
Akhilesh Yadav ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जब 9 वर्षों में प्रदेश की जनता के लिए कोई बड़ा काम नहीं हुआ, तो अब आखिरी के 9 महीनों में मंत्री क्या कर लेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।
अखिलेश यादव ने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार और अत्याचार चरम पर है तथा पीडीए समाज के साथ लगातार अन्याय हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं और सरकार एक तरफ बजट की लूट कर रही है तो दूसरी तरफ जनता की जेब काटने का काम कर रही है।
जल जीवन मिशन का जिक्र करते हुए सपा प्रमुख ने कहा कि पानी की टंकियां भाजपा के भ्रष्टाचार का बोझ नहीं सह पा रही हैं और लगातार गिर रही हैं। उन्होंने स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था को बदहाल बताते हुए कहा कि कमीशनखोरी और मुनाफाखोरी की वजह से महंगाई और भ्रष्टाचार तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही उन्होंने वृक्षारोपण अभियान को “भ्रष्टारोपण” करार दिया।
स्मार्ट मीटर योजना पर हमला बोलते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार बिजली उपभोक्ताओं की जेब से पैसा निकालकर उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा प्रदेश की जनता को चौतरफा लूट रही है।
नौकरियों में आरक्षण घोटाले का आरोप लगाते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा लोगों के हक और अधिकार छीन रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा पीडीए की एकजुटता से घबराई हुई है, लेकिन समाज भाजपा की रणनीतियों को समझ चुका है और हर साजिश को नाकाम करेगा। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पीडीए समाज को हक, सम्मान और न्याय मिलेगा, गरीबों का मुफ्त इलाज होगा और केजी से पीजी तक बेटियों की शिक्षा मुफ्त की जाएगी।
मंत्रिमंडल विस्तार पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि इसमें मुख्यमंत्री की कोई भूमिका नहीं होती, “उधर से पर्ची आएगी और यहां सिर्फ पढ़ी जाएगी।” उन्होंने भाजपा शासन में सीएम का मतलब “Courier & Messenger” बताया।
इसके अलावा अखिलेश यादव ने फिल्म देखने को लेकर भी तंज कसा और कहा कि जनता पूछ रही है कि फिल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे बैठकर। उन्होंने कहा कि “कर्मफल-कंसफल” का सिद्धांत समझकर शायद कुछ जागरण हो जाए और बदलाव भी आए।
अंत में उन्होंने कहा कि इंसान मूल रूप से बुरा नहीं होता, बल्कि उसका लालच और लोभ उसे गलत रास्ते पर ले जाता है। वहीं जब व्यक्ति स्वार्थ छोड़कर परमार्थ के मार्ग पर चलता है तो समाज और मानवता के लिए सकारात्मक बदलाव संभव होता है। “तमसो मा ज्योतिर्गमय” का संदेश देते हुए उन्होंने आत्मचिंतन और सुधार की बात कही।












