लखनऊ: उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री अजय राय ने महंगी होती चीनी और एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। 24 अगस्त 2026 को लिखे पत्र में अजय राय ने केंद्र सरकार से एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति की समीक्षा करने और देश में चीनी की बढ़ती कीमतों को लेकर ठोस निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को नीतिगत फैसलों में आम उपभोक्ताओं के हित और महंगाई के प्रभाव को प्राथमिकता देनी चाहिए।
प्रधानमंत्री को संबोधित पत्र में अजय राय ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन को लेकर पहले भी सरकार को पत्र भेजे जाने का उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि बीते 7 जुलाई को उन्होंने एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति के वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता हितों से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत पत्र भेजा था। उसमें E20, E85 और E100 जैसे ईंधनों की स्वतंत्र समीक्षा, उनके आर्थिक प्रभाव और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।
एथेनॉल नीति को लेकर समीक्षा की मांग
अजय राय ने अपने पत्र में कहा कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल को लेकर सरकार की नीति के पीछे पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने का तर्क दिया जाता रहा है। पत्र में उन्होंने सरकार के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024-25 में पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण 19.24 प्रतिशत तक पहुंच गया था और 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य हासिल करने की दिशा में नीति आगे बढ़ी।
हालांकि, कांग्रेस नेता ने इस नीति के साथ जुड़े दूसरे आर्थिक प्रभावों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। उनका कहना है कि जब देश में चीनी की कीमतों और उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ रही है, तब एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने और चीनी से जुड़े संसाधनों के इस्तेमाल का व्यापक आर्थिक और उपभोक्ता प्रभाव देखा जाना चाहिए।
उन्होंने प्रधानमंत्री से एथेनॉल नीति के विभिन्न पहलुओं का स्वतंत्र मूल्यांकन कराने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसका वास्तविक लाभ देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं को कितना मिल रहा है।
चीनी की कीमतों को लेकर भी उठाए सवाल
अजय राय ने पत्र में देश में चीनी की उपलब्धता और बढ़ती कीमतों को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने लिखा कि 20 अगस्त को केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त (ड्यूटी फ्री) आयात की अनुमति देने का फैसला किया। कांग्रेस नेता ने इस निर्णय को चीनी की उपलब्धता और कीमतों से जुड़ी चिंता के संदर्भ में रखा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि देश में पर्याप्त चीनी उपलब्ध है तो शुल्क-मुक्त आयात की आवश्यकता क्यों पड़ी और यदि चीनी की कमी है तो इसकी वास्तविक स्थिति और कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।
पत्र में अजय राय ने चीनी के उत्पादन, घरेलू कीमतों और आयात से जुड़े प्रभावों पर पारदर्शी चर्चा की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि जनता को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि चीनी की कीमतों में वृद्धि के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और सरकार इससे निपटने के लिए क्या कदम उठा रही है।
‘जनता के सामने स्पष्ट किया जाए वास्तविक लेखा-जोखा’
कांग्रेस नेता ने एथेनॉल नीति और चीनी की कीमतों के बीच संभावित संबंधों को लेकर सरकार से स्पष्टता की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण के कारण पेट्रोलियम आयात पर होने वाले विदेशी मुद्रा खर्च में बचत का दावा किया जाता है, तो दूसरी तरफ चीनी के उत्पादन, कीमतों और आयात पर पड़ने वाले प्रभाव का भी वास्तविक लेखा-जोखा जनता के सामने रखा जाना चाहिए।
अजय राय के अनुसार, किसी भी सरकारी नीति का मूल्यांकन केवल एक पहलू के आधार पर नहीं किया जा सकता। उसके आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता हितों से जुड़े सभी प्रभावों का स्वतंत्र अध्ययन जरूरी है।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के फैसलों का असर किसानों, चीनी उद्योग, वाहन मालिकों और आम उपभोक्ताओं पर अलग-अलग पड़ सकता है। इसलिए नीति बनाते समय सभी पक्षों को ध्यान में रखना जरूरी है।
E20 के बाद कम मिश्रण वाले ईंधन की उपलब्धता पर भी चर्चा
