उत्तर प्रदेश पुलिस की कांस्टेबल भर्ती को लेकर एक बार फिर सियासी और सामाजिक बहस तेज हो गई है। इस बार विवाद का केंद्र बना है उम्र सीमा का नियम, जिसे लेकर अभ्यर्थियों के बीच गहरी नाराज़गी देखी जा रही है। भर्ती प्रक्रिया में तय उम्र सीमा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह व्यवस्था सभी वर्गों के साथ समान न्याय कर रही है या फिर किसी वर्ग के साथ भेदभाव हो रहा है।

भर्ती नियमों के अनुसार, जनरल (सामान्य) वर्ग के अभ्यर्थियों के लिए अधिकतम उम्र सीमा 22 वर्ष तय की गई है, जबकि SC/ST/OBC वर्ग के उम्मीदवारों को 27 वर्ष तक की छूट दी गई है। यानी आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को उम्र में 5 साल तक की अतिरिक्त राहत मिल रही है। इसी अंतर को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक बहस छिड़ी हुई है।

जनरल वर्ग के अभ्यर्थियों में नाराज़गी

जनरल वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि आज के समय में 22 वर्ष की उम्र तक प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी तैयारी कर पाना बेहद कठिन हो गया है। कई छात्र 12वीं के बाद ग्रेजुएशन करते हैं, फिर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी शुरू करते हैं। ऐसे में 22 साल की उम्र सीमा उनके लिए बहुत कम है।

अभ्यर्थियों का तर्क है कि जब सभी को समान परीक्षा देनी है, समान शारीरिक मानक पूरे करने हैं और समान जिम्मेदारी निभानी है, तो उम्र सीमा में इतना बड़ा अंतर क्यों? उनका कहना है कि यह नियम योग्य उम्मीदवारों के अवसर सीमित कर रहा है और मानसिक दबाव भी बढ़ा रहा है।

आरक्षित वर्ग का पक्ष

वहीं SC/ST/OBC वर्ग के उम्मीदवारों और समर्थकों का कहना है कि उम्र में छूट कोई “विशेषाधिकार” नहीं बल्कि सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन की भरपाई के लिए दी जाती है। उनका तर्क है कि ऐतिहासिक रूप से इन वर्गों को शिक्षा, संसाधन और अवसरों की कमी झेलनी पड़ी है, इसलिए सरकार द्वारा दी गई उम्र छूट पूरी तरह संवैधानिक और न्यायसंगत है।

उनका कहना है कि यदि यह छूट हटा दी जाए या कम की जाए, तो बड़ी संख्या में आरक्षित वर्ग के युवा प्रतियोगिता से बाहर हो जाएंगे, जिससे सामाजिक संतुलन और प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।

सोशल मीडिया पर तीखी बहस

इस मुद्दे ने सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त तूल पकड़ लिया है। ट्विटर (X), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #UPPoliceRecruitment, #AgeLimitControversy जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। एक तरफ जनरल वर्ग के युवा “उम्र सीमा बढ़ाओ” की मांग कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग के लोग मौजूदा व्यवस्था को बनाए रखने की बात कह रहे हैं।

कुछ यूजर्स का कहना है कि समाधान यह नहीं है कि किसी वर्ग की छूट छीनी जाए, बल्कि सभी वर्गों के लिए उम्र सीमा को तर्कसंगत रूप से बढ़ाया जाए, ताकि बराबरी का माहौल बने।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय के साथ भर्ती नियमों की समीक्षा जरूरी है। आज प्रतियोगी परीक्षाओं का स्तर, पाठ्यक्रम और प्रतिस्पर्धा पहले से कहीं अधिक कठिन हो चुकी है। ऐसे में 22 वर्ष की उम्र सीमा वाकई कई उम्मीदवारों के लिए कम पड़ सकती है।

कुछ विशेषज्ञ सुझाव दे रहे हैं कि सभी वर्गों के लिए न्यूनतम और अधिकतम उम्र सीमा में 2–3 वर्ष की वृद्धि की जा सकती है, जिससे विवाद भी कम होगा और योग्य उम्मीदवारों को अवसर भी मिलेगा।

सरकार और पुलिस विभाग का रुख

फिलहाल सरकार या Uttar Pradesh Police की ओर से इस विवाद पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। भर्ती नियमों का आधार राज्य सरकार द्वारा तय आरक्षण नीति और पूर्व में बने नियम हैं। हालांकि, अभ्यर्थियों का दबाव बढ़ता जा रहा है और संभावना जताई जा रही है कि सरकार इस मुद्दे पर पुनर्विचार कर सकती है।

निष्कर्ष

UP पुलिस कांस्टेबल भर्ती में उम्र सीमा का मुद्दा सिर्फ एक नियम का सवाल नहीं, बल्कि समान अवसर बनाम सामाजिक न्याय की बड़ी बहस बन चुका है। एक तरफ जनरल वर्ग के युवा खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ आरक्षित वर्ग अपनी संवैधानिक छूट को जायज़ ठहरा रहा है।

अब देखना यह है कि सरकार इस विवाद को कैसे संतुलित करती है—क्या नियमों में बदलाव होगा, या मौजूदा व्यवस्था ही जारी रहेगी। लेकिन इतना तय है कि जब तक इस पर स्पष्ट और संतुलित निर्णय नहीं आता, तब तक यह मुद्दा चर्चा और बहस के केंद्र में बना रहेगा।

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