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दमिश्क। सीरिया में सत्ता परिवर्तन के बाद पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासनकाल की घटनाओं पर शुरू हुई कानूनी कार्रवाई अब एक बड़े मुकाम पर पहुंच गई है। दमिश्क की अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति बशर अल-असद, उनके भाई माहेर अल-असद और पूर्व सुरक्षा अधिकारी अतीफ नजीब को मौत की सजा सुनाई है।

यह फैसला करीब डेढ़ दशक पुराने संघर्ष से जुड़े गंभीर मामलों की सुनवाई के बाद आया है। 2011 में शुरू हुआ सरकार विरोधी आंदोलन धीरे-धीरे एक लंबे गृहयुद्ध में बदल गया था। इस संघर्ष ने सीरिया की राजनीति ही नहीं, बल्कि वहां के सामाजिक और आर्थिक ढांचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया।

अदालत का फैसला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि बशर और माहेर अल-असद इस समय सीरिया में मौजूद नहीं हैं। दोनों के खिलाफ कार्रवाई उनकी अनुपस्थिति में आगे बढ़ी, जबकि अतीफ नजीब को हिरासत से अदालत में पेश किया गया।

सत्ता जाने के बाद खुलीं पुराने शासन की फाइलें

दिसंबर 2024 में विद्रोही ताकतों के दमिश्क पहुंचने के साथ बशर अल-असद की सत्ता समाप्त हो गई थी। इसके साथ ही असद परिवार का दशकों लंबा राजनीतिक प्रभुत्व भी खत्म हो गया।

नई सत्ता ने पुराने शासन के दौरान हुई हिंसा, गिरफ्तारियों और कथित मानवाधिकार उल्लंघनों से जुड़े मामलों की पड़ताल शुरू की। इसी व्यापक प्रक्रिया के तहत पूर्व शासन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की जांच की गई।

अब अदालत का फैसला उसी जांच प्रक्रिया का एक बड़ा परिणाम माना जा रहा है।

अतीफ नजीब पर क्यों टिकी रहीं निगाहें?

मंगलवार की सुनवाई में अतीफ नजीब की मौजूदगी सबसे ज्यादा चर्चा में रही। उन्हें अदालत में कैदी की वर्दी में पेश किया गया।

नजीब कभी सीरियाई सुरक्षा तंत्र के प्रभावशाली अधिकारियों में शामिल थे। वर्ष 2011 में वह दक्षिणी सीरिया के दारा क्षेत्र में राजनीतिक सुरक्षा शाखा की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

दारा में शुरू हुए सरकार विरोधी आंदोलन के दौरान सुरक्षा कार्रवाई को लेकर उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल उठे थे। बाद में यही आंदोलन पूरे देश में फैलता चला गया और सीरिया लंबे गृहयुद्ध में फंस गया।

दारा से निकली चिंगारी ने बदली सीरिया की तस्वीर

2011 में दारा में सरकार विरोधी प्रदर्शन शुरू हुए थे। शुरुआती विरोध धीरे-धीरे दूसरे इलाकों तक पहुंचा और सरकार तथा विद्रोही गुटों के बीच संघर्ष बढ़ता गया।

समय के साथ इसमें कई स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय ताकतें शामिल हो गईं। संघर्ष का दायरा इतना बढ़ा कि सीरिया कई हिस्सों में बंटे प्रभाव क्षेत्रों में बदल गया।

अतीफ नजीब की उस दौर में सुरक्षा व्यवस्था में भूमिका होने के कारण उनके खिलाफ जांच को विशेष महत्व मिला।

बशर अल-असद का राजनीतिक सफर कहां से कहां पहुंचा?

बशर अल-असद ने वर्ष 2000 में अपने पिता हाफिज अल-असद के निधन के बाद सीरिया की सत्ता संभाली थी। इसके बाद लगभग 24 वर्षों तक वह राष्ट्रपति पद पर बने रहे।

लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद 2024 में हालात अचानक तेजी से बदल गए। विद्रोही समूहों ने कम समय में कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर कब्जा किया और अंततः राजधानी दमिश्क तक पहुंच गए।

सरकार के गिरने से पहले बशर अल-असद सीरिया छोड़कर रूस चले गए। इसके बाद नई राजनीतिक व्यवस्था ने पुराने शासन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की।

रूस में होने के कारण अदालत में नहीं पहुंचे असद

बशर अल-असद और उनके भाई माहेर अल-असद दोनों सीरिया से बाहर हैं। इसलिए अदालत के सामने उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी नहीं रही।

इसी वजह से उनके खिलाफ मामला उनकी गैरमौजूदगी में आगे बढ़ा और मंगलवार को मौत की सजा सुनाई गई।

हालांकि अदालत का फैसला आ चुका है, लेकिन दोनों की विदेश में मौजूदगी के कारण सजा को वास्तविक रूप से लागू करना अलग चुनौती है।

माहेर अल-असद पर भी गंभीर आरोप

बशर के छोटे भाई माहेर अल-असद लंबे समय तक सीरियाई सैन्य ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। सरकार विरोधी प्रदर्शनों से निपटने में उनके प्रभाव को लेकर भी कई आरोप सामने आते रहे।

मौजूदा मामले में अदालत ने उन्हें भी बशर अल-असद के साथ दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई।

अब इस फैसले के बाद पुराने शासन के शीर्ष स्तर पर जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गई है।

14 साल के संघर्ष ने सीरिया को कितना बदला?

