नई दिल्ली/उत्तर प्रदेश। अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ी कामयाबी मिलने का दावा किया गया है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि इस सनसनीखेज हत्याकांड की जांच के लिए अपर पुलिस महानिदेशक कानून-व्यवस्था और एडीजी एसटीएफ के नेतृत्व में कई विशेष टीमों का गठन किया गया था। इन टीमों में चार अपर पुलिस अधीक्षक और सात पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारियों समेत अन्य पुलिसकर्मियों को शामिल किया गया। जांच में एसटीएफ मेरठ और एसटीएफ गौतमबुद्ध नगर की यूनिट्स को भी लगाया गया।
पुलिस के मुताबिक, जांच का मकसद सिर्फ हत्या में सीधे तौर पर शामिल शूटरों तक पहुंचना नहीं था, बल्कि पूरी आपराधिक साजिश, हथियार उपलब्ध कराने वाले लोगों, रेकी करने वालों, आर्थिक मदद देने वालों और आरोपियों को संरक्षण देने वाले नेटवर्क की पहचान करना भी था। इसी दिशा में मानव खुफिया तंत्र यानी ह्यूमन इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी के जरिए लगातार सूचनाएं जुटाई गईं।
हत्या से पहले की गई थी रेकी
जांच में पुलिस को कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि अंकित बालियान की हत्या अचानक नहीं हुई थी। वारदात से पहले उनकी गतिविधियों पर नजर रखी गई और उनकी आवाजाही की रेकी की गई थी। विशेष रूप से जिम आने-जाने के समय और गतिविधियों पर निगरानी रखे जाने की बात जांच में सामने आई है।
पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल गतिविधियों, संदिग्धों की लोकेशन और मूवमेंट, उनके ठहरने के स्थान, आपसी संपर्क तथा कथित भुगतान से संबंधित जानकारियों को जांच का हिस्सा बनाया। इन सभी कड़ियों को जोड़कर पुलिस ने उन लोगों तक पहुंचने का प्रयास किया, जो हत्या की योजना के पीछे हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, हत्या के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार भी शूटर्स को बाहर से उपलब्ध कराए गए थे। पुलिस का कहना है कि वारदात को चार हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया और इसके बाद सभी आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदलते रहे।
कई राज्यों में हुई छापेमारी
वारदात के बाद आरोपियों की तलाश में पुलिस और एसटीएफ की टीमों ने उत्तर प्रदेश के अलावा कई राज्यों में दबिश दी। जांच के दौरान हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और पूर्वी उत्तर प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर छापेमारी किए जाने की जानकारी सामने आई है।
पुलिस ने संदिग्धों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी। ह्यूमन इंटेलिजेंस और तकनीकी इनपुट के आधार पर 29 अगस्त को इस हत्याकांड में शामिल संदिग्ध आरोपियों की पहचान किए जाने का दावा किया गया। इसके बाद पुलिस कार्रवाई के दौरान मोहित और सुमित नाम के दो आरोपियों के मारे जाने की जानकारी सामने आई।
डीजीपी के मुताबिक, मोहित के खिलाफ हरियाणा में करीब 14 आपराधिक मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिली है। वहीं सुमित के खिलाफ भी आपराधिक मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। दोनों के अन्य आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच और सत्यापन कराया जा रहा है।
एनकाउंटर में मारे गए दो आरोपी, दो अन्य शूटरों की तलाश
पुलिस के अनुसार, अंकित बालियान हत्याकांड में कुल चार शूटरों के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें से दो आरोपी पुलिस मुठभेड़ में मारे गए हैं, जबकि दो अन्य की तलाश अभी जारी है।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पुलिस का उद्देश्य आरोपियों को गिरफ्तार करना ही होता है। पुलिस के मुताबिक, अधिकांश मामलों में आरोपी गिरफ्तार किए जाते हैं, लेकिन यदि कोई अपराधी पुलिस टीम पर गोलीबारी करता है तो पुलिस की ओर से जवाबी कार्रवाई की जाती है।
