लखनऊ। राजधानी लखनऊ के ईको गार्डन में संविदा एएनएम (Auxiliary Nurse Midwife) नर्सों का धरना लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी एएनएम नर्सें समान कार्य के लिए समान वेतन, नियमितीकरण, समय पर मानदेय और काम के अनुरूप सुविधाएं दिए जाने की मांग कर रही हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना है कि वे कई वर्षों से स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारियां निभा रही हैं, लेकिन उनकी सेवा शर्तों और पारिश्रमिक में कथित तौर पर बड़ा अंतर बना हुआ है।
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक वे 21 सितंबर से धरने पर बैठी हैं और 28 सितंबर तक भी उनकी मांगों पर ठोस समाधान नहीं हुआ है। धरने में शामिल कई एएनएम ने कहा कि वे अपने छोटे बच्चों और परिवार को छोड़कर दूर-दराज के जिलों से लखनऊ पहुंची हैं। उनका आरोप है कि कई कर्मचारियों की तैनाती उनके घर से सैकड़ों किलोमीटर दूर की जाती है, जबकि मिलने वाला वेतन उनके रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
समान काम के बावजूद वेतन में अंतर का सवाल
धरने में शामिल एएनएम नर्सों ने सबसे प्रमुख सवाल समान काम के बदले अलग-अलग वेतन को लेकर उठाया। उनका कहना है कि संविदा और स्थायी एएनएम एक ही तरह की स्वास्थ्य सेवाओं में काम करती हैं, लेकिन दोनों के वेतन और सुविधाओं में काफी अंतर है।
प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि संविदा एएनएम को करीब 10 हजार रुपये के आसपास मानदेय मिलता है, जबकि स्थायी कर्मचारियों का वेतन इससे कई गुना अधिक है। इसके अलावा स्थायी कर्मचारियों को टीए-डीए और आवास जैसी सुविधाएं मिलने की बात भी प्रदर्शनकारियों ने कही।
एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उनकी नियुक्ति वर्ष 2013 में हुई थी और तब से लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद वेतन और सुविधाओं में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि समय के साथ काम का दायरा बढ़ा है और कई अतिरिक्त डिजिटल पोर्टल पर भी काम करना पड़ता है।
कई महीनों तक वेतन नहीं मिलने का आरोप
धरने पर बैठी नर्सों ने वेतन भुगतान में देरी का भी मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक कई बार दो से तीन महीने तक वेतन नहीं मिलता, जिससे किराया, बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा के खर्चों को पूरा करना मुश्किल हो जाता है।
एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि दूर के जिले में तैनाती होने के कारण उन्हें रहने के लिए अलग से कमरा लेना पड़ता है। उनका कहना था कि सीमित मानदेय में किराया और खाने-पीने का खर्च निकालने के बाद परिवार के लिए बहुत कम पैसा बचता है।
कुछ प्रदर्शनकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि संविदा कर्मचारियों पर काम का दबाव अधिक है, लेकिन इसके अनुपात में भुगतान नहीं किया जाता। उन्होंने कहा कि जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें स्थायी कर्मचारियों के बराबर सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
10-15 साल की सेवा के बाद भी नियमितीकरण की मांग
धरने में शामिल एएनएम का कहना है कि कुछ कर्मचारी 10 से 15 वर्षों से स्वास्थ्य विभाग से जुड़कर काम कर रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है।
एक प्रदर्शनकारी ने कहा कि लंबे समय से सेवा कर रहीं कई महिला कर्मचारियों की उम्र अब ऐसी स्थिति में पहुंच चुकी है, जहां वे नई सरकारी भर्ती की सामान्य आयु सीमा में आवेदन नहीं कर सकतीं। उनका सवाल है कि वर्षों तक सेवा लेने के बाद उनके भविष्य को लेकर सरकार क्या व्यवस्था करेगी।
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि लंबे समय से काम कर रहीं संविदा एएनएम के नियमितीकरण के लिए स्पष्ट नीति बनाई जाए और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखते हुए उन्हें राहत दी जाए।
दूर-दराज जिलों में तैनाती भी बना मुद्दा
एएनएम नर्सों ने दूरस्थ क्षेत्रों में तैनाती को लेकर भी अपनी परेशानी सामने रखी। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक कुछ कर्मचारियों की पोस्टिंग घर से 300 से 400 किलोमीटर या उससे भी अधिक दूरी पर होती है।
