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लखनऊ। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का आपराधिक परिवाद दाखिल किया है। अजय राय की ओर से यह परिवाद लखनऊ के जनपद न्यायालय में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आलोक वर्मा की अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया गया। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने अपने अधिवक्ता संजीव पाण्डेय के माध्यम से यह कानूनी कार्रवाई की है।

यह मामला अयोध्या में आयोजित एक निषाद सम्मेलन के दौरान अजय राय के मछली खाने को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा दिए गए कथित बयान से जुड़ा बताया जा रहा है। अजय राय का आरोप है कि मुख्यमंत्री की ओर से उनके संबंध में बिना किसी ठोस या प्रमाणित आधार के ऐसा बयान दिया गया, जिससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और उन्हें मानसिक रूप से भी प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि वह पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं और उनके बारे में सार्वजनिक मंच से मछली खाने संबंधी टिप्पणी किए जाने से उनकी सामाजिक छवि प्रभावित हुई है। इसी को आधार बनाते हुए उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।

अयोध्या के निषाद सम्मेलन से जुड़ा है मामला

बताया गया है कि अजय राय अयोध्या में राम जन्मभूमि और हनुमानगढ़ी के दर्शन करने पहुंचे थे। इसी दौरान राम निहाल निषाद द्वारा आयोजित निषाद सम्मेलन में उनकी मौजूदगी रही। कांग्रेस की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सम्मेलन के दौरान आयोजित मत्स्य भोज को लेकर बाद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ओर से अजय राय को लेकर एक बयान दिया गया।

इसी बयान को लेकर अब राजनीतिक विवाद कानूनी लड़ाई में बदल गया है। अजय राय ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री द्वारा उनके संबंध में मछली खाने की बात कही गई, जबकि वह स्वयं को पूर्ण शाकाहारी बताते हैं। कांग्रेस नेता का कहना है कि इस तरह का बयान सार्वजनिक रूप से उनकी व्यक्तिगत और सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला है।

अजय राय की ओर से दाखिल किए गए परिवाद में इसी कथित बयान को मानहानि का आधार बनाया गया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा किसी सार्वजनिक व्यक्ति के बारे में बयान देते समय तथ्यों और प्रमाणों का ध्यान रखा जाना चाहिए।

बिना सबूत बयान देने का लगाया आरोप

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर आरोप लगाया है कि उनके बारे में मछली खाने से संबंधित बयान बिना किसी सबूत के दिया गया। उनका कहना है कि बयान के कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक रूप से परेशानी का सामना करना पड़ा।

कांग्रेस की ओर से कहा गया है कि अजय राय लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं और उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक छवि है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक मंच से उनके खान-पान को लेकर कथित तौर पर गलत जानकारी सार्वजनिक किए जाने का असर उनकी प्रतिष्ठा पर पड़ सकता है।

परिवाद के जरिए अजय राय ने न्यायालय के समक्ष अपनी शिकायत रखी है। अब इस मामले में अदालत की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत क्या कदम उठाया जाता है, इस पर सभी की निगाहें रहेंगी।

अजय राय ने खुद को बताया पूर्ण शाकाहारी

अजय राय की ओर से दाखिल परिवाद में विशेष रूप से इस बात का उल्लेख किया गया है कि वह पूर्ण शाकाहारी हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का कहना है कि उनके बारे में मछली खाने संबंधी टिप्पणी उनके लिए व्यक्तिगत तौर पर बेहद आपत्तिजनक है।

उनका तर्क है कि खान-पान से संबंधित किसी व्यक्ति की निजी आदतों को लेकर यदि सार्वजनिक मंच से ऐसी बात कही जाए, जो उसके अनुसार तथ्यात्मक रूप से गलत हो, तो इससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हो सकती है।

अजय राय का कहना है कि मुख्यमंत्री के बयान से उन्हें समाज में मानहानि का सामना करना पड़ा। इसी कथित सामाजिक और मानसिक क्षति के चलते उन्होंने आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल करने का निर्णय लिया।

राजनीतिक बयान से कोर्ट तक पहुंचा मामला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी कोई नई बात नहीं है। लेकिन इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष द्वारा सीधे न्यायालय का रुख किए जाने के बाद विवाद ने नया राजनीतिक और कानूनी मोड़ ले लिया है।

अजय राय उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल हैं और वह कई मौकों पर प्रदेश सरकार तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं। दूसरी ओर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी विपक्षी दलों और उनके नेताओं पर राजनीतिक मंचों से निशाना साधते रहे हैं।

ऐसे में दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब मानहानि का मामला अदालत तक पहुंचना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कांग्रेस की ओर से इसे अजय राय की प्रतिष्ठा और सार्वजनिक छवि से जुड़ा मामला बताया जा रहा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में सक्रिय किसी व्यक्ति के बारे में यदि तथ्यहीन या गलत टिप्पणी की जाती है और उससे उसकी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचता है, तो उसके पास कानूनी उपचार का अधिकार है।

अधिवक्ता के माध्यम से दाखिल हुआ परिवाद

अजय राय ने अपने अधिवक्ता संजीव पाण्डेय के माध्यम से लखनऊ के जनपद न्यायालय में परिवाद दाखिल किया। परिवाद अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आलोक वर्मा की अदालत में प्रस्तुत किया गया है।

