उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की ड्राफ्ट लिस्ट जारी होते ही राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस ड्राफ्ट सूची में करीब 2.89 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जिसके बाद प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या घटकर 12.55 करोड़ रह गई है। यह प्रक्रिया आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को शुद्ध और अद्यतन करने के उद्देश्य से की गई है।
चुनाव आयोग के अनुसार, SIR के तहत उन मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं जो मृत पाए गए, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर शिफ्ट हो चुके हैं, दोहरी प्रविष्टि वाले थे या जिनका सत्यापन नहीं हो सका। आयोग का कहना है कि यह कदम फर्जी वोटिंग और गड़बड़ियों को रोकने के लिए जरूरी था। इससे पहले देश के 11 अन्य राज्यों में इसी तरह की प्रक्रिया के दौरान 3.69 करोड़ नाम मतदाता सूचियों से हटाए जा चुके हैं।
ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के साथ ही आयोग ने आम जनता को 30 दिन का समय दिया है, जिसमें वे दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम गलती से सूची से हट गया है या विवरण में कोई त्रुटि है, तो वह निर्धारित समय सीमा के भीतर सुधार करा सकता है। इसके लिए ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम उपलब्ध कराए गए हैं।
राज्यभर में बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन किया गया था। कई इलाकों में यह प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण रही, क्योंकि बड़ी संख्या में लोग अस्थायी रूप से दूसरे शहरों या राज्यों में काम के सिलसिले में रहते हैं। ऐसे मामलों में कई मतदाताओं का सत्यापन नहीं हो पाया, जिससे उनके नाम ड्राफ्ट लिस्ट से बाहर हो गए।
इस बड़े पैमाने पर नाम कटने को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने आशंका जताई है कि कहीं यह प्रक्रिया किसी वर्ग विशेष को प्रभावित न करे। वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह पूरी तरह निष्पक्ष और नियमों के अनुसार की गई प्रक्रिया है और किसी भी तरह की गलती को सुधारने के लिए दावा-आपत्ति का प्रावधान रखा गया है।
चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे अपनी प्रविष्टि स्वयं जांचें और यदि कोई त्रुटि हो तो तुरंत सुधार कराएं। आयोग के अधिकारियों का कहना है कि अंतिम मतदाता सूची दावा-आपत्तियों के निपटारे के बाद ही जारी की जाएगी, जिससे कोई भी पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित न रह जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटना यह दर्शाता है कि लंबे समय से मतदाता सूची में सुधार की जरूरत थी। हालांकि, यह भी जरूरी है कि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रहे और आम मतदाता को पर्याप्त जानकारी व सुविधा मिले। यदि दावा-आपत्ति की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो यह कदम चुनावी व्यवस्था को और मजबूत बना सकता है।
फिलहाल, ड्राफ्ट लिस्ट जारी होने के बाद प्रदेशभर में लोग अपने नाम जांचने में जुट गए हैं। आने वाले 30 दिन यह तय करेंगे कि अंतिम मतदाता सूची कितनी सटीक और समावेशी होगी। चुनाव आयोग के लिए यह एक बड़ी जिम्मेदारी है कि वह हर योग्य मतदाता का नाम सूची में सुनिश्चित करे, ताकि लोकतंत्र की नींव और मजबूत हो सके।