एक महिला कर्मचारी ने रायबरेली से महाराजगंज जैसे दूर के क्षेत्र में तैनाती का उदाहरण देते हुए कहा कि इतनी दूरी पर काम करने के लिए उन्हें परिवार से दूर रहना पड़ता है। प्रदर्शन स्थल पर छोटे बच्चों के साथ पहुंची महिलाओं ने भी अपनी परेशानियां साझा कीं।
नर्सों का कहना है कि कम वेतन के साथ दूरस्थ तैनाती होने पर यात्रा और रहने का खर्च उनकी आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा देता है।
कोरोना काल की सेवाओं का भी दिया हवाला
प्रदर्शनकारी एएनएम ने कोरोना महामारी और अन्य स्वास्थ्य अभियानों के दौरान निभाई गई अपनी जिम्मेदारियों का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि महामारी के समय स्वास्थ्य सेवाओं को जारी रखने में एएनएम और नर्सिंग स्टाफ ने लगातार काम किया।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने दावा किया कि महामारी के दौरान उनकी छुट्टियां तक रद्द की गईं और उन्हें लगातार ड्यूटी करनी पड़ी। इसके अलावा पोलियो और टीकाकरण जैसे अभियानों में भी दूर-दराज क्षेत्रों तक जाकर काम करने की जिम्मेदारी निभाने की बात उन्होंने कही।
नेपाल सीमा से जुड़े क्षेत्रों में भी ड्यूटी
महाराजगंज जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों से आई कुछ एएनएम ने बताया कि वे भारत-नेपाल सीमा के आसपास के इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं देती हैं। उनके अनुसार सीमा क्षेत्र में टीकाकरण और प्रसव जैसी स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बड़ी संख्या में लोग सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर पहुंचते हैं।
एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि सोनौली सीमा के आसपास के क्षेत्रों में नेपाल से आने वाले लोग भी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते हैं और एएनएम को इन सेवाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी पड़ती है।
“अस्पताल की व्यवस्था में हमारी भूमिका को समझा जाए”
धरने में शामिल महिलाओं ने कहा कि अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में एएनएम की भूमिका महत्वपूर्ण है। उनका कहना है कि डॉक्टर द्वारा दवा लिखे जाने के बाद मरीज की देखभाल, दवा देने, टीकाकरण, स्वास्थ्य निगरानी और कई जमीनी स्वास्थ्य अभियानों में नर्सिंग स्टाफ की सीधी भूमिका रहती है।
प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि स्वास्थ्य सेवाओं में उनसे लगातार जिम्मेदारियां ली जा रही हैं, तो उनके वेतन और कामकाजी सुविधाओं को लेकर भी सरकार को स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए।
स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात को लेकर भी नाराजगी
प्रदर्शनकारी एएनएम ने स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात और मांगों पर कार्रवाई को लेकर भी अपनी नाराजगी जताई। बातचीत में कुछ प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी समस्याओं पर ठोस आश्वासन के बजाय फाइल आगे बढ़ने की बात कही गई।
एक प्रदर्शनकारी ने दावा किया कि उन्हें बताया गया कि मामला आगे भेजा जाएगा। वहीं नर्सों का सवाल था कि यदि भर्ती और सेवा व्यवस्था राज्य स्तर से जुड़ी है तो उनकी समस्याओं के समाधान के लिए स्पष्ट निर्णय कब लिया जाएगा।
अब समाधान की मांग पर टिकी नजर
ईको गार्डन में चल रहे प्रदर्शन के दौरान एएनएम नर्सों ने साफ किया कि उनकी प्रमुख मांगें समान कार्य के लिए समान वेतन, समय पर वेतन भुगतान, नियमितीकरण, दूरस्थ तैनाती से जुड़ी समस्याओं का समाधान और काम के अनुरूप सुविधाएं हैं।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए तैयार हैं, लेकिन लंबे समय से चली आ रही वेतन और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान भी जरूरी है। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस पहल नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रखने का फैसला लिया गया है।
नोट: इस रिपोर्ट में वेतन, सेवा अवधि, तैनाती और सरकारी स्तर पर कार्रवाई से जुड़े आंकड़े व दावे प्रदर्शन में शामिल एएनएम नर्सों द्वारा बताए गए हैं। संबंधित विभाग की स्वतंत्र प्रतिक्रिया इस उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।
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