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लखनऊ, 7 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision) को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती जा रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने बुधवार को जारी बयान में चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची में हुए बदलावों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि SIR के नाम पर बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की गई है और चुनाव आयोग को हटाए गए नामों का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करना चाहिए।

कांग्रेस ने अपने बयान को “संविधान पर प्रहार, वोट चोर सरकार” शीर्षक के साथ जारी किया। आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘400 पार’ का नारा दिया गया था और कांग्रेस के मुताबिक इसका संबंध संविधान में बदलाव की आशंकाओं से जोड़ा गया था। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की जनता ने भाजपा को अपेक्षित बहुमत नहीं दिया और इसके बाद मतदाता सूची के पुनरीक्षण के जरिए लोकतांत्रिक अधिकारों को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों और आंकड़ों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण है, यह इस रिपोर्ट में अलग से स्पष्ट किया जाना जरूरी है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए आंकड़े और सवाल पार्टी के दावे हैं, जिन्हें आयोग के आधिकारिक जवाब के साथ देखा जाना होगा।

SIR को लेकर राहुल गांधी के अभियान का भी किया जिक्र

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी पिछले एक वर्ष से अधिक समय से मतदाता सूची और SIR से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाते रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी तरह की पारदर्शिता की कमी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है।

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अपने बयान में कहा कि कांग्रेस अब चार ऐसे बिंदु सामने रख रही है, जिनके आधार पर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से जुड़े निर्णयों और Form 6 में कथित बदलाव को लेकर सार्वजनिक स्तर पर स्पष्टता जरूरी है।

पहला दावा: Form 6 में बदलाव को लेकर सवाल

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि चुनाव आयोग के आयुक्तों संधू और जोशी की ओर से Form 6 में बदलाव और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी आपत्तियों की बात सामने आई थी।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि चुनाव जैसी संवेदनशील संवैधानिक प्रक्रिया में आयोग के ही अधिकारियों के बीच जानकारी को लेकर मतभेद या असहमति रही हो, तो पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

Form 6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नए मतदाता के नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। ऐसे में कांग्रेस का कहना है कि इस फॉर्म से संबंधित प्रक्रिया और उसमें हुए बदलावों की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

दूसरा दावा: सुप्रीम कोर्ट की अनुमति को लेकर सवाल

कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी टिप्पणी का भी उल्लेख किया। पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि Form 6 में किसी बदलाव के लिए न्यायालय की अनुमति नहीं दी गई थी, तो ऐसा बदलाव किस प्रक्रिया और किस अधिकार के तहत किया गया।

कांग्रेस का कहना है कि इस पूरे मामले में चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए कि Form 6 में क्या बदलाव हुए, उनका आधार क्या था और संबंधित निर्णय किस स्तर पर लिया गया।

यहां यह भी महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस के बयान में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों की जिस तरह व्याख्या की गई है, उसे न्यायालय के मूल आदेश और आधिकारिक रिकॉर्ड के संदर्भ में ही अंतिम रूप से समझा जाना चाहिए।

तीसरा मुद्दा: सार्वभौमिक मताधिकार की अहमियत

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति भुइयां की टिप्पणी का भी हवाला दिया। कांग्रेस के मुताबिक, न्यायमूर्ति ने औपनिवेशिक दौर का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय देश की आबादी के एक छोटे हिस्से को ही मतदान का अधिकार प्राप्त था।

कांग्रेस ने इस टिप्पणी को वर्तमान मतदाता सूची विवाद से जोड़ते हुए कहा कि लोकतंत्र में सार्वभौमिक मताधिकार सबसे महत्वपूर्ण अधिकारों में से एक है। यदि किसी योग्य नागरिक का नाम मतदाता सूची से हटता है, तो इसका सीधा असर उसके लोकतांत्रिक अधिकार पर पड़ सकता है।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया जितनी संवेदनशील है, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए।

चौथा मुद्दा: पश्चिम बंगाल में वोट कटने का दावा

कांग्रेस ने पूर्व न्यायाधीश जस्टिस रोहिंटन नरीमन की टिप्पणी का भी उल्लेख किया। पार्टी ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में लगभग 90 लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने से जुड़े मामले का संदर्भ देते हुए उन्होंने SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

कांग्रेस ने इसी आधार पर चुनाव आयोग से पूछा कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की परिस्थितियों में पूरी प्रक्रिया की न्यायिक और प्रशासनिक निगरानी किस तरह सुनिश्चित की गई।

हालांकि, कांग्रेस द्वारा प्रस्तुत इन सभी संदर्भों की वास्तविक कानूनी और तथ्यात्मक स्थिति संबंधित न्यायिक आदेशों, चुनाव आयोग के रिकॉर्ड और आधिकारिक आंकड़ों से ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।

उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची को लेकर कांग्रेस के तीन बड़े सवाल

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के संदर्भ में तीन प्रमुख सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि इन सवालों का जवाब चुनाव आयोग और भाजपा सरकार को सार्वजनिक रूप से देना चाहिए।

1. अतिरिक्त 16.18 लाख नाम कहां से आए?

