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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के लौलई क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की परेशानियां एक बार फिर चर्चा में हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सामान्य बारिश के दौरान भी कई बार बिजली आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। कहीं बिजली गुल हो जाती है, कहीं लो-वोल्टेज की समस्या सामने आती है और इसके बाद शिकायत करने के लिए उपभोक्ताओं को लंबे समय तक जवाब का इंतजार करना पड़ता है।

लौलई बिजली उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के मुताबिक बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है। खास तौर पर आसपास की आवासीय कॉलोनियों के लोगों का कहना है कि बिजली जाने के बाद सबसे बड़ी परेशानी यह होती है कि समस्या की जानकारी देने और बिजली बहाल होने की स्थिति जानने के लिए जिम्मेदार कर्मचारियों से संपर्क करना आसान नहीं रहता।

बारिश की कुछ बूंदें और बिजली व्यवस्था पर सवाल

लखनऊ में बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या नई नहीं है। हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट में भी कमता और लौलाई उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में बारिश के दौरान तीन से चार घंटे तक बिजली गुल रहने की जानकारी सामने आई थी।

इससे पहले मई 2026 में लौलई स्थित कांशीराम कॉलोनी के लोगों ने रातभर बिजली गुल रहने के बाद पावर हाउस पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया था। उस समय भी लोगों की शिकायत बिजली आपूर्ति को लेकर थी।

जून 2026 में भी लौलई बिजली उपकेंद्र पर बिजली कटौती को लेकर उपभोक्ताओं के प्रदर्शन और हंगामे की घटना सामने आई थी। रिपोर्ट के अनुसार, बिजली संकट से नाराज लोग उपकेंद्र पहुंचे थे और बाद में पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। बिजली विभाग की ओर से उस मामले में एरियल बंच केबल में खराबी को समस्या का कारण बताया गया था।

इन घटनाओं से कम से कम इतना जरूर सामने आता है कि लौलई क्षेत्र में बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं।

पॉश कॉलोनियों के लोग भी परेशान

लौलई और गोमती नगर विस्तार के आसपास तेजी से विकसित हो रहे आवासीय क्षेत्रों में बड़ी संख्या में परिवार रह रहे हैं। इनमें माधव ग्रीन जैसे आवासीय क्षेत्र भी शामिल हैं। उपलब्ध संपत्ति संबंधी जानकारी में माधव ग्रीन को लौलई, गोमती नगर एक्सटेंशन क्षेत्र में स्थित आवासीय प्रोजेक्ट के रूप में बताया गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बेहतर सुविधाओं की उम्मीद के साथ रहने वाले परिवारों के लिए बार-बार बिजली की समस्या परेशानी का कारण बन रही है।

बारिश के दौरान यदि बिजली चली जाए और उसके बाद लो-वोल्टेज या बार-बार ट्रिपिंग जैसी समस्या हो, तो घरों में पंखे, कूलर, एसी, पानी की मोटर और अन्य जरूरी उपकरण प्रभावित होते हैं।

सबसे बड़ी समस्या तब पैदा होती है जब उपभोक्ताओं को यह पता ही न चले कि बिजली कब तक आएगी।

फोन मिलाना भी बन जाता है चुनौती?

स्थानीय उपभोक्ताओं की एक प्रमुख शिकायत बिजली आपूर्ति के साथ-साथ शिकायत दर्ज कराने और जानकारी प्राप्त करने की व्यवस्था को लेकर भी है।

लोगों का कहना है कि जब बिजली चली जाती है तो वे लौलई पावर हाउस से संपर्क करने की कोशिश करते हैं, लेकिन कई बार फोन पर संपर्क नहीं हो पाता या उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिलती।

ऐसे में सवाल उठता है—

अगर किसी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति बाधित है, तो उपभोक्ताओं को इसकी सही जानकारी कौन देगा?

क्या खराबी की स्थिति में कोई जिम्मेदार अधिकारी या कर्मचारी उपभोक्ताओं को अनुमानित बहाली का समय बताता है?

क्या शिकायतों का कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड और फॉलो-अप सिस्टम है?

और अगर है, तो बारिश के दौरान परेशान लोगों को उसका लाभ क्यों नहीं दिखाई देता?

‘लाइट कब आएगी?’—इस सवाल का जवाब कौन देगा?

