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लखनऊ, 5 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग ने सोमवार को जातिगत जनगणना-2027 में OBC का अलग कॉलम जोड़ने, प्रगणकों को जातियों की ड्रॉपडाउन सूची उपलब्ध कराने और OBC वर्ग की सुरक्षा के लिए एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून की तर्ज पर OBC अत्याचार निवारण कानून लागू करने की मांग को लेकर लखनऊ में राजभवन मार्च और प्रदर्शन किया। कांग्रेस के मुताबिक, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पिछड़ा वर्ग विभाग से जुड़े नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए तथा कई प्रदर्शनकारियों ने गिरफ्तारी भी दी।

कांग्रेस की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान OBC समाज की जातिगत गणना, आबादी के अनुपात में प्रतिनिधित्व, आरक्षण, सरकारी नौकरियों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों की ओर आकर्षित करना था। पार्टी का कहना है कि देश में होने वाली जनगणना-2027 में OBC की स्पष्ट संख्या सामने आनी चाहिए, ताकि उनकी आबादी के अनुरूप नीतियां और प्रतिनिधित्व तय किया जा सके।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जातिगत जनगणना और OBC समाज की सुरक्षा के मुद्दे को अब व्यापक आंदोलन का रूप दिया जाएगा। पार्टी ने दावा किया कि आने वाले दिनों में इस मांग को लेकर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

राजभवन मार्च के जरिए सरकार तक पहुंचाई मांग

उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में कार्यकर्ता राजभवन की ओर मार्च करते हुए पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने जातिगत जनगणना और OBC सुरक्षा से संबंधित मांगों को लेकर नारेबाजी की।

कांग्रेस के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल लोगों की प्रमुख मांग थी कि जनगणना-2027 के फॉर्म में OBC के लिए अलग कॉलम शामिल किया जाए। इसके साथ ही प्रगणकों को जातियों की ड्रॉपडाउन सूची उपलब्ध कराने की मांग की गई, ताकि जातियों की गणना में अस्पष्टता और अलग-अलग नामों के कारण होने वाली परेशानी को कम किया जा सके।

पार्टी ने यह भी मांग उठाई कि OBC वर्ग के खिलाफ होने वाले कथित अत्याचारों और अपराधों से निपटने के लिए अलग कानून बनाया जाए। कांग्रेस ने इसे एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून की तर्ज पर लागू करने की मांग की है।

जातिगत जनगणना को लेकर कांग्रेस का दबाव

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने जातिगत जनगणना को लेकर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की मांग का भी उल्लेख किया। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जातिगत जनगणना कराने की मांग को लेकर पत्र लिख चुके हैं।

कांग्रेस का आरोप है कि इस मांग को लेकर अभी तक उसे केंद्र सरकार की ओर से अपेक्षित सकारात्मक जवाब नहीं मिला है। पार्टी का कहना है कि OBC समाज की वास्तविक आबादी का आंकड़ा सामने आने के बाद ही शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और सरकारी संस्थाओं में प्रतिनिधित्व को लेकर बेहतर नीति बनाई जा सकती है।

हालांकि, ये सभी दावे कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में किए गए हैं।

आबादी के अनुपात में हिस्सेदारी की मांग

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने OBC समाज की आबादी के अनुपात में आरक्षण और सरकारी संस्थानों में प्रतिनिधित्व की मांग उठाई। कांग्रेस का कहना है कि पिछड़ा वर्ग केवल जनसंख्या के आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, रोजगार और देश के संसाधनों में उसकी भागीदारी भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

पार्टी के मुताबिक, OBC समाज की सही संख्या उपलब्ध होने पर सरकार के सामने यह स्पष्ट तस्वीर होगी कि विभिन्न क्षेत्रों में पिछड़े वर्ग की वास्तविक भागीदारी कितनी है और किन क्षेत्रों में उनकी हिस्सेदारी बढ़ाने की आवश्यकता है।

कांग्रेस ने कहा कि जातिगत जनगणना को केवल राजनीतिक मुद्दे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे सामाजिक और आर्थिक नीतियों के लिए आवश्यक आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया के रूप में भी देखा जाना चाहिए।

बिहार और तेलंगाना मॉडल का दिया हवाला

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग ने बिहार और तेलंगाना में हुई जातिगत गणना/सर्वेक्षण की तर्ज पर देशभर में वैज्ञानिक तरीके से जातिगत जनगणना कराने की मांग दोहराई।

