लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सोमवार को 1,375 नवचयनित ग्राम पंचायत अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए गए। लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि एक नियुक्ति पत्र केवल एक युवक या युवती की नौकरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उससे पूरे परिवार की उम्मीदों और आर्थिक स्थिति पर असर पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में रोजगार, पारदर्शी भर्ती और ग्रामीण विकास को एक-दूसरे से जोड़ते हुए कहा कि युवा ऊर्जा का सही दिशा में इस्तेमाल प्रदेश की अर्थव्यवस्था और गांवों की तस्वीर बदल सकता है। उन्होंने नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे गांवों में सरकारी योजनाओं को जमीन तक पहुंचाने और पंचायतों को अधिक सक्षम बनाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
नियुक्ति पत्र को परिवार की खुशी से जोड़ा
सीएम योगी ने कहा कि सरकारी नियुक्ति मिलने का अवसर केवल चयनित अभ्यर्थी के लिए खुशी का विषय नहीं होता। इसके साथ माता-पिता, भाई-बहन और रिश्तेदारों की उम्मीदें भी जुड़ी होती हैं। उन्होंने इसे परिवार के लिए त्योहार जैसी खुशी बताते हुए कहा कि रोजगार मिलने से नौजवान को अपने भविष्य को लेकर नई दिशा मिलती है।
उन्होंने युवाओं से कहा कि आज उनके सामने आगे बढ़ने के लिए पहले की तुलना में अधिक अवसर मौजूद हैं। उनके मुताबिक, युवा अपने सपनों को पूरा करने के लिए जिस मंच और वातावरण की जरूरत महसूस करते हैं, वह तैयार करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
निष्पक्ष भर्ती को लेकर सरकार का दावा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में सरकारी भर्तियों की प्रक्रिया को लेकर सरकार की नीति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चयन में निष्पक्षता और पारदर्शिता का लाभ उन युवाओं तक पहुंचना चाहिए जो अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
कार्यक्रम में सामने आए आधिकारिक विवरण के अनुसार, इन 1,375 ग्राम पंचायत अधिकारियों का चयन उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की प्रक्रिया के माध्यम से हुआ है। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में प्रतीकात्मक रूप से 11 नवचयनित अधिकारियों को नियुक्ति पत्र सौंपे।
2017 से पहले की स्थिति का किया जिक्र
अपने संबोधन में योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की पिछली परिस्थितियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले प्रदेश की पहचान को लेकर अलग तरह की धारणा थी और सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के बीच भी निराशा का माहौल रहता था।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उस दौर में आर्थिक रूप से कमजोर और बिना किसी प्रभाव वाले परिवारों के युवाओं के लिए सरकारी नौकरी हासिल करना मुश्किल माना जाता था। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और प्रभाव के इस्तेमाल को भी अपने संबोधन का हिस्सा बनाया।
योगी ने कहा कि 2017 के बाद सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया और इसका परिणाम बड़ी संख्या में युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर मिलने के रूप में सामने आया।
‘9 लाख युवाओं को नौकरी’ का आंकड़ा सामने रखा
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में प्रदेश में अब तक हुई सरकारी नियुक्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लगभग 9 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी उपलब्ध कराने का काम हुआ है। हालिया रिपोर्टों में भी मुख्यमंत्री के हवाले से सरकारी भर्तियों का आंकड़ा करीब साढ़े नौ लाख बताया गया है।
योगी ने कहा कि युवाओं को नौकरी देने के साथ-साथ उनकी ऊर्जा और प्रतिभा को प्रदेश के विकास से जोड़ना भी जरूरी है। उनके मुताबिक, सरकारी सेवा में आने वाले युवा केवल अपनी नौकरी तक सीमित न रहें, बल्कि जिस क्षेत्र में उनकी तैनाती हो वहां लोगों की समस्याओं और विकास कार्यों को प्राथमिकता दें।