आपराधिक मानहानि के मामलों में शिकायतकर्ता की ओर से अदालत के समक्ष कथित आपत्तिजनक बयान, उससे जुड़े तथ्य और उससे हुई कथित क्षति का आधार रखा जाता है। इसके बाद न्यायालय उपलब्ध तथ्यों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार आगे की प्रक्रिया तय करता है।

इस मामले में भी अब अदालत की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी। यह देखना होगा कि अदालत परिवाद पर किस प्रकार संज्ञान लेती है और आगे की सुनवाई के दौरान किन तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार किया जाता है।

कांग्रेस ने कहा- प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बयान

कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा अजय राय के संबंध में दिया गया कथित बयान उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को प्रभावित करने वाला है। पार्टी का कहना है कि अजय राय ने अपनी व्यक्तिगत छवि और सम्मान को लेकर न्यायालय की शरण ली है।

कांग्रेस नेताओं के अनुसार, यह मामला केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ा विषय है। पार्टी का कहना है कि अजय राय ने अपने ऊपर लगाए गए कथित आरोप का जवाब राजनीतिक मंच से देने के बजाय कानूनी माध्यम से देने का फैसला किया है।

हालांकि, इस पूरे मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ या उनकी ओर से संबंधित बयान पर विस्तृत कानूनी प्रतिक्रिया सामने आना अभी महत्वपूर्ण होगा। अदालत में मामले की आगे की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के तर्क और साक्ष्य सामने आ सकते हैं।

बयान के राजनीतिक मायने भी महत्वपूर्ण

अजय राय द्वारा मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का परिवाद ऐसे समय में दाखिल किया गया है, जब उत्तर प्रदेश में कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के इस कदम को पार्टी की ओर से राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर जवाब देने की रणनीति के तौर पर भी देखा जा सकता है। वहीं, भाजपा की ओर से इस मामले पर आने वाली प्रतिक्रिया राजनीतिक चर्चा को और तेज कर सकती है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में नेताओं द्वारा एक-दूसरे के खिलाफ बयान देने और उसके बाद कानूनी कार्रवाई किए जाने के कई मामले सामने आते रहे हैं। मानहानि का परिवाद दाखिल होने के बाद अब यह विवाद अदालत की प्रक्रिया के दायरे में पहुंच गया है।

क्या है अजय राय का आरोप?

अजय राय की ओर से दाखिल परिवाद की मुख्य बातों को संक्षेप में देखें तो उनका आरोप है कि—

  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अयोध्या में निषाद सम्मेलन के संदर्भ में उनके बारे में मछली खाने को लेकर बयान दिया।
  • अजय राय का दावा है कि वह पूर्ण शाकाहारी हैं।
  • उनके अनुसार मुख्यमंत्री का कथित बयान बिना किसी प्रमाण या सबूत के दिया गया।
  • बयान से उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
  • कथित टिप्पणी के कारण उन्हें मानसिक रूप से भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • इसी आधार पर उन्होंने आपराधिक मानहानि का परिवाद अदालत में दाखिल किया है।

अब इस मामले में अदालत की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट होगा कि परिवाद पर न्यायालय क्या रुख अपनाता है और शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत तथ्यों एवं साक्ष्यों का किस प्रकार परीक्षण किया जाता है।

अदालत के रुख पर टिकी निगाहें

फिलहाल इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू न्यायालय की आगामी कार्यवाही होगी। अजय राय की ओर से परिवाद दाखिल किया जा चुका है। अब अदालत के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होनी है।

मानहानि से जुड़े मामलों में कथित बयान की प्रकृति, उसके सार्वजनिक होने, उससे प्रतिष्ठा को हुई कथित क्षति और उपलब्ध साक्ष्यों जैसे पहलुओं की कानूनी अहमियत होती है। इसलिए आगे होने वाली सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलें महत्वपूर्ण रहेंगी।

अजय राय ने स्पष्ट रूप से कहा है कि मुख्यमंत्री के कथित बयान से उनकी सामाजिक और व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। वहीं, इस मामले में मुख्यमंत्री या उनकी ओर से आने वाला पक्ष भी कानूनी प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।

निष्कर्ष

अयोध्या के निषाद सम्मेलन और वहां आयोजित मत्स्य भोज से जुड़ा विवाद अब राजनीतिक बयानबाजी से निकलकर अदालत तक पहुंच गया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपराधिक मानहानि का परिवाद दाखिल करते हुए आरोप लगाया है कि उनके बारे में मछली खाने संबंधी कथित बयान बिना सबूत के दिया गया और इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा।

अजय राय का कहना है कि वह पूर्ण शाकाहारी हैं और मुख्यमंत्री के कथित बयान से उन्हें मानसिक एवं सामाजिक रूप से प्रताड़ना झेलनी पड़ी। इसी आधार पर उन्होंने अधिवक्ता संजीव पाण्डेय के माध्यम से लखनऊ के जनपद न्यायालय में अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री आलोक वर्मा की अदालत का रुख किया है।

अब इस मामले में अदालत की आगामी कार्यवाही पर राजनीतिक और कानूनी दोनों ही हलकों की नजर रहेगी। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि न्यायालय इस परिवाद पर क्या रुख अपनाता है और मामले की आगे की प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।

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