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लखनऊ

उत्तर प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) को औद्योगिक विकास विभाग से हटाकर अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग के अधीन कर दिया है। यह विभाग सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पास है। इस फैसले के बाद औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के अधिकार क्षेत्र से यूपीडा बाहर हो गया है।

सरकारी अधिसूचना के अनुसार, यूपीडा अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाले अवस्थापना विभाग के माध्यम से संचालित होगा। प्रशासनिक हलकों में इस फैसले को बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि यूपीडा प्रदेश की सबसे महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर एजेंसियों में से एक है।

क्या है यूपीडा?

उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की स्थापना वर्ष 2007 में की गई थी। यह संस्था प्रदेश में एक्सप्रेसवे निर्माण, औद्योगिक कॉरिडोर, डिफेंस कॉरिडोर और बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास का कार्य करती है। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और गंगा एक्सप्रेसवे जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का संचालन एवं विकास यूपीडा के माध्यम से किया जाता है।

क्यों अहम माना जा रहा है फैसला?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यूपीडा राज्य सरकार की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में गिनी जाती है क्योंकि इसके माध्यम से हजारों करोड़ रुपये की परियोजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन होता है। ऐसे में इसका सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय के अधीन आना प्रशासनिक नियंत्रण को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

क्या मंत्री नंदी के लिए झटका?

विपक्ष और राजनीतिक गलियारों में इस फैसले को मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ के लिए बड़ा झटका बताया जा रहा है। हालांकि सरकार की ओर से इसे प्रशासनिक पुनर्गठन और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के बेहतर समन्वय के लिए उठाया गया कदम बताया जा रहा है। आधिकारिक तौर पर किसी प्रकार की राजनीतिक टिप्पणी नहीं की गई है।

आगे क्या होगा?

यूपीडा वर्तमान में गंगा एक्सप्रेसवे, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर (IMLC) समेत कई बड़ी परियोजनाओं पर काम कर रहा है। अब इन परियोजनाओं की निगरानी और नीति-निर्धारण सीधे मुख्यमंत्री के अधीन अवस्थापना विभाग के माध्यम से होगा।

राजनीतिक दृष्टि से यह फैसला आने वाले समय में भाजपा सरकार के भीतर शक्ति संतुलन और प्रशासनिक प्राथमिकताओं को लेकर भी चर्चा का विषय बना रह सकता है।

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