लखनऊ, 26 सितंबर। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के लखनऊ स्थित मुख्यालय नेहरू भवन, 10 माल एवेन्यू में शनिवार को पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती सादगी के साथ मनाई गई। इस अवसर पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और देश की अर्थव्यवस्था तथा सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान को याद किया।
कार्यक्रम में कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’, कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे सहित प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नेताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह के राजनीतिक जीवन, आर्थिक नीतियों और प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे।
कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का आर्थिक चिंतन और सार्वजनिक जीवन में उनका नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को देश की दिशा और नीतियों पर विचार करने के लिए प्रेरित करता रहेगा। वहीं राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने उनके कार्यकाल से जुड़े सूचना का अधिकार कानून और मनरेगा जैसे कदमों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों का उद्देश्य आम नागरिकों को अधिकार और ग्रामीण परिवारों को रोजगार सुरक्षा से जोड़ना था।
सादगी के साथ हुआ श्रद्धांजलि कार्यक्रम
उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को बड़े सार्वजनिक आयोजन के बजाय सादगीपूर्ण तरीके से रखा गया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह के चित्र पर माल्यार्पण किया और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
कार्यक्रम में मौजूद नेताओं ने डॉ. सिंह को ऐसे राजनेता के रूप में याद किया, जिनकी पहचान राजनीति के साथ-साथ अर्थशास्त्र के क्षेत्र में भी रही। भारत सरकार की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध उनके जीवन-वृत्त के अनुसार, डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री बनने से पहले वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक, योजना आयोग और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग सहित कई महत्वपूर्ण संस्थानों में जिम्मेदारियां निभाईं।
डॉ. सिंह का जन्म 26 सितंबर 1932 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के गाह गांव में हुआ था। उन्होंने अर्थशास्त्र की पढ़ाई पंजाब विश्वविद्यालय के बाद कैम्ब्रिज और ऑक्सफोर्ड में की। आगे चलकर उनका अकादमिक और प्रशासनिक अनुभव भारत सरकार की आर्थिक नीतियों से भी जुड़ा।
1991 का दौर और आर्थिक सुधारों से जुड़ी भूमिका
कांग्रेस नेताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह के आर्थिक योगदान की चर्चा करते हुए विशेष रूप से उनके वित्त मंत्री के रूप में कार्यकाल को याद किया।
डॉ. मनमोहन सिंह ने 1991 से 1996 तक भारत के वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जीवनी में भी इस अवधि को भारत के आर्थिक इतिहास के महत्वपूर्ण दौर के रूप में दर्ज किया गया है और आर्थिक सुधारों के लिए व्यापक नीति तैयार करने में उनकी भूमिका का उल्लेख किया गया है।
यही वह दौर था जब भारतीय अर्थव्यवस्था में व्यापक आर्थिक बदलावों की शुरुआत हुई। डॉ. सिंह की भूमिका को समझने के लिए उनके पूरे प्रशासनिक और आर्थिक अनुभव को भी देखना जरूरी है। वे इससे पहले वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार, आर्थिक मामलों के विभाग में सचिव, योजना आयोग में महत्वपूर्ण पद और भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर जैसी जिम्मेदारियां निभा चुके थे।
कांग्रेस नेताओं ने इसी आर्थिक पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए कहा कि डॉ. सिंह की नीतिगत सोच का प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा पर लंबे समय तक दिखाई देता रहा।
प्रधानमंत्री के रूप में दो कार्यकाल
डॉ. मनमोहन सिंह ने 22 मई 2004 को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली और 2009 में दूसरी बार प्रधानमंत्री बने। उन्होंने 2004 से 2014 तक दो कार्यकालों में केंद्र सरकार का नेतृत्व किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वे 1991 से राज्यसभा के सदस्य रहे और 1998 से 2004 के बीच राज्यसभा में विपक्ष के नेता भी रहे।
शनिवार को आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल के दौरान लागू की गई विभिन्न योजनाओं और कानूनों का भी उल्लेख किया।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ के अनुसार, डॉ. सिंह की पहचान केवल प्रधानमंत्री के तौर पर नहीं बल्कि आर्थिक मामलों की गहरी समझ रखने वाले सार्वजनिक व्यक्ति के रूप में भी रही। कांग्रेस की ओर से कहा गया कि उनके आर्थिक विचार और सार्वजनिक जीवन में अपनाई गई कार्यशैली को पार्टी आज भी महत्वपूर्ण मानती है।
आरटीआई और मनरेगा का किया गया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय प्रवक्ता अभय दुबे ने सूचना का अधिकार अधिनियम और मनरेगा का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने इन्हें डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाले दौर से जुड़ी महत्वपूर्ण पहलों के रूप में बताया।
आरटीआई कानून ने सरकारी सूचनाओं तक नागरिकों की पहुंच के लिए एक कानूनी ढांचा उपलब्ध कराया। दूसरी ओर, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम यानी मनरेगा ग्रामीण परिवारों को रोजगार की कानूनी गारंटी देने वाली व्यवस्था के रूप में लागू हुआ।