अजय राय ने अपने पत्र में परिवहन क्षेत्र से जुड़े कुछ सुझावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के नेतृत्व में परिवहन क्षेत्र में E20 के बाद आगे की दिशा को लेकर चर्चा हुई है।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने हाल में E20 के साथ E10 जैसे कम-मिश्रण वाले ईंधन को फिर से उपलब्ध कराने का सुझाव दिया था। पत्र के मुताबिक, इस सुझाव का उद्देश्य पुराने वाहनों के मालिकों की चिंता को कम करना है।
अजय राय ने इसी संदर्भ में सरकार से एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति को लेकर व्यापक और स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। उनका तर्क है कि यदि देश में बड़ी संख्या में ऐसे पुराने वाहन हैं जिनके मालिक E20 ईंधन के प्रभाव को लेकर चिंतित हैं, तो उनकी समस्याओं को भी नीति निर्माण में शामिल किया जाना चाहिए।
‘मंत्रिमंडल में फेरबदल से ज्यादा जरूरी जनहित के सवालों का जवाब’
पत्र में अजय राय ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि सरकार के स्तर पर मंत्रिमंडल में फेरबदल जैसे राजनीतिक विषयों पर चर्चा हो सकती है, लेकिन जनता से जुड़े आर्थिक सवालों का जवाब देना अधिक महत्वपूर्ण है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि सरकार एथेनॉल नीति के साथ-साथ देश में चीनी की कीमतों को लेकर भी ठोस निर्णय ले। अजय राय ने कहा कि जनता सरकार की नीतियों का स्वतंत्र और सार्वजनिक रूप से मूल्यांकन करती है, इसलिए नीतियों के परिणामों को पारदर्शी तरीके से सामने रखा जाना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने पत्र में यह भी कहा कि लोकतंत्र में जनता के सवालों का जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि सरकार ऐसे निर्णय ले जिससे आम लोगों को महंगाई से राहत मिल सके।
त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों पर फैसला लेने की मांग
अजय राय ने अपने पत्र के अंत में प्रधानमंत्री से चीनी की कीमतों को लेकर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है। उन्होंने लिखा कि देश में त्योहारों और पर्वों की श्रृंखला शुरू होने वाली है। ऐसे समय में चीनी जैसी आवश्यक खाद्य वस्तु की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों के घरेलू बजट पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि सरकार को त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर ठोस कदम उठाना चाहिए, ताकि आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े।
अजय राय ने प्रधानमंत्री से अपेक्षा जताई कि केंद्र सरकार एथेनॉल नीति की स्वतंत्र समीक्षा के साथ-साथ चीनी की कीमतों पर भी प्रभावी निर्णय लेगी।
कांग्रेस ने उठाया आर्थिक और उपभोक्ता हित का मुद्दा
अजय राय का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब ईंधन नीति, एथेनॉल मिश्रण, चीनी उत्पादन और कीमतों को लेकर अलग-अलग आर्थिक एवं राजनीतिक बहस चल रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने पत्र में इन मुद्दों को एक साथ रखते हुए सरकार से नीतियों के व्यापक प्रभाव का मूल्यांकन करने की मांग की है।
उनका कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और पेट्रोलियम आयात में कमी महत्वपूर्ण लक्ष्य हैं, लेकिन इन लक्ष्यों को हासिल करते समय किसानों, वाहन मालिकों और आम उपभोक्ताओं के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए।
पत्र में अजय राय ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है कि एथेनॉल मिश्रित ईंधन की नीति के वैज्ञानिक, आर्थिक, पर्यावरणीय और उपभोक्ता प्रभावों की स्वतंत्र समीक्षा कराई जाए। साथ ही चीनी की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अब सरकार के फैसले पर नजर
अजय राय के पत्र ने एथेनॉल मिश्रित ईंधन और चीनी की कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस को एक नया मुद्दा दे दिया है। कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार से जहां E20, E85 और E100 जैसी नीतियों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है, वहीं चीनी के शुल्क-मुक्त आयात और बढ़ती कीमतों पर भी सवाल उठाए हैं।
फिलहाल पत्र में उठाए गए सवाल और मांगें अजय राय एवं उत्तर प्रदेश कांग्रेस की ओर से रखे गए राजनीतिक तर्क और चिंताएं हैं। पत्र में केंद्र सरकार की ओर से इन आरोपों या सवालों का कोई जवाब शामिल नहीं है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार एथेनॉल नीति और चीनी की कीमतों को लेकर कांग्रेस की इन मांगों पर क्या रुख अपनाती है और आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।
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