सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले को लेकर बढ़ा आक्रोश, सरकार पर लापरवाही का आरोप
लखनऊ: 69000 शिक्षक भर्ती मामले में आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का आंदोलन एक बार फिर तेज होता दिख रहा है। अपनी मांगों को लेकर अभ्यर्थी 18 मई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे। इस प्रदर्शन में अभ्यर्थियों के साथ उनके परिजन भी बड़ी संख्या में शामिल होंगे।आंदोलन का नेतृत्व कर रहे धनंजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि सरकार इस पूरे मामले में कोई ठोस पहल नहीं कर रही, जिससे प्रकरण लगातार लंबित होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस मामले की पहली सुनवाई सितंबर 2024 में Supreme Court of India में हुई थी, लेकिन तब से अब तक लगातार तारीख पर तारीख मिल रही है।वहीं अभ्यर्थी सुशील कश्यप ने कहा कि सरकार की ओर से समाधान के लिए कोई गंभीर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। इसी के चलते 18 मई को लखनऊ में बड़े स्तर पर घेराव का निर्णय लिया गया है। इस आंदोलन में विक्रम, अमित मौर्य, सुमित कुमार, राहुल मौर्या, मनोज प्रजापति और शैलेंद्र वर्मा समेत कई अभ्यर्थी शामिल रहेंगे।धनंजय गुप्ता का कहना है कि इस मामले में National Commission for Backward Classes की रिपोर्ट, मुख्यमंत्री द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट और Allahabad High Court की डबल बेंच का फैसला उनके पक्ष में है। इसके बावजूद न्याय नहीं मिलने पर उन्होंने सवाल उठाए हैं।अभ्यर्थियों का कहना है कि वे पिछले करीब छह वर्षों से लगातार संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा। उनका आरोप है कि वे पिछड़े और दलित समाज से आते हैं, इसी कारण उनकी अनदेखी हो रही है।मामले की अगली सुनवाई 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपंकर दत्ता और जॉर्ज मशीह की बेंच में निर्धारित है। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि सरकार इस तारीख पर अपना स्पष्ट पक्ष रख देती है, तो मामले का जल्द निस्तारण संभव है। फिलहाल, बार-बार सुनवाई टलने से अभ्यर्थियों में नाराजगी और निराशा बढ़ती जा रही है।













