लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी ने आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों को लेकर अपनी संगठनात्मक गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती की अध्यक्षता में बुधवार को लखनऊ स्थित पार्टी के यूपी स्टेट कार्यालय में ऑल इंडिया स्तर की विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर पार्टी की तैयारियों की समीक्षा की गई। इसके अलावा संगठन के कामकाज, संभावित उम्मीदवारों की तैयारी, पिछले निर्देशों की प्रगति और पार्टी के भीतर जरूरी बदलावों पर भी चर्चा हुई।
बसपा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य केवल चुनावी रणनीति पर चर्चा तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पार्टी संगठन की मौजूदा स्थिति और जमीनी स्तर पर उसकी सक्रियता का भी आकलन किया गया। मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से पहले दिए गए निर्देशों पर हुए काम की जानकारी ली और चुनावी सफलता के लिए संगठन को और अधिक सक्रिय करने पर जोर दिया।
तीन राज्यों के चुनाव पर विशेष नजर
बसपा के लिए उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड और पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव महत्वपूर्ण हैं। बैठक में इन राज्यों में पार्टी की चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा की गई। संभावित उम्मीदवारों की पहचान और चयन से लेकर संगठन की मजबूती तक कई बिंदुओं पर विचार किया गया।
पार्टी नेतृत्व की ओर से यह संदेश दिया गया कि चुनाव की तैयारियों को अंतिम समय के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। उम्मीदवारों, संगठनात्मक जिम्मेदारियों और जमीनी नेटवर्क को लेकर पहले से तैयारी करने की जरूरत है।
उत्तर प्रदेश बसपा की राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण आधार रहा है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी अपने पुराने संगठनात्मक ढांचे को फिर सक्रिय करने की दिशा में काम करती दिखाई दे रही है। बैठक में चुनावी तैयारियों को लेकर कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की भूमिका पर भी जोर दिया गया।
मायावती ने संगठन को लेकर दिए दिशा-निर्देश
बैठक में मायावती ने पार्टी संगठन में जरूरी फेरबदल को लेकर भी चर्चा की। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पहले दिए गए दिशा-निर्देशों की समीक्षा के साथ यह देखा गया कि संगठन के स्तर पर कौन से काम पूरे हुए और किन क्षेत्रों में अभी और मेहनत की जरूरत है।
मायावती ने चुनावी सफलता के लिए पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से ईमानदारी, अनुशासन और पूरी निष्ठा के साथ काम करने की अपेक्षा जताई। पार्टी के अनुसार, चुनावी तैयारियों के साथ संगठन के भीतर भी जरूरी बदलाव किए गए हैं।
बसपा की तरफ से जारी जानकारी में यह भी कहा गया है कि संगठन को मजबूत करने के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि चुनाव के दौरान पार्टी का नेटवर्क प्रभावी तरीके से काम कर सके।
भाजपा सरकार के कामकाज पर मायावती का निशाना
बैठक में देश और उत्तर प्रदेश की मौजूदा राजनीतिक एवं सामाजिक स्थिति पर भी चर्चा हुई। बसपा की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक मायावती ने गरीबी, बेरोजगारी, पिछड़ेपन और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर चिंता जताई।
पार्टी के फीडबैक का हवाला देते हुए कहा गया कि इन मुद्दों को लेकर आम लोगों के बीच असंतोष है। बसपा ने आरोप लगाया कि सत्ता में मौजूद भाजपा से लोगों की उम्मीदें कमजोर हुई हैं और जनता के बीच निराशा का माहौल बन रहा है।
हालांकि यह पार्टी की ओर से बैठक में व्यक्त किया गया राजनीतिक आकलन है। इसे बसपा के आधिकारिक दृष्टिकोण के रूप में देखा जाना चाहिए।
मायावती ने राजनीतिक माहौल के साथ सामाजिक मुद्दों का भी जिक्र किया। पार्टी के बयान में संकीर्णता, साम्प्रदायिकता, जातिवाद और जनविरोधी नीतियों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है।
अयोध्या प्रकरण को भी चर्चा में लाया गया
