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लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी सरकार पर कई मुद्दों को लेकर निशाना साधा। प्रेस वार्ता में पार्टी में शामिल हुए नए नेताओं का स्वागत करने के साथ-साथ अखिलेश यादव ने रायबरेली में समाजवादी छात्र सभा और एबीवीपी से जुड़े विवाद, पुलिस कार्रवाई, महंगाई, रोजगार, किसानों की समस्याओं, बिजली और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी।

प्रेस वार्ता के दौरान बांदा लोकसभा क्षेत्र से पूर्व में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके मयंक द्विवेदी अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। अखिलेश यादव ने उनका स्वागत करते हुए कहा कि उनके आने से पार्टी का सामाजिक न्याय और पीडीए अभियान मजबूत होगा। इसी क्रम में श्रावस्ती से नंद किशोर गिरी और श्रावस्ती से ही लंबे समय तक चेयरमैन संघ के प्रदेश अध्यक्ष रहे जितेंद्र कुमार गुप्ता के पार्टी में शामिल होने की जानकारी दी गई।

कानपुर देहात के भोगनीपुर क्षेत्र से पूर्व प्रत्याशी जुनेद खान ने भी अपने समर्थकों के साथ समाजवादी पार्टी की सदस्यता ली। अखिलेश यादव ने कहा कि जुनेद खान को पिछले चुनाव में अच्छा समर्थन मिला था और यदि उस समय उन्हें राजनीतिक सम्मान के साथ पार्टी के साथ जोड़ा गया होता तो पार्टी को इसका राजनीतिक लाभ मिल सकता था। उन्होंने भविष्य में ऐसे नेताओं के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की बात कही।

रायबरेली विवाद पर अखिलेश यादव ने उठाए सवाल

प्रेस वार्ता में सबसे ज्यादा चर्चा रायबरेली में समाजवादी छात्र सभा के कार्यक्रम को लेकर हुए विवाद की रही। अखिलेश यादव ने रायबरेली के सपा विधायक राहुल लोधी और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कथित दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्र सभा के कार्यक्रम में व्यवधान पैदा किया गया और बाद में पुलिस-प्रशासन का रवैया भी पक्षपातपूर्ण रहा।

इस मामले को लेकर रायबरेली में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन भी किया था। शुक्रवार को सपा कार्यकर्ताओं ने शहीद चौक से प्रदर्शन शुरू कर एसपी कार्यालय और फिर कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। प्रशासन के अनुसार, मामले की जांच एसडीएम न्यायिक स्तर के अधिकारी से कराने और सात दिन में रिपोर्ट मांगे जाने की बात कही गई है।

अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता में कहा कि उन्हें रायबरेली की घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस अधिकारियों से बात करनी पड़ी। उन्होंने राहुल लोधी के साथ हुए कथित व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

रायबरेली मामले को लेकर अखिलेश यादव ने आगे खुद वहां जाने की घोषणा भी की। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने 24 सितंबर को रायबरेली जाने और राहुल लोधी के घर चाय पीने की बात कही है।

हालांकि, इस पूरे विवाद में पुलिस की ओर से सपा के आरोपों को खारिज किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पुलिस ने विधायक से मारपीट के आरोपों को भ्रामक और असत्य बताया है। ऐसे में पूरे मामले की प्रशासनिक जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होने की संभावना है।

सरकार पर महंगाई और रोजगार को लेकर निशाना

अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता के दौरान महंगाई को भी प्रमुख मुद्दा बनाया। उन्होंने कहा कि आम आदमी की जरूरत की वस्तुओं की कीमतें बढ़ रही हैं और पेट्रोल-डीजल, खाद तथा कृषि में इस्तेमाल होने वाली कई चीजों की लागत किसानों और आम लोगों पर असर डाल रही है।

रोजगार के मुद्दे पर उन्होंने सरकार के विज्ञापनों और जमीन पर रोजगार की स्थिति के बीच अंतर होने का दावा किया। उनका कहना था कि निवेश, उद्योग और रोजगार को लेकर बड़े-बड़े दावे और विज्ञापन दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन रोजगार के अवसरों और युवाओं की स्थिति से किया जाना चाहिए।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि प्रदेश में रोजगार और निवेश की स्थिति को लेकर सरकार के दावों की वास्तविक आंकड़ों के आधार पर समीक्षा होनी चाहिए। उनके इस बयान की रिपोर्टिंग में भी रोजगार और निवेश को लेकर सरकार पर उनके आरोपों को प्रमुखता मिली है।

आलू किसानों का मुद्दा भी उठाया

प्रेस वार्ता में आलू किसानों की स्थिति का मुद्दा भी उठाया गया। अखिलेश यादव ने सरकार से आलू उत्पादन और सरकारी खरीद से जुड़े आंकड़ों का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि सरकार ने किसानों की मदद और खरीद के लिए बजट रखा है तो उस बजट से वास्तव में कितनी खरीद हुई और किसानों को कितना लाभ मिला, इसका आंकड़ा सामने आना चाहिए।

उन्होंने किसानों की आय, कृषि लागत और बाजार की कीमतों के बीच अंतर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिलना जरूरी है।

