व्यापार 100 अरब डॉलर पार, रणनीतिक साझेदारी अब टेक्नोलॉजी, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा तक विस्तारित
लखनऊ/नई दिल्ली, 15 मई 2026:
Narendra Modi ने 15 मई 2026 को United Arab Emirates (यूएई) की अहम यात्रा की, जहां उन्होंने राष्ट्रपति Mohamed bin Zayed Al Nahyan के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। इस यात्रा ने भारत–यूएई संबंधों को और मजबूत करते हुए ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, कनेक्टिविटी और रक्षा सहयोग जैसे क्षेत्रों में नई दिशा दी।
ऐतिहासिक रिश्तों से रणनीतिक साझेदारी तक
भारत और यूएई के बीच संबंध सदियों पुराने हैं, जो व्यापार और सांस्कृतिक जुड़ाव से विकसित होकर अब व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदल चुके हैं। वर्ष 1972 में औपचारिक राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ा है।
2015 में प्रधानमंत्री मोदी की ऐतिहासिक यूएई यात्रा के बाद संबंधों में तेजी आई। तब से अब तक उच्च स्तरीय यात्राओं और समझौतों के जरिए दोनों देश आर्थिक और रणनीतिक रूप से और करीब आए हैं।
व्यापार और निवेश: नई ऊंचाई पर
भारत–यूएई के बीच व्यापारिक संबंध लगातार मजबूत हो रहे हैं।
- वित्त वर्ष 2025–26 में द्विपक्षीय व्यापार 101.25 अरब डॉलर तक पहुंच गया
- 2032 तक इसे 200 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
- यूएई भारत का प्रमुख निवेशक और ऊर्जा साझेदार
फरवरी 2024 में हुई निवेश संधि और स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (रुपया–दिरहम) ने व्यापार को और आसान बनाया है।
ऊर्जा सुरक्षा में बड़ी मजबूती
ऊर्जा क्षेत्र में यूएई भारत का प्रमुख सहयोगी बना हुआ है:
- कच्चे तेल का चौथा सबसे बड़ा स्रोत
- LNG का तीसरा और LPG का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता
- भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में भागीदारी करने वाला एकमात्र देश
इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा को स्थिरता मिली है।
यात्रा के 7 बड़े समझौते (Key Outcomes)
1. ISPRL–ADNOC समझौता:
रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार को मजबूत करने और ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर सहमति।
2. IOCL–ADNOC LPG डील:
भारत के लिए दीर्घकालिक और स्थिर LPG आपूर्ति सुनिश्चित।
3. रक्षा सहयोग फ्रेमवर्क:
संयुक्त विकास, टेक्नोलॉजी शेयरिंग और रक्षा उद्योग में भागीदारी बढ़ेगी।
4. कोचीन शिपयार्ड–ड्राईडॉक्स वर्ल्ड समझौता:
वाडिनार में जहाज मरम्मत क्लस्टर स्थापित होगा, लॉजिस्टिक्स को बढ़ावा।
5. समुद्री स्किल डेवलपमेंट MoU:
भारतीय युवाओं के लिए जहाज निर्माण और मरम्मत में उन्नत प्रशिक्षण।
6. C-DAC–G42 सुपरकंप्यूटिंग प्रोजेक्ट:
8 एक्साफ्लॉप AI सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर से भारत की टेक्नोलॉजी क्षमता मजबूत।
7. यूएई का भारत में निवेश:
इंफ्रास्ट्रक्चर और बैंकिंग सेक्टर में बड़े निवेश से आर्थिक विकास को बढ़ावा।
लोगों के बीच मजबूत रिश्ते
यूएई में भारतीय प्रवासी सबसे बड़ा विदेशी समुदाय है, जो वहां की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समुदाय भारत के लिए लगातार मजबूत रेमिटेंस (विदेशी धन) का स्रोत भी बना हुआ है।
भविष्य की साझेदारी: टेक्नोलॉजी और रणनीतिक विकास
यह यात्रा सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं रही, बल्कि AI, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, समुद्री लॉजिस्टिक्स और उन्नत विनिर्माण जैसे नए क्षेत्रों में भी सहयोग का रास्ता खोला है।
भारत और यूएई के बीच बढ़ता तालमेल आने वाले वर्षों में क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति में अहम भूमिका निभाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भारत–यूएई संबंधों को एक नए स्तर पर ले गई है, जहां साझेदारी अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और वैश्विक रणनीतिक संतुलन तक फैल चुकी है।













