लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के बीच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) को बड़ी कामयाबी मिलने की जानकारी सामने आई है। STF ने अंतरराज्यीय स्तर पर अवैध गांजे की तस्करी और बिक्री करने वाले कथित गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के रौनक गैंग का सक्रिय सदस्य बताए जा रहे प्रिंस कुमार के अलावा आशीष कुमार, सोनू कुमार, राजा कुमार और रोहित कुमार शामिल हैं।
STF के मुताबिक, आरोपियों के कब्जे से 23 पैकेट अवैध गांजा बरामद किया गया है। बरामद गांजे का कुल वजन करीब 150 किलोग्राम बताया गया है। STF के अनुसार, बरामद मादक पदार्थ की अनुमानित कीमत करीब 37.50 लाख रुपये है। सभी आरोपियों को गाजियाबाद जिले के ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र, लोनी से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है।
कार्रवाई के बाद STF ने गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ शुरू की है। पूछताछ में मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रिंस कुमार ने कथित तौर पर बताया कि वह मनेर, पटना, बिहार का रहने वाला है और पिछले करीब दो वर्षों से अपने साथियों के साथ मिलकर अवैध गांजे की तस्करी और बिक्री का काम कर रहा था।
पांच आरोपियों को STF ने किया गिरफ्तार
STF द्वारा की गई कार्रवाई में जिन पांच आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी गई है, उनके नाम प्रिंस कुमार, आशीष कुमार, सोनू कुमार, राजा कुमार और रोहित कुमार बताए गए हैं।
STF के अनुसार, आरोपियों के पास से 23 पैकेटों में गांजा बरामद हुआ। बरामदगी की मात्रा करीब 150 किलोग्राम बताई जा रही है। इतनी बड़ी मात्रा में गांजा बरामद होने के बाद STF ने इसे अंतरराज्यीय स्तर पर चल रहे अवैध मादक पदार्थों के नेटवर्क से जोड़कर देखा है।
गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुट सकती हैं कि आरोपी गांजा कहां से लाते थे, इसे किन स्थानों पर पहुंचाया जाता था और इस नेटवर्क में इनके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र से हुई गिरफ्तारी
STF की कार्रवाई गाजियाबाद के लोनी स्थित ट्रॉनिका सिटी थाना क्षेत्र में हुई। इसी क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए टीम ने पांचों आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके कब्जे से गांजा बरामद किया।
पुलिस और STF के लिए अंतरराज्यीय मादक पदार्थ तस्करी का नेटवर्क लंबे समय से चुनौती बना हुआ है। अलग-अलग राज्यों से मादक पदार्थों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए तस्कर अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे मामलों में स्थानीय स्तर पर बिक्री के साथ-साथ बड़े नेटवर्क की भूमिका की भी जांच की जाती है।
इस मामले में भी STF की पूछताछ का मुख्य उद्देश्य कथित नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और गांजे की सप्लाई लाइन तक पहुंचना हो सकता है।
150 किलो गांजे की कीमत करीब 37.50 लाख रुपये बताई गई
STF द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से बरामद गांजे का वजन करीब 150 किलोग्राम है। इसकी अनुमानित कीमत लगभग 37 लाख 50 हजार रुपये बताई गई है।
बरामदगी की इतनी बड़ी मात्रा यह संकेत देती है कि मामला केवल व्यक्तिगत इस्तेमाल का नहीं, बल्कि कथित तौर पर अवैध तस्करी और बिक्री के नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। STF इसी बिंदु को ध्यान में रखते हुए गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है।
हालांकि, बरामद मादक पदार्थ की अंतिम मात्रा और उसकी कीमत का आधिकारिक निर्धारण संबंधित जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। फिलहाल उपलब्ध जानकारी STF की ओर से बताई गई प्रारंभिक जानकारी पर आधारित है।
बिहार के रौनक गैंग से जुड़ा बताया गया प्रिंस
इस कार्रवाई में गिरफ्तार प्रिंस कुमार को बिहार के रौनक गैंग का सक्रिय सदस्य बताया गया है। STF की पूछताछ में प्रिंस के बारे में सामने आई जानकारी के मुताबिक वह बिहार के पटना जिले के मनेर का रहने वाला है।
पूछताछ में प्रिंस ने कथित तौर पर बताया कि वह पिछले दो वर्षों से अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर अवैध गांजे की तस्करी और बिक्री का काम कर रहा था।
इस बयान के आधार पर जांच एजेंसियों के सामने अब यह सवाल महत्वपूर्ण होगा कि पिछले दो वर्षों के दौरान कथित नेटवर्क ने किन-किन इलाकों में अपनी गतिविधियां संचालित कीं और इस दौरान कितनी मात्रा में मादक पदार्थ की तस्करी की गई।
