लखनऊ। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पार्टी के विधायकों और विधान परिषद सदस्यों के साथ बैठक के बाद कई मुद्दों पर अपनी पार्टी का रुख सामने रखा। उन्होंने खास तौर पर सरकारी कर्मचारियों की पुरानी पेंशन, शिक्षकों की समस्याओं, वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय, शिक्षा मित्रों, मदरसा शिक्षकों, बेरोजगार युवाओं और किसानों से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
अखिलेश यादव ने कहा कि बैठक में पार्टी के जनप्रतिनिधियों से विभिन्न विषयों पर सुझाव लिए गए हैं और इन सुझावों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जाएगी। उन्होंने शिक्षक नेता लाल बिहारी यादव के संघर्ष का भी उल्लेख किया और कहा कि उन्होंने सदन में शिक्षकों के मुद्दों को लगातार उठाया है।
सत्ता में आने पर पुरानी पेंशन लागू करने का दावा
अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी अपने पिछले घोषणापत्र में सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम लागू करने की बात शामिल कर चुकी है। उन्होंने दोहराया कि भविष्य में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर पुरानी पेंशन योजना लागू करने के लिए काम किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी ने इस व्यवस्था को लागू करने के वित्तीय पक्ष पर भी चर्चा की थी। उनके मुताबिक सरकार बनने के बाद कर्मचारियों की पुरानी पेंशन को किस वित्तीय मॉडल के जरिए लागू किया जाएगा, इसकी जानकारी घोषणापत्र के समय दी जाएगी।
वित्तविहीन शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा
अखिलेश यादव ने वित्तविहीन शिक्षण संस्थानों से जुड़े शिक्षकों के मानदेय का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि समाजवादी सरकार के समय वित्तविहीन संस्थाओं के लिए मानदेय की व्यवस्था के लिए बजट में प्रावधान किया गया था और भविष्य में सरकार बनने पर दोबारा मानदेय की व्यवस्था करने का काम किया जाएगा।
उन्होंने शिक्षकों की सेवा, सुरक्षा और पदोन्नति से जुड़े प्रावधानों को बहाल करने की बात भी कही। उनके बयान के मुताबिक धारा 12, 18 और 21 से जुड़े प्रावधानों को फिर से बहाल करने का मुद्दा पार्टी के एजेंडे में रहेगा।
मदरसा और संस्कृत शिक्षकों को लेकर भी घोषणा
अखिलेश यादव ने आधुनिक मदरसा शिक्षकों की समस्याओं को लेकर कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर उनके वेतन को बहाल करने और बकाया वेतन के भुगतान की दिशा में काम किया जाएगा।
इसी क्रम में उन्होंने संस्कृत विद्यालयों और संस्कृत शिक्षकों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं के समाधान के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
शिक्षा मित्रों और अन्य संविदाकर्मियों का भी जिक्र
शिक्षा मित्रों के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि भविष्य में उनकी व्यवस्था को लेकर समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने शिक्षा मित्रों को शिक्षक के रूप में सम्मान देने की बात कही।
इसके साथ ही उन्होंने अनुदेशक, रोजगार सेवक और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मांगों का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि इन वर्गों से प्राप्त मांगों और ज्ञापनों के आधार पर भविष्य की सरकार में समस्याओं के समाधान की दिशा में काम किया जाएगा।
प्रतियोगी छात्रों के लिए नियमित भर्ती कैलेंडर का वादा
बेरोजगारी और सरकारी भर्तियों के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि प्रतियोगी छात्रों के लिए सरकारी पदों के विज्ञापन जारी करने का नियमित कैलेंडर घोषणापत्र में शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि भर्ती प्रक्रिया को लेकर छात्रों के बीच स्पष्टता होनी चाहिए और सरकारी नौकरियों के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाने की दिशा में काम किया जाएगा।
किसानों के मुआवजे पर उठाया सवाल
अखिलेश यादव ने निर्माणाधीन एक्सप्रेसवे और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन विकास परियोजनाओं के लिए ली जा रही है तो मुआवजा बाजार मूल्य के अनुरूप होना चाहिए।
उन्होंने अलीगढ़-मुरादाबाद ग्रीनफील्ड एक्सेस कॉरिडोर का उल्लेख करते हुए किसानों को सर्किल रेट बढ़ाकर बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा देने की मांग रखी।
चुनाव और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों को लेकर भी बयान
प्रेस वार्ता के दौरान अखिलेश यादव ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों का भी जिक्र किया। उन्होंने पार्टी प्रत्याशियों के समर्थन में मतदान की अपील की और कई निर्वाचन क्षेत्रों के उम्मीदवारों के नाम गिनाए।
उन्होंने आगरा खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में कथित फर्जी शिक्षक मतदाताओं का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इस मामले में चुनाव आयोग को शिकायत दी गई है और कथित तौर पर गलत तरीके से बनाए गए वोटों को हटाने की मांग की गई है।
साइबर फ्रॉड को लेकर सरकार पर निशाना
अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में साइबर अपराध को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि लोगों के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं और सरकार को इस समस्या पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।
प्रेस वार्ता में उन्होंने साइबर फ्रॉड को लेकर कई गंभीर दावे किए। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि इस बयान के उपलब्ध ट्रांसक्रिप्ट में नहीं है, इसलिए इन्हें अखिलेश यादव के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
बाढ़ और जलभराव पर सरकार को घेरा
प्रदेश में बारिश और जलभराव के मुद्दे पर भी अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने लखीमपुर, पीलीभीत, बहराइच, सीतापुर, महाराजगंज और गोरखपुर समेत कई क्षेत्रों का जिक्र करते हुए किसानों की फसल और ग्रामीण इलाकों में नुकसान का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि बाढ़ से किसानों की फसलों, घरों और पशुधन को नुकसान हुआ है और सरकार को प्रभावित लोगों की मदद करनी चाहिए।
गंगा एक्सप्रेसवे के जलभराव पर भी टिप्पणी
गंगा एक्सप्रेसवे पर जलभराव से जुड़ी तस्वीरों और वीडियो का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव ने निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल उठाए। इसी मुद्दे को लेकर समाजवादी पार्टी की ओर से एक वीडियो/व्यंग्यात्मक प्रस्तुति का भी उल्लेख बातचीत में हुआ।
हालांकि जलभराव के कारणों और निर्माण संबंधी आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि इस उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
संविधान और कानून व्यवस्था पर भी बोले
अखिलेश यादव ने सहारनपुर में मस्जिद से जुड़े विवाद का जिक्र करते हुए कहा कि कानून और संविधान के दायरे में रहकर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी प्रक्रिया को मनमाने तरीके से गैरकानूनी नहीं बनाया जाना चाहिए और न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी है।
कुल मिलाकर, अखिलेश यादव की प्रेस वार्ता में शिक्षा, कर्मचारी हित, पुरानी पेंशन, सरकारी भर्ती, किसानों के मुआवजे, साइबर अपराध, बाढ़ और चुनावी प्रक्रिया जैसे कई मुद्दे केंद्र में रहे। उन्होंने इन विषयों पर समाजवादी पार्टी की प्रस्तावित नीतियों और भविष्य की राजनीतिक रणनीति को लेकर कई घोषणाएं और दावे किए।
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