लखनऊ। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को जेल से रिहाई के तुरंत बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा हिरासत में लिए जाने के मामले ने उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। इस कार्रवाई को लेकर समाजवादी पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला है। सपा प्रवक्ता फखरुल हसन चांद ने आजम खान के खिलाफ हुई कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसे कानून और संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का मामला बताया।
फखरुल हसन चांद ने कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर कहते थे कि संविधान अच्छा या बुरा नहीं होता, बल्कि उसे लागू करने वाले लोग अच्छे और बुरे होते हैं। उन्होंने इसी विचार का उल्लेख करते हुए मौजूदा कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।
‘आजम साहब को जेल में रखने का प्रयास कर रही BJP सरकार’
सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार लगातार आजम खान के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उन्हें जेल में रखने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि आजम खान ने शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए विश्वविद्यालय बनाने की पहल की, लेकिन इसके बावजूद उनके खिलाफ इस तरह की कार्रवाई की जा रही है।
फखरुल हसन चांद ने कहा कि आजम खान के साथ जिस तरह का व्यवहार किया जा रहा है, उसे पूरा देश और दुनिया देख रही है। उन्होंने इसे निंदनीय बताते हुए सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
‘फर्जी मुकदमों में एजेंसियों का किया जा रहा दुरुपयोग’
ED की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सपा प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि फर्जी मुकदमे दर्ज कर जांच एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कानून और संविधान का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को परेशान करने या जेल में रखने के लिए नहीं होना चाहिए।
उन्होंने आजम खान के मामले को लेकर कहा कि जिस तरह से कानूनी और संवैधानिक प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है, वह निंदनीय है।
रिहाई के तुरंत बाद ED की हिरासत में लिए गए आजम खान
गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान 31 अक्टूबर को रामपुर जिला जेल से रिहा हुए थे। दो पैन कार्ड से जुड़े मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद उनकी रिहाई हुई थी। हालांकि, जेल से बाहर आते ही ED की टीम ने उन्हें हिरासत में ले लिया।
यह कार्रवाई मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़े कथित धनशोधन मामले की जांच के सिलसिले में की गई। इस घटनाक्रम के बाद समाजवादी पार्टी के नेताओं की ओर से लगातार प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
आजम खान की रिहाई के तुरंत बाद हुई ED की कार्रवाई ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति में कानून, जांच एजेंसियों की भूमिका और विपक्ष के आरोपों को लेकर बहस तेज कर दी है।
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