लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 68,500 शिक्षक भर्ती से जुड़े अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार जारी है। प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े अपने दावों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अभ्यर्थियों के मुताबिक 1 सितंबर से शुरू हुआ मौजूदा धरना 29वें दिन में पहुंच गया है और जब तक भर्ती प्रक्रिया का शेड्यूल जारी नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्होंने भर्ती के लिए निर्धारित शैक्षिक योग्यताएं पूरी कीं, शिक्षक पात्रता परीक्षाएं पास कीं और चयन प्रक्रिया से जुड़े आवश्यक मानकों को पूरा किया, इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति नहीं मिल सकी। उनका कहना है कि यह मामला केवल रोजगार का नहीं बल्कि आरक्षण व्यवस्था में कथित विसंगतियों का भी है।
10 सितंबर की बैठक का हवाला, अभ्यर्थियों का बड़ा दावा
आंदोलनकारियों ने 10 सितंबर को हुई एक बैठक का हवाला देते हुए कहा कि इस बैठक में शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और संबंधित मंत्रियों के सामने उन्होंने 68,500 शिक्षक भर्ती से जुड़े दस्तावेज और अपने पक्ष के साक्ष्य प्रस्तुत किए थे।
अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधि के मुताबिक बैठक में भर्ती प्रक्रिया और आरक्षण से संबंधित कई बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई। उनका दावा है कि बैठक में अधिकारियों और मंत्रियों के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों पर चर्चा के बाद मुख्यमंत्री के स्तर पर मामला रखने और भर्ती का शेड्यूल जारी कराने की बात कही गई थी।
हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि बैठक के बाद अब तक न तो भर्ती का नया शेड्यूल जारी हुआ है और न ही नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर कोई अंतिम आदेश सामने आया है। उनका कहना है कि 10 सितंबर से 29 सितंबर तक 19 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें अभी भी स्पष्ट समयसीमा नहीं मिली है।
आठ साल से संघर्ष का दावा
आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों का कहना है कि 68,500 शिक्षक भर्ती से संबंधित उनका संघर्ष नया नहीं है। उनके मुताबिक वे पिछले करीब आठ वर्षों से अलग-अलग स्तरों पर अपनी मांग उठाते रहे हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस दौरान उन्होंने अधिकारियों, विभागीय स्तर और आयोगों के सामने अपनी बात रखी। उनका आरोप है कि लगातार प्रक्रिया आगे बढ़ने के बजाय मामला अलग-अलग स्तरों पर लंबित होता रहा।
अभ्यर्थियों ने कहा कि उनके पास शिक्षक भर्ती के लिए आवश्यक शैक्षिक योग्यताएं हैं। उनके मुताबिक बीटीसी/संबंधित प्रशिक्षण, टीईटी और अन्य आवश्यक पात्रता परीक्षाएं पास करने के बावजूद उन्हें नियुक्ति का अवसर नहीं मिला।
भर्ती परीक्षा की कठिनाई का भी दिया हवाला
प्रदर्शनकारियों ने भर्ती से जुड़ी परीक्षा की कठिनाई का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कठिन चयन प्रक्रिया को पार किया था। उनका कहना है कि परीक्षा में उत्तरों की शुद्धता को लेकर काफी सख्त व्यवस्था थी और अभ्यर्थियों को निर्धारित उत्तर के अनुसार ही जवाब देना होता था।
अभ्यर्थियों का कहना है कि उन्होंने इस परीक्षा को भी सफलतापूर्वक पास किया और इसके बाद नियुक्ति की उम्मीद की, लेकिन लंबे समय तक नियुक्ति नहीं मिलने से उनकी आर्थिक और सामाजिक परेशानियां बढ़ती गईं।
आरक्षण को लेकर चार श्रेणियों पर सवाल
आंदोलनकारियों की सबसे प्रमुख आपत्ति आरक्षण प्रक्रिया को लेकर है। उनका आरोप है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC, दिव्यांगजन, भूतपूर्व सैनिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के आश्रितों से जुड़े आरक्षण प्रावधानों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि इन श्रेणियों को भर्ती प्रक्रिया में आरक्षित वर्ग के रूप में अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला। उनका कहना है कि यह केवल कुछ अभ्यर्थियों की नियुक्ति का मामला नहीं है, बल्कि आरक्षण के संवैधानिक प्रावधानों के अनुपालन से जुड़ा प्रश्न है।
हालांकि इन आरोपों के संबंध में संबंधित विभाग और अन्य जिम्मेदार पक्षों का आधिकारिक पक्ष भी महत्वपूर्ण है। ऐसे दावों पर अंतिम स्थिति संबंधित सरकारी आदेश, आयोग के निर्णय और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगी।
राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 7 जुलाई के आदेश का हवाला
आंदोलनकारियों ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के 7 जुलाई 2026 के आदेश का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि आयोग ने अपने आदेश में मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति और जिम्मेदार अधिकारियों की पहचान से जुड़े निर्देश दिए हैं।
प्रदर्शनकारियों के अनुसार आयोग ने यह भी कहा है कि यदि भर्ती प्रक्रिया में आरक्षण से संबंधित अनियमितता हुई है तो जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
