नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में देशवासियों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा की। कार्यक्रम में उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा और सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती, भारत के एनीमेशन और गेमिंग सेक्टर, आत्मनिर्भर भारत, डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड, भारतीय कला-संस्कृति, फिटनेस और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसे विषयों पर अपना संदेश दिया।
प्रधानमंत्री ने खास तौर पर डिजिटल अरेस्ट के नाम पर हो रहे साइबर फ्रॉड को लेकर लोगों को सतर्क किया। उन्होंने समझाया कि साइबर अपराधी किस तरह पुलिस, सीबीआई, नारकोटिक्स विभाग या आरबीआई के अधिकारी बनकर लोगों को डराते हैं और फिर मानसिक दबाव बनाकर उनसे पैसे या निजी जानकारी हासिल करने की कोशिश करते हैं।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी से रहें सावधान
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में एक ऑडियो बातचीत के जरिए डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड का तरीका समझाया। बातचीत में कथित अधिकारी पहले व्यक्ति को उसके खिलाफ शिकायत और एफआईआर की जानकारी देकर डराता है। इसके बाद आधार कार्ड और दूसरी निजी जानकारी मांगने की कोशिश की जाती है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह सिर्फ कोई सामान्य फोन कॉल नहीं है, बल्कि लोगों को मानसिक रूप से डराकर फंसाने वाला एक सुनियोजित साइबर फ्रॉड है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में अपराधी सरकारी अधिकारी होने का दावा करते हैं और कानून की धाराओं तथा जांच का डर दिखाकर पीड़ित को अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश करते हैं।
प्रधानमंत्री के मुताबिक, साइबर अपराधियों की रणनीति कई चरणों में काम करती है। सबसे पहले वे पीड़ित की निजी जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद सरकारी कार्यालय, वर्दी और कानूनी कार्रवाई का माहौल बनाकर डर पैदा करते हैं। तीसरे चरण में पीड़ित पर तत्काल फैसला लेने का दबाव बनाया जाता है।
‘रुको, सोचो और एक्शन लो’ का मंत्र

डिजिटल फ्रॉड से बचने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को ‘रुको, सोचो, एक्शन लो’ का मंत्र दिया।
उन्होंने कहा कि इस तरह का फोन आने पर सबसे पहले घबराने के बजाय रुकना चाहिए। जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए और किसी अनजान व्यक्ति को निजी जानकारी नहीं देनी चाहिए। संभव हो तो बातचीत का स्क्रीनशॉट या रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखनी चाहिए।
इसके बाद दूसरे चरण में सोचने की जरूरत है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि कोई भी सरकारी एजेंसी सामान्य फोन कॉल या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह की पूछताछ और पैसे की मांग नहीं करती। अगर कोई व्यक्ति सरकारी अधिकारी बनकर डराता है और तुरंत कार्रवाई करने का दबाव बनाता है तो सावधान हो जाना चाहिए।
तीसरे चरण में उन्होंने लोगों से साइबर अपराध की शिकायत करने की अपील की। इसके लिए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की बात कही। साथ ही परिवार और पुलिस को सूचना देने तथा उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखने की सलाह दी।
सरदार पटेल और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में सरदार वल्लभभाई पटेल और भगवान बिरसा मुंडा के योगदान को भी याद किया। उन्होंने बताया कि देश दोनों महान व्यक्तित्वों की 150वीं जन्म जयंती को विशेष रूप से मनाने की तैयारी कर रहा है।
पीएम मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली झारखंड के उलिहातू गांव की अपनी यात्रा का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वहां की मिट्टी को अपने माथे से लगाने का अनुभव उनके लिए विशेष रहा। उनके मुताबिक, इस यात्रा ने उन्हें स्वतंत्रता संग्राम की शक्ति और देश के करोड़ों लोगों की सामूहिक शक्ति का एहसास कराया।
उन्होंने सरदार पटेल और बिरसा मुंडा के जीवन में अलग-अलग परिस्थितियों के बावजूद देश की एकता की समान भावना का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने देशवासियों से दोनों महापुरुषों की जयंती से जुड़े अभियानों में भाग लेने की अपील की।
दुनिया में बढ़ रहा भारतीय एनीमेशन और गेमिंग का प्रभाव
‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के तेजी से बढ़ते एनीमेशन और गेमिंग सेक्टर का भी जिक्र किया। उन्होंने छोटा भीम, कृष्ण, हनुमान और मोटू-पतलू जैसे भारतीय एनीमेशन किरदारों की लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय कंटेंट को विदेशों में भी पसंद किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज एनीमेशन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। स्मार्टफोन, सिनेमा, गेमिंग कंसोल और वर्चुअल रियलिटी जैसे क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारत के क्रिएटर्स वर्चुअल रियलिटी के जरिए अजंता की गुफाओं, कोणार्क मंदिर और वाराणसी के घाटों जैसे पर्यटन स्थलों का अनुभव लोगों तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने युवाओं से अपनी रचनात्मक क्षमता का इस्तेमाल करने और भारत को ग्लोबल एनीमेशन पावरहाउस बनाने में योगदान देने का आह्वान किया।
आत्मनिर्भर भारत की उपलब्धियों का जिक्र
पीएम मोदी ने आत्मनिर्भर भारत को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता अब सिर्फ सरकारी नीति नहीं बल्कि जनभागीदारी का अभियान बन रही है।
प्रधानमंत्री ने मोबाइल निर्माण, रक्षा उपकरणों के निर्यात और अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत ने कई ऐसे क्षेत्रों में अपनी क्षमता साबित की है, जिनमें कुछ वर्ष पहले देश की क्षमता को लेकर सवाल उठाए जाते थे।
लद्दाख के हनले में स्थापित इमेजिंग टेलीस्कोप का उदाहरण देते हुए प्रधानमंत्री ने इसे भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता से जोड़ा। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भारतीय वैज्ञानिकों और स्थानीय उद्योग ने इस परियोजना को संभव बनाया।
विदेशों में भी गूंज रही भारतीय संस्कृति
प्रधानमंत्री मोदी ने भारतीय कला और संस्कृति की वैश्विक पहुंच का भी जिक्र किया। उन्होंने रूस के याकुत्स्क में कालिदास के ‘अभिज्ञान शाकुंतलम्’ के मंचन का उदाहरण दिया। इसके अलावा लाओस में रामायण की प्रस्तुति और कुवैत में रामायण तथा महाभारत के अरबी अनुवाद का उल्लेख किया।
पेरू में भारतीय शास्त्रीय नृत्य सिखाए जाने की बात भी प्रधानमंत्री ने साझा की। उन्होंने कहा कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भारतीय संस्कृति के प्रति लोगों की रुचि बढ़ रही है। उनके संदेश का सार था कि भारतीय कला और संस्कृति देश की सीमाओं से कहीं आगे तक अपनी पहचान बना रही है।
फिटनेस को जन आंदोलन बनाने की अपील
कार्यक्रम के अंतिम हिस्से में प्रधानमंत्री ने फिटनेस को लेकर भी देशवासियों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि भारत में फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और पार्कों से लेकर स्कूलों तक लोग अलग-अलग गतिविधियों में भाग ले रहे हैं।
उन्होंने फिट इंडिया स्कूल आवर्स का जिक्र करते हुए बताया कि कई स्कूल बच्चों को योग, एरोबिक्स, खेल और पारंपरिक खेलों से जोड़ रहे हैं। इससे बच्चों की एकाग्रता और स्कूल में उपस्थिति पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की बात भी उन्होंने साझा की।
प्रधानमंत्री ने परिवारों से भी फिटनेस को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की अपील की। उन्होंने फैमिली फिटनेस आवर और पारंपरिक खेलों को फिर से लोकप्रिय बनाने जैसे उदाहरणों का उल्लेख किया।
‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश
कार्यक्रम के समापन पर प्रधानमंत्री मोदी ने त्योहारों के दौरान ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने लोगों से स्थानीय दुकानदारों और उत्पादों से खरीदारी करने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि त्योहार केवल उत्सव का अवसर नहीं बल्कि स्थानीय कारोबार, कारीगरों और छोटे व्यापारियों को मजबूत करने का भी मौका हैं। उन्होंने देशवासियों को आने वाले त्योहारों की शुभकामनाएं देते हुए स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में इस बार साइबर सुरक्षा से लेकर आत्मनिर्भर भारत, भारतीय संस्कृति, एनीमेशन, फिटनेस और राष्ट्रीय एकता तक कई मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। इनमें डिजिटल अरेस्ट फ्रॉड को लेकर दिया गया संदेश आम लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण रहा।
प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा कि ऐसे मामलों में डरने के बजाय सतर्क रहना जरूरी है। रुकें, सोचें और फिर एक्शन लें—यह मंत्र साइबर ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश के तौर पर सामने आया। वहीं, भारतीय संस्कृति, तकनीक और युवाओं की रचनात्मक क्षमता को लेकर प्रधानमंत्री ने भारत की वैश्विक भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया।
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