लखनऊ/सहारनपुर। उत्तर प्रदेश की राजनीति में गुरुवार को सहारनपुर से जुड़ा एक अहम घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद के दामाद शायान मसूद समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। लखनऊ में सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में शायान मसूद ने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। उनके इस कदम के बाद सहारनपुर की राजनीतिक गलियों में नए समीकरणों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
शायान मसूद का सपा में शामिल होना इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि उनका संबंध सहारनपुर के पुराने और प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से है। वह पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं वरिष्ठ नेता रहे दिवंगत काजी रशीद मसूद के पौत्र हैं। वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद से उनका पारिवारिक रिश्ता दामाद का है।
अखिलेश यादव की मौजूदगी में सपा में एंट्री
लखनऊ में हुए कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने शायान मसूद का समाजवादी पार्टी में स्वागत किया। इस दौरान उन्हें पार्टी का पटका पहनाकर सदस्यता दिलाई गई। शायान के सपा में आने को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
शायान मसूद के सपा में शामिल होने की अटकलें पिछले कुछ समय से राजनीतिक हलकों में चल रही थीं। अब औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने के बाद इन चर्चाओं पर विराम लग गया है।
रशीद मसूद की राजनीतिक विरासत से जुड़ा परिवार
शायान मसूद सहारनपुर के चर्चित मसूद परिवार से आते हैं। उनके दादा काजी रशीद मसूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय तक सक्रिय रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रह चुके थे। ऐसे में शायान का सपा से जुड़ना स्थानीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है।
सहारनपुर और आसपास के क्षेत्रों में मसूद परिवार का राजनीतिक प्रभाव रहा है। यही वजह है कि शायान के सपा में शामिल होने को सिर्फ एक पार्टी ज्वाइनिंग के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे आने वाले समय में पश्चिमी यूपी के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
2027 के चुनाव से पहले बढ़ी हलचल
उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो चुकी हैं। ऐसे समय में शायान मसूद का सपा में जाना काफी अहम माना जा रहा है। उनके पार्टी में आने के बाद यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या समाजवादी पार्टी उन्हें आने वाले विधानसभा चुनाव में कोई बड़ी जिम्मेदारी देगी।
शायान मसूद के संभावित चुनाव लड़ने को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कुछ रिपोर्टों में बेहट विधानसभा सीट का नाम सामने आया है, हालांकि समाजवादी पार्टी ने अभी तक उन्हें किसी सीट से अपना उम्मीदवार घोषित नहीं किया है।
इसलिए फिलहाल उनके चुनाव लड़ने को लेकर किसी तरह का दावा करना जल्दबाजी होगा।
इमरान मसूद के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह घटनाक्रम?
शायान मसूद का कांग्रेस से अलग होकर सपा में जाना इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह इमरान मसूद के दामाद हैं। लोकसभा चुनाव के दौरान भी शायान को इमरान मसूद के चुनाव अभियान में सक्रिय देखा गया था। ऐसे में उनका अब समाजवादी पार्टी के साथ जाना सहारनपुर की राजनीति में नई बहस को जन्म दे रहा है।
हालांकि, शायान मसूद के सपा में शामिल होने के फैसले को सीधे तौर पर इमरान मसूद की राजनीतिक रणनीति या कांग्रेस से उनके रिश्ते से जोड़ना फिलहाल उचित नहीं होगा। इस संबंध में शायान या इमरान मसूद की ओर से कोई विस्तृत राजनीतिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
सपा-कांग्रेस के स्थानीय समीकरणों पर भी नजर
सहारनपुर में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बीच स्थानीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां पहले भी चर्चा में रही हैं। हाल में सहारनपुर की दिशा बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच तीखी बहस की खबर सामने आई थी। हालांकि, इमरान मसूद ने बाद में इसे लेकर सफाई दी थी और कहा था कि ऐसा कोई विवाद नहीं हुआ जिससे विकास कार्य प्रभावित हों।
अब शायान मसूद के सपा में शामिल होने के बाद स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर नजर और बढ़ गई है।
पश्चिमी यूपी में सपा को कितना फायदा?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सहारनपुर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है। यहां विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक समीकरण चुनावी परिणामों पर असर डालते हैं। ऐसे में रशीद मसूद परिवार से जुड़े युवा चेहरे को अपने साथ जोड़ना समाजवादी पार्टी के लिए संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों लिहाज से अहम हो सकता है।
हालांकि, किसी एक नेता के पार्टी में शामिल होने से चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी कहना मुश्किल है। इसका वास्तविक प्रभाव आगामी चुनाव में उम्मीदवारों, स्थानीय समीकरणों और पार्टी की रणनीति के आधार पर ही सामने आएगा।
फिलहाल शायान मसूद के सपा में शामिल होने से सहारनपुर की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा हो गई है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि समाजवादी पार्टी उन्हें आगे क्या जिम्मेदारी देती है और क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में उन्हें मैदान में उतारा जाता है।
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