लखनऊ, 4 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश की बहुचर्चित 68500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 में आरक्षण से जुड़ी विसंगति का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भर्ती से प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल द्वारा केंद्रीय राज्य मंत्री एवं अपना दल (एस) की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को सौंपे गए ज्ञापन के बाद अब इस मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा गया है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, केंद्रीय मंत्री ने 2 अक्टूबर को प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद मामले का संज्ञान लिया और 3 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर प्रकरण पर आवश्यक कार्रवाई का अनुरोध किया।

मामले से जुड़े पत्र में OBC सहित आरक्षित वर्गों के प्रभावित अभ्यर्थियों के संशोधित परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक भर्ती शेड्यूल जारी करने का अनुरोध किया गया है। पत्र में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 7 जुलाई 2026 की संस्तुति और 10 सितंबर 2026 की उच्चस्तरीय विभागीय समीक्षा बैठक में उपलब्ध तथ्यों का भी उल्लेख किया गया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे उम्मीदवारों के लिए अब यह मामला केवल भर्ती तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि उनके रोजगार, उम्र और पारिवारिक जिम्मेदारियों से भी जुड़ चुका है।
2 अक्टूबर को अभ्यर्थियों ने अनुप्रिया पटेल से की मुलाकात
68500 शिक्षक भर्ती से प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल से मुलाकात कर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल की ओर से आशुतोष वर्मा, तूफान सिंह, नवीन चौधरी, अखिल कुमार और मोहितअहलावत सहित अन्य प्रतिनिधियों के नाम पत्र में दर्ज हैं।
अभ्यर्थियों ने मंत्री के सामने भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित विसंगतियों और उनके कारण नियुक्ति से वंचित रह गए अभ्यर्थियों का मुद्दा रखा। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि आरक्षित वर्गों के उन अभ्यर्थियों को भी नियमानुसार नियुक्ति का अवसर दिया जाए, जो पुराने निर्धारित मानकों के आधार पर पात्रता पूरी करते हैं।
मंत्री को दिए गए ज्ञापन में यह भी कहा गया कि भर्ती प्रक्रिया में लंबे समय से मामला लंबित रहने के कारण प्रभावित अभ्यर्थियों की आयु बढ़ती जा रही है और रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में क्या कहा गया?
केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल की ओर से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे गए पत्र में 68500 सहायक अध्यापक भर्ती-2018 से संबंधित प्रकरण का उल्लेख किया गया है।
पत्र में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रतिनिधि मंडल की ओर से 2 अक्टूबर 2026 को प्रार्थना पत्र दिया गया था। इस प्रार्थना पत्र में भर्ती प्रक्रिया के दौरान OBC सहित दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित अभ्यर्थियों से संबंधित आरक्षण और पात्रता के मुद्दे को उठाया गया।
पत्र में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की ओर से की गई संस्तुतियों का भी संदर्भ दिया गया है। केंद्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया है कि उपलब्ध तथ्यों और संबंधित आदेशों के आधार पर मामले की सक्षम स्तर पर जांच कराकर विधि एवं शासनादेशों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
साथ ही प्रभावित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के संशोधित परिणाम एवं नियुक्ति की कार्यवाही के लिए आवश्यक भर्ती शेड्यूल जारी कराने का अनुरोध किया गया है।
60 से 66 अंक वाले अभ्यर्थियों का मुद्दा फिर उठा
अभ्यर्थियों की प्रमुख मांग 68500 शिक्षक भर्ती के पुराने मानक से जुड़ी हुई है। उनका कहना है कि 150 अंकों के पुराने पूर्णांक में 60 से 66 अंक प्राप्त करने वाले OBC, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रित अभ्यर्थियों को नियमानुसार उत्तीर्ण घोषित कर नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों का दावा है कि इस दिशा में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 7 जुलाई 2026 की संस्तुति महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि आयोग की संस्तुति और उसके बाद हुई विभागीय समीक्षा के आधार पर पात्र अभ्यर्थियों के संबंध में आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
यह पूरा मुद्दा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 68500 शिक्षक भर्ती का मामला पहले से ही आरक्षण, कटऑफ और नियुक्ति से जुड़े विवादों के कारण लंबे समय से अभ्यर्थियों के बीच चर्चा में रहा है।
10 सितंबर की उच्चस्तरीय बैठक का भी पत्र में उल्लेख
केंद्रीय मंत्री के पत्र में 10 सितंबर 2026 को माध्यमिक शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक का भी उल्लेख किया गया है। पत्र के अनुसार, इस बैठक में अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल और विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में इस विषय पर विचार-विमर्श किया गया था।
इससे अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि अब इस प्रकरण में शासन स्तर पर ठोस निर्णय लिया जा सकता है। उनका कहना है कि अलग-अलग स्तरों पर मामले के उठने के बावजूद नियुक्ति का रास्ता अभी पूरी तरह साफ नहीं हुआ है।
अभ्यर्थियों की मांग है कि शासन उपलब्ध अभिलेखों और संबंधित आयोग की संस्तुतियों का परीक्षण कर पात्र उम्मीदवारों के लिए आगे की प्रक्रिया निर्धारित करे।
वर्षों से नियुक्ति का इंतजार, बढ़ती उम्र की चिंता