कासगंज और एटा के विकास का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भविष्य में पार्टी के घोषणापत्र में इन क्षेत्रों की स्थानीय जरूरतों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने जवाहरपुर थर्मल पावर प्लांट का उल्लेख करते हुए दावा किया कि यह परियोजना समाजवादी सरकार के समय शुरू हुई थी और मौजूदा सरकार पर नई बिजली उत्पादन इकाइयों को लेकर सवाल उठाए।

कासगंज में चिकोरी और डेयरी को बढ़ावा देने की बात

अखिलेश यादव ने कासगंज क्षेत्र में चिकोरी की खेती का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि चिकोरी का इस्तेमाल कॉफी समेत अन्य उत्पादों में किया जाता है और क्षेत्र के किसानों को बाजार से बेहतर लाभ दिलाने के लिए विशेष योजना बनाई जा सकती है।

उन्होंने मंडियों को बेहतर करने और किसानों को उनकी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की बात कही। इसके साथ ही डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने का भी उल्लेख किया गया।

किसानों की कर्जमाफी से जुड़े सवाल पर अखिलेश यादव ने कहा कि अभी विधानसभा चुनाव के लिए पार्टी का घोषणापत्र सामने आने में समय है। उन्होंने संकेत दिया कि पार्टी समय-समय पर किसानों के हित में फैसले लेती रही है और घोषणापत्र में आगे की नीतियों को स्पष्ट किया जाएगा।

UPI चार्ज को लेकर भी सरकार पर हमला

प्रेस वार्ता में यूपीआई चार्ज से जुड़े सवाल पर भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने डिजिटल भुगतान से संबंधित शुल्क को लेकर सवाल उठाए और इसे आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों के लिए चिंता का विषय बताया।

उन्होंने नोटबंदी का जिक्र करते हुए उस समय सरकार की ओर से किए गए दावों और उसके बाद की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए। अखिलेश यादव ने भ्रष्टाचार और महंगाई को लेकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और AI को लेकर सपा की रणनीति

प्रेस वार्ता में डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर भी चर्चा हुई। अखिलेश यादव ने कहा कि आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों को जमीन पर संगठन मजबूत करने के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी अपनी बात रखनी होगी।

उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर राजनीतिक नैरेटिव तेजी से बनता है और पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी अपनी बात रखने के लिए डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल करना होगा।

उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा बनाए जा रहे वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि सोशल मीडिया अब राजनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। हाल के दिनों में यूपी की राजनीति में भाजपा और सपा के बीच AI आधारित वीडियो और डिजिटल कंटेंट को लेकर भी गतिविधियां तेज हुई हैं।

2027 की तैयारी को लेकर अखिलेश का बड़ा बयान

उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी चुनाव की तैयारी कर रही है। उन्होंने पार्टी के पीडीए कार्यक्रमों और पंचायतों का उल्लेख करते हुए कहा कि संगठन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में कार्यक्रम कर रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि चुनाव में अभी समय कम है और पार्टी को जमीन पर संगठन को और मजबूत करना होगा। उन्होंने पत्रकारों से बातचीत के दौरान यह भी कहा कि चुनावी लड़ाई केवल सोशल मीडिया तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संगठनात्मक स्तर पर भी पार्टी को तैयारी करनी होगी।

रायबरेली विवाद को लेकर भी सपा की सक्रियता इसी राजनीतिक माहौल के बीच बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर हुए विरोध-प्रदर्शन के बाद मामला लखनऊ तक पहुंच चुका है और अखिलेश यादव के रायबरेली दौरे की घोषणा ने इसे और राजनीतिक महत्व दे दिया है।

PDA को लेकर भाजपा पर निशाना

अखिलेश यादव ने प्रेस वार्ता में पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समूहों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन वर्गों के नेताओं और जनप्रतिनिधियों के साथ दबाव और कार्रवाई की जा रही है।

हालांकि ये आरोप समाजवादी पार्टी के राजनीतिक दावे हैं। भाजपा और सरकार की ओर से अलग-अलग मौकों पर विपक्ष के ऐसे आरोपों का खंडन किया जाता रहा है। रायबरेली मामले में भी पुलिस ने सपा नेताओं के आरोपों को खारिज किया है और प्रशासन ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही है।

अखिलेश यादव ने कहा कि उनकी पार्टी आने वाले समय में संगठन को मजबूत करने और जनता से जुड़े मुद्दों को उठाने पर जोर देगी। प्रेस वार्ता में पार्टी में नए नेताओं की जॉइनिंग, रायबरेली विवाद, किसानों की समस्याएं, रोजगार, महंगाई, बिजली और डिजिटल राजनीति जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।

कुल मिलाकर, समाजवादी पार्टी कार्यालय में हुई यह प्रेस वार्ता आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच पार्टी के राजनीतिक एजेंडे की झलक देती नजर आई। वहीं रायबरेली का विवाद फिलहाल जांच के दायरे में है और प्रशासनिक रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में आगे की तस्वीर साफ होने की उम्मीद है।

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