लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर और स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में नई युवा नीति तैयार कर रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल के तहत युवाओं के लिए शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार, उद्यमिता और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को एक व्यापक ढांचे से जोड़ने की तैयारी है।
प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग से जुड़ा है। योजना के तहत युवाओं को UPSC, UPPSC, NEET, JEE सहित अलग-अलग प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए संस्थागत स्तर पर मार्गदर्शन उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। इसका उद्देश्य यह है कि छात्रों को महंगे निजी कोचिंग संस्थानों पर पूरी तरह निर्भर न रहना पड़े और छोटे शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी बेहतर तैयारी का अवसर मिले।
हर जिले से कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंच बनाने की तैयारी
सरकार की योजना को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों तक ले जाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए फिजिकल और वर्चुअल, दोनों माध्यमों का इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
इस मॉडल में एक ओर स्थानीय स्तर पर कक्षाएं संचालित की जा सकती हैं, वहीं दूसरी ओर डिजिटल माध्यम से विशेषज्ञ शिक्षकों और सफल अभ्यर्थियों के मार्गदर्शन को बड़ी संख्या में छात्रों तक पहुंचाया जा सकेगा।
इससे उन विद्यार्थियों को विशेष फायदा मिलने की उम्मीद है जो आर्थिक कारणों, दूरी या पारिवारिक परिस्थितियों के कारण लखनऊ, प्रयागराज, दिल्ली या दूसरे बड़े कोचिंग केंद्रों तक नहीं जा पाते।
DM-SP से लेकर डॉक्टर और IIT इंजीनियर तक दे सकते हैं मार्गदर्शन
प्रस्तावित मॉडल में केवल पारंपरिक कोचिंग शिक्षकों पर निर्भर रहने के बजाय प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी छात्रों से जोड़ने की बात सामने आई है।
बताया गया है कि DM, SP, डॉक्टर और IIT से पढ़े इंजीनियर जैसे पेशेवर छात्रों को अपने अनुभव के आधार पर मार्गदर्शन दे सकते हैं। इसका मकसद केवल पाठ्यक्रम पढ़ाना नहीं बल्कि विद्यार्थियों को परीक्षा की रणनीति, समय प्रबंधन, करियर विकल्प और वास्तविक जीवन के अनुभव से परिचित कराना भी होगा।
हालांकि, किन अधिकारियों या विशेषज्ञों की नियमित कक्षाएं होंगी, इसका विस्तृत कार्यक्रम और आधिकारिक संचालन व्यवस्था सामने आना अभी बाकी है।
पहले से चल रही अभ्युदय योजना को मिल सकता है विस्तार
उत्तर प्रदेश में प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त तैयारी के लिए मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना पहले से संचालित है। वर्ष 2021 में शुरू की गई इस पहल के तहत UPSC, JEE, NEET, NDA, CDS जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग व्यवस्था विकसित की गई थी। उस समय सरकार ने ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा उन्हें बड़े कोचिंग शहरों की ओर पलायन से बचाने पर जोर दिया था।
नई युवा नीति के संदर्भ में अब इसी तरह की व्यवस्थाओं को और व्यापक स्तर पर ले जाने की दिशा में चर्चा हो रही है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार सभी कॉलेजों में अभ्युदय कोचिंग केंद्रों के विस्तार का प्रस्ताव भी सामने आया है।
युवाओं के लिए सिर्फ कोचिंग नहीं, रोजगार और उद्यमिता पर भी फोकस
नई युवा नीति का दायरा केवल प्रतियोगी परीक्षाओं तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। सरकार युवाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता से जोड़ने के लिए भी कई स्तरों पर पहल कर रही है।
इसी कड़ी में प्रदेश के सभी 75 जिलों में ‘यूथ अड्डा’ विकसित करने की योजना की रिपोर्ट सामने आई है। इसका उद्देश्य युवाओं को एक ही स्थान पर कौशल विकास, स्टार्टअप, वित्तीय सहायता, सरकारी योजनाओं और व्यवसाय से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराना है। यह व्यवस्था भौतिक और डिजिटल दोनों माध्यमों से संचालित किए जाने की योजना है।
उत्तर प्रदेश सरकार के सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग ने भी हाल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक और कौशल विकास को राज्य की ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया है।
छात्रों को अपने जिले में ही बेहतर अवसर देने की कोशिश
नई व्यवस्था के पीछे सबसे बड़ी चुनौती कोचिंग और करियर मार्गदर्शन की भौगोलिक असमानता को कम करना है। अभी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, दिल्ली, कोटा और अन्य शिक्षा केंद्रों का रुख करते हैं।
यदि जिले, कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर पर गुणवत्तापूर्ण तैयारी की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू होती है, तो छात्रों का समय और खर्च दोनों कम हो सकते हैं। साथ ही स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञों से सीधे संवाद और ऑनलाइन संसाधनों की उपलब्धता से तैयारी का दायरा भी बढ़ सकता है।
असली चुनौती होगी गुणवत्ता और नियमितता
सरकार के इस प्रस्ताव का असर काफी हद तक उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। केवल कोचिंग सेंटर खोलना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों को अनुभवी शिक्षक, गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री, नियमित टेस्ट सीरीज, व्यक्तिगत मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं के बदलते पैटर्न के अनुरूप तैयारी उपलब्ध करानी होगी।
इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीण और शहरी विद्यार्थियों को समान गुणवत्ता की सुविधा मिले। ऑनलाइन व्यवस्था के साथ इंटरनेट और डिजिटल संसाधनों की पहुंच भी एक अहम factor रहेगी।
क्या बदलेगा?
अगर प्रस्तावित व्यवस्था अपने लक्ष्य के मुताबिक लागू होती है तो यूपी के युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए स्थानीय स्तर पर एक नया विकल्प मिल सकता है। सरकार की मौजूदा अभ्युदय व्यवस्था, कौशल विकास और प्रस्तावित यूथ अड्डा जैसी पहलों को एक साथ जोड़कर देखा जाए तो फोकस युवाओं को पढ़ाई से लेकर कौशल, रोजगार और उद्यमिता तक एक व्यापक सपोर्ट सिस्टम देने की दिशा में दिखाई देता है।
फिलहाल नई युवा नीति के अंतिम प्रावधान, प्रत्येक संस्थान में कोचिंग की समय-सारणी, पात्रता, चयन प्रक्रिया और विशेषज्ञों की नियुक्ति से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश का इंतजार है।
Spider-Man: Brand New Day ने भारत में रचा इतिहास, बनी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हॉलीवुड फिल्म













