लखनऊ, 13 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में महंगाई के मुद्दे पर सियासी घमासान तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने बढ़ती महंगाई को लेकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों में वृद्धि ने आम परिवारों के घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। कांग्रेस नेता ने दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों का जिक्र करते हुए कहा कि महंगाई के मौजूदा हालात में आम लोगों के लिए त्योहारों की खुशियां मनाना भी आर्थिक चुनौती बनता जा रहा है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अपने बयान में कहा कि देश और उत्तर प्रदेश में महंगाई का दबाव गरीब, मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, मजदूरों और नौकरीपेशा लोगों की परेशानियां बढ़ा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब रसोई का खर्च, बच्चों की पढ़ाई, परिवहन, स्वास्थ्य और दूसरी बुनियादी जरूरतों पर लगातार अधिक पैसा खर्च करना पड़ रहा है, तो सीमित आय में परिवार अपनी जरूरतें कैसे पूरी करें?
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने भाजपा सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को विकास के दावों के साथ-साथ महंगाई से राहत के ठोस उपाय भी दिखाई देने चाहिए। उनके मुताबिक, आम नागरिक को भाषणों से ज्यादा जरूरी वस्तुओं की कीमतों में राहत की जरूरत है।
देश में 5.54 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 6.08 प्रतिशत खुदरा महंगाई का दावा
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की 12 अक्टूबर 2026 को जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, सितंबर 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर 5.54 प्रतिशत दर्ज की गई, जबकि खाद्य महंगाई दर 7.74 प्रतिशत रही।
जारी आंकड़ों के मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य महंगाई दर 8.06 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, उत्तर प्रदेश में खुदरा महंगाई दर 6.08 प्रतिशत बताई गई, जो राष्ट्रीय औसत से 0.54 प्रतिशत अंक अधिक है। प्रदेश में ग्रामीण खुदरा महंगाई दर 6.71 प्रतिशत दर्ज होने का दावा किया गया है।
कांग्रेस ने इन आंकड़ों को आम परिवारों पर बढ़ते आर्थिक दबाव का संकेत बताया है। पार्टी का कहना है कि महंगाई का असर केवल बाजार में खरीदारी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका सीधा संबंध परिवारों की बचत, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य संबंधी खर्च और जीवन की अन्य आवश्यकताओं से भी होता है।
हालांकि, महंगाई के आंकड़ों को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि खुदरा महंगाई दर और खाद्य महंगाई दर अलग-अलग सूचकांक हैं। खुदरा महंगाई व्यापक उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को दर्शाती है, जबकि खाद्य महंगाई विशेष रूप से खाद्य पदार्थों की कीमतों में आए बदलाव से संबंधित होती है।
प्याज की महंगाई 108 प्रतिशत के पार, अदरक और लहसुन के दाम भी चिंता का विषय
कांग्रेस की ओर से जारी विज्ञप्ति में खाद्य पदार्थों की सालाना महंगाई के आंकड़ों को भी प्रमुखता से उठाया गया है। विज्ञप्ति के अनुसार, सितंबर 2026 में प्याज की अखिल भारतीय सालाना महंगाई दर 108.09 प्रतिशत रही। अगस्त में यह दर 48.78 प्रतिशत बताई गई थी।
इसी तरह अदरक की महंगाई दर 62.85 प्रतिशत, लहसुन की 54.62 प्रतिशत और नींबू की 36.41 प्रतिशत दर्ज किए जाने का उल्लेख किया गया है।
इन आंकड़ों ने रसोई के बजट पर बढ़ते दबाव को लेकर बहस तेज कर दी है। प्याज, लहसुन, अदरक और नींबू जैसी वस्तुओं का इस्तेमाल भारतीय घरों में रोजमर्रा के भोजन में होता है। इनकी कीमतों में तेजी आने पर परिवारों के मासिक खर्च में बढ़ोतरी हो सकती है।
खासकर सीमित आय वाले परिवारों के सामने यह चुनौती होती है कि वे बढ़ी हुई कीमतों के बीच अपने खर्च का संतुलन कैसे बनाए रखें। कुछ परिवार दूसरी वस्तुओं की खरीदारी कम करके रसोई का खर्च पूरा करने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ को अपनी बचत का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
यहां यह समझना भी जरूरी है कि सालाना महंगाई दर किसी वस्तु की कीमत में पिछले वर्ष के समान महीने की तुलना में हुए बदलाव को दर्शाती है। इसलिए प्याज की 108.09 प्रतिशत महंगाई दर का अर्थ यह नहीं है कि प्याज की कीमत सितंबर महीने के भीतर ही 108 प्रतिशत बढ़ी, बल्कि यह पिछले वर्ष के सितंबर की तुलना में मूल्य स्तर में वृद्धि का संकेत है।
त्योहारों से पहले बढ़ता खर्च, परिवारों के सामने बजट संभालने की चुनौती
दशहरा और दीपावली जैसे त्योहारों के दौरान परिवारों का खर्च सामान्य महीनों की तुलना में बढ़ सकता है। इस दौरान लोग खाद्य सामग्री, मिठाइयां, कपड़े, घरेलू सामान और अन्य जरूरी वस्तुओं की खरीदारी करते हैं। ऐसे समय में रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी परिवारों के बजट को और प्रभावित कर सकती है।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने इसी स्थिति को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि त्योहारों के समय आम लोगों को राहत मिलने के बजाय महंगाई की चिंता का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने बयान में इसे घरेलू बजट पर हमला बताते हुए सरकार से महंगाई पर जवाब मांगा।
महंगाई का असर अलग-अलग आय वर्गों पर अलग तरीके से पड़ता है। नियमित वेतन पाने वाले परिवारों को बढ़ते खर्च के बीच अपनी मासिक आय का प्रबंधन करना पड़ता है। वहीं, दिहाड़ी मजदूरों और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आमदनी निश्चित नहीं होती। ऐसे परिवारों के लिए खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेजी आर्थिक मुश्किलों को बढ़ा सकती है।
