लखनऊ, 26 सितंबर। अपनी जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था, सरकार की कार्यशैली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर कई सवाल उठाए। मौर्य ने प्रदेश में हाल की कुछ घटनाओं का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि सरकार अपराध के मामलों में अपेक्षित सख्ती नहीं दिखा रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना के बाद जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
स्वामी प्रसाद मौर्य ने यह भी घोषणा की कि वह 1 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) से मुलाकात करेंगे। उनके मुताबिक, मुलाकात के दौरान हाल की घटनाओं की जानकारी डीजीपी को दी जाएगी और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग रखी जाएगी। उन्होंने कहा कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करेगी।
मौर्य की ओर से कानून व्यवस्था को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक बयान हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट के लिए नहीं हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस पर प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी रिपोर्ट में शामिल किया जा सकता है।
‘सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि आरोपियों पर कार्रवाई हो’
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश की मौजूदा कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं और सरकार को प्रत्येक मामले में निष्पक्ष जांच तथा कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।
मौर्य ने कहा कि किसी भी घटना को केवल राजनीतिक नजरिए से देखने के बजाय प्रशासन को कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि सरकार इस नीति की बात करती है, लेकिन कई मामलों में आरोपियों के खिलाफ अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती।
उन्होंने कहा कि किसी भी घटना में अगर कोई व्यक्ति आरोपी है तो जांच के बाद कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उनके मुताबिक, पीड़ित पक्ष को न्याय दिलाना सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है।
सरकार पर ‘जंगल राज’ का आरोप
अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने प्रदेश की स्थिति को लेकर ‘जंगल राज’ जैसी टिप्पणी की और आरोप लगाया कि राज्य में कानून व्यवस्था कमजोर हुई है।
मौर्य ने कहा कि अपराध की घटनाओं पर सरकार को गंभीरता से प्रतिक्रिया देनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की ओर से ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात कही जाती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कई मामलों में कार्रवाई को लेकर सवाल उठते हैं।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ‘जंगल राज’ और सरकार द्वारा आरोपियों को ‘क्लीन चिट’ देने जैसे आरोप स्वामी प्रसाद मौर्य के बयान का हिस्सा हैं, न कि इस रिपोर्ट का स्वतंत्र निष्कर्ष।
हिंदू-मुस्लिम राजनीति का भी लगाया आरोप
स्वामी प्रसाद मौर्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार पर धार्मिक मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार हिंदू-मुस्लिम राजनीति कर रही है और अलग-अलग स्थानों पर मदरसों तथा मस्जिदों से जुड़े मामलों को उठाया जा रहा है।
मौर्य ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि शासन का ध्यान कानून व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा पर होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मुद्दों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाया जा रहा है।
इन आरोपों पर सरकार की ओर से इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के समय कोई प्रतिक्रिया उपलब्ध नहीं थी। ऐसे मामलों में संबंधित प्रशासनिक कार्रवाई और सरकारी पक्ष को अलग से देखना जरूरी है।
आरोपियों की पहचान को लेकर भी लगाया आरोप
स्वामी प्रसाद मौर्य ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया कि जिन घटनाओं का उन्होंने जिक्र किया, उनमें शामिल बताए जा रहे कुछ आरोपी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बिरादरी से संबंधित हैं। यह भी उनके द्वारा लगाया गया राजनीतिक आरोप है।
इस तरह के आरोपों की पुष्टि के लिए प्रत्येक मामले में संबंधित एफआईआर, पुलिस जांच और आधिकारिक रिकॉर्ड देखना आवश्यक होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए किसी राजनीतिक आरोप को जांच के निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता।
मौर्य ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जिन मामलों को उन्होंने उठाया है उनमें कार्रवाई की मांग करना है।
1 अक्टूबर को डीजीपी से मिलने का ऐलान
प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने आगामी 1 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के डीजीपी से मुलाकात करने की बात कही।
उन्होंने कहा कि वह डीजीपी के सामने हाल की घटनाओं को रखेंगे और संबंधित मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी तथा सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे।
मौर्य के मुताबिक, वह चाहते हैं कि जिन मामलों में पीड़ितों को न्याय नहीं मिला है या कार्रवाई को लेकर सवाल हैं, उन मामलों पर पुलिस प्रशासन से स्पष्ट जवाब लिया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनकी मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है तो उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेगी।
‘रोजाना कई घटनाएं होती हैं’
मौर्य ने कहा कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने केवल कुछ हालिया और उनके अनुसार महत्वपूर्ण मुद्दों को सामने रखा है। उनका कहना था कि प्रदेश में रोजाना कई घटनाएं होती हैं और प्रत्येक मामले में प्रशासन को शिकायत तथा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करनी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि जिन मामलों में अपराध दर्ज हैं, वहां जांच को आगे बढ़ाया जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो आरोपियों के खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाए।
