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लखनऊ, 29 सितंबर 2026। बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से होने वाले चुनाव और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर अपनी पार्टी का पक्ष सामने रखा है। 28 सितंबर को जारी BSP की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, मायावती ने देश में हो रहे चुनावों, EVM से जुड़े सवालों और कानून-व्यवस्था से संबंधित मुद्दों पर मीडिया को संबोधित किया। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया में मतदाताओं के भरोसे और पारदर्शिता को लेकर अपनी चिंताएं दर्ज कराते हुए बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने की मांग दोहराई है।

प्रेस नोट में मायावती ने कहा कि भारत के संविधान में नागरिकों को अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनने का अधिकार दिया गया है। BSP के मुताबिक, इस संवैधानिक अधिकार को सही तरीके से लागू करने की जिम्मेदारी चुनाव आयोग की है। पार्टी का कहना है कि चुनाव ऐसी प्रक्रिया के तहत होने चाहिए, जिसमें मतदाता अपने मत को लेकर आश्वस्त रहें और मतदान के बाद उनका वोट उसी उम्मीदवार के खाते में दर्ज और गिना जाए, जिसे उन्होंने चुना है।

EVM को लेकर BSP ने उठाए सवाल

BSP ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में EVM के इस्तेमाल को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवाद का जिक्र किया है। पार्टी ने कहा कि पहले भी EVM की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। प्रेस नोट के अनुसार, जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा की ओर से भी EVM के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए थे। BSP ने अपने बयान में यह भी कहा कि उस समय EVM में चिप लगाकर मशीन के साथ छेड़छाड़ किए जाने की आशंका जताई गई थी और इस संबंध में एक किताब प्रकाशित किए जाने का उल्लेख भी किया गया है।

BSP का आरोप है कि वर्तमान समय में EVM के जरिए मतदान और मतगणना की प्रक्रिया को लेकर मतदाताओं के बीच संदेह की स्थिति पैदा हो रही है। पार्टी ने दावा किया कि दुनिया के कई देशों में बैलेट पेपर के माध्यम से चुनाव कराए जाते हैं और भारत में भी इस व्यवस्था पर लौटने की जरूरत है। यह BSP का राजनीतिक और प्रक्रियागत मत है; प्रेस नोट में इसके समर्थन में किसी स्वतंत्र तकनीकी जांच का निष्कर्ष प्रस्तुत नहीं किया गया है।

BSP ने बैलेट पेपर से मतदान की मांग दोहराई

मायावती की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यदि चुनाव प्रक्रिया को लेकर लोगों के मन में किसी प्रकार की आशंका है तो उसका समाधान किया जाना चाहिए। BSP ने मांग की है कि EVM के स्थान पर फिर से बैलेट पेपर से मतदान की व्यवस्था शुरू की जाए।

पार्टी के मुताबिक, मतदाता का भरोसा लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है। इसलिए चुनाव व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें मतदान करने वाले व्यक्ति को यह विश्वास रहे कि उसका वोट उसी उम्मीदवार के खाते में दर्ज हुआ है, जिसे उसने चुना था।

VVPAT को लेकर भी सवाल

प्रेस नोट में BSP ने VVPAT व्यवस्था का भी उल्लेख किया है। पार्टी का कहना है कि EVM में वोट डालने के बाद VVPAT पर्ची दिखाई जाती है, लेकिन मतगणना के दौरान सभी VVPAT पर्चियों की गिनती नहीं किए जाने को लेकर सवाल हैं।

BSP का तर्क है कि यदि VVPAT पर्ची मतदाता के वोट का सत्यापन करने का माध्यम है तो उसकी पूरी तरह गिनती किए जाने से मतगणना पर लोगों का भरोसा मजबूत हो सकता है। प्रेस विज्ञप्ति में पार्टी ने यह भी कहा कि EVM से वोट की गिनती के दौरान VVPAT की सभी पर्चियों को नहीं गिना जाता।

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि प्रेस नोट में VVPAT और EVM की प्रक्रिया को लेकर BSP की आपत्तियां दर्ज हैं। इन्हें पार्टी के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी जिक्र