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की वेबसाइट पर उपलब्ध Form 6 applications का हवाला देते हुए दावा किया कि वेबसाइट पर लगभग 71 लाख 38 हजार आवेदन दिखाई देते हैं, जबकि अंतिम मतदाता सूची में लगभग 84 लाख 28 हजार नाम जोड़े गए।

कांग्रेस के मुताबिक दोनों आंकड़ों में करीब 16 लाख 18 हजार का अंतर है।

इसी अंतर को लेकर पार्टी ने सवाल उठाया कि यदि Form 6 के आवेदन लगभग 71.38 लाख हैं और मतदाता सूची में करीब 84.28 लाख नाम जोड़े गए, तो अतिरिक्त नाम किस प्रक्रिया के तहत शामिल हुए?

कांग्रेस ने मांग की है कि ऐसे सभी मतदाताओं से संबंधित Form 6 applications और अन्य विवरण सार्वजनिक किए जाएं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने की प्रक्रिया किस आधार पर हुई।

2. 16.91 करोड़ और 13.39 करोड़ के आंकड़ों में अंतर क्यों?

कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की अलग-अलग मतदाता सूचियों के आंकड़ों को जोड़कर दूसरा बड़ा सवाल खड़ा किया।

पार्टी के अनुसार, वर्ष 2026 की त्रिस्तरीय पंचायत मतदाता सूची में करीब 12 करोड़ 58 लाख मतदाता बताए गए हैं। वहीं 2023 की नगरीय निकाय मतदाता सूची में लगभग 4 करोड़ 33 लाख मतदाता होने का दावा किया गया है।

कांग्रेस के मुताबिक दोनों आंकड़ों को जोड़ने पर संख्या करीब 16 करोड़ 91 लाख होती है।

दूसरी तरफ पार्टी ने दावा किया कि SIR के बाद विधानसभा की अंतिम मतदाता सूची में 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 मतदाता रह गए।

कांग्रेस ने दोनों आंकड़ों के बीच करीब 3 करोड़ 52 लाख के अंतर पर सवाल उठाया है।

हालांकि, यहां मतदाता सूचियों की तुलना करते समय यह देखना जरूरी होगा कि अलग-अलग चुनावों और स्थानीय निकायों की मतदाता सूचियों का क्षेत्राधिकार, पात्रता और संरचना समान है या नहीं। इसलिए इन आंकड़ों की सीधी तुलना से पहले चुनाव आयोग की आधिकारिक व्याख्या महत्वपूर्ण होगी।

3. करीब 2.04 करोड़ मतदाताओं के नाम क्यों कम हुए?

कांग्रेस का तीसरा और सबसे बड़ा सवाल विधानसभा की मतदाता सूची को लेकर है।

पार्टी के मुताबिक SIR से पहले उत्तर प्रदेश की विधानसभा मतदाता सूची में 15 करोड़ 44 लाख 30 हजार 92 मतदाता थे। कांग्रेस के अनुसार अंतिम SIR सूची में यह संख्या घटकर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 रह गई।

कांग्रेस ने दोनों आंकड़ों के बीच लगभग 2 करोड़ 4 लाख मतदाताओं के अंतर को लेकर चुनाव आयोग से विस्तृत जवाब मांगा है।

पार्टी ने पूछा है कि हटाए गए मतदाताओं में कितने नाम किन-किन कारणों से हटाए गए।

कांग्रेस ने विशेष रूप से इन श्रेणियों का विवरण मांगा है—

  • कितने नाम मृत्यु के कारण हटाए गए?
  • कितने मतदाताओं का पता बदलने के कारण नाम हटाया गया?
  • कितने नाम डुप्लीकेट होने के कारण हटाए गए?
  • कितने मतदाता सत्यापन के दौरान अनुपलब्ध पाए गए?
  • कितने नाम दस्तावेजों की कमी के कारण हटाए गए?
  • कितने नाम अन्य प्रशासनिक कारणों से हटाए गए?

