नई दिल्ली। देश में छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों और शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही बहस अब फिल्मी दुनिया तक पहुंचती दिखाई दे रही है। इसी कड़ी में दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की छात्र आंदोलनों को लेकर कही गई बातों पर अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए नसीरुद्दीन शाह पर निशाना साधते हुए देशभक्ति और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर सवाल खड़े किए।
कंगना का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है, जब छात्रों के प्रदर्शन का मुद्दा राजनीतिक गलियारों में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बाद झारखंड में छात्रों के आंदोलन ने भी इस बहस को और तेज कर दिया है।
छात्र आंदोलन पर नसीरुद्दीन शाह की टिप्पणी बनी बहस की वजह
दरअसल, छात्र आंदोलन और नीट से जुड़े विवाद के दौरान नसीरुद्दीन शाह ने उन फिल्मी सितारों की चुप्पी पर सवाल उठाया था, जिन्होंने छात्रों के मुद्दे पर सार्वजनिक तौर पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
उनकी टिप्पणी का संदर्भ लेते हुए कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर अपनी बात रखी। कंगना ने कलाकारों की राजनीतिक और सामाजिक प्रतिबद्धताओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की और इसी दौरान नसीरुद्दीन शाह पर व्यक्तिगत रूप से भी निशाना साधा।
कंगना ने ‘किसके प्रति वफादारी’ का उठाया सवाल
कंगना ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में बेहद तीखे अंदाज में प्रतिक्रिया दी। उनके संदेश का मुख्य केंद्र यह था कि प्रत्येक व्यक्ति की किसी न किसी के प्रति निष्ठा होती है, लेकिन उनके लिए अपने देश के प्रति प्रतिबद्धता सबसे ऊपर है।
उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश की कि जिस देश में वह रहती हैं और जिससे उन्हें पहचान मिली है, उसके मुद्दों पर बोलने में उन्हें किसी तरह की झिझक नहीं है।
कंगना की टिप्पणी ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है। एक तरफ उनके समर्थक इसे राष्ट्रहित से जुड़ा स्पष्ट रुख बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग इसे अभिनेता की व्यक्तिगत राय पर राजनीतिक प्रतिक्रिया के तौर पर देख रहे हैं।
‘देश का खाते हैं…’ वाली टिप्पणी ने खींचा ध्यान
कंगना की प्रतिक्रिया का सबसे ज्यादा चर्चित हिस्सा वह है जिसमें उन्होंने नसीरुद्दीन शाह पर तीखा कटाक्ष किया। उन्होंने अपने बयान में ‘लोमड़ी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए अभिनेता की निष्ठा पर सवाल उठाया।
कंगना का आरोप था कि कुछ लोग देश से मिलने वाले लाभ तो स्वीकार करते हैं, लेकिन सार्वजनिक मुद्दों पर उनकी आवाज देश के बजाय दूसरी दिशा में जाती दिखाई देती है। हालांकि यह पूरी तरह कंगना की राजनीतिक टिप्पणी और व्यक्तिगत राय है, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से व्यक्त किया।
नसीरुद्दीन शाह और कंगना के बीच पहले भी रही है वैचारिक टकराहट
कंगना रनौत और नसीरुद्दीन शाह के बीच वैचारिक मतभेद कोई नया विषय नहीं है। दोनों कलाकार कई मौकों पर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर अलग-अलग राय व्यक्त करते रहे हैं।
नसीरुद्दीन शाह अपने बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, जबकि कंगना भी राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर मुखर रुख अपनाती रही हैं। ऐसे में छात्रों के आंदोलन से जुड़ा यह ताजा विवाद भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है।
जंतर-मंतर से झारखंड तक छात्र आंदोलन की चर्चा
छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों का मुद्दा पिछले कुछ समय से राजनीतिक बहस का हिस्सा बना हुआ है। जंतर-मंतर पर छात्रों की गतिविधियों के बाद झारखंड में भी छात्र प्रदर्शन की खबरों ने राजनीतिक दलों को आमने-सामने ला दिया।
एक तरफ विपक्ष और प्रदर्शन से जुड़े लोग छात्रों के अधिकारों तथा रोजगार से जुड़े सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार और उसके समर्थक प्रदर्शन के तरीके और राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर सवाल कर रहे हैं।
इसी माहौल में बॉलीवुड से जुड़े कलाकारों के बयान भी चर्चा का विषय बन रहे हैं।
कंगना का संदेश बना सोशल मीडिया चर्चा का केंद्र
कंगना की सोशल मीडिया पोस्ट सामने आने के बाद उनके बयान को लेकर यूजर्स के बीच अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। उनके समर्थकों का कहना है कि अभिनेत्री ने देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट किया है।
वहीं, आलोचक मानते हैं कि छात्र आंदोलन जैसे गंभीर विषय पर बहस को व्यक्तिगत टिप्पणियों की ओर ले जाने के बजाय मूल मुद्दों पर केंद्रित रहना चाहिए।
इस पूरे विवाद में एक बात साफ है कि छात्रों के मुद्दे ने राजनीतिक नेताओं के साथ-साथ फिल्मी हस्तियों को भी अपनी राय जाहिर करने के लिए मजबूर किया है।
असली मुद्दा छात्रों की आवाज या सितारों की बयानबाजी?
कंगना और नसीरुद्दीन शाह के बीच शुरू हुई यह जुबानी जंग केवल दो कलाकारों की व्यक्तिगत राय तक सीमित नहीं है। इसके पीछे बड़ा सवाल यह भी है कि जब देश में छात्र किसी मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरते हैं, तो सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों और खासकर लोकप्रिय कलाकारों की क्या भूमिका होनी चाहिए।
क्या उन्हें आंदोलन के समर्थन या विरोध में खुलकर बोलना चाहिए, या फिर उन्हें राजनीतिक विवादों से दूर रहना चाहिए? यही सवाल अब सोशल मीडिया पर बहस का नया केंद्र बन गया है।
फिलहाल कंगना रनौत की टिप्पणी ने इस पूरे मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। अब देखना होगा कि नसीरुद्दीन शाह इस ताजा प्रतिक्रिया पर कोई जवाब देते हैं या यह विवाद सोशल मीडिया की बहस तक ही सीमित रहता है।
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