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उन्नाव। जनपद में आयोजित शिव महापुराण कथा के छठवें दिन श्रद्धा, भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। कथा स्थल पर हरिद्वार से आए संत-महात्माओं, केंद्रीय मंत्री बघेल, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मनोज पांडेय सहित बड़ी संख्या में गणमान्य लोगों और आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। आयोजकों के अनुसार, छठवें दिन करीब डेढ़ लाख श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। पूरे पंडाल में हर ओर ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ की गूंज सुनाई देती रही और उन्नाव की धरती पूरी तरह शिवमय नजर आई।

शिव से प्रार्थना के साथ व्यास पीठ पर पहुंचे कथावाचक

कथा के दौरान व्यास पीठ पर विराजमान होने से पहले कथावाचक ने भगवान शिव से विशेष प्रार्थना करते हुए कहा कि किसी पुरुष की थैली खाली न रहे और किसी मां की गोद सूनी न हो। इस भावपूर्ण प्रार्थना ने श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया।

कथा में भगवान शिव की भक्ति, पारिवारिक संस्कार, माता-पिता के सम्मान और युवाओं को सही दिशा देने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा कि माता-पिता को बच्चों के लिए एक पारिवारिक पाठशाला तैयार करनी चाहिए, जहां उन्हें संस्कार, जिम्मेदारी और रिश्तों की अहमियत समझाई जाए। उन्होंने शिवालयों की विशेषता बताते हुए कहा कि शिव मंदिर ऐसा स्थान है, जहां पहुंचकर व्यक्ति को अपने घर जैसा अपनापन महसूस होता है।

Gen-Z को दिया संदेश, शिव को अपना पिता मानकर चलें युवा

छठवें दिन की कथा में विशेष रूप से Gen-Z यानी नई पीढ़ी और युवाओं पर फोकस देखने को मिला। कथावाचक ने युवाओं से कहा कि भगवान शिव को अपना पिता मानकर चलें। आडंबरों से दूर रहकर स्वयं पर, अपने पिता पर और देवाधिदेव महादेव पर विश्वास रखें। ऐसा करने वाला व्यक्ति जीवन में भटकाव से बच सकता है।

उन्होंने युवाओं को अनावश्यक विवादों और नकारात्मक लोगों से दूर रहने की सलाह देते हुए कहा कि जो लोग आपके अच्छे कार्यों में बाधा बनते हैं, उनसे दूरी बनाना भी जरूरी है। अपना काम ईमानदारी से करें और प्रतिदिन भगवान शिव के द्वार पर जाएं।

बीमारी में डॉक्टर के पास जाने की भी दी सलाह

कथा के दौरान स्वास्थ्य को लेकर भी एक महत्वपूर्ण बात कही गई। कथावाचक ने श्रद्धालुओं से कहा कि भगवान शिव को जल अर्पित करें और अपनी आस्था बनाए रखें, लेकिन जब कोई परेशानी या बीमारी हो तो सबसे पहले डॉक्टर के पास जाएं। इलाज कराने के बाद अपने इष्टदेव का स्मरण करें।

उन्होंने भगवान शिव की पूजा और जलाभिषेक को लेकर कई धार्मिक मान्यताओं का उल्लेख किया। शिवलिंग पर चढ़ाए गए जल के आचमन, घर के दरवाजे पर जल छिड़कने और शिव को काली मिर्च अर्पित करने जैसी परंपराओं के बारे में भी बताया। इन बातों को उन्होंने धार्मिक आस्था और मान्यताओं के संदर्भ में प्रस्तुत किया।

सीहोर धाम का भी होता रहा उल्लेख

छठवें दिन की कथा में सीहोर स्थित अपने धाम और वहां की धार्मिक गतिविधियों का भी कई बार उल्लेख हुआ। कथावाचक ने श्रद्धालुओं को सीहोर आने का निमंत्रण दिया और वहां पहुंचने वाले भक्तों के अनुभवों तथा उनकी जिंदगी में आए बदलावों के उदाहरण साझा किए।

