कोलकाता। इंडियन प्रीमियर लीग में दिल्ली कैपिटल्स का हिस्सा रहे युवा क्रिकेटर अभिषेक पोरेल की मुश्किलें अब कानूनी मोर्चे पर बढ़ गई हैं। हुगली जिले में मोगरा पुलिस ने उन्हें एक मेडिकल छात्रा की शिकायत से जुड़े आपराधिक मामले में गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई कलकत्ता हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई। पोरेल पर शिकायतकर्ता ने शादी का भरोसा देकर शारीरिक संबंध बनाने, धमकी देने और निजी तस्वीरों/वीडियो से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अदालत में अभी नहीं हुई है और पोरेल इन आरोपों से इनकार कर चुके हैं।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद तेज हुई कार्रवाई
इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट पहले ही पुलिस को अभिषेक पोरेल और एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार करने का निर्देश दे चुका था। अदालत ने जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को भी कब्जे में लेने का आदेश दिया था, ताकि शिकायतकर्ता से संबंधित कथित निजी सामग्री के प्रसार को रोका जा सके।
अदालत के सामने यह भी कहा गया था कि जांच के दौरान एक पेन ड्राइव बरामद की जा चुकी है और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। हाईकोर्ट ने डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने और उनकी संभावित गलत तरीके से प्रसार की आशंका को देखते हुए कार्रवाई तेज करने को कहा था।
मेडिकल छात्रा ने क्या आरोप लगाए?
पुलिस शिकायत के मुताबिक, शिकायतकर्ता ने दावा किया कि उसकी और पोरेल की पहचान वर्ष 2023 में हुई थी और दोनों के बीच लंबे समय तक संपर्क तथा संबंध रहे। महिला का आरोप है कि इसी दौरान क्रिकेटर ने उससे शादी करने की बात कही और इसी भरोसे के आधार पर उनके बीच शारीरिक संबंध बने।
शिकायत में आगे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिला का कहना है कि बाद में रिश्ते में तनाव पैदा हुआ और उसे कथित तौर पर धमकियों का सामना करना पड़ा। अदालत के सामने यह आरोप भी रखा गया कि उसकी निजी तस्वीरों और वीडियो को सार्वजनिक करने की धमकी दी गई थी।
इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले की जांच पुलिस कर रही है और आगे की कानूनी प्रक्रिया में आरोपों की सत्यता तय होगी।
मामला जून में पुलिस तक पहुंचा
मामले में मोगरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई थी। उपलब्ध अदालत संबंधी रिपोर्टों के अनुसार, यह मामला FIR संख्या 346/2026 से जुड़ा है। शिकायत में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
हाईकोर्ट की कार्यवाही के दौरान शिकायतकर्ता पक्ष ने पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद अदालत ने आरोपियों को पकड़ने और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित करने के संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए।
पोरेल ने आरोपों को बताया गलत
अभिषेक पोरेल की ओर से आरोपों को खारिज किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, क्रिकेटर ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को गलत बताया था। ऐसे में इस मामले में फिलहाल दोनों पक्षों के दावे सामने हैं और अंतिम स्थिति जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी अपने आप में अपराध सिद्ध होने के बराबर नहीं होती। इस मामले में भी अदालत द्वारा अंतिम फैसला आने तक पोरेल को आरोपों का सामना कर रहे आरोपी के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
कौन हैं अभिषेक पोरेल?
23 वर्षीय अभिषेक पोरेल बंगाल के विकेटकीपर-बल्लेबाज हैं और घरेलू क्रिकेट में बंगाल का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। IPL में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के लिए अपनी पहचान बनाई है।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, पोरेल ने दिल्ली कैपिटल्स के लिए 35 IPL मुकाबले खेले हैं और फ्रेंचाइजी ने उन्हें ₹4 करोड़ में रिटेन किया था। वह 2023 से दिल्ली कैपिटल्स की टीम का हिस्सा रहे हैं।
IPL 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, उन्होंने चार पारियों में 108 रन बनाए और उनका सर्वाधिक स्कोर 51 रहा।
क्रिकेट से कानूनी विवाद तक पहुंची कहानी
अभिषेक पोरेल को भारतीय क्रिकेट में उभरती प्रतिभाओं में गिना जाता रहा है। विकेटकीपिंग के साथ बाएं हाथ की बल्लेबाजी के कारण उन्होंने घरेलू क्रिकेट से IPL तक अपनी जगह बनाई।
लेकिन अब उनके क्रिकेट करियर से अलग एक गंभीर कानूनी मामला सुर्खियों में है। गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां शिकायत में लगाए गए आरोपों, उपलब्ध डिजिटल सामग्री और अन्य साक्ष्यों की जांच करेंगी।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण क्यों महत्वपूर्ण हैं?
इस मामले में अदालत की ओर से इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को सुरक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है। वजह शिकायतकर्ता की निजी तस्वीरों और वीडियो से संबंधित आरोप हैं।
अदालत के समक्ष शिकायतकर्ता पक्ष ने आशंका जताई थी कि कथित निजी सामग्री का प्रसार हो सकता है। इसी कारण मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को जब्त कर डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया गया।
यह पहल केवल जांच के लिहाज से ही नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की निजता की रक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
BNS की धारा 69 को लेकर क्या है प्रावधान?
शादी के झूठे वादे से संबंधित मामलों में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 का उल्लेख किया जाता है। यह प्रावधान ऐसे मामलों से संबंधित है जहां शादी करने का इरादा न होने के बावजूद शादी का भरोसा देकर महिला के साथ यौन संबंध बनाए जाने का आरोप हो।
हालांकि, हर ऐसा मामला अपने आप दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं आता। जांच और अदालत यह देखती है कि कथित वादे के समय आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी और परिस्थितियां क्या थीं। इसलिए किसी मामले में धारा लगना और आरोपी का दोषी साबित होना दो अलग-अलग कानूनी चरण हैं।
आगे क्या होगा?
अभिषेक पोरेल की गिरफ्तारी के बाद अब जांच का अगला चरण महत्वपूर्ण होगा। पुलिस शिकायत में लगाए गए आरोपों, डिजिटल साक्ष्यों और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच करेगी।
मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की निगरानी और उसके निर्देश पहले ही सामने आ चुके हैं। अदालत ने पुलिस से कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी थी।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कौन-कौन से साक्ष्य सामने आते हैं और अदालत के सामने अभियोजन तथा बचाव पक्ष किस तरह अपना पक्ष रखते हैं।
निष्कर्ष
IPL के मैदान पर दिल्ली कैपिटल्स का प्रतिनिधित्व करने वाले अभिषेक पोरेल अब एक गंभीर आपराधिक मामले के चलते चर्चा में हैं। एक मेडिकल छात्रा की शिकायत के बाद दर्ज FIR, कलकत्ता हाईकोर्ट के गिरफ्तारी संबंधी निर्देश और अब पुलिस की कार्रवाई ने मामले को हाई-प्रोफाइल बना दिया है।
हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन उनका अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए ही होगा। पोरेल आरोपों को खारिज कर चुके हैं और फिलहाल मामले की अगली दिशा पुलिस जांच तथा अदालत की कार्यवाही से तय होगी।
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