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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती का मामला एक बार फिर चर्चा में है। भर्ती में आरक्षण संबंधी विसंगतियों और संशोधित परिणाम जारी करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने मंगलवार को ‘दस्तक दो अभियान’ के तहत अलग-अलग टोलियां बनाकर प्रदेश सरकार के पांच कैबिनेट मंत्रियों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की। अभ्यर्थियों ने सभी नेताओं को ज्ञापन सौंपते हुए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुरूप कार्रवाई किए जाने और पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने की मांग रखी।

अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि 68,500 शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को अर्हता अंकों में नियमानुसार छूट का लाभ दिया जाना चाहिए। उनकी मुख्य मांग है कि 150 पूर्णांक में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत को आधार मानते हुए संशोधित परिणाम जारी किया जाए और संशोधित परिणाम में पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति दी जाए। इस मांग को लेकर अभ्यर्थी पिछले कई वर्षों से आंदोलन कर रहे हैं। हाल के दिनों में भी लखनऊ में इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन और धरना जारी रहा है।

आठ वर्षों से आंदोलन का दावा

आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों का कहना है कि 68,500 शिक्षक भर्ती का विवाद उनके लिए केवल एक भर्ती प्रक्रिया का मुद्दा नहीं है, बल्कि उनके रोजगार और भविष्य से जुड़ा विषय है। अभ्यर्थियों के अनुसार, वे पिछले करीब आठ वर्षों से अपने अधिकारों और नियुक्ति की मांग को लेकर अलग-अलग स्तर पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आयोगों के सामने अपनी बात रखते रहे हैं।

अभ्यर्थियों का कहना है कि लगातार ज्ञापन, प्रदर्शन और मुलाकातों के बावजूद अभी तक इस मामले का अंतिम समाधान नहीं हुआ है। इसी क्रम में पिछले 36 दिनों से ईको गार्डन में धरना दिए जाने का दावा भी किया गया है। मंगलवार को आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अभ्यर्थियों ने एक साथ सभी मंत्रियों से मिलने के बजाय अलग-अलग टोलियां बनाईं और संबंधित जनप्रतिनिधियों के आवास पर पहुंचकर ज्ञापन सौंपे।

अभ्यर्थियों के मुताबिक, उनका उद्देश्य सरकार के अलग-अलग जिम्मेदार प्रतिनिधियों तक अपनी मांग को सीधे पहुंचाना और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति पर निर्णय की मांग करना था।

क्या है अभ्यर्थियों की मुख्य मांग?

68,500 शिक्षक भर्ती-2018 के मामले में आरक्षण और अर्हता अंकों को लेकर विवाद लंबे समय से चल रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि आरक्षित वर्ग के लिए पांच प्रतिशत अर्हता छूट का लाभ दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि 150 अंकों की परीक्षा में 40 प्रतिशत यानी 60 अंक प्राप्त करने वाले पात्र आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सफल मानते हुए संशोधित परिणाम जारी किया जाए।

जुलाई 2026 में उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति को लेकर भी यह मुद्दा फिर सामने आया था। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार आयोग ने 68,500 सहायक शिक्षक भर्ती-2018 के मामले में ओबीसी अभ्यर्थियों के लिए पांच प्रतिशत अर्हता छूट के मुद्दे पर अपनी पूर्व संस्तुति को बरकरार रखते हुए परिणाम संशोधित करने की सिफारिश की थी।

अभ्यर्थियों का कहना है कि आयोग की संस्तुति के अनुसार 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर संशोधित परिणाम तैयार किया जाए और इसके बाद पात्र अभ्यर्थियों की नई चयन सूची जारी कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जाए।

‘दस्तक दो अभियान’ के तहत मंत्रियों से मुलाकात

मंगलवार को अभ्यर्थियों की पहली टोली ने उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों के अनुसार, उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और विभागीय स्तर पर कार्यवाही चल रही है। अभ्यर्थियों के मुताबिक, उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित विभाग के मंत्री मामले में कार्रवाई कर रहे हैं और अभ्यर्थियों के साथ न्याय होगा।

इसके बाद दूसरी टोली ने कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह से मुलाकात की। अभ्यर्थियों ने उन्हें भर्ती से संबंधित पूरा प्रकरण बताते हुए ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है और जल्द कार्रवाई की जाएगी।

तीसरी टोली ने कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद से मुलाकात की। इस दौरान अभ्यर्थियों ने भर्ती में आरक्षण से जुड़ी अपनी शिकायतें और राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति का मुद्दा उनके सामने रखा। अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री ने कहा कि वह इस मामले को उच्च अधिकारियों और बेसिक शिक्षा मंत्री के समक्ष रखकर इस पर वार्ता करेंगे।

चौथी टोली ने कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री ने मामले को मुख्यमंत्री के समक्ष रखने और जल्द समाधान की दिशा में प्रयास करने का आश्वासन दिया।

इसके बाद पांचवीं टोली ने कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर से मुलाकात की। अभ्यर्थियों के अनुसार, मंत्री ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से बातचीत की है। उनके मुताबिक, मुख्यमंत्री की ओर से विभागीय मंत्री और विभाग के प्रमुख सचिव के साथ बैठक कर मामले पर निर्णय लेने की बात कही गई है।