कांग्रेस की मांग है कि इन सभी श्रेणियों का जिला स्तर और बूथ स्तर पर आंकड़ा सार्वजनिक किया जाए।

हटाए गए मतदाताओं का कारण सार्वजनिक करने की मांग

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं माना जा सकता। कांग्रेस के अनुसार, मतदाता लोकतांत्रिक व्यवस्था का सिर्फ एक आंकड़ा नहीं बल्कि संविधान से मिला अधिकार रखने वाला नागरिक है।

इसी आधार पर पार्टी ने मांग की कि यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटाया गया है तो उसके हटने का कारण स्पष्ट रूप से उपलब्ध होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची की शुद्धता जरूरी है, लेकिन इसके साथ यह भी सुनिश्चित करना आवश्यक है कि पात्र नागरिक का नाम गलती से न हटे।

भाजपा और चुनाव आयोग पर कांग्रेस ने साधा निशाना

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने भाजपा और चुनाव आयोग दोनों पर सवाल उठाते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने की स्थिति में राज्य और केंद्र सरकार की ओर से इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब आना चाहिए।

कांग्रेस ने विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से सवाल किया कि यदि उत्तर प्रदेश में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं तो इस पर सरकार की ओर से आपत्ति क्यों नहीं जताई गई।

कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार को मतदाता सूची में होने वाले बदलावों पर जवाब देना चाहिए, जबकि पार्टी का कहना है कि वह इसे लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रही है।

वहीं, इस पूरे विवाद का अंतिम निष्कर्ष तभी निकलेगा जब चुनाव आयोग इन आंकड़ों और आरोपों पर आधिकारिक रूप से विस्तृत स्पष्टीकरण देगा।

कांग्रेस ने पारदर्शिता को बनाया मुख्य मुद्दा

SIR विवाद के बीच कांग्रेस ने अपनी राजनीति का केंद्र मतदाता अधिकार और संविधान को बनाया है। पार्टी का कहना है कि चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा बनाए रखने के लिए मतदाता सूची से जुड़े सभी आंकड़े सार्वजनिक और सत्यापन योग्य होने चाहिए।

कांग्रेस की मांग है कि नाम जोड़ने और हटाने की पूरी प्रक्रिया का डेटा सार्वजनिक किया जाए। विशेष रूप से हटाए गए मतदाताओं की संख्या, कारण, जिला, विधानसभा क्षेत्र और बूथ स्तर की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

कांग्रेस का तर्क है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलती से हट गया तो वह चुनाव के दिन मतदान करने के संवैधानिक अधिकार से वंचित हो सकता है। इसलिए पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रशासनिक शुद्धता के साथ-साथ नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

आगे क्या?

उत्तर प्रदेश में SIR को लेकर कांग्रेस के आरोपों के बाद अब निगाहें चुनाव आयोग के आधिकारिक जवाब पर हैं। कांग्रेस द्वारा बताए गए आंकड़ों की वास्तविक स्थिति, विभिन्न मतदाता सूचियों की तुलना का आधार और लगभग 2.04 करोड़ नाम कम होने के कारणों पर आयोग यदि विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करता है तो पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

फिलहाल कांग्रेस ने इसे संविधान और मताधिकार से जुड़ा मुद्दा बनाते हुए आंदोलनात्मक तेवर अपनाए हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि वह मतदाता सूची में पारदर्शिता और नागरिकों के मतदान अधिकार की रक्षा के सवाल को आगे भी उठाती रहेगी।

आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने अपने बयान के अंत में कहा कि कांग्रेस संविधान, लोकतंत्र और जनता के मताधिकार से जुड़े किसी भी मुद्दे पर पीछे नहीं हटेगी। पार्टी का संदेश है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर पात्र नागरिक का वोट सुरक्षित रहना चाहिए और मतदाता सूची में होने वाले हर बदलाव का स्पष्ट रिकॉर्ड जनता के सामने होना चाहिए।

नोट: इस रिपोर्ट में SIR, मतदाता संख्या, Form 6 और न्यायिक टिप्पणियों से संबंधित आंकड़े एवं आरोप उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा जारी प्रेस बयान के आधार पर दिए गए हैं। संबंधित आंकड़ों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि तथा चुनाव आयोग/अन्य संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष अलग से महत्वपूर्ण रहेगा।

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