अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर के प्रशासनिक और संचालन तंत्र को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया है। बुधवार को अयोध्या में हुई ट्रस्ट की बैठक में यह फैसला लिया गया। खास बात यह है कि जीतेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पश्चिमी वायु कमान (Western Air Command) के प्रमुख की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं।
यह नियुक्ति ऐसे समय हुई है जब राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए जाने वाले चढ़ावे की कथित हेराफेरी और दान राशि की व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ चुके हैं। इस मामले में आठ लोगों की गिरफ्तारी हुई थी और ट्रस्ट के कुछ पदाधिकारियों के इस्तीफे के बाद मंदिर की वित्तीय एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा तेज हुई। ऐसे में अब एक पूर्व सैन्य अधिकारी को मंदिर ट्रस्ट के प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपे जाने को पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
पहली बार बनाया गया CEO का पद
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद से मंदिर निर्माण और संचालन का काम ट्रस्ट के पदाधिकारियों और विभिन्न समितियों के जरिए चलता रहा है। लेकिन अब पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है।
इस पद के लिए ट्रस्ट की ओर से व्यापक चयन प्रक्रिया अपनाई गई। रिपोर्टों के मुताबिक CEO पद के लिए कुल 5,585 आवेदन प्राप्त हुए थे। चयन प्रक्रिया में कई चरणों की स्क्रीनिंग, ऑनलाइन बातचीत और आमने-सामने की बैठकें शामिल थीं। इसके बाद तीन नामों का पैनल तैयार किया गया और अंतिम निर्णय ट्रस्ट की बैठक में लिया गया।
इन हजारों आवेदनों के बीच रिटायर्ड एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा का चयन होना इस पद के महत्व को भी दर्शाता है। ट्रस्ट अब मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक, वित्तीय और संचालन संबंधी कामों के लिए एक पेशेवर और पूर्णकालिक नेतृत्व चाहता है।
कौन हैं एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से आने वाले जीतेंद्र मिश्रा ने भारतीय वायुसेना में करीब चार दशक तक सेवा की। वह 30 अप्रैल 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न एयर कमांड के पद से सेवानिवृत्त हुए।
अपने लंबे सैन्य करियर के दौरान मिश्रा ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। वह फाइटर पायलट रहे और विभिन्न कमांड एवं ऑपरेशनल भूमिकाओं में काम किया। पश्चिमी वायु कमान भारतीय वायुसेना की बेहद महत्वपूर्ण कमानों में से एक है, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान सीमा से लगे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हवाई अभियानों और सुरक्षा से जुड़ी होती है।
मिश्रा ने 1 जनवरी 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक पश्चिमी वायु कमान का नेतृत्व किया। इसी दौरान मई 2025 में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस अभियान के दौरान पश्चिमी मोर्चे पर भारतीय वायु अभियानों की कमान उनके नेतृत्व वाली व्यवस्था के अंतर्गत थी।
उनकी सैन्य सेवा को कई सम्मान भी मिले हैं। रिपोर्टों के अनुसार उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल, अति विशिष्ट सेवा मेडल और विशिष्ट सेवा मेडल जैसे सैन्य सम्मान प्राप्त हुए हैं।
ऑपरेशन सिंदूर से राम मंदिर तक का सफर
जीतेंद्र मिश्रा की नई जिम्मेदारी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि कुछ महीने पहले तक वह देश की सुरक्षा से जुड़े बेहद संवेदनशील सैन्य दायित्व को संभाल रहे थे।
पश्चिमी वायु कमान के प्रमुख के तौर पर उनके अधीन राफेल, सुखोई-30 एमकेआई और मिग-29 जैसे लड़ाकू विमान, अपाचे हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान और एस-400 जैसी वायु रक्षा प्रणालियां थीं।
अब वही अधिकारी एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती संभालेंगे। यहां चुनौती सीमा पर हवाई सुरक्षा की नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों में से एक के प्रशासन, वित्तीय व्यवस्था, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और संस्थागत प्रबंधन की है।
चढ़ावे की कथित हेराफेरी के बाद बढ़ी थी चिंता
राम मंदिर ट्रस्ट के सामने CEO की नियुक्ति का फैसला ऐसे समय आया है जब मंदिर के दानपात्रों से जुड़े कथित चोरी के मामले ने देशभर में चर्चा पैदा की थी।
जून 2026 में राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया। जांच के दौरान आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया और पुलिस ने करीब 79.85 लाख रुपये नकद बरामद किए। जांच एजेंसियों ने मंदिर में चढ़ावे की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्था को भी जांच के दायरे में लिया।
मामले के बाद ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे की भी खबर सामने आई। इस घटनाक्रम ने मंदिर की दान व्यवस्था, निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए।
हालांकि, जिन लोगों पर आरोप हैं, उनके दोषी होने का अंतिम फैसला अदालत करेगी। इसलिए इस पूरे मामले को खबरों में आरोप और जांच के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।
तीन नए ट्रस्टियों की भी नियुक्ति
CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट ने तीन नए ट्रस्टियों को भी शामिल किया है। इनमें दिल्ली के कारोबारी महेश भागचंदका, अयोध्या के वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडे और शिकोहाबाद की सेवानिवृत्त हिंदी प्रोफेसर निर्मला यादव के नाम शामिल हैं।
मदन मोहन पांडे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े कानूनी मामलों में रामलला की ओर से पैरवी करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं। वहीं महेश भागचंदका का संबंध राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में रहे दिवंगत अशोक सिंघल के परिवार से बताया जाता है। निर्मला यादव की नियुक्ति ट्रस्ट में महिला प्रतिनिधित्व के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
ट्रस्ट में इन बदलावों के साथ प्रशासनिक ढांचे में भी नए समीकरण बनने की संभावना है।
CEO की जिम्मेदारी कितनी बड़ी होगी?
