लखनऊ/नई दिल्ली, 25 सितंबर 2026। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस ने शुक्रवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठाते हुए ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, उन्हें पद से हटाने और उनके कार्यकाल में लिए गए फैसलों तथा मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की।
दिल्ली के जंतर-मंतर सहित देश के कई हिस्सों में कांग्रेस कार्यकर्ता सड़कों पर उतरे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी प्रदेश कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में जोरदार प्रदर्शन हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर मार्च करने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर रोकने की कोशिश की, जिसके बाद कुछ स्थानों पर पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बनी। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया और बाद में ईको गार्डन ले जाया गया, जहां से देर शाम उन्हें रिहा किए जाने की जानकारी सामने आई है।
‘वोट चोर-गद्दी छोड़, ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे
लखनऊ में प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “वोट चोर-गद्दी छोड़”, “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो” और “वोट चोर कहां मिलेंगे-बीजेपी के दफ्तर में” जैसे नारे लगाए। कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कल से हो रही मूसलाधार बारिश के बावजूद प्रदेश के विभिन्न जनपदों से बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और वरिष्ठ नेता प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय से मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय, जनपथ मार्केट की ओर मार्च का कार्यक्रम रखा गया था। प्रदर्शन का नेतृत्व अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के उत्तर प्रदेश प्रभारी एवं पूर्व मंत्री राजेन्द्र पाल गौतम तथा उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने किया।
कांग्रेस के मुताबिक, मार्च जब माल एवेन्यू से आगे बढ़ा तो सुन्नी वक्फ बोर्ड के पास भारी पुलिस बल ने बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई और कई कांग्रेस नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भी लखनऊ में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर मार्च किया और पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद टकराव की स्थिति बनी।
राजेन्द्र पाल गौतम का आरोप—‘चुनाव आयोग को बीजेपी की बी टीम बना दिया’
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेन्द्र पाल गौतम ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने चुनाव आयोग को भारतीय जनता पार्टी की “बी टीम” बना दिया है और संविधान द्वारा निर्वाचन आयोग को दी गई शक्तियों का इस्तेमाल निष्पक्ष चुनाव कराने के बजाय भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया जा रहा है।
गौतम ने कहा कि कांग्रेस के अनुसार मतदाता सूची में गड़बड़ी और “वोट चोरी” हो रही है तथा इसके लिए मुख्य चुनाव आयुक्त को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। उन्होंने ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
हालांकि, ये कांग्रेस और उसके नेताओं द्वारा लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। निर्वाचन आयोग की ओर से SIR और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर अलग-अलग मौकों पर स्पष्टीकरण दिया गया है।
अजय राय बोले—‘ज्ञानेश कुमार को तत्काल हटाया जाए’
उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से निर्वाचन आयोग की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाती रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने पहले भी चुनाव प्रक्रिया, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर सवाल उठाए हैं।
अजय राय ने आरोप लगाया कि फर्जी मतदाताओं के नाम जोड़ने, वैध मतदाताओं के नाम काटने और Form-6 में कथित अनियमितताओं को लेकर कांग्रेस पहले से अपनी आपत्ति दर्ज कराती रही है। उनके मुताबिक, मौजूदा विवाद ने कांग्रेस के पुराने सवालों को और गंभीर बना दिया है।
उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग एक स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था है और उसके ऊपर चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष एवं पारदर्शी बनाए रखने की जिम्मेदारी है। कांग्रेस का आरोप है कि SIR और मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया ने चुनावी पारदर्शिता को लेकर नए सवाल खड़े किए हैं।
अजय राय ने कहा कि कांग्रेस का आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक ज्ञानेश कुमार को पद से हटाया नहीं जाता।
SIR बना विवाद का मुख्य केंद्र
इस पूरे विवाद के केंद्र में Special Intensive Revision यानी SIR है। यह प्रक्रिया मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़ी है। निर्वाचन आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट अथवा अपात्र मतदाताओं से संबंधित प्रविष्टियों की पहचान करना है।
हालांकि, विपक्षी दलों ने SIR की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं और यदि किसी पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची से बाहर हो जाता है तो उसका मतदान का अधिकार प्रभावित हो सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने 25 सितंबर को देशव्यापी प्रदर्शन का आह्वान किया था। कांग्रेस ने अपने प्रदेश संगठनों को राज्य निर्वाचन कार्यालयों की ओर मार्च निकालने के निर्देश दिए थे और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे/हटाए जाने तथा चुनावी फैसलों एवं मतदाता सूची में हुए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की थी।
दिल्ली से लेकर कई राज्यों तक प्रदर्शन
कांग्रेस का प्रदर्शन केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली, लखनऊ, चंडीगढ़, जम्मू, देहरादून, गुवाहाटी, कोलकाता और अन्य स्थानों पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया।