हालांकि, कथा के समग्र स्वरूप को लेकर एक चर्चा का विषय भी सामने आया। कुछ समय कथा के धार्मिक प्रसंगों को दिया गया, जबकि सीहोर धाम, वहां आने के निमंत्रण और विभिन्न भक्तों के अनुभवों का उल्लेख भी लगातार होता रहा। एक दृष्टिकोण यह भी रहा कि धार्मिक कथा का लाभ श्रद्धालु ऑनलाइन माध्यम से भी उठा सकते हैं, इसके लिए हर व्यक्ति का शारीरिक रूप से कथा स्थल पर पहुंचना अनिवार्य नहीं है। कथा स्थल की मिट्टी उठाकर ले जाने जैसी बात भी कुछ लोगों को व्यावहारिक दृष्टि से अलग लगी।

दुर्वा का महत्व बताया, ब्रह्मा-विष्णु-महेश से जोड़ा संबंध

कथा में दुर्वा के धार्मिक महत्व पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कथावाचक ने बताया कि दुर्वा को भगवान शिव के आशीर्वाद से अमर माना गया है। इसे काटने या जलाने के बाद भी कुछ समय में दोबारा उगने की विशेषता का उदाहरण देते हुए उन्होंने जीवन में सकारात्मकता और पुनः उठ खड़े होने का संदेश दिया।

उन्होंने दुर्वा को लेकर धार्मिक मान्यता बताते हुए कहा कि एक दुर्वा में तीन कमल अर्थात ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना जाता है। दुर्वा की माला से दीप का श्रृंगार कर पूजा करने की परंपरा और अष्ट सिद्धि-नौ निधि से जुड़ी मान्यताओं का भी उल्लेख किया।

उन्होंने श्रद्धालुओं को सलाह दी कि प्रदोष के दिन शिवालय में जाकर दुर्वा से भगवान शिव का श्रृंगार करें और पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करें।

भक्तों के पत्र पढ़कर सुनाए, नशामुक्ति से लेकर सरकारी नौकरी तक की चर्चा

कथा के दौरान कथावाचक ने पहले की तरह श्रद्धालुओं की ओर से भेजे गए पत्र भी पढ़कर सुनाए। इनमें लखनऊ की एक महिला का पत्र शराब की लत से मुक्ति से संबंधित था, जबकि कानपुर की एक महिला ने सरकारी नौकरी से जुड़ी अपनी परेशानी साझा की थी।

कथावाचक ने इन पत्रों के माध्यम से लोगों को विश्वास और सकारात्मक सोच बनाए रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति यह कहता है कि किसी ने उस पर कुछ कर दिया है या उसका जीवन किसी दूसरे व्यक्ति के कारण बिगड़ रहा है, तो उसे यह समझना चाहिए कि इंसान अपने कर्मों और निर्णयों से भी अपना भविष्य बनाता और बिगाड़ता है।

उन्होंने परिवार और रिश्तों को लेकर भी कई उदाहरण दिए। पिता के साथ बाजार जाने पर किसी दूसरे व्यक्ति से पैसे मांगने के बजाय पिता से और पति के साथ जाने पर पति या सास-ससुर से अपनी जरूरत साझा करने की बात कही। इसके माध्यम से उन्होंने परिवार के भीतर विश्वास और आपसी सहयोग को महत्व दिया।

शराब की लत से बर्बाद परिवार को मंच पर बुलाया

कथा के दौरान एक ऐसा परिवार भी चर्चा में रहा, जिसका जीवन कभी शराब की लत के कारण बुरी तरह प्रभावित हो गया था। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि उनका घर तक बिक चुका था। कथावाचक ने इस परिवार को मंच पर बुलाकर बातचीत की।