ग्राम पंचायतों को विकास की पहली इकाई बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण विकास को अपने संबोधन का अहम हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के विकास की मजबूत नींव गांवों से तैयार होगी। इसके लिए ग्राम पंचायतों का मजबूत और आत्मनिर्भर होना जरूरी है।
नवनियुक्त ग्राम पंचायत अधिकारियों को उन्होंने सरकार और ग्रामीण जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करने का संदेश दिया। पंचायत स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन, प्रशासनिक कार्यों और ग्रामीणों तक सरकारी सुविधाओं की पहुंच में ग्राम पंचायत अधिकारियों की भूमिका अहम मानी जाती है।
योगी ने विकसित भारत के लक्ष्य को विकसित उत्तर प्रदेश और फिर आत्मनिर्भर गांवों से जोड़ते हुए कहा कि जब ग्राम पंचायतें अपने स्तर पर मजबूत होंगी, तभी प्रदेश के विकास को व्यापक आधार मिलेगा।
युवाओं को सुनाई ‘कोशिश’ की कहानी
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करने के लिए कवि सोहनलाल द्विवेदी की प्रसिद्ध रचना की पंक्तियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने असफलता को अंतिम पड़ाव न मानने और लगातार प्रयास करते रहने की बात कही।
उन्होंने युवाओं से कहा कि किसी परीक्षा, प्रतियोगिता या अवसर में असफलता आने पर उससे सीख लेकर अपनी तैयारी में सुधार करना चाहिए। उनके मुताबिक, मंजिल हासिल करने के लिए धैर्य, मेहनत और लगातार प्रयास जरूरी हैं।
एपीजे अब्दुल कलाम का उदाहरण
योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि शुरुआती असफलता किसी व्यक्ति की अंतिम पहचान तय नहीं करती।
उन्होंने बताया कि कलाम का सपना भारतीय वायुसेना में फाइटर पायलट बनने का था, लेकिन वह सफल नहीं हो सके। इसके बाद उन्होंने अपनी दिशा बदली और आगे चलकर देश के प्रमुख वैज्ञानिकों में शामिल हुए। बाद में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया और वह देश के राष्ट्रपति पद तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री ने इस उदाहरण के जरिए नवनियुक्त युवाओं को संदेश दिया कि करियर की यात्रा में आने वाली कठिनाइयों को सीख के तौर पर लेना चाहिए और अपने लक्ष्य की दिशा में प्रयास जारी रखना चाहिए।
नियुक्ति के साथ बढ़ी जिम्मेदारी
1,375 युवाओं को मिली यह नियुक्ति केवल रोजगार का अवसर नहीं, बल्कि गांवों की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ी नई जिम्मेदारी भी है। ग्राम पंचायत अधिकारी के रूप में इन युवाओं को ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक कामकाज और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भूमिका निभानी होगी।
कार्यक्रम में ग्रामीण विकास पर केंद्रित एक विशेष लघु फिल्म भी दिखाई गई और नवचयनित अधिकारियों को अपनी चयन प्रक्रिया के अनुभव साझा करने का अवसर मिला।
मुख्यमंत्री ने युवाओं को संबोधित करते हुए मूल रूप से यही संदेश दिया कि नौकरी मिलने के बाद असली चुनौती अपने दायित्व को ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ निभाने की है। सरकार की योजनाओं का वास्तविक लाभ गांव के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और ग्राम पंचायतें विकास की मजबूत इकाई बनें, इसके लिए नवनियुक्त अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
इस कार्यक्रम के जरिए सरकार ने रोजगार के साथ ग्रामीण प्रशासन और आत्मनिर्भर पंचायतों के एजेंडे को भी सामने रखा। मुख्यमंत्री ने युवाओं से अपनी क्षमता का इस्तेमाल प्रदेश के विकास में करने का आह्वान किया।
स्रोत/संदर्भ: मुख्यमंत्री के 28 सितंबर 2026 के कार्यक्रम और उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों के आधार पर।
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