बिजली विभाग के लिए बिजली की खराबी होना असामान्य बात नहीं है। बारिश, पेड़ गिरने, केबल खराब होने, ट्रांसफार्मर में तकनीकी समस्या या अन्य कारणों से बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है।

लेकिन उपभोक्ता का सवाल तकनीकी खराबी से ज्यादा जवाबदेही और सूचना को लेकर है।

अगर किसी क्षेत्र में घंटों बिजली नहीं है, तो उपभोक्ता को कम से कम यह पता होना चाहिए कि—

  • खराबी कहां हुई है?
  • टीम मौके पर पहुंची या नहीं?
  • मरम्मत का काम शुरू हुआ या नहीं?
  • बिजली बहाल होने में कितना समय लग सकता है?
  • लो-वोल्टेज की शिकायत का समाधान कब होगा?

यही वह जगह है जहां स्थानीय लोगों को व्यवस्था से बेहतर प्रतिक्रिया की उम्मीद है।

‘Nai Soch Nai Urja’ ने भी संपर्क करने का प्रयास किया

इस मामले में Nai Soch Nai Urja की ओर से भी लौलई पावर हाउस से संपर्क करने का प्रयास किया गया।

हमारे पत्रकार राहुल मिश्रा ने अपनी ओर से संबंधित नंबर पर एक दिन में कई बार संपर्क करने की कोशिश की। उनके अनुसार कई प्रयासों के बावजूद फोन पर संपर्क नहीं हो सका।

ऐसे में इस खबर के माध्यम से बिजली विभाग से हमारा सीधा सवाल है—

क्या लौलई क्षेत्र की बिजली व्यवस्था को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों की समीक्षा की जा रही है?

क्या बारिश के दौरान बार-बार सामने आने वाली बिजली समस्याओं का स्थायी तकनीकी समाधान तलाशा जा रहा है?

और उपभोक्ताओं को शिकायत की स्थिति और बिजली बहाली की जानकारी देने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था क्यों नहीं है?

विभाग का पक्ष भी जरूरी

इस मामले में बिजली विभाग का पक्ष भी महत्वपूर्ण है।

बारिश के दौरान बिजली आपूर्ति प्रभावित होने के पीछे तकनीकी कारण हो सकते हैं। इसलिए यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि लौलई उपकेंद्र से जुड़े क्षेत्रों में हाल की बिजली समस्याओं के पीछे वास्तविक तकनीकी कारण क्या रहे।

क्या लाइन में खराबी थी?

क्या ट्रांसफार्मर या केबल में समस्या थी?

क्या उपकेंद्र पर अतिरिक्त स्टाफ और फील्ड टीम उपलब्ध थी?

क्या शिकायतों की संख्या अचानक बढ़ी?

और सबसे अहम—क्या समस्या का स्थायी समाधान किया गया है या अगली बारिश में फिर वही स्थिति दोहराई जाएगी?

सवाल सिर्फ बिजली कटने का नहीं, व्यवस्था का है

बिजली का जाना अपने आप में हर बार विभागीय लापरवाही का प्रमाण नहीं माना जा सकता। लेकिन अगर किसी क्षेत्र में एक जैसी समस्या बार-बार सामने आती है और उपभोक्ताओं को शिकायत के बाद पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती, तो व्यवस्था की समीक्षा जरूरी हो जाती है।

लौलई क्षेत्र में पहले भी बिजली संकट को लेकर लोगों के विरोध की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

इसलिए अब सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इन शिकायतों को केवल अस्थायी फॉल्ट मानकर ठीक करता रहेगा या पूरे क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था का तकनीकी ऑडिट कराकर स्थायी समाधान की दिशा में कदम उठाएगा?

बारिश हर साल होगी।

लेकिन सवाल यह है—

क्या हर बारिश में लौलई के लोगों को फिर उसी बिजली संकट का सामना करना पड़ेगा?

Nai Soch Nai Urja स्थानीय लोगों की समस्याओं और संबंधित विभाग के पक्ष को सामने लाने का प्रयास जारी रखेगा।

यदि बिजली विभाग इस मामले पर अपना पक्ष या स्पष्टीकरण देना चाहता है, तो उसे भी खबर में उचित स्थान दिया जाएगा।

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