मौर्य ने कहा कि पीड़ित परिवारों को यह महसूस होना चाहिए कि प्रशासन उनकी शिकायत सुन रहा है और उन्हें न्याय दिलाने के लिए गंभीरता से काम कर रहा है।
कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन की चेतावनी
स्वामी प्रसाद मौर्य ने साफ किया कि यदि उनकी ओर से उठाए गए मुद्दों पर कार्रवाई नहीं होती है तो उनकी पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन करेगी।
उन्होंने कहा कि आंदोलन का रास्ता लोकतांत्रिक होगा और संबंधित अधिकारियों के सामने अपनी मांगें रखी जाएंगी।
राजनीतिक दलों द्वारा सरकार या प्रशासन के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा है। हालांकि, किसी भी मामले में वास्तविक कार्रवाई की स्थिति संबंधित पुलिस या प्रशासन के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होती है।
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर भी मौर्य का हमला
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दूसरे हिस्से में स्वामी प्रसाद मौर्य ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।
भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ज्ञानेश कुमार वर्तमान में भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं और उन्होंने 19 फरवरी 2025 को 26वें मुख्य निर्वाचन आयुक्त के रूप में पदभार संभाला था।
मौर्य ने कहा कि निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जनता के बीच सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका को लेकर लोगों का विश्वास प्रभावित हुआ है।
उन्होंने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आयोग सत्तारूढ़ दल के पक्ष में काम कर रहा है। मौर्य ने बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त पर संविधान और जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया।
यहां यह महत्वपूर्ण है कि ये स्वामी प्रसाद मौर्य के राजनीतिक आरोप हैं। निर्वाचन आयोग भारत का एक संवैधानिक निकाय है और चुनाव प्रक्रिया के संचालन की जिम्मेदारी उसी के पास है। आयोग अपनी आधिकारिक भूमिका को स्वतंत्र और संवैधानिक संस्था के रूप में प्रस्तुत करता है।
CEC पर लगाए आरोपों को लेकर सुप्रीम कोर्ट से मांग
स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि वह इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट से भी हस्तक्षेप की मांग करते हैं। उन्होंने अदालत से मामले का स्वतः संज्ञान लेकर कार्रवाई करने की मांग रखी।
उन्होंने कहा कि यदि चुनाव प्रक्रिया या निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कोई गंभीर सवाल उठता है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
हालांकि, अदालत द्वारा किसी मामले में स्वतः संज्ञान लिया गया है या नहीं, यह न्यायालय के आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट किया जा सकता है। मौर्य की प्रेस कॉन्फ्रेंस में की गई मांग को फिलहाल उनकी राजनीतिक मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
चुनाव आयोग को लेकर पहले से चल रही राजनीतिक बहस
CEC ज्ञानेश कुमार को लेकर मौर्य का बयान ऐसे समय आया है जब उत्तर प्रदेश में निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर राजनीतिक बहस चल रही है।
हाल ही में उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी की।
इसके अलावा निर्वाचन आयोग ने सितंबर में उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित दो Electoral Literacy Club कार्यक्रमों को स्थगित किया था, जिनमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को शामिल होना था। आयोग की ओर से बताया गया था कि कार्यक्रम स्थगित करने का कारण उनका व्यस्त कार्यक्रम था और इसका मौजूदा विवाद से संबंध नहीं था।
ऐसे में चुनाव आयोग को लेकर राजनीतिक दलों की ओर से उठाए जा रहे सवाल आने वाले समय में राजनीतिक बहस का हिस्सा बने रह सकते हैं।
मौर्य ने सरकार और आयोग दोनों पर उठाए सवाल
लखनऊ की इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने मूल रूप से दो अलग-अलग मुद्दों को उठाया।
पहला मुद्दा उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से जुड़ा था। इसमें उन्होंने सरकार से हालिया घटनाओं में कार्रवाई, आरोपियों की गिरफ्तारी और पीड़ितों को न्याय दिलाने की मांग की।
दूसरा मुद्दा निर्वाचन आयोग की भूमिका और CEC ज्ञानेश कुमार से संबंधित था। इसमें उन्होंने आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की।
मौर्य ने कहा कि वह इन मुद्दों को लेकर आगे भी अपनी आवाज उठाते रहेंगे।
आगे क्या होगा?
अब निगाहें 1 अक्टूबर पर रहेंगी, जब मौर्य के अनुसार वह उत्तर प्रदेश के डीजीपी से मुलाकात करेंगे। इस मुलाकात में वह किन मामलों को आधिकारिक रूप से उठाते हैं और पुलिस प्रशासन की ओर से उन पर क्या जवाब दिया जाता है, यह आगे की तस्वीर स्पष्ट करेगा।
इसी तरह मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी आगे की राजनीतिक और कानूनी गतिविधियां महत्वपूर्ण होंगी। चुनाव आयोग की ओर से यदि मौर्य के आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है या संबंधित मामलों में न्यायालय की ओर से कोई आदेश सामने आता है, तो उससे इस विवाद के अलग-अलग पक्षों को समझने में मदद मिलेगी।
फिलहाल लखनऊ की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी प्रसाद मौर्य ने सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए, 1 अक्टूबर को डीजीपी से मिलने की घोषणा की और कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक आंदोलन की चेतावनी दी। इसके साथ ही उन्होंने CEC ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की है।
नोट: इस खबर में सरकार, प्रशासन और निर्वाचन आयोग से जुड़े आरोपों को संबंधित नेता के बयान के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आरोपों को स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना गया है।
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