लखनऊ: राजधानी लखनऊ में विभिन्न समाजवादी छात्र संगठनों ने पेपर लीक, छात्रसंघ बहाली, भर्ती फीस में बढ़ोतरी और नई शिक्षा नीति समेत कई छात्र हितों के मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में छात्र और युवा हाथों में पार्टी के झंडे और तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाते नजर आए।
प्रदर्शन के दौरान छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में छात्रसंघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं, जिससे छात्रों की लोकतांत्रिक भागीदारी प्रभावित हो रही है। उन्होंने मांग की कि विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव जल्द बहाल किए जाएं।
छात्र नेताओं ने भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक की घटनाओं, भर्ती प्रक्रिया में देरी और विश्वविद्यालयों में बढ़ी फीस को लेकर भी सरकार को घेरा। उनका कहना था कि लगातार बढ़ती फीस से आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यम वर्ग के छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
प्रदर्शन के दौरान नई शिक्षा नीति को लेकर भी सवाल उठाए गए। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था गरीब, पिछड़े और वंचित वर्ग के छात्रों के लिए चुनौतियां बढ़ा रही है। उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की।
कार्यक्रम में मौजूद समाजवादी छात्र नेताओं ने दावा किया कि युवाओं, किसानों और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक माहौल भी देखने को मिला। कुछ वक्ताओं ने आगामी 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए दावा किया कि राज्य की जनता बदलाव चाहती है। वहीं, उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में सरकार बनने का भरोसा भी जताया।
प्रदर्शन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ। मौके पर पुलिस और प्रशासन की टीम भी मौजूद रही ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।













