹205 करोड़ की कमाई की। इससे पहले 11 सितंबर की रिपोर्ट में भारत में कलेक्शन ₹193 करोड़ से अधिक बताया गया था। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों का अंतर है।

निष्कर्ष

‘हैवान’, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ और ‘हनुमान अंश’ तीन अलग-अलग सिनेमाई अनुभव प्रस्तुत करती हैं। ‘हैवान’ का आधार अपराध और सस्पेंस है, ‘मिर्जापुर: द मूवी’ की ताकत लोकप्रिय गैंगस्टर दुनिया और उसके किरदार हैं, जबकि ‘हनुमान अंश’ आध्यात्मिक एवं भावनात्मक विषय के साथ सामने आती है।

आपके साझा किए गए पोस्टर की रेटिंग के अनुसार ‘हनुमान अंश’ सबसे आगे दिखाई देती है, लेकिन वास्तविक चुनाव दर्शक की पसंद पर निर्भर करेगा। यदि आप एक्शन और क्राइम पसंद करते हैं, तो ‘हैवान’ या ‘मिर्जापुर: द मूवी’ आपके लिए बेहतर हो सकती है। यदि आप आस्था और भावनात्मक कहानी चाहते हैं, तो ‘हनुमान अंश’ पर विचार कर सकते हैं।

नई सोच नई ऊर्जा का फैसला: तीनों फिल्मों में से आपके लिए सबसे अच्छी फिल्म वही होगी, जो आपकी पसंद के जॉनर, कहानी और मनोरंजन की अपेक्षाओं पर खरी उतरे।



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