तस्करी नेटवर्क की कड़ियां खंगालने में जुटी STF
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी और 150 किलोग्राम गांजे की बरामदगी के बाद जांच का दायरा बढ़ सकता है। STF आरोपियों से पूछताछ के जरिए कथित नेटवर्क के स्रोत और गंतव्य का पता लगाने की कोशिश करेगी।
जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि बरामद गांजा किस स्थान से लाया गया था। इसके अलावा जिन लोगों को इसकी आपूर्ति की जानी थी, उनके बारे में भी जानकारी जुटाई जा सकती है।
STF यह पता लगाने का प्रयास कर सकती है कि आरोपी अकेले काम कर रहे थे या इनके पीछे कोई बड़ा गिरोह सक्रिय था। यदि किसी संगठित नेटवर्क के संकेत मिलते हैं तो आगे अन्य लोगों की गिरफ्तारी भी हो सकती है।
पिछले दो साल से तस्करी में शामिल होने का दावा
STF की पूछताछ में प्रिंस द्वारा कथित तौर पर यह स्वीकार किए जाने की बात सामने आई है कि वह करीब दो वर्षों से अपने साथियों के साथ मिलकर गांजे की तस्करी और बिक्री कर रहा था।
यदि जांच में यह जानकारी पुष्ट होती है तो इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि आरोपी कितने समय से इस कथित अवैध कारोबार में सक्रिय थे और इनके संपर्क में कौन-कौन लोग थे।
जांच एजेंसी आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्कों, यात्रा और वित्तीय लेनदेन से संबंधित जानकारियों की भी जांच कर सकती है, ताकि कथित नेटवर्क की पूरी कड़ी सामने आ सके। हालांकि, ऐसी किसी विस्तृत जांच की जानकारी इस समय उपलब्ध विवरण में नहीं दी गई है।
अंतरराज्यीय तस्करी पर STF की नजर
इस कार्रवाई को अंतरराज्यीय स्तर पर अवैध गांजे की तस्करी और बिक्री के खिलाफ STF की कार्रवाई के रूप में बताया गया है। मामले में बिहार से जुड़े आरोपी की गिरफ्तारी और गाजियाबाद में बरामदगी से जांच का दायरा एक से अधिक राज्यों तक जुड़ता दिखाई देता है।
मादक पदार्थों की तस्करी के मामलों में एक राज्य से दूसरे राज्य तक सप्लाई नेटवर्क काम कर सकता है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियां अक्सर सप्लाई करने वालों और खरीदारों तक पहुंचने की कोशिश करती हैं।
STF की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का अगला चरण यह पता लगाना होगा कि बरामद गांजे की खेप कहां से आई और इसे कहां पहुंचाया जाना था।
कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी

पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी। बरामद मादक पदार्थ को जांच और कानूनी प्रक्रिया के तहत सुरक्षित रखा जाएगा। इसके साथ ही आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की प्रक्रिया भी होगी।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि गिरफ्तारी और पूछताछ के दौरान सामने आए आरोपों का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा। आरोपियों को अदालत में अपना पक्ष रखने का पूरा कानूनी अधिकार है।
बड़ी बरामदगी से बढ़ी जांच की अहमियत
STF द्वारा करीब 150 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की सूचना ने इस कार्रवाई को महत्वपूर्ण बना दिया है। करीब 37.50 लाख रुपये की अनुमानित कीमत वाली इस खेप के साथ पांच लोगों की गिरफ्तारी हुई है।
मुख्य आरोपी बताए जा रहे प्रिंस के कथित बयान में दो वर्षों से गांजे की तस्करी और बिक्री में शामिल होने की बात सामने आने के बाद जांच एजेंसियों के सामने अब पूरे नेटवर्क की पड़ताल की चुनौती है।
आगे क्या होगी कार्रवाई?
STF की इस कार्रवाई के बाद अब जांच का फोकस कथित सप्लाई नेटवर्क, गांजे के स्रोत, खरीदारों और इस कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की पहचान पर रहेगा। यदि पूछताछ और जांच में अन्य आरोपियों की भूमिका सामने आती है तो आगे और गिरफ्तारियां भी संभव हैं।
फिलहाल प्रिंस कुमार, आशीष कुमार, सोनू कुमार, राजा कुमार और रोहित कुमार की गिरफ्तारी तथा उनके कब्जे से 23 पैकेटों में करीब 150 किलोग्राम गांजा बरामद किए जाने की जानकारी सामने आई है। STF के मुताबिक, बरामद गांजे की अनुमानित कीमत करीब 37.50 लाख रुपये है। मामले की आगे की जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि इस कथित अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क की जड़ें कितनी गहरी हैं और इसमें अन्य कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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