सीरिया का युद्ध केवल सत्ता संघर्ष नहीं था। इसके असर ने आम नागरिकों की जिंदगी को भी पूरी तरह बदल दिया।

लंबे संघर्ष के दौरान लाखों लोगों की जान गई, बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए और कई शहरों की बुनियादी सुविधाएं तबाह हो गईं। स्कूल, अस्पताल, सड़कें और दूसरे सार्वजनिक ढांचे भी युद्ध की चपेट में आए।

इस दौरान असद सरकार के अलावा विभिन्न विद्रोही और सशस्त्र संगठनों पर भी अलग-अलग तरह के गंभीर अपराधों के आरोप लगते रहे।

मौजूदा अदालत का फैसला मुख्य रूप से पूर्व असद शासन से जुड़े मामलों पर केंद्रित है।

रूस और ईरान का साथ भी नहीं बचा पाया सत्ता

गृहयुद्ध के वर्षों में असद सरकार को रूस और ईरान का महत्वपूर्ण समर्थन हासिल रहा। इस सहयोग ने सरकार को लंबे समय तक विद्रोही ताकतों के दबाव का सामना करने में मदद की।

लेकिन 2024 के आखिर में क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदलने लगे। असद के सहयोगी पहले की तरह मजबूत स्थिति में नहीं थे और विद्रोही गुटों ने तेजी से अपना अभियान आगे बढ़ाया।

राजधानी पर नियंत्रण खोने के बाद असद शासन का अंत हो गया और सत्ता का पूरा ढांचा बदल गया।

नई सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल था—जवाबदेही

सत्ता संभालने के बाद नई व्यवस्था के सामने सिर्फ देश चलाने की चुनौती नहीं थी। पुराने शासन से जुड़े कथित अपराधों पर कार्रवाई भी बड़ा मुद्दा था।

लापता लोगों, हिरासत में मारे गए नागरिकों, कथित यातना और सुरक्षा बलों की कार्रवाई से जुड़े मामलों की जांच शुरू की गई।

अतीफ नजीब की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ सार्वजनिक सुनवाई इसी प्रक्रिया का हिस्सा बनी।

मौत की सजा के बावजूद असद के मामले में आगे की राह कठिन

बशर और माहेर को अदालत ने मृत्युदंड दे दिया है, लेकिन दोनों देश से बाहर हैं। ऐसे में फैसला सुनाए जाने और उसे लागू किए जाने के बीच बड़ा कानूनी और राजनीतिक अंतर है।

यदि दोनों सीरिया की हिरासत में नहीं आते हैं तो अदालत का फैसला तत्काल जमीन पर लागू करना मुश्किल होगा।

इसलिए आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सीरिया की नई सरकार उन्हें वापस लाने के लिए क्या कदम उठाती है और रूस इस मामले में किस तरह की भूमिका निभाता है।

पीड़ित परिवारों के लिए फैसले का क्या मतलब?

सीरिया में वर्षों से हजारों परिवार अपने उन रिश्तेदारों के बारे में जवाब तलाश रहे हैं जो युद्ध के दौरान लापता हुए या मारे गए।

ऐसे परिवारों के लिए पूर्व शासन के शीर्ष लोगों के खिलाफ अदालत का फैसला महज राजनीतिक घटनाक्रम नहीं है। यह उनके लिए जिम्मेदारी तय होने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा सकता है।

हालांकि, न्याय की प्रक्रिया को लेकर एक दूसरा सवाल भी मौजूद है—क्या सभी मामलों में पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया और निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित की जा रही है?

यही वजह है कि असद शासन के कथित अपराधों पर कार्रवाई के साथ-साथ अदालत की प्रक्रिया और मृत्युदंड को लेकर भी बहस जारी रह सकती है।

असद परिवार के लंबे शासन के बाद नया अध्याय

1971 में हाफिज अल-असद के सत्ता में आने से शुरू हुआ असद परिवार का शासन दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के सत्ता से हटने के साथ समाप्त हुआ।

अब उसी परिवार के शीर्ष नेताओं के खिलाफ मौत की सजा का फैसला सीरिया के इतिहास में एक असाधारण मोड़ है।

लेकिन यह कहानी अभी पूरी नहीं हुई है। पुराने शासन से जुड़े अन्य अधिकारियों की भूमिका, पीड़ितों को न्याय और विदेश में मौजूद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई जैसे सवाल आने वाले समय में भी सीरिया की राजनीति और न्याय व्यवस्था के केंद्र में बने रहेंगे।

असद शासन के पतन के बाद अदालत का यह फैसला सीरिया के लिए सिर्फ अतीत पर फैसला नहीं, बल्कि यह तय करने की कोशिश भी है कि नए दौर में सत्ता और जवाबदेही के बीच रिश्ता कैसा होगा।

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