जीतेंद्र मिश्रा के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती मंदिर की बढ़ती गतिविधियों को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना होगी। राम मंदिर में हर दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इसके अलावा मंदिर परिसर के विस्तार, सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, कर्मचारियों की व्यवस्था, वित्तीय प्रक्रियाओं और श्रद्धालुओं से जुड़ी सुविधाओं का दायरा भी लगातार बढ़ रहा है।
CEO के तौर पर मिश्रा की भूमिका प्रशासन और संचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने में अहम हो सकती है। उनकी सैन्य पृष्ठभूमि को देखते हुए अनुशासन, लॉजिस्टिक्स, बड़े स्तर पर संसाधनों के प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय का अनुभव उनके लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
हालांकि, यह भी महत्वपूर्ण है कि CEO की नियुक्ति को मंदिर ट्रस्ट की पूरी सत्ता किसी एक व्यक्ति को सौंपे जाने के तौर पर नहीं देखा जाए। ट्रस्ट की अपनी संस्थागत संरचना और पदाधिकारी हैं। CEO का काम उस ढांचे के भीतर प्रशासनिक और संचालन संबंधी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से संभालना होगा।
भरोसा बहाल करना होगी सबसे बड़ी चुनौती
राम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था से जुड़ा स्थान है। ऐसे में चढ़ावे की कथित हेराफेरी जैसे मामलों का असर केवल आर्थिक व्यवस्था तक सीमित नहीं रहता, बल्कि श्रद्धालुओं के भरोसे पर भी पड़ता है।
यही वजह है कि जीतेंद्र मिश्रा की नियुक्ति को एक ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब ट्रस्ट को प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत करने की जरूरत है।
एक पूर्व एयर मार्शल के रूप में मिश्रा ने जिस तरह बेहद संवेदनशील सैन्य जिम्मेदारियां संभाली हैं, अब उनसे उम्मीद होगी कि मंदिर ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में भी उसी स्तर की पेशेवर कार्यशैली दिखाई दे।
आगे क्या होगा?
CEO की नियुक्ति के बाद अब असली परीक्षा इस बात की होगी कि नई व्यवस्था जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है। दान की गिनती से लेकर उसके सुरक्षित रखरखाव, बैंकिंग और लेखांकन तक पूरी प्रक्रिया कितनी पारदर्शी बनाई जाती है, यह श्रद्धालुओं के भरोसे के लिए महत्वपूर्ण होगा।
इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि CEO और ट्रस्ट के मौजूदा पदाधिकारियों के बीच जिम्मेदारियों का बंटवारा किस तरह किया जाता है और नए प्रशासनिक ढांचे के तहत फैसले कितनी तेजी और पारदर्शिता से लिए जाते हैं।
फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि राम मंदिर ट्रस्ट के इतिहास में पहली बार CEO के रूप में एक रिटायर्ड एयर मार्शल की नियुक्ति एक बड़ा संस्थागत बदलाव है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान देश की पश्चिमी सीमा पर सैन्य कमान संभाल चुके जीतेंद्र मिश्रा अब अयोध्या में रामलला मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालेंगे।
आने वाले समय में यह नियुक्ति मंदिर के प्रबंधन, वित्तीय पारदर्शिता और श्रद्धालुओं के भरोसे को मजबूत करने में कितनी सफल रहती है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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