इस तरह एक ही दिन में अभ्यर्थियों ने सरकार के कई प्रमुख प्रतिनिधियों तक अपनी मांग पहुंचाने का प्रयास किया।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से भी मिले अभ्यर्थी

अभियान के तहत अभ्यर्थियों की एक अन्य टोली ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से भी मुलाकात की और उन्हें ज्ञापन सौंपा। अभ्यर्थियों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 68,500 शिक्षक भर्ती का मामला उनके संज्ञान में है और पार्टी स्तर पर भी इसे गंभीरता से देखा जा रहा है।

अभ्यर्थियों का दावा है कि प्रदेश अध्यक्ष ने उन्हें मामले में जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई कि सरकार और संगठन स्तर पर मामले को आगे बढ़ाया जाएगा और लंबे समय से चल रहे विवाद का समाधान निकाला जाएगा।

यह मुद्दा पिछले कुछ सप्ताह में लगातार सक्रिय रहा है। सितंबर में भी अभ्यर्थियों ने लखनऊ में भाजपा कार्यालय और अन्य स्थानों पर प्रदर्शन करते हुए संशोधित परिणाम और नियुक्ति की मांग उठाई थी। मीडिया रिपोर्टों में भी 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर संशोधित परिणाम जारी करने की मांग का उल्लेख किया गया है। Live Hindustan

अभ्यर्थियों का दावा—लगभग 23 हजार सीटें खाली

अभ्यर्थियों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि 68,500 शिक्षक भर्ती में करीब 23 हजार सीटें अभी खाली हैं। इनमें लगभग 2 हजार सीटें ओबीसी वर्ग की बताई गई हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुसार संशोधित परिणाम जारी किया जाता है तो इन खाली पदों पर पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने का रास्ता खुल सकता है।

हालांकि, खाली पदों की संख्या और श्रेणीवार स्थिति से संबंधित आंकड़ों का अंतिम आधिकारिक सत्यापन संबंधित विभाग के अभिलेखों से किया जाना जरूरी है। इसलिए इन आंकड़ों को फिलहाल अभ्यर्थियों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

अलग-अलग टोलियों में पहुंचे अभ्यर्थी

अभियान के दौरान कई अभ्यर्थियों ने अलग-अलग समूहों में मंत्रियों और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष से मुलाकात की। प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, रंजना जायसवाल, विनोद प्रजापति, अवधेश शाक्य, नवीन चौधरी, किरन मौर्य, मयंक गुप्ता, उत्कर्ष पटेल, सच्चिदानंद, विमलेश गोता, धीरेंद्र कुशवाहा, सुमन यादव और अखिल कुमार सहित कई अभ्यर्थियों के नेतृत्व में टोलियों ने मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

आंदोलन का नेतृत्व आशुतोष वर्मा, नवीन चौधरी, अखिल कुमार और तूफान सिंह द्वारा किए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे इस अभियान के माध्यम से सरकार को यह संदेश देना चाहते हैं कि मामला अभी समाप्त नहीं हुआ है और जब तक उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक वे अपनी आवाज उठाते रहेंगे।

आयोग की संस्तुति के अनुपालन पर टिकी नजर

68,500 शिक्षक भर्ती विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति के अनुपालन का है। अभ्यर्थी लगातार मांग कर रहे हैं कि आयोग की ओर से कही गई बातों के आधार पर विभागीय स्तर पर निर्णय लिया जाए।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, आयोग की संस्तुति में ओबीसी अभ्यर्थियों को 150 में 60 अंक यानी 40 प्रतिशत के आधार पर अर्हता देने और उसी के अनुरूप परिणाम संशोधित करने की बात सामने आई थी।

वहीं, सरकार की ओर से इस पूरे मामले में विभागीय प्रक्रिया और निर्णय की स्थिति ही आगे की दिशा तय करेगी। अभ्यर्थियों की लगातार मांग है कि उन्हें स्पष्ट और अंतिम निर्णय की जानकारी दी जाए, ताकि वर्षों से चल रहा विवाद समाप्त हो सके।

अब सरकार के फैसले का इंतजार

मंगलवार के ‘दस्तक दो अभियान’ के बाद अभ्यर्थियों ने उम्मीद जताई है कि उनकी मांग अब सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंच चुकी है। अलग-अलग मंत्रियों से हुई मुलाकातों में अभ्यर्थियों के अनुसार उन्हें मामले की जानकारी होने और कार्रवाई का आश्वासन मिला है।

अब निगाह इस बात पर है कि विभागीय स्तर पर इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है और क्या 68,500 शिक्षक भर्ती का संशोधित परिणाम जारी करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया जाता है।

अभ्यर्थियों का कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हैं और उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक आरक्षण संबंधी विवाद का समाधान करते हुए पात्र अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति का रास्ता साफ नहीं किया जाता।

नोट: इस खबर में मंत्रियों से हुई बातचीत, खाली पदों की संख्या और आंदोलन की अवधि से संबंधित दावे अभ्यर्थियों द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर हैं। राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग की संस्तुति और भर्ती विवाद से जुड़े प्रमुख बिंदुओं की स्वतंत्र मीडिया रिपोर्टों से भी पुष्टि होती है।

यह खबर भी पढ़ें: लखनऊ में OBC आरक्षण और जातिगत जनगणना की मांग को लेकर कांग्रेस का राजभवन मार्च

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