आंदोलनकारियों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी अधिकारी या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप
धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने बेसिक शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि मामले को जानबूझकर लंबा खींचा गया और अलग-अलग स्तरों पर ऐसी दलीलें दी गईं, जिनके कारण समाधान में देरी हुई।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कभी मामला न्यायालय में लंबित होने की बात कही जाती है तो कभी समय बीत जाने को आधार बनाया जाता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इस तरह की प्रक्रियात्मक उलझनों के कारण अभ्यर्थियों को वर्षों तक इंतजार करना पड़ा।
इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के स्तर पर नहीं की गई है। संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।
आंदोलनकारियों ने लगाया नारा—‘लड़ेंगे आरक्षण चोरों से’
प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने आरक्षण के कथित उल्लंघन के खिलाफ तीखे नारे लगाए। आंदोलनकारियों की ओर से कहा गया कि वे अपने अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे।
इसी क्रम में उन्होंने नारा दिया—“हमने लड़े थे गोरों से, अब लड़ेंगे आरक्षण चोरों से।”
यह नारा आंदोलनकारियों द्वारा इस्तेमाल किया गया है और उनके विरोध की तीव्रता को दर्शाता है। हालांकि किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराने के लिए सक्षम जांच या कानूनी प्रक्रिया का निष्कर्ष आवश्यक होगा।
ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात का भी जिक्र
आंदोलनकारियों ने बताया कि वे 29 सितंबर को कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर से मिलने उनके आवास पहुंचे। उनके अनुसार 68,500 शिक्षक भर्ती का मामला पहले भी राजभर के सामने रखा जा चुका है।
प्रदर्शनकारियों का दावा है कि राजभर के साथ उनकी पहले भी कई मुलाकातें हुई हैं और प्रत्येक मुलाकात के बाद उन्हें प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद मिली।
अभ्यर्थियों के अनुसार राजभर ने उनसे कहा है कि 1 अक्टूबर को वह मुख्यमंत्री से मुलाकात कर इस मामले को उनके सामने रखेंगे। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्होंने संबंधित फाइल भी राजभर को उपलब्ध करा दी है।
अब अभ्यर्थियों की नजर 1 अक्टूबर की प्रस्तावित मुलाकात पर है। उनका कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि मुख्यमंत्री स्तर पर बातचीत के बाद भर्ती का शेड्यूल जारी करने की दिशा में ठोस निर्णय होगा।
‘नियुक्ति तक आंदोलन जारी रहेगा’
प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि केवल आश्वासन से उनका आंदोलन समाप्त नहीं होगा। उनका कहना है कि उन्हें भर्ती प्रक्रिया की स्पष्ट समयसीमा और नियुक्ति की दिशा में ठोस कार्रवाई चाहिए।
अभ्यर्थियों के मुताबिक जब तक भर्ती का शेड्यूल जारी नहीं होता और उनके मामले का समाधान नहीं होता, तब तक वे धरना समाप्त नहीं करेंगे।
उन्होंने सरकार से मांग की है कि पूरे मामले की समीक्षा कर आरक्षण से जुड़े सभी बिंदुओं को स्पष्ट किया जाए, पात्र अभ्यर्थियों के मामले में नियमानुसार निर्णय लिया जाए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारी तय की जाए।
OBC नेतृत्व को लेकर भी उठाए सवाल
आंदोलनकारियों से जब पूछा गया कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई प्रमुख OBC नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद हैं, फिर भी अभ्यर्थियों को लंबे समय से संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है, तो उन्होंने इसे गंभीर सवाल बताया।
उन्होंने कहा कि अलग-अलग राजनीतिक दलों और सामाजिक समूहों से जुड़े OBC नेताओं को इस मामले में अभ्यर्थियों की आवाज सरकार तक पहुंचानी चाहिए। इसी क्रम में उन्होंने ओमप्रकाश राजभर समेत अन्य OBC नेताओं का उल्लेख किया और उम्मीद जताई कि वे इस मुद्दे को सरकार के सामने प्रभावी तरीके से रखेंगे।
हालांकि यह राजनीतिक प्रतिनिधियों और सरकार पर निर्भर करेगा कि वे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और संबंधित दावों पर उनका आधिकारिक पक्ष क्या है।
अब 1 अक्टूबर पर टिकी नजर
68,500 शिक्षक भर्ती को लेकर चल रहे आंदोलन में अब 1 अक्टूबर की तारीख महत्वपूर्ण हो गई है। प्रदर्शनकारियों के अनुसार इसी दिन ओमप्रकाश राजभर मुख्यमंत्री से मुलाकात कर उनका पक्ष रख सकते हैं।
अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं और अब उन्हें आश्वासन के बजाय स्पष्ट निर्णय चाहिए।
फिलहाल 29वें दिन भी धरना जारी है। एक तरफ आंदोलनकारी भर्ती शेड्यूल और नियुक्ति की मांग पर अड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ आरक्षण से जुड़े आरोपों की वास्तविक स्थिति सरकारी दस्तावेजों, संबंधित आयोग के आदेशों और आगे होने वाली कार्रवाई से स्पष्ट होगी।
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