लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में फीस वृद्धि और छात्रों के निष्कासन के विरोध में पिछले 56 दिनों से चल रहे अनिश्चितकालीन धरने को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। छात्र प्रतिनिधिमंडल और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी सैनी के बीच हुई वार्ता के बाद छात्रों ने यह फैसला लिया। छात्र पक्ष ने वार्ता को सकारात्मक और सार्थक बताते हुए निष्कासित छात्रों की बहाली समेत अन्य मांगों पर जल्द ठोस निर्णय की उम्मीद जताई है।
कुलपति के सामने रखीं सभी मांगें
छात्रों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने कुलपति के समक्ष फीस वृद्धि वापस लेने और निष्कासित छात्र नेताओं की बहाली सहित अपनी सभी मांगों को विस्तार से रखा।
छात्रों का दावा है कि कुलपति ने उनकी बातों को गंभीरता से सुना और विशेष रूप से छात्रों का निष्कासन वापस लेने के मुद्दे पर सकारात्मक आश्वासन दिया।
छात्रों ने इस बातचीत को 56 दिनों से चल रहे आंदोलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल बताया है। उनका कहना है कि अब उन्हें विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से मांगों पर ठोस निर्णय का इंतजार रहेगा।
मांगें पूरी होने तक संघर्ष जारी रखने की बात
छात्रों ने स्पष्ट किया कि अनिश्चितकालीन धरना फिलहाल स्थगित किया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि अपनी मांगों को लागू कराने के लिए वे लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आगे भी अपनी बात रखते रहेंगे।
छात्रों को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन निष्कासन वापसी के आश्वासन को जल्द अमल में लाएगा और फीस वृद्धि सहित अन्य लंबित मुद्दों पर भी न्यायसंगत निर्णय करेगा।
मिठाई खिलाकर स्थगित कराया गया धरना
प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, प्रोफेसर रीता चौधरी और पूर्व कुलानुशासक प्रो. दिनेश कुमार की मौजूदगी में विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. राकेश द्विवेदी ने छात्रों को मिठाई खिलाकर धरना स्थगित करवाया।
इस दौरान निष्कासित बताए गए छात्र प्रिंस प्रकाश, प्रेम प्रकाश और हर्षित शुक्ला भी मौजूद रहे।
इसके अलावा छात्र नेता अनिल यादव मास्टर, सुधांशु बाजपेई, अतुल शुक्ला, महेंद्र कुमार यादव, अभिषेक श्रीवास्तव बाबू, सर्वेश यादव, अखिलेश यादव, प्रिंस कुमार, विशाल सिंह, शिवाजी यादव, नवनीत यादव, शिवपूजन पाण्डेय, विपुल यादव, उमाशंकर विद्यार्थी, हर्षित द्विवेदी, गौरव सिंह, अतुल प्रियरंजन और रामजाने यादव समेत अन्य छात्र उपस्थित रहे।
56 दिनों से चल रहा था आंदोलन
छात्रों के अनुसार फीस वृद्धि और छात्र निष्कासन के मुद्दे को लेकर पिछले 56 दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में आंदोलन चल रहा था। अब कुलपति के साथ हुई बातचीत के बाद आंदोलन में एक नया मोड़ आया है। हालांकि छात्रों ने धरना समाप्त करने के बजाय इसे स्थगित करने की बात कही है।
अब निगाहें विश्वविद्यालय प्रशासन के अगले कदम पर हैं और यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि छात्रों की मांगों, खासकर निष्कासन वापसी और फीस वृद्धि के मुद्दे पर क्या निर्णय लिया जाता है।