दिल्ली में जंतर-मंतर के आसपास कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। कई जगह पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बैरिकेडिंग के जरिए रोकने का प्रयास किया। कुछ राज्यों में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और पुलिस कार्रवाई की खबरें भी सामने आईं।
चंडीगढ़ में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ प्रदर्शन किया और SIR से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। पंजाब में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने CEC के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए SIR को लेकर भी अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।
इस तरह कांग्रेस ने इस मुद्दे को राज्य और स्थानीय स्तर से निकालकर राष्ट्रीय राजनीतिक मुद्दा बनाने की कोशिश की है।
कांग्रेस ने 28 सितंबर को भी प्रदर्शन का ऐलान किया
कांग्रेस ने 25 सितंबर के राज्य स्तर के विरोध प्रदर्शन के बाद 28 सितंबर को जिला स्तर पर भी प्रदर्शन करने की घोषणा की है। पार्टी के अनुसार जिला कांग्रेस कमेटियां संबंधित जिला मुख्यालयों और कलेक्टरेट की ओर मार्च करेंगी।
कांग्रेस की मांग केवल CEC के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। पार्टी ने ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग भी उठाई है।
चुनाव आयोग पर लगे आरोपों के बीच सामने आया आंतरिक मतभेद का मुद्दा
विवाद को और हवा उस समय मिली जब मीडिया रिपोर्टों में निर्वाचन आयोग के भीतर SIR और अन्य निर्णयों को लेकर कथित तौर पर अलग-अलग राय सामने आने की बात कही गई।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं को लेकर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची, Form-6, चुनावी डेटा और SIR से जुड़े मुद्दों का उल्लेख किया गया था।
इन रिपोर्टों को विपक्ष ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने के लिए इस्तेमाल किया है।
हालांकि, निर्वाचन आयोग से जुड़े सूत्रों ने इन दावों की अलग व्याख्या की है। आयोग की ओर से कहा गया कि SIR समेत महत्वपूर्ण निर्णय चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए और सामने आई टिप्पणियों अथवा प्रश्नों को आंतरिक विचार-विमर्श की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। इसलिए इस मामले में आरोपों और आयोग के पक्ष को अलग-अलग देखना जरूरी है।
SIR को लेकर सुप्रीम कोर्ट में भी सवाल
मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर न्यायिक स्तर पर भी सवाल सामने आए हैं। दिल्ली में SIR के दौरान कुछ मतदाताओं को “logical discrepancy” जैसी श्रेणियों के तहत नोटिस दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निर्वाचन आयोग से इस वर्गीकरण के आधार और प्रक्रिया को स्पष्ट करने को कहा है।
पश्चिम बंगाल में भी SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं और अपील की प्रक्रिया को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पहुंचा है। निर्वाचन आयोग ने अदालत को बताया कि बड़ी संख्या में ऐसे मतदाताओं ने पुनः नाम शामिल करने के लिए अपील की है। आयोग ने यह भी कहा कि हटाए गए नामों में मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित और डुप्लीकेट प्रविष्टियां शामिल थीं।
इससे स्पष्ट है कि SIR केवल राजनीतिक बहस का मुद्दा नहीं है, बल्कि मतदाता सूची की प्रक्रिया, पात्र मतदाताओं के अधिकार और सत्यापन के तरीके को लेकर कानूनी एवं प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
प्रदर्शन में कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता शामिल
लखनऊ के प्रदर्शन में कांग्रेस की ओर से जारी सूची के अनुसार नेता कांग्रेस विधानमंडल दल आराधना मिश्रा मोना, राष्ट्रीय सचिव अब्दुल हन्नान, संजीव आर्या, अभिषेक दत्त, जगदीश चन्द्र जांगिड़, कुणाल चौधरी और वरुण चौधरी, सांसद राकेश राठौर, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ब्रजलाल खाबरी सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
इसके अलावा सांसद तनुज पुनिया, पूर्व सांसद पी.एल. पुनिया, पूर्व सांसद कुंवर दानिश अली, कांग्रेस प्रवक्ता अभय दुबे, पूर्व विधायक लुईस खुर्शीद, गजराज सिंह, प्रदीप माथुर, श्यामकिशोर शुक्ल, गयादीन अनुरागी, इन्दल रावत, मीडिया चेयरमैन कुंवर सिंह निषाद सहित बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं के शामिल होने की जानकारी कांग्रेस ने दी।
विवाद अब चुनावी पारदर्शिता बनाम निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया का मुद्दा
ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस का यह आंदोलन ऐसे समय हुआ है जब मतदाता सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक बहस तेज है।
कांग्रेस जहां इसे लोकतंत्र, मताधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जोड़कर देख रही है, वहीं निर्वाचन आयोग की ओर से SIR और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपने प्रशासनिक एवं कानूनी आधार पर स्पष्टीकरण दिए जा रहे हैं।
इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि मतदाता सूची में किसी पात्र नागरिक का नाम न छूटे और चुनाव प्रक्रिया पर जनता का भरोसा बना रहे। आने वाले दिनों में SIR से जुड़े न्यायिक फैसले, निर्वाचन आयोग की ओर से जारी होने वाले स्पष्टीकरण और राजनीतिक दलों की आगे की रणनीति इस विवाद की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल कांग्रेस ने अपने आंदोलन को जारी रखने का ऐलान किया है और 28 सितंबर को जिला स्तर पर प्रदर्शन की तैयारी है। वहीं, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कांग्रेस के आरोपों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।
लखनऊ में बारिश के बीच कांग्रेस का प्रदर्शन, पुलिस से टकराव और नेताओं की गिरफ्तारी ने उत्तर प्रदेश में SIR तथा निर्वाचन आयोग के खिलाफ कांग्रेस के आंदोलन को और चर्चा में ला दिया है। देश के अलग-अलग हिस्सों में हुए प्रदर्शनों से स्पष्ट है कि ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, SIR की प्रक्रिया और मतदाता सूची में बदलाव आने वाले दिनों में विपक्ष और निर्वाचन आयोग के बीच जारी राजनीतिक एवं सार्वजनिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।
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