68500 शिक्षक भर्ती से प्रभावित अभ्यर्थियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि विवाद के समाधान में लगातार समय बीत रहा है। प्रतिनिधिमंडल द्वारा दिए गए प्रार्थना पत्र में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि कई वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों की उम्र बढ़ रही है और उनके रोजगार एवं पारिवारिक दायित्व प्रभावित हो रहे हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि यह मामला केवल एक सामान्य भर्ती प्रक्रिया के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, लंबे समय से सरकारी नौकरी की उम्मीद लगाए बैठे उम्मीदवारों के लिए हर बीतता वर्ष महत्वपूर्ण है।
इसी आधार पर उन्होंने शासन से संवेदनशीलता के साथ मामले पर निर्णय लेने की अपील की है।
अभ्यर्थियों ने खाली पदों का भी उठाया मुद्दा

प्रतिनिधिमंडल की ओर से यह भी कहा गया है कि पूर्व में काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बड़ी संख्या में पद रिक्त रह गए थे। अभ्यर्थियों का दावा है कि उपलब्ध रिक्तियों और OBC वर्ग से संबंधित पदों की जानकारी को विभागीय अभिलेखों से सत्यापित करते हुए पात्र उम्मीदवारों को नियुक्ति का अवसर दिया जाना चाहिए।
उनका तर्क है कि यदि विभागीय रिकॉर्ड में रिक्तियां उपलब्ध हैं और नियमों के अनुसार पात्र अभ्यर्थी मौजूद हैं, तो ऐसे उम्मीदवारों की नियुक्ति के रास्ते पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग की है कि इस पूरे मामले में दस्तावेजों का सत्यापन कर उपलब्ध रिक्तियों एवं लागू नियमों के अनुरूप पात्र अभ्यर्थियों को अवसर दिया जाए।
अब भर्ती शेड्यूल जारी करने की मांग
अभ्यर्थियों की वर्तमान मांग का सबसे अहम हिस्सा भर्ती शेड्यूल जारी करना है। उनका कहना है कि केवल पत्राचार या आश्वासन से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। जब तक संशोधित परिणाम और नियुक्ति प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सारिणी सामने नहीं आती, तब तक प्रभावित उम्मीदवारों की चिंता बनी रहेगी।
अभ्यर्थियों ने उत्तर प्रदेश सरकार से आग्रह किया है कि संबंधित विभाग को स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए मामले में आवश्यक प्रक्रिया शुरू कराई जाए और नियुक्ति की समय-सारिणी सार्वजनिक की जाए।
उनका कहना है कि इससे लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों को यह स्पष्ट हो सकेगा कि शासन इस मामले को किस दिशा में आगे बढ़ा रहा है।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं होने की स्थिति में 68500 शिक्षक भर्ती के प्रभावित अभ्यर्थियों ने आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी है।
अभ्यर्थियों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि यदि जल्द भर्ती का शेड्यूल जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू नहीं की गई, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने भूख हड़ताल शुरू करने की बात कही है और आवश्यकता पड़ने पर आमरण अनशन तक जाने की चेतावनी दी है।
इस चेतावनी के बाद अब निगाहें उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
आयोग की संस्तुति के बाद बढ़ी उम्मीद
अभ्यर्थियों के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 7 जुलाई 2026 की संस्तुति इस पूरे मामले में उम्मीद का एक महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है। उनका कहना है कि आयोग द्वारा की गई संस्तुति और उसके बाद शासन स्तर पर हुई बैठकों को देखते हुए अब प्रकरण को अंतिम निर्णय की दिशा में ले जाने की आवश्यकता है।
केंद्रीय मंत्री की ओर से मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र से भी अभ्यर्थियों को उम्मीद जगी है कि मामला अब उच्च स्तर पर पहुंच चुका है और संबंधित विभाग इस पर जल्द निर्णय ले सकता है।
हालांकि, संशोधित परिणाम, नियुक्ति और भर्ती शेड्यूल को लेकर अंतिम निर्णय उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित विभाग की ओर से लिया जाना बाकी है। फिलहाल केंद्रीय मंत्री की ओर से मुख्यमंत्री को भेजा गया पत्र अभ्यर्थियों के आंदोलन में एक नए घटनाक्रम के तौर पर सामने आया है।
क्या है 68500 शिक्षक भर्ती का ताजा घटनाक्रम?
पूरे घटनाक्रम को क्रमवार समझें तो 2 अक्टूबर को प्रभावित अभ्यर्थियों के प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने आरक्षण विसंगति और नियुक्ति से जुड़े मुद्दों को उनके सामने रखा। इसके बाद मंत्री की ओर से 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजा गया।
पत्र में राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की 7 जुलाई 2026 की संस्तुति, 10 सितंबर की उच्चस्तरीय विभागीय बैठक और प्रभावित आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के संशोधित परिणाम एवं नियुक्ति की कार्यवाही के लिए आवश्यक भर्ती शेड्यूल जारी कराने का अनुरोध किया गया है।
अब अभ्यर्थियों की नजर सरकार के अगले कदम पर है। यदि शासन स्तर से जल्द कोई ठोस निर्णय सामने आता है, तो वर्षों से लंबित नियुक्ति की उम्मीद लगाए बैठे उम्मीदवारों के लिए यह बड़ा राहत भरा कदम हो सकता है। वहीं, यदि प्रक्रिया में और देरी होती है, तो अभ्यर्थियों ने आंदोलन को और व्यापक करने के संकेत दिए हैं।
फिलहाल 68500 शिक्षक भर्ती का यह मामला एक बार फिर उत्तर प्रदेश की शिक्षक भर्ती व्यवस्था, आरक्षण प्रक्रिया और लंबित नियुक्तियों को लेकर बहस के केंद्र में आ गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार इस प्रकरण में संशोधित परिणाम और नियुक्ति की प्रक्रिया को लेकर कब तक स्पष्ट निर्णय लेती है।
नोट: इस खबर में आरक्षण, आयोग की संस्तुति और अभ्यर्थियों की मांगों से संबंधित दावे उपलब्ध पत्र/प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर प्रस्तुत किए गए हैं। अंतिम नियुक्ति एवं प्रशासनिक कार्रवाई का निर्णय संबंधित सरकारी विभाग द्वारा किया जाना है।
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