ACHOUP प्रदेश अध्यक्ष हिमालय कुमार के नेतृत्व में प्रदर्शन, तीन सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश जारी करने की मांग; संगठन ने 2027 के चुनावों को लेकर भी दिया संदेश
लखनऊ, 17 अक्टूबर 2026।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इको गार्डन में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (CHO) का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन लगातार जारी है। एसोसिएशन ऑफ कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स, उत्तर प्रदेश (ACHOUP) के बैनर तले प्रदेश अध्यक्ष हिमालय कुमार के नेतृत्व में CHO अपनी सेवा संबंधी मांगों को लेकर सरकार से ठोस निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। आंदोलन के दौरान शनिवार को CHO कर्मियों ने झाड़ू लगाकर सफाई अभियान चलाया और “झाड़ू लगाओ… संविदा हटाओ” के नारे के माध्यम से संविदा व्यवस्था समाप्त करने तथा अपनी लंबित मांगों के समाधान की आवाज बुलंद की।
संगठन का दावा है कि धरना स्थल पर प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों CHO पहुंच रहे हैं। ACHOUP के अनुसार, आंदोलन में प्रतिदिन लगभग 11 से 13 हजार कर्मियों की भागीदारी हो रही है। संगठन ने सरकार से अपील की है कि कर्मचारियों की तीन प्रमुख मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर लिखित आदेश जारी किया जाए, ताकि लंबे समय से चल रहे आंदोलन का समाधान निकल सके।
झाड़ू लगाकर CHO ने सरकार तक पहुंचाया अपना संदेश
इको गार्डन में चल रहे धरने के दौरान CHO कर्मियों ने सफाई अभियान के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया। झाड़ू लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने “झाड़ू लगाओ… संविदा हटाओ” के नारे लगाए। इस गतिविधि के माध्यम से संगठन ने संविदा व्यवस्था में कार्यरत स्वास्थ्य कर्मियों की समस्याओं और नियमितीकरण की मांग को प्रमुखता से उठाया।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इसके बावजूद उनकी सेवा शर्तों, वेतन और भविष्य की सुरक्षा से जुड़े सवालों का समाधान नहीं हो पाया है। संगठन का मानना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में योगदान देने वाले कर्मियों को उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप स्थायी सेवा व्यवस्था और उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए।
हिमालय कुमार बोले—मांगों पर लिखित निर्णय करे सरकार
ACHOUP के प्रदेश अध्यक्ष हिमालय कुमार ने कहा कि प्रदेश के CHO लंबे समय से अपनी सेवा संबंधी मांगों के समाधान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। संगठन का कहना है कि कर्मचारी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस लिखित निर्णय सामने नहीं आया है।
हिमालय कुमार के अनुसार, यदि सरकार जल्द सकारात्मक पहल नहीं करती है, तो संगठन आगे की रणनीति तय करेगा। उन्होंने संकेत दिया कि CHO अपनी मांगों को लेकर मुख्यमंत्री के समक्ष भी अपनी बात रखने और समाधान की गुहार लगाने के लिए आगे बढ़ सकते हैं।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य मांगों का स्थायी और सम्मानजनक समाधान प्राप्त करना है। ACHOUP के मुताबिक, जब तक मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होता, तब तक धरना-प्रदर्शन जारी रखने का रुख अपनाया गया है।
CHO की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?