किसानों और छोटे कारोबारियों के सामने भी आय तथा खर्च के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है। यदि आवश्यक वस्तुओं के साथ परिवहन, बिजली और अन्य घरेलू खर्च भी बढ़ते हैं, तो परिवारों की बचत प्रभावित हो सकती है।
ग्रामीण उत्तर प्रदेश में महंगाई का असर, खेती की लागत भी बड़ी चिंता
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने ग्रामीण परिवारों की आर्थिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों को घरेलू जरूरतों के साथ खेती और शिक्षा पर भी खर्च करना पड़ता है। खाद, बीज, डीजल, बिजली तथा कृषि कार्यों से जुड़े अन्य खर्च किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेतिहर मजदूर, छोटे किसान और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आय कई बार मौसमी काम और रोजगार की उपलब्धता पर निर्भर करती है। ऐसे में आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी होने पर परिवारों के लिए नियमित खर्च पूरा करना कठिन हो सकता है।
उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की आर्थिक परिस्थितियां एक जैसी नहीं हैं। शहरों में परिवारों को किराया, परिवहन और अन्य सेवाओं पर खर्च करना पड़ सकता है, जबकि ग्रामीण परिवारों के सामने कृषि लागत और रोजगार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियां हो सकती हैं।
कांग्रेस का तर्क है कि महंगाई से निपटने के लिए सरकार को अलग-अलग आय वर्गों और क्षेत्रों की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रभावी कदम उठाने चाहिए। पार्टी ने विशेष रूप से कम आय वाले परिवारों को राहत देने और जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर निगरानी बढ़ाने की आवश्यकता बताई है।
भाजपा सरकार से कांग्रेस ने पूछे सवाल
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने भाजपा सरकार से सवाल किया कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित करने और आम लोगों को राहत देने के लिए अब तक क्या प्रभावी कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की आर्थिक नीतियों का मूल्यांकन केवल विकास संबंधी दावों से नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव से भी किया जाना चाहिए।
कांग्रेस के अनुसार, जनता को यह जानने का अधिकार है कि खाद्य पदार्थों की आपूर्ति बनाए रखने, जमाखोरी और कालाबाजारी पर रोक लगाने तथा कम आय वाले परिवारों को राहत पहुंचाने के लिए सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
पार्टी ने महंगाई के मुद्दे को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़ाकर आम परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ा विषय बताया। कांग्रेस का कहना है कि रसोई का खर्च बढ़ने से परिवारों की बचत पर असर पड़ता है और कई बार उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य या दूसरी आवश्यकताओं पर खर्च कम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
महंगाई पर सरकार की जवाबदेही को लेकर विपक्ष के सवालों के बीच यह मुद्दा आने वाले दिनों में राजनीतिक चर्चा का विषय बना रह सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से इस विशेष प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं कराई गई है।
महंगाई पर कांग्रेस की प्रमुख मांगें
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अपने बयान में महंगाई से राहत दिलाने के लिए कई मांगें रखी हैं। इनमें आवश्यक खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और कीमतों की नियमित निगरानी, जमाखोरी तथा कालाबाजारी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना शामिल है।
पार्टी ने यह भी मांग की है कि महंगाई से प्रभावित गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए ठोस राहत सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस के मुताबिक, केवल आंकड़ों और घोषणाओं से परिवारों की मुश्किलें दूर नहीं होंगी, बल्कि ऐसी नीतियों की जरूरत है जिनका असर आम नागरिक की जेब पर दिखाई दे।
महंगाई के मुद्दे पर कांग्रेस की इन मांगों के साथ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारें किस तरह समन्वय करती हैं। खाद्य वस्तुओं की कीमतें कई कारकों से प्रभावित हो सकती हैं, जिनमें उत्पादन, मौसम, परिवहन, भंडारण और बाजार में उपलब्ध आपूर्ति शामिल हैं।
इसलिए महंगाई से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए नियमित निगरानी, समय पर आपूर्ति प्रबंधन और जरूरत पड़ने पर लक्षित राहत जैसे उपाय महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
‘जनता को महंगाई पर भाषण नहीं, राहत चाहिए’
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अपने बयान में कहा कि महंगाई का सवाल हर घर की थाली, हर परिवार की बचत और प्रत्येक नागरिक के सम्मानजनक जीवन से जुड़ा है। उन्होंने भाजपा सरकार से आम परिवारों के बजट पर पड़ रहे दबाव का जवाब देने की मांग की।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि सरकार को महंगाई के प्रभाव को गंभीरता से लेते हुए ऐसे कदम उठाने चाहिए, जिनसे आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में राहत मिल सके और परिवार अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा कर सकें।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से जारी यह बयान महंगाई को लेकर विपक्ष की राजनीतिक चिंता और आम परिवारों के घरेलू बजट पर बढ़ते दबाव को सामने रखता है। सितंबर 2026 के जिन महंगाई आंकड़ों का विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है, वे खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर चर्चा को और महत्वपूर्ण बनाते हैं। अब इस मुद्दे पर सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदम और महंगाई से राहत के लिए बनाई जाने वाली नीतियां अहम रहेंगी।
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