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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने का अवसर देश की राजनीति और शासन व्यवस्था में उनके लंबे सफर को पीछे मुड़कर देखने का मौका बन गया है। 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से शुरू हुई यह यात्रा अब प्रधानमंत्री पद तक पहुंच चुकी है। इस मौके पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया गया। कार्यक्रम को ‘विकसित भारत 2047 संकल्प सभा’ से जोड़ा गया है। इस दौरान वक्ताओं ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के राजनीतिक और प्रशासनिक सफर को सुशासन, गरीब कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवा विकास और भारत की वैश्विक भूमिका में बदलाव से जोड़कर प्रस्तुत किया।

गुजरात से शुरू हुआ सफर दिल्ली तक पहुंचा

नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर गुजरात से शुरू हुआ। 2001 में उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला। इसके बाद गुजरात में बुनियादी ढांचे, उद्योग, निवेश और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई पहलों को आगे बढ़ाया गया। इसी दौर में गुजरात मॉडल और वाइब्रेंट गुजरात जैसे आयोजनों की देशभर में चर्चा हुई।

स्रोत में बताया गया है कि मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के सामने शुरुआत में ही गुजरात भूकंप जैसी बड़ी प्राकृतिक आपदा की चुनौती आई। इसके बाद राज्य के पुनर्निर्माण और विकास को लेकर उनके नेतृत्व पर चर्चा हुई। वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह ने भी गुजरात के उस दौर को याद करते हुए कहा कि कठिन परिस्थितियों के बीच विकास की दिशा में काम आगे बढ़ाया गया।

गुजरात के बाद राष्ट्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी की भूमिका तेजी से बढ़ी। 2013 में भाजपा ने उन्हें लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। वर्ष 2014 में उन्होंने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इसके बाद 2019 में भाजपा को दोबारा बहुमत मिला और मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद संभाला। 2024 में उन्होंने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली।

‘प्रधान सेवक’ की छवि पर जोर

प्रधानमंत्री मोदी अपने सार्वजनिक संबोधनों में खुद को कई बार ‘प्रधान सेवक’ बताते रहे हैं। उनके राजनीतिक सफर के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी सेवा और जनभागीदारी को प्रमुख संदेश के रूप में सामने रखा गया।

कार्यक्रम में ‘नागरिक देवो भव’ की अवधारणा का उल्लेख करते हुए कहा गया कि शासन का केंद्र आम नागरिक होना चाहिए। इस सोच को अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं और सुविधाओं की पहुंच से जोड़कर देखा गया।

प्रधानमंत्री के समर्थकों और कार्यक्रम में मौजूद वक्ताओं ने इस अवधि को ‘जनसेवा से राष्ट्र सेवा’ की यात्रा बताया। उनके अनुसार 25 वर्षों का यह पड़ाव केवल उपलब्धियों को गिनाने का अवसर नहीं, बल्कि अगले 25 वर्षों के लिए लक्ष्य तय करने का समय भी है।

गरीब कल्याण और सामाजिक योजनाओं का जिक्र

कार्यक्रम के दौरान केंद्र सरकार की कई योजनाओं और नीतियों का उल्लेख किया गया। इनमें गरीब परिवारों के लिए आवास, स्वास्थ्य सुरक्षा, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, नल से जल, महिला सशक्तिकरण और किसान कल्याण से जुड़ी योजनाओं को प्रमुखता दी गई।

गृह मंत्री अमित शाह ने प्रधानमंत्री के 25 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा गरीबों के कल्याण, महिलाओं के सशक्तिकरण, युवाओं के उत्थान और विभिन्न वर्गों की समृद्धि से जुड़ी रही है। उन्होंने शासन में निर्णय क्षमता, पारदर्शिता और योजनाओं के क्रियान्वयन को भी इस यात्रा का हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि और महिला सशक्तिकरण से जुड़े प्रयासों का भी उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने दावा किया कि इन पहलों के माध्यम से बड़ी संख्या में लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिला है।

‘मेक इन इंडिया’ से डिजिटल इंडिया तक

प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के सार्वजनिक जीवन की चर्चा में आर्थिक और तकनीकी बदलावों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया। कार्यक्रम में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, आत्मनिर्भर भारत, स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों का उल्लेख किया गया।

वक्ताओं के मुताबिक भारत ने मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में अपनी क्षमता को बढ़ाने की दिशा में कदम आगे बढ़ाए हैं। डिजिटल भुगतान और तकनीक आधारित शासन को भी आम नागरिक तक सरकारी सेवाएं पहुंचाने के महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर पेश किया गया।

इसी क्रम में ‘मेक इन इंडिया’ से आगे बढ़कर ‘मेक फॉर द वर्ल्ड’ की सोच का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम में कहा गया कि भारतीय उत्पादों और तकनीकी क्षमताओं को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

विरासत और विकास को साथ लेकर चलने का दावा

प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सफर की चर्चा केवल आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों तक सीमित नहीं रही। कार्यक्रम में भारत की सांस्कृतिक विरासत को भी महत्वपूर्ण आयाम बताया गया।

काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में राम मंदिर और महाकाल कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि विकास के साथ सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास पर भी जोर दिया गया है।

इस दौरान यह संदेश भी सामने आया कि आधुनिक भारत के निर्माण की प्रक्रिया में देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है।

महिला, किसान और युवाओं पर फोकस

कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए उज्ज्वला योजना और स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं का उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं की भूमिका को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि विकास की सक्रिय भागीदार के रूप में देखने की दिशा में जोर दिया गया है।

किसानों के संदर्भ में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान कल्याण से जुड़ी नीतियों का उल्लेख किया गया। वहीं युवाओं के लिए स्टार्टअप और रोजगार सृजन की संभावनाओं पर बात हुई। कार्यक्रम में भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम के विस्तार को युवाओं की बदलती भूमिका से जोड़ा गया।

वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका

प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन की चर्चा में विदेश नीति और भारत की अंतरराष्ट्रीय भूमिका भी प्रमुख विषय रही। कार्यक्रम में कहा गया कि पिछले वर्षों में भारत ने वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत करने की दिशा में काम किया है।

जापान की प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची की ओर से भी नरेंद्र मोदी को उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर शुभकामनाएं दिए जाने का उल्लेख किया गया। संदेश में भारत-जापान संबंधों और दोनों देशों के बीच विशेष रणनीतिक एवं वैश्विक साझेदारी को और मजबूत करने की प्रतिबद्धता की बात कही गई।

कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि भारत और जापान के बीच राजनयिक संबंधों की स्थापना की 75वीं वर्षगांठ अगले वर्ष आएगी। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया गया।

सुरक्षा और आत्मविश्वास की राजनीति का भी उल्लेख

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदमों का भी कार्यक्रम में उल्लेख हुआ। वक्ताओं ने सर्जिकल स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को भारत की सुरक्षा नीति में दृढ़ता के उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया।

इसके साथ ही भारतीय सेना के मनोबल और सैनिकों के सम्मान को लेकर सरकार की ओर से किए गए प्रयासों की चर्चा की गई।

हालांकि इन विषयों पर राजनीतिक दलों और विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग मत रहे हैं, कार्यक्रम में इन्हें प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की उपलब्धियों और राष्ट्रीय सुरक्षा की नीति के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया।

2047 के विकसित भारत की ओर अगला लक्ष्य

25 वर्षों की राजनीतिक यात्रा पूरी होने के बाद अब सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत 2047’ के संकल्प को बताया जा रहा है। कार्यक्रम में कहा गया कि अगले दो दशकों में भारत को आर्थिक, तकनीकी, सामाजिक और रणनीतिक रूप से और मजबूत बनाने की दिशा में काम करना होगा।

वक्ताओं ने कहा कि 25 वर्षों की यात्रा को अंतिम पड़ाव के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे अगले चरण की शुरुआत माना जा रहा है। वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य इसी व्यापक दृष्टि का हिस्सा बताया गया।

इस दौरान यह तर्क भी सामने आया कि किसी बड़े लक्ष्य को हासिल करने के लिए लंबी अवधि की योजना, समयबद्ध लक्ष्य और लगातार प्रयास जरूरी हैं। विकसित भारत का विजन इसी दीर्घकालिक सोच से जोड़ा गया।

25 साल की यात्रा पर नेताओं ने दी शुभकामनाएं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे महत्वपूर्ण अवसर बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री को बधाई देते हुए उनके लंबे राजनीतिक जीवन और देश के विकास में योगदान की सराहना की।

वहीं गृह मंत्री अमित शाह ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए प्रधानमंत्री को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी के शपथ लेने का उल्लेख करते हुए 25 वर्षों की सेवा और राजनीतिक यात्रा को रेखांकित किया।

सेवा से संकल्प और संकल्प से विकसित भारत तक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का यह अवसर भाजपा और उनके समर्थकों के लिए राजनीतिक उपलब्धियों के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। इस यात्रा को गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक पहुंचने वाले नेतृत्व के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

कार्यक्रम का केंद्रीय संदेश यही रहा कि 25 वर्षों के बाद अब फोकस अगले बड़े लक्ष्य पर है। विकसित भारत 2047 का संकल्प, तकनीकी आत्मनिर्भरता, आर्थिक विकास, सामाजिक कल्याण, महिला सशक्तिकरण, युवा भागीदारी और वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका—इन सभी को आने वाले वर्षों की प्राथमिकताओं से जोड़ा गया।

इस तरह प्रधानमंत्री मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने का अवसर केवल अतीत की राजनीतिक यात्रा को याद करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे भविष्य के भारत की दिशा तय करने वाले संकल्प के रूप में भी पेश किया गया। कार्यक्रम में बार-बार सेवा, सुशासन और राष्ट्र निर्माण की बात सामने आई और 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को अगले चरण की बड़ी जिम्मेदारी बताया गया।

नोट: इस रिपोर्ट में उपलब्ध कराए गए स्रोत/कार्यक्रम की सामग्री को आधार बनाया गया है। जहां किसी नेता या वक्ता के दावे हैं, उन्हें उसी संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है।

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