इस मामले में भी बाकी दो शूटरों के साथ-साथ हत्या की पूरी साजिश में शामिल अन्य लोगों की तलाश की जा रही है। पुलिस का कहना है कि जांच सिर्फ गोली चलाने वालों तक सीमित नहीं रहेगी।
गोगी गैंग से जुड़े नेटवर्क की भूमिका की जांच
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में दिल्ली के कुख्यात गोगी गैंग से जुड़े नेटवर्क की भूमिका सामने आने का दावा किया गया है। पुलिस के अनुसार, 26 और 27 अगस्त को सोशल मीडिया पर राहुल उर्फ भोलू शाहपुरिया से जुड़े एक इंस्टाग्राम अकाउंट के माध्यम से कथित तौर पर हत्या की जिम्मेदारी लेने वाली पोस्ट सामने आई थी। इस सोशल मीडिया गतिविधि को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर सामने आने वाले दावों को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता। उनकी पुष्टि जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, वर्ष 2021 में दिल्ली की रोहिणी कोर्ट में जितेंद्र मान उर्फ गोगी की हत्या के बाद गोगी और टिल्लू राजपुरिया से जुड़े गैंगों के बीच चली गैंगवार की कड़ियां भी इस मामले की जांच में सामने आई हैं।
एक गाने को लेकर विवाद की कड़ी भी जांच में
जांच के दौरान अंकित बालियान से जुड़े एक लोकप्रिय गाने का संदर्भ भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, इस गाने को कथित तौर पर गोगी की हत्या से जुड़े घटनाक्रम से जोड़कर देखा गया था।
अंकित बालियान की ओर से पहले यह स्पष्ट किया गया था कि उन्होंने उस गाने में केवल अभिनय किया था। गाने के बोल और धुन उनके द्वारा तैयार नहीं किए गए थे। इसके बावजूद पुलिस की जांच में यह बात सामने आने का दावा किया गया है कि संबंधित गैंग के लोगों ने इस गीत को विरोधी गैंग से जोड़कर देखा और इसी वजह से कथित तौर पर अंकित को धमकियां भी दी गई थीं।
हालांकि हत्या का वास्तविक कारण क्या था, इसे लेकर पुलिस ने अभी अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है। अधिकारियों का कहना है कि मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद उनके बयानों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर हत्या के पीछे की वास्तविक वजह अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
सुपारी और फाइनेंसिंग एंगल की भी पड़ताल
पुलिस ने यह भी संकेत दिया है कि शूटरों को वारदात को अंजाम देने के लिए किसी तरह की आर्थिक मदद या फाइनेंसिंग मिली हो सकती है। इस पहलू की गहराई से जांच की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, जब किसी गिरोह के शूटर दूसरे स्थान पर जाकर हत्या को अंजाम देते हैं तो उनके लिए हथियार, ठिकाना, आने-जाने की व्यवस्था और अन्य लॉजिस्टिक्स की जरूरत होती है। अंकित बालियान मामले में भी पुलिस इन सभी कड़ियों की जांच कर रही है।
पुलिस ने बरामद हथियारों को फैक्ट्री-मेड बताया है। साथ ही हथियार किस माध्यम से शूटर्स तक पहुंचे और इन्हें उपलब्ध कराने में किन लोगों की भूमिका थी, इसकी भी जांच की जा रही है।
जेल और विदेश में बैठे अपराधियों पर भी नजर
डीजीपी राजीव कृष्ण ने कहा कि पुलिस की कार्रवाई केवल उन आरोपियों तक सीमित नहीं होगी जो मौके पर मौजूद थे। पुलिस उन लोगों तक भी पहुंचेगी, जो जेल में रहते हुए कथित तौर पर आपराधिक साजिशों में शामिल हो रहे हैं या विदेश में बैठकर आपराधिक नेटवर्क संचालित करने के आरोपों का सामना कर रहे हैं।
पूछे जाने पर कि क्या कनाडा में मौजूद बताए जा रहे गोलू शाह की भूमिका की भी जांच हो रही है, डीजीपी ने कहा कि जांच के सभी पहलुओं पर गहराई से काम किया जा रहा है। हालांकि उन्होंने जांच के संवेदनशील तथ्यों और संभावित आरोपियों की लोकेशन के बारे में विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार किया।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की संबंधित एजेंसियों और दूसरे राज्यों की पुलिस के साथ समन्वय बनाकर कार्रवाई की जा रही है। विदेश में मौजूद आरोपियों को भारत वापस लाने के लिए इंटरपोल, रेड कॉर्नर नोटिस और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किए जाने की बात भी उन्होंने कही।