बसपा की बैठक में अयोध्या से जुड़े चंदा प्रकरण का भी उल्लेख किया गया। पार्टी के मुताबिक मायावती ने धार्मिक आस्था से जुड़े मुद्दों और अयोध्या प्रकरण को लेकर बने राजनीतिक माहौल पर अपनी बात रखी।
बसपा का कहना है कि इन घटनाक्रमों के कारण भाजपा के प्रति जनता में असंतोष बढ़ने का दावा किया जा रहा है। पार्टी ने इसे आने वाले चुनावों के राजनीतिक माहौल से जोड़कर देखा है।
मायावती ने पार्टी कार्यकर्ताओं को ऐसे माहौल में अपनी राजनीतिक गतिविधियों और संगठनात्मक काम पर अधिक ध्यान देने का संदेश दिया।
अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी का संकेत
बैठक में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर बसपा की रणनीति का एक महत्वपूर्ण पहलू भी सामने आया। पार्टी की ओर से कहा गया कि चुनाव का स्वरूप चाहे त्रिकोणीय हो या चतुष्कोणीय, बसपा अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने और सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ चुनावी मैदान में उतरेगी।
इसका मतलब साफ तौर पर संगठन को अपने दम पर मजबूत करने पर जोर देना है। बैठक में पार्टी कार्यकर्ताओं को चुनावी तैयारी में पूरी ताकत लगाने और संगठन के स्तर पर किसी भी तरह की कमजोरी को दूर करने की दिशा में काम करने को कहा गया।
बसपा की राजनीति में संगठन और मतदाता आधार को हमेशा महत्वपूर्ण माना गया है। बैठक में भी पार्टी की इसी ताकत को फिर से सक्रिय करने पर जोर दिखाई दिया।
‘बहुजन समाज’ को बताया राजनीतिक आधार
मायावती ने बैठक में बहुजन समाज की राजनीतिक ताकत का भी उल्लेख किया। पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार उन्होंने कहा कि बहुजन समाज की सबसे बड़ी ताकत संविधान द्वारा दिया गया वोट का अधिकार है।
उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर के संवैधानिक योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि मताधिकार के माध्यम से बहुजन समाज अपनी राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर सकता है।
बसपा का मानना है कि विभिन्न सामाजिक समूहों को राजनीतिक रूप से एकजुट करके ही पार्टी अपनी भूमिका को मजबूत कर सकती है। इसी संदर्भ में पार्टी ने अपने पुराने राजनीतिक अनुभवों और सरकार में किए गए कार्यों को भी याद किया।
परिवारवाद की बहस पर भी पार्टी का रुख
बैठक में राजनीतिक दलों में परिवारवाद को लेकर चलने वाली बहस का भी संदर्भ आया। बसपा ने अपनी स्थापना और संगठन के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी की विचारधारा और संगठनात्मक ढांचा अलग तरीके से विकसित हुआ है।
पार्टी की ओर से कहा गया कि संगठन में व्यक्तिगत स्वार्थ की जगह बहुजन समाज के हितों और राजनीतिक उद्देश्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
इसी बीच बैठक में एक बड़ा संगठनात्मक फैसला भी सामने आया। बसपा ने ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दी है। पार्टी की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ईशान आनंद ने कानून की पढ़ाई पूरी की है और नई जिम्मेदारी मिलने के बाद मायावती के प्रति आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह पार्टी नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करेंगे।
ईशान आनंद को नई जिम्मेदारी
राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी मिलने के बाद ईशान आनंद ने बैठक में मौजूद पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का आभार जताया। उन्होंने पार्टी अध्यक्ष मायावती के प्रति भी धन्यवाद व्यक्त किया।
उनकी ओर से कहा गया कि वह पार्टी संगठन और उसके उद्देश्यों के लिए पूरी निष्ठा से काम करेंगे। उन्होंने बहुजन समाज पार्टी के संस्थापक कांशीराम और डॉ. भीमराव आंबेडकर के विचारों का भी उल्लेख किया।
संगठन में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब बसपा आगामी विधानसभा चुनावों के लिए अपनी तैयारी तेज कर रही है। इसलिए राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी में बदलाव को पार्टी के संगठनात्मक कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
महंगाई और डिजिटल भुगतान का मुद्दा
बैठक में आम जनता से जुड़े आर्थिक मुद्दे भी उठे। बसपा ने महंगाई को लेकर चिंता जताई और कहा कि बढ़ती कीमतों का असर आम लोगों पर पड़ रहा है।