पार्टी का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में जातिगत आंकड़े जुटाने के प्रयासों के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर भी इस दिशा में स्पष्ट पहल की जरूरत है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि देशभर में एक समान और वैज्ञानिक प्रक्रिया के माध्यम से जातियों की संख्या और सामाजिक-आर्थिक स्थिति से जुड़े आंकड़े जुटाए जाने चाहिए।

कांग्रेस का तर्क है कि ऐसे आंकड़ों के आधार पर सरकार सामाजिक न्याय से जुड़ी योजनाओं और नीतियों को अधिक प्रभावी ढंग से तैयार कर सकती है।

OBC अत्याचार निवारण कानून की मांग

राजभवन मार्च में जातिगत जनगणना के साथ-साथ OBC अत्याचार निवारण कानून की मांग भी प्रमुख रही। कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग का कहना है कि OBC वर्ग के लोगों की सुरक्षा के लिए विशेष कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है।

पार्टी ने एससी-एसटी अत्याचार निवारण कानून का उदाहरण देते हुए OBC वर्ग के लिए भी इसी तरह की कानूनी सुरक्षा की मांग की। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यदि OBC समुदाय के खिलाफ होने वाले अपराधों और कथित अत्याचारों के मामलों में विशेष कानूनी संरक्षण उपलब्ध कराया जाता है तो पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को मजबूती मिल सकती है।

यह मांग फिलहाल कांग्रेस पार्टी के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा है और इसके लिए पार्टी ने सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति अपनाई है।

मनोज यादव ने बीजेपी पर साधा निशाना

OBC कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव ने प्रदर्शन के दौरान भाजपा और आरएसएस पर OBC विरोधी होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि OBC समाज की जनगणना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट कदम उठाना चाहिए।

मनोज यादव ने आरोप लगाया कि लोकसभा चुनाव के दौरान OBC की गिनती का मुद्दा उठाने के बाद भाजपा अब अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हट रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में OBC वर्ग से जुड़े लोगों के खिलाफ होने वाली घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार से सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।

मनोज यादव के ये आरोप कांग्रेस के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर प्रतिक्रिया आने पर उसे भी खबर में शामिल किया जा सकता है।

प्रदर्शनकारियों ने दी गिरफ्तारी

कांग्रेस की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, राजभवन मार्च के दौरान हजारों OBC नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया तथा गिरफ्तारी दी। पार्टी ने इसे पिछड़ा वर्ग से जुड़े मुद्दों को लेकर बड़े आंदोलन की शुरुआत बताया।

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जातिगत जनगणना और OBC समाज की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए। कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की।

कांग्रेस का कहना है कि यह संघर्ष अब केवल एक दिन के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। पार्टी आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी अभियान चलाकर OBC समाज को इन मुद्दों के प्रति जागरूक करने की बात कह रही है।

देवेंद्र निषाद ने एकजुट होने का किया आह्वान

कांग्रेस नेता देवेंद्र निषाद ने प्रदर्शन के दौरान OBC समाज से एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, आरक्षण और सरकारी नौकरियों से जुड़े मुद्दों पर पिछड़े वर्ग की आवाज को मजबूती से उठाने की जरूरत है।

उनका कहना था कि OBC समाज को अपने अधिकारों और प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को लेकर जागरूक रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से भी इन मुद्दों को लेकर व्यापक स्तर पर अभियान चलाने की अपील की।

हीरा ठाकुर बोले- जनगणना में OBC कॉलम जरूरी

कांग्रेस नेता हीरा ठाकुर ने कहा कि जनगणना में OBC का अलग कॉलम शामिल किया जाना आवश्यक है। उनके मुताबिक, जब तक OBC समाज की वास्तविक संख्या सामने नहीं आती, तब तक आबादी के अनुपात में उसकी भागीदारी तय करने में कठिनाई बनी रहेगी।

उन्होंने OBC सुरक्षा के लिए विशेष कानून की मांग भी दोहराई। उनका कहना था कि जनगणना और सुरक्षा दोनों मुद्दे पिछड़े वर्ग के सामाजिक अधिकारों से जुड़े हुए हैं।

जितेंद्र पटेल ने रखी हिस्सेदारी की मांग

OBC विभाग के संगठन महासचिव जितेंद्र पटेल ने OBC समाज की स्पष्ट गणना, आबादी के अनुपात में आरक्षण, संस्थाओं के सभी स्तरों पर नौकरी और देश के संसाधनों में हिस्सेदारी तय करने की मांग रखी।