उन्होंने उस परिवार का उदाहरण देते हुए नशे से दूर रहने और परिवार को प्राथमिकता देने का संदेश दिया। इसके अलावा, एक दिन पहले जिन लोगों का उदाहरण कथा में दिया गया था, वे भी अगले दिन मंच पर पहुंचे। उन्हें श्रद्धालुओं के सामने बुलाकर बातचीत की गई।

‘एक लोटा जल सभी समस्या का हल’ का दिया संदेश

कथा में भगवान शिव की भक्ति को सरल बताते हुए ‘एक लोटा जल सभी समस्या का हल’ का संदेश दिया गया। कथावाचक ने कहा कि भगवान शिव की आराधना के लिए बड़े आडंबरों की आवश्यकता नहीं है। सच्ची श्रद्धा, विश्वास और नियमित पूजा का अपना महत्व है।

इस दौरान ‘मांगा है भोलेनाथ से वरदान एक ही…’ भजन पर पूरा पंडाल एक स्वर में गूंज उठा। वहीं ‘दया करो हे भोलेनाथ, मस्त रहूं तेरी मस्ती में…’ भजन शुरू होते ही श्रद्धालु अपने स्थानों पर खड़े हो गए और तालियां बजाकर भक्ति में शामिल हो गए।

अरुण सिंह ने किया भव्य शिव मंदिर निर्माण का ऐलान

कथा के आयोजक अरुण सिंह ने छठवें दिन एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जिस स्थान पर शिव कथा का आयोजन हो रहा है, वहां भगवान शिव का भव्य मंदिर बनवाया जाएगा। मंदिर का नाम ‘चंद्रमौलेश्वर महादेव’ रखा जाएगा।

अरुण सिंह ने कहा कि भगवान शिव किसी की आंखों में आंसू नहीं देख सकते। उन्होंने इस नाम के पीछे भगवान शिव से जुड़ा प्रसंग भी कथा के दौरान बताया। साथ ही उन्होंने भविष्य में इसी स्थान पर दोबारा शिव कथा आयोजित करने की इच्छा जाहिर की।

मंत्री मनोज पांडेय ने की आयोजकों और श्रद्धालुओं की सराहना

छठवें दिन उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री मनोज पांडेय भी कथा स्थल पहुंचे। उन्होंने भगवान शिव के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए आयोजक अरुण सिंह और उपस्थित श्रद्धालुओं की सराहना की।

मंत्री ने कहा कि इस पवित्र धरती पर आकर श्रद्धालुओं ने केवल शिव कथा ही नहीं सुनी, बल्कि भगवान शिव की भक्ति और आशीर्वाद को भी प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन को लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

उन्होंने प्रदेश सरकार की ओर से सनातन परंपराओं और धार्मिक आयोजनों को मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश और आशीर्वाद भी कार्यक्रम के संदर्भ में साझा किया गया। उन्होंने महिला सुरक्षा और प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार के प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि मोदी और योगी सरकार शिव भक्तों तथा सनातन परंपराओं के साथ खड़ी है।

‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ से गूंजता रहा पूरा उन्नाव

छठवें दिन कथा स्थल पर ‘श्री शिवाय नमस्तुभ्यं’ का उद्घोष लगातार सुनाई देता रहा। आयोजन स्थल के आसपास भी इस मंत्र से जुड़े स्टीकर और धार्मिक संदेश लगाए गए थे। हर तरफ भगवान शिव की भक्ति का वातावरण दिखाई दिया।

कुल मिलाकर छठवें दिन की कथा में धार्मिक प्रसंगों के साथ पारिवारिक संस्कार, युवाओं को दिशा देने, नशामुक्ति, आस्था, सीहोर धाम के उल्लेख और भव्य शिव मंदिर निर्माण की घोषणा प्रमुख रूप से चर्चा में रही। डेढ़ लाख श्रद्धालुओं की उपस्थिति के दावे के बीच आयोजकों ने भविष्य में भी इसी स्थान पर शिव कथा और धार्मिक गतिविधियां जारी रखने का संकल्प दोहराया।

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