इसके अलावा UPI भुगतान व्यवस्था से जुड़े बदलाव का मुद्दा भी प्रेस विज्ञप्ति में शामिल किया गया। पार्टी ने छोटे व्यापारियों पर पड़ने वाले संभावित प्रभाव को लेकर सवाल उठाया।
बसपा का कहना है कि डिजिटल भुगतान व्यवस्था में होने वाले बदलावों का असर छोटे दुकानदारों और व्यापारियों पर पड़ सकता है। पार्टी ने इस विषय पर सरकार से आम लोगों और व्यापारियों के हितों को ध्यान में रखने की अपेक्षा जताई।
आईआईटी मुंबई के छात्र की घटना का जिक्र
बैठक में उच्च शिक्षा संस्थानों में सामाजिक भेदभाव से जुड़े मुद्दे को भी उठाया गया। बसपा की प्रेस विज्ञप्ति में आईआईटी मुंबई के एक दलित छात्र की आत्महत्या की घटना का उल्लेख करते हुए जातिगत भेदभाव पर चिंता व्यक्त की गई।
पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्रों को भी सामाजिक भेदभाव जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
बसपा ने इस मुद्दे को सामाजिक न्याय से जोड़ते हुए कहा कि देश में शिक्षा हासिल करने वाले युवाओं को सुरक्षित और समान वातावरण मिलना चाहिए।
‘विकसित भारत’ के दावे पर भी सवाल
मायावती ने देश की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए यह भी कहा कि यदि विकास का वास्तविक लाभ गरीबों तक नहीं पहुंच रहा है तो केवल विकास के बड़े दावों से स्थिति नहीं बदलेगी।
बसपा की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि दुनिया के विकसित देशों की आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए भारत के सामने मौजूद चुनौतियों पर विचार करने की जरूरत है।
पार्टी ने आर्थिक असमानता, महंगाई और गरीबों की स्थिति को अपने राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बनाया है।
चुनावी तैयारी के साथ संगठन मजबूत करने की कवायद
लखनऊ में हुई यह बैठक बसपा के लिए केवल एक समीक्षा बैठक नहीं बल्कि आने वाले चुनावों की दिशा में संगठन को तैयार करने का प्रयास भी रही। उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब में होने वाले चुनावों को ध्यान में रखते हुए पार्टी ने उम्मीदवारों और संगठन दोनों पर फोकस किया है।
मायावती ने पार्टी पदाधिकारियों से पहले दिए गए निर्देशों पर हुए काम की समीक्षा की और आगे की तैयारी के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। संगठन में बदलाव भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।
बसपा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी चुनाव में पूरी मजबूती के साथ उतरने की तैयारी कर रही है। उत्तर प्रदेश में पार्टी ने अपने संगठन और सामाजिक आधार को फिर सक्रिय करने पर विशेष जोर दिया है।
बैठक से निकले प्रमुख संदेश
23 सितंबर को लखनऊ में हुई इस बैठक में कई मुद्दे एक साथ सामने आए। चुनावी राज्यों की तैयारी, उम्मीदवारों की पहचान, संगठनात्मक फेरबदल, आर्थिक मुद्दे, सामाजिक न्याय, अयोध्या से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम और पार्टी के वैचारिक आधार पर विस्तार से चर्चा हुई।
सबसे महत्वपूर्ण संगठनात्मक फैसलों में ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी दिया जाना शामिल है। इसके साथ ही पार्टी ने उत्तर प्रदेश सहित अन्य चुनावी राज्यों में संगठन को सक्रिय करने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया है।
अब आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बैठक में तय की गई रणनीति को बसपा किस तरह जमीन पर लागू करती है। खासकर उत्तर प्रदेश में उम्मीदवारों के चयन, संगठन के विस्तार और बूथ स्तर की तैयारी पर पार्टी का अगला कदम क्या होता है, इस पर राजनीतिक नजरें रहेंगी।
फिलहाल 23 सितंबर की बैठक से इतना स्पष्ट है कि बसपा ने आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर संगठनात्मक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी नेतृत्व ने जहां अपने पुराने निर्देशों की समीक्षा की, वहीं नए संगठनात्मक बदलाव के जरिए जिम्मेदारियां भी तय कीं। मायावती ने चुनावी तैयारियों के साथ सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को भी पार्टी के राजनीतिक एजेंडे में प्रमुखता से रखा है।
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