उन्होंने कहा कि OBC समाज इन मुद्दों पर किसी आधे-अधूरे समाधान से संतुष्ट नहीं होगा। कांग्रेस के मुताबिक, जितेंद्र पटेल ने आने वाले दिनों में प्रदेशव्यापी प्रदर्शन और जागरूकता अभियान चलाने की बात भी कही।

कांग्रेस ने आगामी चुनाव से जोड़ा मुद्दा

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने OBC से जुड़े मुद्दों को आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीति से भी जोड़ा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि यदि सरकार OBC समाज की मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आगामी चुनाव में समाज अपने वोट के माध्यम से इसका जवाब देगा।

कांग्रेस ने जातिगत जनगणना, आरक्षण, सरकारी नौकरियों और सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाने के संकेत दिए हैं। पार्टी का प्रयास है कि इन मुद्दों के माध्यम से OBC वर्ग के बीच अपना राजनीतिक आधार मजबूत किया जाए।

हालांकि, चुनावी राजनीति को लेकर किए गए दावे राजनीतिक दल के बयान हैं और आगामी चुनाव में मतदाताओं का रुख किस दिशा में जाता है, यह भविष्य में ही स्पष्ट होगा।

कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद

राजभवन मार्च और प्रदर्शन में कांग्रेस के कई नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। पार्टी की ओर से जारी सूची के अनुसार, कैलाश चौहान, संकल्प पटेल, डॉ. राजकुमार मौर्य, मोहसिन सलीम, बी.एल. वर्मा, राहुल राय प्रजापति, सुरेंद्र कुशवाहा, शंकर यादव, राजेश्वरी पटेल, मंजू मौर्य, राम गणेश प्रजापति, अजीत वर्मा, अभिमन्यु विश्वकर्मा, विनोद पाल, ममता राजपूत, विजय बहादुर यादव, संजीव अर्कवंशी और सेतराम केसरी समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता कार्यक्रम में मौजूद रहे।

पार्टी ने प्रदर्शन को OBC अधिकारों की मांग को लेकर महत्वपूर्ण कार्यक्रम बताया है।

अब प्रदेशव्यापी आंदोलन की तैयारी

लखनऊ में राजभवन मार्च के बाद कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग ने प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी आंदोलन को आगे बढ़ाने के संकेत दिए हैं। पार्टी का कहना है कि OBC समाज को जातिगत जनगणना, आरक्षण, नौकरी, शिक्षा और सुरक्षा से जुड़े अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा।

इससे साफ है कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश में OBC से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक और संगठनात्मक स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में इन मांगों को लेकर और प्रदर्शन होते हैं या सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया आती है, इस पर राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।

क्या हैं कांग्रेस की प्रमुख मांगें?

कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग की ओर से राजभवन मार्च में मुख्य रूप से ये मांगें उठाई गईं—

  • जनगणना-2027 में OBC के लिए अलग कॉलम जोड़ा जाए।
  • प्रगणकों को जातियों की ड्रॉपडाउन सूची उपलब्ध कराई जाए।
  • OBC वर्ग की सुरक्षा के लिए विशेष अत्याचार निवारण कानून बनाया जाए।
  • OBC समाज की वास्तविक आबादी की स्पष्ट गणना हो।
  • आबादी के अनुपात में आरक्षण और प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए।
  • सरकारी एवं संस्थागत नौकरियों में OBC की भागीदारी तय की जाए।
  • देश के संसाधनों में OBC समाज की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने के लिए नीतियां बनाई जाएं।

निष्कर्ष

लखनऊ में सोमवार को हुआ राजभवन मार्च उत्तर प्रदेश कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग विभाग के लिए एक बड़ा राजनीतिक कार्यक्रम रहा। जातिगत जनगणना-2027 में OBC कॉलम, जातियों की ड्रॉपडाउन सूची और OBC अत्याचार निवारण कानून की मांग को केंद्र में रखकर कांग्रेस ने सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने OBC समाज की आबादी के अनुपात में आरक्षण, सरकारी नौकरियों और संसाधनों में हिस्सेदारी की मांग भी उठाई। पार्टी ने यह भी संकेत दिया कि यदि इन मुद्दों पर सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं होती है तो आंदोलन को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाया जाएगा।

फिलहाल इस पूरे मामले में कांग्रेस की ओर से उठाई गई मांगों पर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। आने वाले समय में जातिगत जनगणना और OBC प्रतिनिधित्व का मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति में कितना बड़ा रूप लेता है, यह देखने वाली बात होगी।

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