कांग्रेस नेताओं ने इन पहलों को ग्रामीण और आम नागरिकों से जुड़ी नीतियों के संदर्भ में याद किया। साथ ही शिक्षा के अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून का भी उल्लेख करते हुए कहा गया कि डॉ. सिंह के प्रधानमंत्री कार्यकाल में सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई महत्वपूर्ण कानून और योजनाएं सामने आईं।
यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि इन नीतियों और उनके प्रभाव को लेकर राजनीतिक दलों के बीच अलग-अलग आकलन रहे हैं। ऐसे में डॉ. सिंह की विरासत को समझने के लिए उनके कार्यकाल की उपलब्धियों के साथ उस समय की नीतिगत बहसों और उनके प्रभावों को भी व्यापक संदर्भ में देखना जरूरी है।
अर्थशास्त्री से प्रधानमंत्री तक का सफर
डॉ. मनमोहन सिंह का सार्वजनिक जीवन पारंपरिक राजनीतिक पृष्ठभूमि से अलग रहा। उनका लंबा करियर अकादमिक क्षेत्र और आर्थिक प्रशासन से शुरू हुआ।
उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन किया। इसके बाद भारत सरकार में आर्थिक सलाहकार और वित्त मंत्रालय में मुख्य आर्थिक सलाहकार सहित विभिन्न जिम्मेदारियां संभालीं। वे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर भी रहे।
इसके बाद राजनीति में उनकी भूमिका बढ़ी और वे राज्यसभा के सदस्य बने। 1991 में वित्त मंत्री बनने के साथ ही वे देश की आर्थिक नीति के केंद्र में आए। लगभग एक दशक बाद 2004 में वे प्रधानमंत्री बने।
इस तरह डॉ. सिंह का राजनीतिक सफर प्रशासन, अर्थव्यवस्था और संसदीय राजनीति—तीनों क्षेत्रों से होकर गुजरा।
सार्वजनिक जीवन में सादगी का उल्लेख
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में कांग्रेस नेताओं ने डॉ. मनमोहन सिंह के सार्वजनिक व्यवहार और व्यक्तिगत शैली का भी उल्लेख किया। पार्टी नेताओं ने उनके नेतृत्व को संजीदगी और सादगी से जोड़ते हुए अपने विचार व्यक्त किए।
प्रधानमंत्री कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर भी डॉ. सिंह के व्यक्तित्व का उल्लेख एक विद्वान, अर्थशास्त्री और अपेक्षाकृत सरल सार्वजनिक शैली वाले नेता के रूप में किया गया है।
उनके जीवन में अकादमिक उपलब्धियां भी महत्वपूर्ण रहीं। उन्होंने कैम्ब्रिज से अर्थशास्त्र में पढ़ाई की और ऑक्सफोर्ड के नफील्ड कॉलेज से डी.फिल. की उपाधि प्राप्त की। उन्हें अपने सार्वजनिक और अकादमिक जीवन में कई सम्मान भी मिले, जिनमें 1987 का पद्म विभूषण शामिल है।
प्रदेश कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता रहे मौजूद
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मीडिया विभाग के चेयरमैन कुंवर सिंह निषाद, मीडिया विभाग के कोऑर्डिनेटर पुनीत पाठक, प्रवक्ता सिद्धिश्री, अरशद खुर्शीद समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी ने डॉ. मनमोहन सिंह के चित्र पर पुष्प अर्पित किए और उनके सार्वजनिक जीवन को याद किया।
प्रदेश कांग्रेस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि डॉ. सिंह की आर्थिक सोच, प्रशासनिक अनुभव और सार्वजनिक जीवन की शैली को कांग्रेस कार्यकर्ता एक महत्वपूर्ण विरासत के रूप में देखते हैं।
आर्थिक नीतियों पर आज भी होती है चर्चा
डॉ. मनमोहन सिंह का नाम भारतीय आर्थिक सुधारों के संदर्भ में लगातार चर्चा में आता है। प्रधानमंत्री कार्यालय के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी 1991 से 1996 के बीच वित्त मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल और आर्थिक सुधारों में उनकी भूमिका को प्रमुखता से दर्ज किया गया है।
उनकी आर्थिक सोच का प्रभाव केवल वित्त मंत्रालय तक सीमित नहीं रहा। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी आर्थिक नीति, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकास से जुड़े विषय उनके सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे।
उनकी राजनीतिक विरासत का आकलन अलग-अलग राजनीतिक दल और विशेषज्ञ अपने-अपने दृष्टिकोण से करते रहे हैं। लेकिन यह तथ्य निर्विवाद रूप से दर्ज है कि वे भारत के वित्त मंत्री और बाद में दो कार्यकाल तक प्रधानमंत्री रहे तथा भारतीय आर्थिक नीति के महत्वपूर्ण दौर में उनकी प्रमुख भूमिका रही।
जयंती पर याद किया गया योगदान
26 सितंबर को डॉ. मनमोहन सिंह की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने उनके जीवन और योगदान को याद करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया। पार्टी नेताओं ने आर्थिक सुधारों से लेकर सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं तक उनके कार्यकाल से जुड़े विभिन्न विषयों का उल्लेख किया।
आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने उनके आर्थिक चिंतन और नेतृत्व को याद करते हुए श्रद्धांजलि दी, जबकि अभय दुबे ने आरटीआई और मनरेगा जैसी पहलों का उल्लेख किया।
कार्यक्रम का संदेश यही रहा कि डॉ. मनमोहन सिंह का सार्वजनिक जीवन भारतीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण दौर से जुड़ा रहा है। अर्थशास्त्र से लेकर प्रशासन और फिर प्रधानमंत्री पद तक उनका सफर भारतीय सार्वजनिक जीवन में एक अलग तरह की राजनीतिक यात्रा के रूप में दर्ज है।
उत्तर प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम इसी स्मरण और श्रद्धांजलि के रूप में आयोजित किया गया, जहां पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पूर्व प्रधानमंत्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें याद किया।
नई सोच नई ऊर्जा के लिए यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति और भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड में उपलब्ध डॉ. मनमोहन सिंह की जीवनी संबंधी जानकारी के आधार पर तैयार की गई है।
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