लॉरेंस बिश्नोई कनेक्शन पर पुलिस ने साधी सावधानी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लॉरेंस बिश्नोई गैंग के संभावित कनेक्शन को लेकर भी सवाल पूछा गया। इस पर डीजीपी ने कहा कि जांच अभी जारी है। पुलिस का रुख स्पष्ट है कि किसी भी व्यक्ति या गैंग के खिलाफ कार्रवाई उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही की जाएगी।
अधिकारी के मुताबिक, जांच में जिन नामों और तथ्यों की पुष्टि होगी, उन्हीं के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ है कि पुलिस फिलहाल किसी संभावित गैंग कनेक्शन को लेकर अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक करने से बच रही है।
दूसरे राज्यों की पुलिस का मिला सहयोग
अंकित बालियान हत्याकांड की जांच में अंतरराज्यीय पुलिस समन्वय को भी महत्वपूर्ण बताया गया है। पुलिस के अनुसार, हरियाणा और दिल्ली पुलिस समेत पड़ोसी राज्यों की एजेंसियों से लगातार सहयोग मिला। इसी समन्वय के चलते अलग-अलग राज्यों में छिपे आरोपियों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिली।
डीजीपी ने कहा कि अपराधी यदि एक राज्य में वारदात करके दूसरे राज्य में जाकर छिपने की कोशिश करते हैं, तो केवल भौगोलिक दूरी उन्हें कानून की पहुंच से बाहर नहीं कर सकती।
उन्होंने साफ संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश की जमीन को किसी भी गैंगवार या आपराधिक गिरोह की गतिविधियों का ठिकाना बनने नहीं दिया जाएगा।
‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर डीजीपी का जोर
अंकित बालियान हत्याकांड के साथ प्रदेश में हाल की कुछ आपराधिक घटनाओं को लेकर जब सवाल उठाया गया तो डीजीपी ने सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि जीरो टॉलरेंस का अर्थ यह है कि कानून लागू करने वाली एजेंसियां अपराध की सूचना मिलने पर कठोर और प्रभावी कानूनी कार्रवाई करें। उनके अनुसार, पिछले कई वर्षों में संगठित अपराध के खिलाफ लगातार अभियान चलाए गए हैं और जिन मामलों में अपराधियों के खिलाफ मुकदमे चले, उनमें सजा सुनिश्चित कराने पर भी जोर दिया गया है।
उन्होंने ‘ऑपरेशन कन्विक्शन’ का उल्लेख करते हुए पुलिस की ओर से अदालतों में प्रभावी पैरवी और दोषसिद्धि पर जोर दिए जाने की बात कही।
बाकी आरोपियों की तलाश जारी
अंकित बालियान हत्याकांड में अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती बाकी दो शूटरों और उस पूरे नेटवर्क तक पहुंचना है, जिसने कथित तौर पर हत्या की योजना तैयार की।
पुलिस के अनुसार, हत्या की योजना बनाने वालों, रेकी कराने वालों, हथियार और लॉजिस्टिक्स उपलब्ध कराने वालों, आर्थिक मदद करने वालों तथा आरोपियों को संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका की अलग-अलग जांच की जा रही है।
डीजीपी ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई केवल दो मारे गए आरोपियों के साथ खत्म नहीं होगी। जांच में जिस व्यक्ति की जो भूमिका सामने आएगी, उसके अनुसार उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल अंकित बालियान हत्याकांड की जांच कई स्तरों पर आगे बढ़ रही है। दो कथित शूटरों के मारे जाने के बाद पुलिस को मामले में महत्वपूर्ण सुराग मिलने का दावा किया गया है, लेकिन हत्या की अंतिम वजह, कथित फाइनेंसिंग और पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका अभी जांच का विषय है।
पुलिस का कहना है कि जैसे-जैसे नए साक्ष्य सामने आएंगे, कार्रवाई का दायरा भी बढ़ेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां तथा महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना बनी हुई है।
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