ACHOUP ने आंदोलन के दौरान अपनी तीन प्रमुख मांगों को सामने रखा है। संगठन का कहना है कि इन मांगों का समाधान होने से कर्मचारियों की सेवा संबंधी अनिश्चितता दूर होगी और उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी।
1. पृथक कैडर और नियमितीकरण
CHO के लिए अलग कैडर बनाए जाने और नियमितीकरण की मांग की जा रही है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से स्वास्थ्य सेवाएं देने वाले कर्मियों को स्पष्ट सेवा ढांचा और भविष्य की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
2. PBI का वेतन में विलय और समान वेतन/मानदेय
संगठन की दूसरी मांग परफॉर्मेंस बेस्ड इंसेंटिव (PBI) को वेतन में शामिल करने तथा समान वेतन या मानदेय व्यवस्था लागू करने से संबंधित है। CHO का पक्ष है कि उनकी आर्थिक मांगों पर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।
3. ₹4,800 ग्रेड पे और सभी सेवा लाभ
तीसरी मांग के तहत CHO ₹4,800 ग्रेड पे और अन्य सेवा लाभ दिए जाने की मांग कर रहे हैं। संगठन के अनुसार, इन मांगों पर निर्णय होने से कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान हो सकता है।
प्रमुख सचिव के साथ वार्ता के बाद भी आंदोलन जारी

ACHOUP के अनुसार, हाल ही में चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव के साथ CHO प्रतिनिधिमंडल की वार्ता हुई थी। हालांकि, संगठन का कहना है कि बातचीत के बाद भी उसकी प्रमुख मांगों पर कोई ठोस एवं सकारात्मक लिखित आदेश सामने नहीं आया है।
इसी वजह से कर्मचारी धरना जारी रखे हुए हैं। संगठन चाहता है कि वार्ता के दौरान उठाए गए मुद्दों पर स्पष्ट समयसीमा के साथ निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों को केवल आश्वासन के बजाय ठोस परिणाम मिल सकें।
CHO की मांगों पर सरकार की ओर से किसी नए लिखित निर्णय की जानकारी संगठन के इस बयान में नहीं दी गई है।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर
ACHOUP ने कहा कि CHO ग्रामीण क्षेत्रों में आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के माध्यम से लोगों को उनके घर के नजदीक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। संगठन का दावा है कि आंदोलन के चलते इन केंद्रों पर संचालित स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता आम लोगों के लिए काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे में आंदोलन लंबा खिंचने पर स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता बढ़ सकती है।
संगठन ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की अपील करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगों पर सकारात्मक निर्णय होने से आंदोलन समाप्त करने और स्वास्थ्य सेवाओं को सामान्य रूप से संचालित करने का रास्ता खुल सकता है।
हालांकि, धरने के कारण कितने केंद्रों पर सेवाएं प्रभावित हुई हैं और इसका मरीजों पर कितना असर पड़ा है, इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं कराया गया है।
2027 के चुनावों को लेकर संगठन ने दिया संदेश
CHO संगठन ने अपने बयान में आगामी वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों का भी उल्लेख किया है। ACHOUP का कहना है कि प्रदेश के CHO ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं देने के साथ-साथ प्रत्येक जिले और ब्लॉक में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
संगठन ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं हुआ, तो इसका प्रभाव आगामी चुनावों में भी देखने को मिल सकता है। ACHOUP के मुताबिक, प्रदेश के हजारों CHO और उनके परिवार इस मुद्दे को गंभीरता से देख रहे हैं तथा सरकार से सकारात्मक पहल की अपेक्षा कर रहे हैं।
यह संगठन की ओर से व्यक्त किया गया राजनीतिक संदेश है। इसका वास्तविक चुनावी प्रभाव क्या होगा, यह भविष्य की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सेना के जवानों के सम्मान में रक्तदान शिविर का प्रस्ताव
धरने के बीच ACHOUP ने सामाजिक और राष्ट्रीय दायित्वों से जुड़ी गतिविधि आयोजित करने की योजना भी सामने रखी है। संगठन के प्रदेश कार्यालय मंत्री एवं मीडिया प्रभारी अनुपम वर्मा ने कहा कि CHO का संघर्ष केवल सेवा संबंधी मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी भी उनके लिए महत्वपूर्ण है।
उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में इको गार्डन में भारतीय सेना के जवानों के सम्मान और राष्ट्रसेवा की भावना से रक्तदान शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव है। इस पहल के जरिए CHO यह संदेश देना चाहते हैं कि वे स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ सामाजिक कार्यों में भी योगदान देने के लिए तत्पर हैं।
फिलहाल यह शिविर आयोजित करने का प्रस्ताव है। इसकी तारीख और अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी संगठन की ओर से अलग से जारी किए जाने की अपेक्षा है।
सरकार के फैसले पर टिकी CHO कर्मियों की निगाहें
इको गार्डन में जारी धरना अब नियमितीकरण, वेतन और सेवा लाभ जैसे मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण कर्मचारी आंदोलन का रूप ले चुका है। एक ओर संगठन अपनी तीन सूत्रीय मांगों पर लिखित आदेश जारी करने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रभावित होने की आशंका भी सामने रखी जा रही है।
अब देखना होगा कि उत्तर प्रदेश सरकार CHO की मांगों पर क्या रुख अपनाती है और संगठन के साथ आगे की बातचीत से कोई ठोस समाधान निकलता है या नहीं। फिलहाल ACHOUP ने स्पष्ट किया है कि मांगों का स्थायी और सम्मानजनक समाधान मिलने तक उसका आंदोलन जारी रहेगा।
स्रोत: ACHOUP की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति। आंदोलन में भागीदारी, मांगों और वार्ता से संबंधित आंकड़े एवं दावे संगठन के बयान पर आधारित हैं।
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