BSP ने अपने बयान में EVM और VVPAT से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही का भी उल्लेख किया। पार्टी के अनुसार, उसने EVM के जरिए चुनाव की प्रक्रिया को चुनौती दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने EVM प्रक्रिया को समाप्त करने की मांग स्वीकार नहीं की और VVPAT मशीन लगाने तथा वोट की जांच से जुड़ी व्यवस्था पर आदेश दिया।

BSP का कहना है कि VVPAT की व्यवस्था लागू होने के बावजूद उसकी सभी पर्चियों की गिनती नहीं होने से पार्टी की आपत्ति पूरी तरह दूर नहीं हुई है। इसी आधार पर पार्टी फिर से बैलेट पेपर से मतदान की मांग कर रही है।

SIR को लेकर भी पार्टी ने जताई चिंता

BSP की प्रेस विज्ञप्ति में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर भी चर्चा की गई है। पार्टी का कहना है कि SIR को लेकर देश में अलग-अलग तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आई हैं। BSP ने कहा कि मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत नाम शामिल होने की स्थिति को दूर करना जरूरी है, लेकिन साथ ही वास्तविक मतदाताओं के नाम सुरक्षित रहना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पार्टी ने कहा कि मतदाता सूची में सुधार की प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिससे किसी योग्य मतदाता का नाम अनजाने में न हटे। BSP के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटता है और वह चुनाव में अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाता है, तो इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर असर पड़ सकता है।

गरीब और वंचित वर्ग के मतदाताओं का मुद्दा

BSP ने अपने बयान में खास तौर पर गरीब, दलित, अति-पिछड़े और सामान्य वर्ग के गरीब लोगों का जिक्र किया। पार्टी का कहना है कि ये वर्ग अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में रोजगार, मजदूरी और परिवार के भरण-पोषण जैसी चुनौतियों से जूझते हैं। ऐसे लोगों के लिए मतदान प्रक्रिया सरल और भरोसेमंद होना जरूरी है।

पार्टी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रत्येक मतदाता का वोट महत्वपूर्ण है। इसलिए मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतदान और मतगणना तक हर चरण में पारदर्शिता बनाए रखने की जरूरत है।

EVM की जगह बैलेट पेपर की मांग

BSP ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति के दूसरे पृष्ठ में स्पष्ट रूप से कहा है कि EVM के जरिए चुनाव की प्रक्रिया को तत्काल बंद किया जाए और उसकी जगह बैलेट पेपर से मतदान की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जाए। पार्टी ने SIR को लेकर सामने आई आशंकाओं को दूर करने की भी मांग की है।

मायावती ने यह भी कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में चुनाव से जुड़े अन्य मामलों और शिकायतों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। BSP का कहना है कि यदि समय रहते इन मुद्दों का समाधान किया जाए तो चुनाव व्यवस्था को लेकर पैदा होने वाली आशंकाओं को कम किया जा सकता है।

दिल्ली और दूसरे राज्यों से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख

प्रेस नोट में BSP ने दिल्ली की राजधानी और उसके आसपास के राज्यों में कानून-व्यवस्था तथा अन्य मुद्दों को लेकर भी सरकारों से आवश्यक कदम उठाने की मांग की। पार्टी ने कहा कि यदि किसी राज्य में कानून-व्यवस्था या जनहित से जुड़ी कोई समस्या लगातार बनी हुई है तो संबंधित सरकारों को उस पर गंभीरता से कार्रवाई करनी चाहिए।

निष्कर्ष

BSP की ओर से जारी इस प्रेस विज्ञप्ति में चुनाव प्रक्रिया को लेकर तीन प्रमुख मुद्दे सामने रखे गए हैं—EVM पर भरोसे का सवाल, VVPAT की पर्चियों की गिनती और SIR के दौरान मतदाता सूची की शुद्धता। पार्टी ने इन मुद्दों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में मतदाताओं के विश्वास से जोड़ते हुए बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग रखी है।

हालांकि, EVM में छेड़छाड़, मतदाता सूची में गड़बड़ी या SIR के कारण संभावित प्रभाव को लेकर प्रेस नोट में लगाए गए दावे BSP के राजनीतिक वक्तव्य हैं। इन्हें स्वतंत्र जांच या आधिकारिक निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है। BSP की यह मांग अब चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर चल रही राजनीतिक बहस में एक और महत्वपूर्ण पक्ष के रूप में सामने आई है।

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